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जियो ने IPO के लिए 17 ग्लोबल बैंकर्स नियुक्त किए:₹40,000 करोड़ से ज्यादा जुटा सकती है कंपनी, ये देश का सबसे बड़ा IPO होगा

रिलायंस इंडस्ट्रीज के जियो प्लेटफॉर्म्स ने अपने आईपीओ के लिए 17 ग्लोबल और घरेलू इन्वेस्टमेंट बैंकों को नियुक्त किया है। यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ हो सकता है। ईटी नाऊ की एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से ये जानकारी दी गई है। गोल्डमैन सैक्स जैसे दिग्गज संभालेंगे कमान जियो ने इस इश्यू को मैनेज करने के लिए गोल्डमैन सैक्स, मॉर्गन स्टेनली और जेपी मॉर्गन जैसी इन्वेस्टमेंट बैंकिंग कंपनियों को ऑनबोर्ड किया हैं। इनके अलावा कोटक महिंद्रा कैपिटल, एक्सिस कैपिटल, जेएम फाइनेंशियल जैसे घरेलू बैंक भी इस टीम का हिस्सा हैं। ₹16 लाख करोड़ की वैल्यूएशन हो सकती है जियो प्लेटफॉर्म्स की वैल्यूएशन लगभग 180 बिलियन डॉलर (करीब ₹16 लाख करोड़) के आसपास हो सकती है। सेबी के नए नियमों के मुताबिक, जिन कंपनियों की वैल्यूएशन ₹5 लाख करोड़ से ज्यादा है, वे सिर्फ 2.5% पब्लिक फ्लोट के साथ लिस्ट हो सकती हैं। इस आधार पर अगर रिलायंस सिर्फ 2.5% हिस्सेदारी भी बेचता है, तो वह ₹40,000 करोड़ से ज्यादा जुटा सकता है, जो इसे भारत के इतिहास का सबसे बड़ा IPO बना देगा। सेबी के नए नियमों का फायदा मिलेगा जेफरीज और CLSA जैसे विश्लेषकों का मानना है कि सेबी के संशोधित नियमों से जियो को काफी मदद मिलेगी। पहले कंपनियों को कम से कम 10% हिस्सेदारी बेचनी पड़ती थी, लेकिन अब बड़े आईपीओ के लिए 2.5% की छूट दी गई है। इससे प्रमोटर्स का कंपनी पर कंट्रोल भी बना रहेगा और मार्केट में शेयरों की सप्लाई कम होने से लिस्टिंग के बाद शेयर की कीमतों को सपोर्ट भी मिल सकता है। KKR जैसे निवेशक बेच सकते हैं हिस्सा माना जा रहा है कि इस आईपीओ में नए शेयर जारी करने के साथ-साथ मौजूदा निवेशक अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे । KKR, TPG, सिल्वर लेक और विस्टा इक्विटी पार्टनर्स जैसे शुरुआती निवेशक अपनी होल्डिंग को आंशिक रूप से कैश कर सकते हैं। इंटेल भी थोड़े शेयर बेच सकता है। इस महीने के अंत तक फाइल हो सकता है ड्राफ्ट ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, रिलायंस इंडस्ट्रीज इस महीने के अंत तक सेबी के पास DRHP फाइल करने का लक्ष्य लेकर चल रही है। इसमें दिसंबर 2025 के अंत तक के फाइनेंशियल डेटा का इस्तेमाल किया जा सकता है। लिस्टिंग का सही समय बाजार की स्थिति और रेगुलेटरी मंजूरियों पर निर्भर करेगा।

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मजबूत सेना, स्वदेशी हथियार और नई युद्ध तकनीक, यही है मोदी सरकार की जबरदस्त सामरिक रणनीति

