सऊदी अरब और भारत में ईद के जश्न में होता है ये अनोखा फर्क..., क्यों सऊदी में भारत से एक दिन पहले मनाया जाता है ये त्यौहार?
Eid ul Fitr celebrations Saudi Arabia vs India 2026: ईद-उल-फितर (मीठी ईद) के जश्न का सऊदी अरब और भारत में अलग-अलग अंदाज है. जहां सऊदी अरब में यह जश्न ज्यादा धार्मिक, परिवार-केंद्रित और अरबी परंपराओं से भरा हुआ होता है, वहीं, भारत में यह रंग-बिरंगा, मेलों वाला और भारतीय संस्कृति से मिश्रित दिखाई पड़ता है.
इस साल आज शाम तक चांद दिखने के बाद सऊदी अरब में ईद कब मनाई जाएगी ये साफ हो जाएगा. जबकि भारत में उसके बाद ईद होगी. बता दें दोनों देशों में ये अंतर भौगोलिक स्थिति और चांद की दृश्यता से जुड़ा होता है, जो हर साल चर्चा का विषय रहता है.
VIDEO | Srinagar, Jammu and Kashmir: As Eid-ul-Fitr approaches, large crowds are flocking to Goni Khan Market in Srinagar to shop for festival essentials. The bustling market is alive with activity, as people purchase new clothes, footwear, accessories, sweets, and gifts to mark… pic.twitter.com/xQOBI2gvh8
— Press Trust of India (@PTI_News) March 18, 2026
सऊदी अरब में चांद रात वाली परंपरा नहीं है
भारत में चांद रात को खास महत्व दिया जाता है. इस रात बाजारों में देर रात तक भीड़भाड़ रहती है. महिलाएं मेहंदी लगवाती हैं, नए कपड़े और ज्वैलरी की खरीदारी करती हैं. दिल्ली के चांदनी चौक, लखनऊ के अमीनाबाद या हैदराबाद के चारमीनार इलाके रात भर जगमगाते रहते हैं. वहीं, सऊदी अरब में ऐसी चांद रात वाली परंपरा नहीं है. रमजान के आखिरी दिनों में ही यहां लोग खरीददारी करते हैं.
नमाज और माहौल दोनों देशों में एक जैस दिखता है
सऊदी अरब में ईद की नमाज मक्का के ग्रैंड मस्जिद या मदीना में होती है, इस दौरान लाखों लोगों एक साथ जुड़ते हैं. वहां सुरक्षा के कड़े इंतजाम होते हैं. वहीं, भारत में ईदगाह मैदानों या मस्जिदों में नमाज के बाद लोग घर लौटते हैं, रिश्तेदारों से मिलते हैं और कई जगह हिंदू-मुस्लिम पड़ोसी भी शुभकामनाएं देते हैं. भारत में ईद के दिन मेलों (ईद मेला) का रंग अलग होता है. मेलों में झूले, खिलौने, स्ट्रीट फूड, संगीत और नाच-गाना होता है. जबकि सऊदी में जश्न ज्यादा घरेलू और मेहमाननवाजी पर केंद्रित रहता है.
VIDEO | Srinagar, J&K: Markets witness a massive shopping rush ahead of Eid-ul-Fitr.
— Press Trust of India (@PTI_News) March 17, 2026
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अरबी खाना स्वादिष्ट तो भारतीय व्यंजनों में मसालों का स्वाद
सऊदी अरब में मुख्य व्यंजन लैम्ब कबसा, मंडी, खजूर, अरबी कॉफी और मामौल (खजूर भरी मीठी बिस्किट) होते हैं. भोजन में मीठे और डेट्स का ज्यादा यूज किया जाता है. वहीं, भारत में बिरयानी (खासकर हैदराबादी), शीर खुरमा, सेवइयां, गुलाब जामुन, हलवा-पूरी और कबाब होते हैं. मीठी ईद का नाम भारत में इसलिए ज्यादा फिट बैठता है क्योंकि यहां मिठाइयों की भरमार होती है.
दोनों देशों का पहनावा है पहचान, भारत में बच्चों को रहता है ईदी का इंतजार
सऊदी में पुरुष थोब और महिलाएं अबाया पहनती हैं. वे नए जूते और कपड़े लेते हैं. बच्चों को गिफ्ट लाइन में खड़े होकर मिलते हैं. जबकि भारत में महिलाएं सलवार-सूट, अनारकली और पुरुष शेरवानी, रंग-बिरंगे और एम्ब्रॉयडरी वाले कपड़े पहनते हैं. यहां ईदी का (पैसे या गिफ्ट) बच्चों को सबसे ज्यादा क्रेज रहता है.
FAQ
Q1. क्यों सऊदी अरब में ईद भारत से एक दिन पहले मनाई जाती है?
उत्तर- चांद की दृश्यता भौगोलिक स्थिति पर निर्भर करती है. सऊदी में चांद अक्सर भारत से पहले दिख जाता है, भारत में चांद रात अलग से मनाई जाती है.
Q2. भारत में चांद रात क्यों खास है?
