प्रधानमंत्री मोदी ने कुवैत के क्राउन प्रिंस को दी ईद की मुबारकबाद, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर भी हुई बात
नई दिल्ली, 18 मार्च (आईएएनएस)। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को कुवैत के क्राउन प्रिंस, शेख सबाह अल-खालिद अल-हमद अल-मुबारक अल-सबाह से बात की और ईद की मुबारकबाद दी। इस दौरान प्रधानमंत्री ने उनसे पश्चिम एशिया के हालात पर फिक्र जाहिर की।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बातचीत का विवरण पोस्ट किया गया। प्रधानमंत्री ने बताया, हमने पश्चिम एशिया में बदलती स्थिति पर विचारों का आदान-प्रदान किया और हाल के घटनाक्रमों पर अपनी चिंता व्यक्त की। कुवैत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर हमलों की हम पहले भी निंदा कर चुके हैं और हमने फिर वही किया।
बातचीत का एक विषय स्ट्रेट ऑफ होर्मुज भी रहा। पीएम ने कहा, होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित और निर्बाध आवागमन सुनिश्चित करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है।
पीएम मोदी ने कहा कि हम इस बात पर सहमत हुए कि क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए निरंतर कूटनीतिक जुड़ाव अत्यंत आवश्यक है। कुवैत में रहने वाले भारतीय समुदाय की सुरक्षा और भलाई के लिए लगातार समर्थन देने हेतु मैंने उनका आभार व्यक्त किया।
बता दें, ईरान पर यूएस-इजरायल के संयुक्त हमले से शुरू हुआ संघर्ष दिन पर दिन भीषण होता जा रहा है। इसका असर वैश्विक बाजार और अर्थव्यवस्था पर गंभीर रूप में देखने को मिल सकता है। इन सबके बीच भारत अपनी सीक्रेट डिप्लोमेसी से ताजा हालात के दुष्प्रभाव को देश के लिए कम असरदार करने की सफल कोशिशों में लगा है।
होर्मुज स्ट्रेट में जो हालात बने हुए हैं, उसकी वजह से अमेरिका को नाटो देशों से अपील करनी पड़ रही है कि स्ट्रेट को खुला रखने के लिए यूएस का साथ दें और वॉरशिप भेजें। ऐसे हालात में भी भारत होर्मुज स्ट्रेट से अपने शिप बाहर निकाल ले रहा है।
भारत के तीन शिप होर्मुज स्ट्रेट से निकलकर भारतीय समुद्री तट पर पहुंच गए हैं और आगे कई अन्य आने की संभावना है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 से 89 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है। भारत के कच्चे तेल के आयात का 55 फीसदी हिस्सा ही पहले होर्मुज स्ट्रेट के बाहर से होकर आता था। हालांकि, सरकार की ओर से जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, अब यह आंकड़ा 70 फीसदी भी हो गया है। भारत की ऊर्जा आपूर्ति सुरक्षित बनी हुई है। कच्चे तेल के मामले में भारत की दैनिक खपत लगभग 55 लाख बैरल है और यह लगभग 40 देशों से क्रूड ऑयल (कच्चे तेल) का आयात करता है।
भारत की कुल प्राकृतिक गैस खपत लगभग 189 मिलियन घन मीटर प्रतिदिन है। इसमें से 97.5 मिलियन घन मीटर प्रतिदिन का उत्पादन घरेलू स्तर पर होता है। अप्रत्याशित परिस्थितियों के कारण लगभग 47.4 मिलियन घन मीटर प्रतिदिन की आपूर्ति प्रभावित हुई है।
कच्चे तेल के लिए रूस, इराक, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात भारत के सबसे बड़े तेल आपूर्तिकारों में से हैं। इसके अलावा अमेरिका से भी भारत के कच्चे तेल का आयात बढ़ा है। खाड़ी और मिडिल ईस्ट में कुवैत, कतर, ओमान और मिस्र से भारत तेल आयात करता है।
--आईएएनएस
केआर/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
ईरान में संघर्ष कर रहे परिवारों के लिए ताजिकिस्तान ने बढ़ाया मदद का हाथ, 3,610 टन मानवीय सहायता भेजी
दुशांबे, 18 मार्च (आईएएनएस)। युद्ध में लगातार संघर्ष कर रहे ईरान के लोगों के लिए ताजिकिस्तान ने बुधवार को 110 ट्रकों के काफिले में 3,610 टन मानवीय सहायता भेजी।
ताजिकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा, “कुल 3,610 टन सामग्री, जिसमें 45 टन दवाइयां, बड़ी मात्रा में स्वच्छता और हाइजीन उत्पाद, बच्चों के कपड़े, विभिन्न खाद्य पदार्थ, घरेलू सामान, बिस्तर, टेंट, निर्माण सामग्री और अन्य आवश्यक वस्तुएं शामिल हैं।”
संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (यूएनएचसीआर) ने पिछले सप्ताह प्रारंभिक आकलनों का हवाला देते हुए बताया था कि चल रहे संघर्ष के कारण ईरान में 6 लाख से 10 लाख परिवार, जो लगभग 32 लाख लोगों का प्रतिनिधित्व करते हैं, अस्थायी रूप से विस्थापित हो चुके हैं।
यूएनएचसीआर के आपातकालीन और कार्यक्रम समर्थन निदेशक तथा मध्य पूर्व आपातकाल के लिए क्रॉस-रीजनल शरणार्थी प्रतिक्रिया समन्वयक ने कहा, “बताया जा रहा है कि इनमें से अधिकांश लोग तेहरान और अन्य बड़े शहरी क्षेत्रों से देश के उत्तरी हिस्सों और ग्रामीण इलाकों की ओर सुरक्षा के लिए पलायन कर रहे हैं। जैसे-जैसे संघर्ष जारी है, यह संख्या बढ़ने की संभावना है, जो मानवीय जरूरतों में चिंताजनक वृद्धि को दर्शाता है। देश में रह रहे शरणार्थी परिवार, खासकर अफगान, भी प्रभावित हैं, जो पहले से ही अस्थिर स्थिति और सीमित सहायता के कारण अधिक कमजोर हैं। बढ़ती असुरक्षा और आवश्यक सेवाओं तक सीमित पहुंच के कारण परिवार प्रभावित क्षेत्रों को छोड़ रहे हैं।”
इसमें यह भी बताया गया कि ईरान, जो लंबे समय से लगभग 16.5 लाख शरणार्थियों (मुख्य रूप से अफगानिस्तान से) की मेजबानी कर रहा है, वहां अमेरिका-इजरायल हमलों के बाद पहले दो दिनों में ही लगभग एक लाख लोग तेहरान छोड़कर चले गए।
इससे पहले संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत अमीर सईद इरावानी ने दावा किया था कि अमेरिका-इजरायल हवाई हमलों में कम से कम 1,332 ईरानी नागरिक, जिनमें महिलाएं और बच्चे शामिल हैं, मारे गए हैं और हजारों लोग घायल हुए हैं।
इस महीने की शुरुआत में न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत के दौरान इरावानी ने बताया कि देशभर में 180 से अधिक बच्चों की मौत हो चुकी है और 20 से ज्यादा स्कूलों को नुकसान पहुंचा है।
--आईएएनएस
एवाई/डीकेपी
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