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उत्तर भारत बना ग्रीन बिल्डिंग का नया हब, एनसीआर और यूपी आगे: विशेषज्ञ

नई दिल्ली, 18 मार्च (आईएएनएस)। उत्तर भारत में ग्रीन बिल्डिंग को अपनाने की रफ्तार तेजी से बढ़ रही है, जिसमें एनसीआर पहले स्थान पर और उत्तर प्रदेश दूसरे स्थान पर उभरकर सामने आया है। यह जानकारी विशेषज्ञों ने बुधवार को दी।

सीआईआई भारतीय हरित भवन परिषद (आईजीबीसी) द्वारा आयोजित ग्रीनटेक समिट 2026 में बताया गया कि उत्तर प्रदेश में 1,673 आईजीबीसी-पंजीकृत प्रोजेक्ट दर्ज किए गए हैं, जो 1.78 बिलियन वर्ग फुट क्षेत्र में फैले हैं। यह राज्य में तेजी से बढ़ती सतत विकास की दिशा को दर्शाता है।

वहीं, नई दिल्ली में 794 प्रोजेक्ट 0.63 बिलियन वर्ग फुट क्षेत्र में फैले हुए हैं, जिससे राजधानी क्षेत्र ग्रीन बिल्डिंग मूवमेंट में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

पूरे एनसीआर क्षेत्र में ग्रीन बिल्डिंग का दायरा और भी बड़ा है, जहां कुल 2,475 प्रोजेक्ट 2.81 बिलियन वर्ग फुट क्षेत्र में फैले हुए हैं।

उत्तर प्रदेश में यह विकास प्रमुख शहरों में विभाजित है। नोएडा और ग्रेटर नोएडा में 748 प्रोजेक्ट, गुरुग्राम में 651 प्रोजेक्ट, जबकि फरीदाबाद और गाज़ियाबाद में मिलाकर 282 प्रोजेक्ट दर्ज किए गए हैं।

इस आयोजन में उद्योग जगत के प्रतिनिधि, नीति निर्माता, तकनीकी विशेषज्ञ और सस्टेनेबिलिटी एक्सपर्ट्स शामिल हुए, जिन्होंने भारत के निर्माण क्षेत्र में क्लाइमेट टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देने पर चर्चा की।

समिट में यह भी कहा गया कि भारत ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य और नेट जीरो की दिशा में आगे बढ़ रहा है, ऐसे में ग्रीन टेक्नोलॉजी, लो-कार्बन मटेरियल, डिजिटलीकरण और इंटीग्रेटेड डिजाइन भविष्य के शहरों को टिकाऊ और मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाएंगे।

आईजीबीसी दिल्ली चैप्टर के को-चेयर और ब्रुकफील्ड प्रॉपर्टीज के एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट बलजीत सिंह ने कहा, “भारत के पास अभी अपनी अधिकांश इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण करना बाकी है। ऐसे में हमारे पास जलवायु-अनुकूल डिजाइन, लो-कार्बन तकनीक और डिजिटल इनोवेशन के जरिए भविष्य के शहरों को आकार देने का बड़ा अवसर है।”

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि उत्तर प्रदेश में ग्रीन बिल्डिंग को बढ़ावा देने के लिए नीतिगत समर्थन मिल रहा है। इसमें आईजीबीसी गोल्ड या उससे ऊपर की रेटिंग वाले प्रोजेक्ट्स को अतिरिक्त फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) देने जैसी सुविधाएं शामिल हैं।

साथ ही ग्रेटर नोएडा इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (जीएनआईडीए) द्वारा ऐसे प्रोजेक्ट्स को 5 प्रतिशत अतिरिक्त एफएआर मुफ्त देने की व्यवस्था भी की गई है।

रिपोर्ट के अनुसार, एशिया-प्रशांत क्षेत्र में ग्रीन बिल्डिंग सर्टिफिकेशन, ऊर्जा मॉनिटरिंग और सख्त मटेरियल मानकों के कारण निर्माण लागत में भी बढ़ोतरी देखी जा रही है।

