सोशल मीडिया पर सैम ऑल्टमैन ने एक संदेश साझा किया जिसकी वजह से तकनीक की दुनिया में इन दिनों एक दिलचस्प बहस छिड़ी हुई है। ऑल्टमैन ने उन सॉफ्टवेयर इंजीनियरों का आभार जताया, जिन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दौर से पहले जटिल प्रणालियां तैयार की थीं।
अपने संदेश में ऑल्टमैन ने कहा कि पहले के इंजीनियर एक-एक अक्षर लिखकर बेहद जटिल सॉफ्टवेयर बनाते थे और उस मेहनत को अब याद करना भी मुश्किल लगता है। उन्होंने उन सभी लोगों को धन्यवाद दिया, जिनकी वजह से आज तकनीक इस मुकाम तक पहुंची है।
हालांकि उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। मौजूद जानकारी के अनुसार कई लोगों ने इस बात पर सवाल उठाया कि एक तरफ वह इंजीनियरों की सराहना कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ ऐसी तकनीक विकसित कर रहे हैं जो भविष्य में उन्हीं की नौकरियों को प्रभावित कर सकती है।
गौरतलब है कि कई यूजर्स ने इसे विडंबना बताया और कहा कि यह धन्यवाद कहीं न कहीं बदलाव का संकेत भी है। कुछ लोगों ने यह भी कहा कि पारंपरिक तरीके से कोडिंग करना उनके लिए सिर्फ काम नहीं बल्कि एक जुनून था, जो अब धीरे-धीरे बदलता नजर आ रहा है।
इस पूरे मामले को तकनीकी क्षेत्र में हो रहे बड़े बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। बता दें कि हाल के महीनों में कई कंपनियों ने एआई के बढ़ते उपयोग के चलते अपने कर्मचारियों की संख्या घटाने के संकेत दिए हैं। ब्लॉक इंक ने अपने कार्यबल में बड़ी कटौती की योजना बनाई है, वहीं एटलासियन ने भी कर्मचारियों की संख्या कम करने के साथ इस क्षेत्र में निवेश बढ़ाने की बात कही है।
मौजूद जानकारी के अनुसार उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि एआई अब केवल तकनीकी क्षेत्र ही नहीं, बल्कि कई सफेदपोश नौकरियों को भी प्रभावित कर रही है। इससे कंपनियां कम लोगों के साथ अधिक काम करने में सक्षम हो रही हैं।
गौरतलब है कि अन्य कंपनियों के प्रमुखों ने भी इस दिशा में संकेत दिए हैं। एलेक्स कार्प और एंडी जेसी जैसे उद्योग जगत के नेताओं ने भी कहा है कि आने वाले समय में कार्यबल की संरचना में बदलाव देखने को मिल सकता है।
कुल मिलाकर देखा जाए तो सैम ऑल्टमैन का यह बयान सिर्फ एक धन्यवाद संदेश नहीं, बल्कि तकनीक के बदलते दौर की ओर इशारा करता है, जहां काम करने के तरीके और रोजगार के स्वरूप दोनों में बड़े बदलाव की संभावना जताई जा रही है।
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भारत में साफ और हरित परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा निवेश सामने आया है, जिसने इलेक्ट्रिक बस सेक्टर में नई गति पैदा कर दी है। वैश्विक निवेश कंपनी केकेआर ने ऑलफ्लीट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और पीएमआई इलेक्ट्रो मोबिलिटी सॉल्यूशंस के साथ रणनीतिक साझेदारी करने का फैसला लिया है।
बता दें कि इस समझौते के तहत केकेआर करीब 31 करोड़ डॉलर तक का निवेश करेगी। मौजूद जानकारी के अनुसार इस निवेश के जरिए केकेआर ऑलफ्लीट में बहुमत हिस्सेदारी लेगी, जबकि पीएमआई इलेक्ट्रो में अल्प हिस्सेदारी हासिल करेगी। गौरतलब है कि यह भारत में केकेआर की जलवायु परिवर्तन से जुड़ी पहली बड़ी पहल मानी जा रही है।
ऑलफ्लीट की स्थापना वर्ष 2022 में हुई थी और यह कंपनी बड़े स्तर पर इलेक्ट्रिक बसों के संचालन और प्रबंधन पर काम कर रही है। बता दें कि कंपनी फिलहाल 5000 से ज्यादा इलेक्ट्रिक बसों का नेटवर्क तैयार करने की दिशा में काम कर रही है, जो देश के कई प्रमुख शहरों में सार्वजनिक परिवहन सेवाओं को मजबूत करेगा।
मौजूद जानकारी के अनुसार भारत में तेजी से बढ़ते शहरीकरण और प्रदूषण की चुनौती को देखते हुए स्वच्छ परिवहन की जरूरत लगातार बढ़ रही है। ऐसे में इस निवेश से इलेक्ट्रिक बसों के विस्तार को गति मिलने की उम्मीद है, जिससे शहरों में बेहतर और पर्यावरण के अनुकूल परिवहन व्यवस्था विकसित हो सकेगी।
गौरतलब है कि इस साझेदारी के तहत निर्माण से लेकर संचालन और रखरखाव तक का पूरा मॉडल एक साथ विकसित किया जाएगा। पीएमआई इलेक्ट्रो पहले से ही इस क्षेत्र में काम कर रही है और उसकी तकनीकी क्षमता इस परियोजना को मजबूती देगी।
केकेआर के एशिया प्रशांत क्षेत्र के प्रमुख अधिकारी नील अरोड़ा ने कहा कि भारत में परिवहन का विद्युतीकरण ऊर्जा परिवर्तन का अहम हिस्सा है और यहां बड़े स्तर पर विकास की संभावनाएं मौजूद हैं। वहीं पीएमआई इलेक्ट्रो की मुख्य कार्यकारी अधिकारी आंचल जैन ने इसे कंपनी के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है।
बता दें कि केकेआर इससे पहले भी दुनिया के कई देशों में ऊर्जा और पर्यावरण से जुड़े प्रोजेक्ट में निवेश कर चुकी है। मौजूद जानकारी के अनुसार यह निवेश भी उसी रणनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य स्वच्छ ऊर्जा और टिकाऊ विकास को बढ़ावा देना है।
गौरतलब है कि यह सौदा वर्ष 2026 के मध्य तक पूरा होने की उम्मीद है, हालांकि इसके लिए जरूरी नियामकीय मंजूरी मिलना बाकी है। कुल मिलाकर यह निवेश भारत में इलेक्ट्रिक सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
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