उत्तर- यह रात महिलाओं के लिए मेहंदी, शॉपिंग और बाजार की रौनक वाली होती है. कई लोग इसे ईद की पूर्व संध्या मानते हैं.
Q3. दोनों जगहों का मुख्य भोजन क्या अंतर है?
उत्तर- सऊदी में कबसा, मंडी, खजूर-आधारित मीठे व्यंजन होते हैं. भारत में बिरयानी, शीर खुरमा, सेवइंया, भारतीय मिठाइयां होती हैं.
Q4. क्या दोनों जगहों पर नमाज एक जैसी होती है?
उत्तर- हां, ईद की नमाज का तरीका एक ही है (दो रकअत), लेकिन सऊदी में बड़े मस्जिदों में लाखों लोग एक साथ रहते हैं जबकि भारत में ईदगाह या लोकल मस्जिदों में अपने घर के पास नमाज की जाती है.
Q5. ईदी क्या है और यह कहां ज्यादा आम है?
उत्तर- बच्चों को ईद पर पैसे या गिफ्ट देना ईदी कहलाई जाती है. भारत में यह बहुत पॉपुलर है, सऊदी में भी ये होती है लेकिन वहां ज्यादा परिवारिक तरीके से होती है.
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भारत की मजबूत अर्थव्यवस्था सभी क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा कर रही है: रिपोर्ट
नई दिल्ली, 18 मार्च (आईएएनएस)। भारत में बेरोजगारी दर फरवरी में घटकर 4.9 प्रतिशत हो गई है, जो यह दिखाता है कि देश में नौकरी मिलने की रफ्तार में सुधार हो रहा है। अब रोजगार के अवसर सिर्फ कुछ बड़े शहरों या चुनिंदा सेक्टर तक सीमित नहीं रह गए हैं।
इंडिया नैरेटिव में प्रकाशित एक लेख के अनुसार, फरवरी में मैन्युफैक्चरिंग, कंस्ट्रक्शन, रिटेल, लॉजिस्टिक्स और कृषि जैसे कई सेक्टर में रोजगार बढ़ा है। इससे साफ है कि आर्थिक सुधार का फायदा अब शहरों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों तक भी पहुंच रहा है।
सरकार द्वारा बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर किया जा रहा खर्च और कारोबार में बढ़ता भरोसा अब वास्तविक नौकरी के अवसरों में तब्दील होता दिख रहा है।
मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसे कार्यक्रमों के तहत मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बढ़ावा देने के प्रयास रंग लाते दिख रहे हैं। साथ ही, पीएलआई (प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव) स्कीम के जरिए इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे क्षेत्रों में विदेशी निवेश बढ़ रहा है। इन सेक्टर में सिर्फ फैक्ट्री में ही नहीं, बल्कि लॉजिस्टिक्स, कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर में भी रोजगार के नए अवसर बन रहे हैं।
लेख में कहा गया है कि अब कई ग्लोबल कंपनियां भारत को अपना प्रोडक्शन बेस बना रही हैं, जिससे नौकरी के अवसर ज्यादा स्थिर हो रहे हैं और मौसमी उतार-चढ़ाव का असर कम पड़ रहा है।
युवाओं के रोजगार को लेकर भी सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं। टेक्नोलॉजी और डिजिटल सर्विस सेक्टर तेजी से बढ़ रहे हैं, जहां सॉफ्टवेयर, डेटा एनालिटिक्स और क्लाउड जैसी फील्ड में लाखों लोगों को नौकरी मिल रही है।
इसके अलावा, भारत का बढ़ता स्टार्टअप इकोसिस्टम — जैसे फिनटेक, ई-कॉमर्स और ग्रीन एनर्जी — भी युवाओं के लिए नए अवसर पैदा कर रहा है। सरकार की पीएम कौशल विकास योजना जैसी स्कीम युवाओं को नए स्किल्स सिखाकर उन्हें नौकरी के लिए तैयार कर रही हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार बढ़ने से यह भी संकेत मिलता है कि विकास का फायदा छोटे शहरों और गांवों तक पहुंच रहा है, जिससे लोगों की आय स्थिर हो रही है और मांग भी बढ़ रही है।
लेख में यह भी कहा गया है कि सिर्फ आर्थिक सुधार ही नहीं, बल्कि लंबे समय से चल रहे बदलाव भी असर दिखा रहे हैं। खासकर, महिलाओं की श्रम भागीदारी दर में बढ़ोतरी हो रही है, जो कई सालों से स्थिर थी।
अब ज्यादा महिलाएं हेल्थकेयर, एजुकेशन, छोटे बिजनेस और डिजिटल सर्विस सेक्टर में काम कर रही हैं, जिससे रोजगार के ढांचे में बड़ा बदलाव आ रहा है।
जैसे-जैसे डिजिटल कनेक्टिविटी बढ़ रही है, वैसे-वैसे वर्क फ्रॉम होम और पार्ट-टाइम जैसी नई नौकरी के विकल्प भी सामने आ रहे हैं, जिससे पहले बाहर रह गए लोगों को भी काम के मौके मिल रहे हैं।
--आईएएनएस
डीबीपी
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