--आईएएनएस

डीएससी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी की वजह से दिल्ली के बाजारों में डाई फ्रूट्स 50% तक महंगे हो गए हैं। पैरासिटामोल के कच्चे माल की कीमत भी 47% तक बढ़ गई है। वहीं, गैस की किल्लत के कारण पिछले दो हफ्तों में 1.20 लाख नए PNG कनेक्शन बढ़ें हैं। इसके अलावा, अमेजन जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर रेडी-टू-ईट मील और पैक्ड फूड की डिमांड में 15% से ज्यादा बढ़ गई है। मिडिल ईस्ट जंग के कारण भारत पर 3 बड़े असर... 1. LPG की किल्लत: 1.20 लाख लोगों ने नए पाइप गैस कनेक्शन लिए मिडल-ईस्ट में चल रही जंग के कारण भारत में LPG की किल्लत बनी हुई है। गैस एजेंसियों के बाहर लम्बी लाइनें हैं। गैस सिलेंडर की कालाबाजारी और जमाखोरी भी हो रही है। 2. ड्राई फ्रूट्स महंगे: बादाम, पिस्ता और खजूर की सप्लाई रुकी एशिया की सबसे बड़ी थोक मंडी खारी बावली में ड्राई फ्रूट्स और जड़ी-बूटियों की कीमतों में 20% से 50% तक का उछाल आया है। व्यापारियों का कहना है कि काजू को छोड़कर ज्यादातर ड्राई फ्रूट्स मिडल-ईस्ट से आते हैं, जिनकी सप्लाई अभी ठप है। 3. बदला ट्रेंड: रेडी-टू-ईट और पैकेट बंद खाने की डिमांड 15% बढ़ी घरों में कुकिंग गैस की कमी के चलते लोग अब ऐसा खाना पसंद कर रहे हैं, जिसे पकाने में कम समय लगे या जो तुरंत खाया जा सके। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म अमेजन इंडिया पर इंस्टेंट नूडल्स, पैकेट बंद मील और स्नैक्स जैसे रेडी-टू-ईट या अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड की डिमांड 15% से ज्यादा हो गई है। क्यों बने ऐसे हालात? ईरान पर अमेरिका और इजराइल ने संयुक्त रूप से 28 फरवरी 2026 को हमला कर दिया था । दोनों देशों ने मिलकर ईरान के कई सैन्य ठिकानों, मिसाइल साइटों, परमाणु सुविधाओं और नेतृत्व पर सैकड़ों हवाई हमले किए। इन हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनी समेत कई उच्च अधिकारी मारे गए। अमेरिका ने इसे ऑपरेशन एपिक फ्यूरी नाम दिया। इस युद्ध के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव और आपूर्ति बाधित हुई। यहां से भारत का 80-85% LPG आयात होता है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा LPG आयातक है और 60% से ज्यादा LPG बाहर से आती है। इसी के कारण भारत में LPG किल्लत जैसे हालत बने लेकिन भारत सरकार ने लगातार लोगों से अफवाहों से बचने की अपील की। सरकार ने कहा कि देश में LPG और तेल की कोई कमी नहीं है। नंदा देवी और शिवालिक जहाज LPG लेकर भारत पहुंचे भारत का नंदा देवी जहाज होर्मुज स्ट्रेट को पार करके मंगलवार को गुजरात के वडिनार पोर्ट पहुंचा। इस जहाज में करीब 46,500 मीट्रिक टन लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) लाई गई। दीनदयाल पोर्ट अथॉरिटी के चेयरमैन सुशील कुमार सिंह ने कहा कि यह गैस समुद्र में ही एक जहाज से दूसरे जहाज में ट्रांसफर की जाएगी। इससे पहले भारतीय जहाज शिवालिक सोमवार को LPG लेकर ‘मुंद्रा पोर्ट’ पहुंच चुका है। इस जहाज पर करीब 46 हजार मीट्रिक टन LPG है, जो लगभग 32.4 लाख घरेलू गैस सिलेंडरों के बराबर है। रिफाइनरीज को उत्पादन बढ़ाने के आदेश पेट्रोलियम मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा ने कहा, 'स्थिति चिंताजनक है, लेकिन हम घरेलू उपभोक्ताओं को पहले की तरह सप्लाई देने की कोशिश कर रहे हैं।" सरकार ने घरेलू रिफाइनरीज को निर्देश दिया है कि वे अपना उत्पादन बढ़ाएं और उसे सीधे घरेलू रसोई के लिए रिजर्व रखें। होटलों और रेस्टोरेंट्स जैसे कमर्शियल इस्तेमाल के लिए सप्लाई में कटौती की गई थी, जिसे अब धीरे-धीरे बहाल किया जा रहा है। PNG नेटवर्क तेज करने वाले राज्यों को मिलेगी ज्यादा गैस केंद्र सरकार ने बुधवार को वादा किया कि जो राज्य अपने यहां पाइप नेचुरल गैस (PNG) नेटवर्क बिछाने के काम में तेजी लाएंगे, उन्हें कमर्शियल LPG की सप्लाई में प्राथमिकता दी जाएगी। इसका मकसद रसोई गैस के पारंपरिक सिलेंडरों पर निर्भरता कम करना है, ताकि भविष्य में ऐसे अंतरराष्ट्रीय संकटों का असर सीधे भारतीय किचन पर न पड़े। ---------------- ये खबर भी पढ़ें… राज्यों को 10% एक्स्ट्रा LPG कोटा मिलेगा: सरकार ने माना- LPG किल्लत जारी; मोदी और पेट्रोलियम मंत्री के बीच 2 घंटे चली बैठक ईरान-इजराइल जंग के बीच भारत में LPG सिलेंडर की किल्लत बनी हुई है। इसी बीच केंद्र सरकार ने बुधवार को कहा कि राज्यों को 10% ज्यादा LPG कोटा देने का ऑफर दिया गया है। साथ ही राज्यों से धीरे-धीरे LPG की जगह PNG अपनाने में मदद करने को कहा गया है। पेट्रोलियम मंत्रालय की अधिकारी सुजाता शर्मा ने कहा कि घरेलू LPG उत्पादन 40% बढ़ा है लेकिन हालात पूरी तरह ठीक नहीं हुए हैं। LPG की दिक्कत अभी भी बनी हुई है। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन बुकिंग बेहतर हुई है लेकिन डिस्ट्रीब्यूटर के यहां अभी भी लंबी लाइनें लग रही हैं। पूरी खबर पढ़ें…

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