साल 2026 में भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी दिखाई देती है। बदलते वैश्विक शक्ति संतुलन, चीन की आक्रामक सैन्य विस्तार नीति, हिंद महासागर में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और सीमा क्षेत्रों में लगातार तनाव ने भारत को अपनी रणनीतिक प्राथमिकताओं को नए सिरे से परिभाषित करने के लिए मजबूर किया है। इसी पृष्ठभूमि में मोदी सरकार ने वर्ष 2026 में ऐसी सामरिक रणनीति अपनाई है जिसका मूल उद्देश्य है सैन्य शक्ति का तीव्र आधुनिकीकरण, स्वदेशी रक्षा उत्पादन का विस्फोटक विस्तार, नई युद्ध तकनीकों में निर्णायक बढ़त और वैश्विक रक्षा कूटनीति का विस्तार।

हम आपको बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी की सबसे पहली और सबसे स्पष्ट प्राथमिकता है रक्षा बजट में निरंतर वृद्धि। केंद्रीय बजट 2026-27 में भारत सरकार ने रक्षा क्षेत्र के लिए लगभग 7.85 लाख करोड़ रुपये का रिकॉर्ड आवंटन किया है जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 15 प्रतिशत अधिक है। यह राशि भारत के सकल घरेलू उत्पाद का लगभग दो प्रतिशत है और केंद्र सरकार के कुल खर्च का लगभग 14.67 प्रतिशत हिस्सा रक्षा क्षेत्र को जाता है। इस बजट में 2.19 लाख करोड़ रुपये पूंजीगत व्यय के लिए रखे गए हैं ताकि सेना को अगली पीढ़ी के लड़ाकू विमान, आधुनिक युद्धपोत, पनडुब्बी, ड्रोन और स्मार्ट हथियारों से लैस किया जा सके।

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मोदी सरकार की दूसरी निर्णायक रणनीति है सैन्य आधुनिकीकरण को तेज करना। पिछले कुछ वर्षों में यह स्पष्ट हुआ है कि भारत को एक साथ दो मोर्चों पर युद्ध की संभावना को ध्यान में रखते हुए अपनी सैन्य क्षमता बढ़ानी होगी। इसी रणनीति के तहत भारत ने नौसेना के लिए 26 आधुनिक राफेल लड़ाकू विमान खरीदने का लगभग 7.4 अरब डॉलर का समझौता किया है, जिससे हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की समुद्री शक्ति और मजबूत होगी।

इसके साथ ही भारतीय वायुसेना के लिए नए लड़ाकू स्क्वॉड्रन, आधुनिक मिसाइल प्रणाली और लंबी दूरी की मारक क्षमता वाले हथियारों पर तेजी से काम चल रहा है। सामरिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम चीन और पाकिस्तान दोनों से उत्पन्न सुरक्षा चुनौतियों के जवाब में उठाया गया है।

तीसरी बड़ी प्राथमिकता है आत्मनिर्भर रक्षा उद्योग का निर्माण। वर्ष 2026 के रक्षा बजट में पूंजीगत खरीद का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा घरेलू उद्योगों से खरीद के लिए निर्धारित किया गया है। इसका अर्थ है कि लगभग 1.39 लाख करोड़ रुपये भारतीय कंपनियों और रक्षा निर्माण इकाइयों को मिलेंगे। इससे न केवल सैन्य क्षमता बढ़ेगी बल्कि देश में विशाल रक्षा औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र भी विकसित होगा।

इसी दिशा में उत्तर प्रदेश रक्षा औद्योगिक गलियारा एक बड़ा उदाहरण बनकर उभरा है जहां अब तक 35000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आकर्षित हो चुका है। इस परियोजना का लक्ष्य भारत को वैश्विक रक्षा उत्पादन केंद्र बनाना है और हजारों उच्च कौशल रोजगार पैदा करना है।

