Ghar Ko Thanda Kaise Rakhe: गर्मियों में AC के बिना भी रहेगी ठंडक, सिर्फ 10 रुपये के थर्माकोल से घर बनेगा कूल-कूल, वायरल हुआ देसी जुगाड़
Ghar Ko Thanda Kaise Rakhe: गर्मी का मौसम शुरू होते ही लोगों की परेशानी बढ़ने लगती है. अप्रैल का महीना पूरा होने से पहले ही तापमान 40 डिग्री के पार पहुंच चुका है. तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण घर की छत भी तपने लगती है. इसका सीधा असर कमरे के अंदर पड़ता है और तापमान काफी बढ़ जाता है. ऐसे में घर के अंदर रहना मुश्किल हो जाता है.
हर किसी के पास एयर कंडीशनर नहीं होता. और अगर होता भी है, तो उसका बिजली बिल हर महीने संभालना आसान नहीं होता. खासकर जिन घरों की छत टीन शेड की होती है, वहां गर्मी और भी ज्यादा महसूस होती है. लेकिन अब एक सस्ती और आसान ट्रिक सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है, जिसकी मदद से आप सिर्फ 10 रुपये के थर्माकोल से अपने घर को ठंडा रख सकते हैं. चलिए जानते हैं क्या है यह आसान ट्रिक?
क्या है यह आसान ट्रिक?
यह ट्रिक थर्माकोल शीट्स का इस्तेमाल करके छत को कवर करने की है. थर्माकोल एक ऐसा मटेरियल है, जो गर्मी को अंदर आने से रोकता है. इसे लगाने के बाद कमरे का तापमान काफी हद तक कम हो सकता है. सबसे अच्छी बात यह है कि इसे आप खुद भी लगा सकते हैं, इसके लिए किसी मिस्त्री की जरूरत नहीं होती.
किन चीजों की होगी जरूरत?
थर्माकोल शीट्स
मजबूत गोंद या सिलिकॉन
पीओपी या जॉइंट पट्टी
ये सभी चीजें आसानी से बाजार में कम कीमत में मिल जाती हैं.
कैसे बनाएं थर्माकोल सीलिंग?
सबसे पहले अपने कमरे की छत के अनुसार थर्माकोल शीट्स खरीद लें. अब इन शीट्स पर गोंद या सिलिकॉन लगाकर छत पर चिपकाएं. ध्यान रखें कि पूरी छत अच्छे से कवर हो जाए. जब सारी शीट्स लग जाएं, तो उनके जोड़ को जॉइंट पट्टी से कवर करें. इससे छत मजबूत बनेगी और देखने में भी अच्छी लगेगी. इसके बाद आप चाहें तो इस पर पेंट या पुट्टी करके डिजाइन भी बना सकते हैं. इससे आपका कमरा स्टाइलिश भी दिखेगा और घर में ठंडक भी रहेगी.
कैसे कम करता है तापमान?
थर्माकोल एक बेहतरीन इंसुलेटर होता है. यह बाहरी गर्मी को सीधे कमरे के अंदर आने से रोकता है. इसी वजह से कमरे का तापमान कम रहता है. वायरल वीडियो के अनुसार, इससे कमरे का तापमान काफी हद तक घट सकता है. अगर आप चाहें तो इसी ट्रिक को खिड़कियों और दरवाजों पर भी इस्तेमाल कर सकते हैं. इससे गर्म हवा का असर और कम हो जाएगा. यहां तक कि पानी की टंकी को भी इससे ढककर ठंडा रखा जा सकता है.
क्यों है यह तरीका खास?
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा यह तरीका सस्ता है, आसान है और हर किसी के लिए फायदेमंद है. इसमें ज्यादा खर्च नहीं होता और इसे लगाने में भी ज्यादा समय नहीं लगता. सबसे बड़ी बात, यह बिना बिजली खर्च किए आपके घर को ठंडा रखने में मदद करता है.
