'पिता के अंतिम संस्कार के लिए नहीं थे पैसे, लेना पड़ा उधार', फराह खान ने किया चौंकाने वाला खुलासा
Director Farah Khan life Story: बॉलीवुड की फेमस कोरियोग्राफर और डायरेक्टर (Farah Khan) फराह खान ने हाल ही में एक पॉडकास्ट में अपने स्ट्रगल के बारे में बताया. जिसे वह आज भी भूल नहीं पातीं. आमतौर पर हंसती-मुस्कुराती नजर आने वाली फराह ने अपने बचपन, परिवार की फाइनेंशियल तंगी और पिता से जुड़ी कई बातें शेयर कीं.
नेपो किड नहीं, संघर्ष से बनी पहचान
फराह खान ने रणवीर इलाहाबादिया (Ranveer Allahbadia) के पोडकास्ट में कहा, 'मुझे कभी भी नेपो किड नहीं माना जाना चाहिए, भले ही मेरे पिता फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े थे. लेकिन उनके पास वो फैसिलिटी नहीं थीं जो आमतौर पर स्टार किड्स को मिलती हैं.' फराह के मुताबिक, उनके पिता कामरान खान (Kamran Khan) एक समय पर फिल्मों में काम करते थे, लेकिन एक बड़ी फिल्म के फ्लॉप होने के बाद उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल गई.
घर तक गिरवी में रखना पड़ा
फराह ने बताया कि उनके पिता ने एक बड़े प्रोजेक्ट पर अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया था. उन्होंने घर तक गिरवी रख दिया था ताकि फिल्म पूरी हो सके. लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया. फिल्म रिलीज के कुछ ही दिनों में फ्लॉप हो गई और पूरा परिवार फाइनेंशियली टूट गया था. फराह ने कहा कि शुक्रवार को फिल्म रिलीज हुई और रविवार तक हालात ऐसे हो गए कि उनके पास कुछ भी नहीं बचा.
शाम ढलते ही डर का माहौल
पोडकास्ट में फराह ने अपने बचपन के एक डरावने फेज के बारे भी बताया किया. जैसे ही शाम होती थी उनके घर का माहौल बदल जाता था. पिता को शराब की लत लग गई थी और हर रात डर सताता था. यह दौर उनके लिए मेंटली बहुत कठीन रहा था. हालात इतने खराब हो गए थे कि परिवार धीरे-धीरे सोसाइटी से कटता चला गया.
13 साल तक काम नहीं किया
फिल्म के फ्लॉप होने का असर इतना गहरा था कि उनके पिता ने खुद को दुनिया से अलग कर लिया. फराह के मुताबिक, उनके पिता ने करीब 13 साल तक कोई काम नहीं किया. इस दौरान परिवार को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा. यहां तक कि घर में लोगों को बुलाना भी मुश्किल हो गया था.
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अंतिम संस्कार के लिए नहीं थे पैसे
पोडकास्ट में फराह खान ने सबसे इमोशनल पल शेयर किया कि जब उनके पिता का निधन हुआ, तब उनकी जेब में सिर्फ 30 रुपये थे. परिवार के पास अंतिम संस्कार तक के पैसे नहीं थे. हालात इतने खराब थे कि उधार लेकर अंतिम संस्कार किया गया. यह एक्सपीरियंस उनके जीवन का सबसे कठिन और दर्दनाक हिस्सा रहा.
मां ने संभाली जिम्मेदारी
इस मुश्किल दौर में फराह की मां मेनका ईरानी (Menaka Irani) ने परिवार की जिम्मेदारी उठाई. उन्होंने होटल में काम किया और बच्चों की परवरिश की. फराह ने भी कम उम्र में काम करना शुरू कर दिया था. उन्होंने डांस ग्रुप जॉइन किया और धीरे-धीरे इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनानी शुरू की.