चौथी रणनीतिक प्राथमिकता है नई पीढ़ी के युद्ध क्षेत्रों में प्रवेश। पारंपरिक युद्ध अब अकेला निर्णायक तत्व नहीं रह गया है। ड्रोन, कृत्रिम बुद्धि आधारित युद्ध प्रणाली, डाटा युद्ध और साइबर युद्ध भविष्य की लड़ाइयों का आधार बनते जा रहे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए भारत ने ड्रोन बल, सैन्य जियो स्पेशल एजेंसी, डाटा फोर्स और संज्ञानात्मक युद्ध इकाइयों की स्थापना की दीर्घकालिक योजना तैयार की है। इसका उद्देश्य है कि वर्ष 2047 तक भारत पूरी तरह तकनीकी रूप से उन्नत सैन्य शक्ति बन सके।

पांचवीं प्राथमिकता है रक्षा निर्यात का आक्रामक विस्तार। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने हथियार आयातक देश की छवि से बाहर निकलकर रक्षा निर्यातक बनने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाए हैं। उदाहरण के तौर पर हाल ही में इंडोनेशिया ने भारत से लगभग 3800 करोड़ रुपये की ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने का समझौता किया है। यह सौदा केवल आर्थिक नहीं बल्कि रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे हिंद प्रशांत क्षेत्र में भारत की सामरिक उपस्थिति मजबूत होती है।

छठी रणनीतिक दिशा है भविष्य के युद्ध खतरों के लिए तैयारी। भारत की नई रक्षा दृष्टि में रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल और परमाणु हमलों से निपटने के लिए विशेष सुरक्षा ढांचे का निर्माण भी शामिल है। रक्षा बल विजन 2047 दस्तावेज में स्पष्ट किया गया है कि भविष्य के युद्ध बहुआयामी होंगे और उनके लिए तेज प्रतिक्रिया क्षमता विकसित करना आवश्यक है।

इन सभी पहलों का व्यापक लक्ष्य है भारत को वर्ष 2047 तक एक विकसित और सैन्य दृष्टि से आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाना। देखा जाये तो रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा प्रस्तुत रक्षा विजन 2047 राष्ट्रीय शक्ति के समग्र विस्तार का खाका है जिसमें सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और तकनीकी नवाचार को एक साथ जोड़ा गया है।

कुल मिलाकर देखें तो वर्ष 2026 में मोदी सरकार की रणनीतिक प्राथमिकताएं बेहद स्पष्ट और आक्रामक हैं। विशाल रक्षा बजट, तेज सैन्य आधुनिकीकरण, स्वदेशी हथियार निर्माण, नई युद्ध तकनीकों में निवेश, रक्षा निर्यात का विस्तार और भविष्य के युद्धों के लिए तैयारी, ये सभी कदम मिलकर भारत को एक उभरती वैश्विक सैन्य शक्ति में बदलने की दिशा में आगे बढ़ा रहे हैं। यदि यह रणनीति इसी गति से लागू होती रही तो आने वाले दशक में भारत केवल दक्षिण एशिया की सुरक्षा व्यवस्था का केंद्र नहीं रहेगा बल्कि हिंद प्रशांत क्षेत्र की शक्ति संतुलन राजनीति में भी निर्णायक भूमिका निभाएगा।

-नीरज कुमार दुबे

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7 batsman Double hundred on debut in Tests: टेस्ट क्रिकेट के 149 साल के इतिहास में पदार्पण मैच में दोहरा शतक जड़ना एक दुर्लभ उपलब्धि है, जिसे अब तक केवल सात बल्लेबाजों ने हासिल किया है. 1903 में फोस्टर के रिकॉर्ड 287 रनों से शुरू हुआ यह सिलसिला डेवन कॉनवे के लॉर्ड्स में ऐतिहासिक 200 रनों तक जारी है. इसमें काइल मायर्स का चौथी पारी में नाबाद 210 रनों का चमत्कार भी शामिल है. इन दिग्गजों ने साबित किया कि पहले ही मैच में मानसिक मजबूती और अटूट धैर्य से इतिहास रचा जा सकता है. Fri, 20 Mar 2026 16:59:03 +0530

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