स्ट्रगल से सक्सेस तक का सफर
आज के समय में फराह खान की कहानी सिर्फ संघर्ष की नहीं, बल्कि हिम्मत और मेहनत की भी मिसाल है. जिस लड़की ने अपने पिता को आर्थिक तंगी में खोया और परिवार को टूटते देखा, वही आगे चलकर बॉलीवुड की सफल डायरेक्टर बनीं. 'ओम शांति ओम' (Om Shanti OM) और 'मै हूं न' (Mein Hoon Na) जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्म बनाकर उन्होंने यह साबित कर दिया कि हालात कितने भी मुश्किल क्यों न हों, अगर इरादे मजबूत हों तो कामयाबी जरूर मिलती है.
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असम चुनाव में AIDUF का मास्टरस्ट्रोक, बदरुद्दीन अजमल अपनी घरेलू सीट से लड़ेंगे चुनाव
Assam Election 2026: असम की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है और चुनावी माहौल पूरी तरह जोर पकड़ता हुआ अभी से नजर आना शुरू हो गया है. इसी बीच मुस्लिम नेतृत्व वाली पार्टी AIUDF ने अपने उम्मीदवारों की दूसरी सूची जारी कर दी है, जिसमें पार्टी का सबसे बड़ा और चर्चित नाम पार्टी प्रमुख बदरुद्दीन अजमल का है. अजमल को उनके होम सीट बिन्नाकांडी से टिकट दिया गया है, जिससे चुनावी मुकाबले में नई सियासी हलचल पैदा हो गई है.
अजमल को चुनावी मैदान में उतारने की उठ रही थी मांग
दरअसल AIUDF के भीतर लंबे समय से यह मांग उठ रही थी कि बदरुद्दीन अजमल को सीधे विधानसभा चुनाव में उतारा जाए. पार्टी विधायक अमीनुल इस्लाम ने भी सार्वजनिक तौर पर कहा कि कार्यकर्ता चाहते हैं कि अजमल अपने गढ़ से चुनाव लड़ें और उनकी जीत लगभग तय मानी जा रही है. यह बयान इस बात की ओर इशारा करता है कि पार्टी अपने पारंपरिक वोट बैंक को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है.
अजमल का बिन्नाकांडी से चुनाव लड़ना केवल एक सीट का मामला नहीं है, बल्कि यह AIUDF की व्यापक राजनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है. पार्टी इस कदम के जरिए असम की राजनीति में अपनी पकड़ को और मजबूत करना चाहती है, खासकर उन इलाकों में जहां अल्पसंख्यक वोट निर्णायक भूमिका निभाते हैं.
9 अप्रैल को होगा असम में विधानसभा चुनाव
इस बार असम विधानसभा की 126 सीटों पर 9 अप्रैल को एक ही चरण में मतदान होना है, जबकि मतगणना 4 मई को होगी. भारतीय चुनाव आयोग द्वारा घोषित इस कार्यक्रम के बाद सभी राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं. राज्य में मुख्य मुकाबला सत्ताधारी BJP के नेतृत्व वाले एनडीए और और कांग्रेस के बीच माना जा रहा है, लेकिन AIUDF भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है.
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AIUDF के आने से दिलचस्प हुआ असम का मामला
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में BJP लगातार तीसरी बार सत्ता में लौटने की कोशिश कर रही है, जबकि विपक्ष इसे रोकने की रणनीति बना रहा है. ऐसे में बदरुद्दीन अजमल का चुनावी मैदान में उतरना असम की राजनीति को और दिलचस्प बना सकता है. अब यह देखना अहम होगा कि क्या AIUDF अपने इस फैसले को वोटों में बदल पाती है या नहीं, क्योंकि इस बार की लड़ाई सिर्फ सीटों की नहीं, बल्कि सियासी प्रभाव और भविष्य की दिशा तय करने वाली मानी जा रही है.
(रिपोर्ट: सैयद उवैस अली)
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