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बाजार की पाठशाला: एसआईपी क्या है, यह कैसे काम करता है? जानें आसान निवेश का स्मार्ट फॉर्मूला और इसकी खासियतें
मुंबई, 18 मार्च (आईएएनएस)। आज के समय में निवेश करना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है सही तरीके से निवेश करना। ऐसे में सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) एक ऐसा विकल्प बनकर उभरा है, जो आम लोगों को भी अनुशासित तरीके से निवेश करने का मौका देता है। एसआईपी के जरिए निवेशक किसी म्यूचुअल फंड स्कीम में एक तय रकम को नियमित अंतराल — जैसे हर हफ्ते, महीने या तिमाही — में निवेश कर सकते हैं। खास बात यह है कि आप केवल 500 रुपए से भी शुरुआत कर सकते हैं और लंबी अवधि में कंपाउंडिंग, यानी चक्रवृद्धि ब्याज, का फायदा उठाकर अच्छा रिटर्न हासिल कर सकते हैं।
एसआईपी की सबसे बड़ी ताकत है रुपया लागत औसत, यानी जब बाजार गिरता है तो आपको ज्यादा यूनिट्स मिलती हैं और जब बाजार ऊपर होता है तो कम यूनिट्स मिलती हैं। इससे लंबे समय में खरीद की औसत लागत संतुलित हो जाती है। इसके अलावा, एसआईपी निवेश को अनुशासित बनाता है, क्योंकि इसमें आपको नियमित अंतराल पर निवेश करना होता है। इसमें प्रोफेशनल फंड मैनेजर आपके पैसे को रिसर्च और मार्केट एनालिसिस के आधार पर निवेश करते हैं, जिससे जोखिम कम होता है और रिटर्न बेहतर मिलने की संभावना बढ़ती है।
एसआईपी की एक और खासियत इसकी फ्लेक्सिबिलिटी (लचीलापन) है। निवेशक चाहें तो अपनी एसआईपी को कुछ समय के लिए रोक सकते हैं, बढ़ा सकते हैं या बंद भी कर सकते हैं। इसके साथ ही इसमें निवेश की कोई ऊपरी सीमा नहीं होती, यानी आप अपनी आय के अनुसार निवेश बढ़ा सकते हैं।
एसआईपी का सबसे बड़ा फायदा पावर ऑफ कंपाउंडिंग है, यानी आपका पैसा सिर्फ बढ़ता ही नहीं, बल्कि उस पर मिलने वाला रिटर्न भी आगे रिटर्न कमाता है। यही वजह है कि जितनी जल्दी आप एसआईपी शुरू करेंगे, उतना ज्यादा फायदा मिलेगा। उदाहरण के तौर पर, अगर कोई व्यक्ति 30 साल की उम्र से हर महीने 10,000 रुपए निवेश करता है, तो 60 साल की उम्र तक वह करीब 3 करोड़ रुपए का फंड बना सकता है। वहीं, अगर वही निवेश 40 साल की उम्र से शुरू किया जाए, तो यह रकम काफी कम यानी लगभग 90 लाख रुपए ही हो पाएगी। इससे साफ है कि देरी करने की कीमत बहुत बड़ी हो सकती है।
एसआईपी कई प्रकार के होते हैं, जो अलग-अलग जरूरतों के अनुसार बनाए गए हैं।
सबसे सामान्य है फिक्स्ड एसआईपी, जिसमें एक तय रकम नियमित रूप से निवेश की जाती है।
फ्लेक्सिबल एसआईपी में आप अपनी आय के अनुसार निवेश राशि बढ़ा या घटा सकते हैं।
परपेचुअल एसआईपी में कोई तय समय सीमा नहीं होती और आप जब चाहें इसे बंद कर सकते हैं।
इसके अलावा ट्रिगर एसआईपी बाजार की स्थिति के आधार पर काम करता है, जिसमें निवेशक कुछ शर्तें तय करते हैं।
स्टेप-अप एसआईपी उन लोगों के लिए बेहतर है जिनकी आय हर साल बढ़ती है, क्योंकि इसमें आप धीरे-धीरे निवेश राशि बढ़ा सकते हैं।
वैल्यू एवरेजिंग प्लान (वीआईपी) और मल्टीपल एसआईपी जैसे विकल्प भी मौजूद हैं, जो खास तरह के निवेशकों के लिए उपयोगी होते हैं।
जानकारों का कहना है कि एसआईपी शुरू करने से पहले अपने वित्तीय लक्ष्यों को तय करना बेहद जरूरी है, जैसे घर खरीदना, बच्चों की पढ़ाई या रिटायरमेंट। इसके साथ ही अपनी जोखिम उठाने की क्षमता को समझना भी जरूरी है, ताकि आप सही फंड का चुनाव कर सकें। निवेश की राशि ऐसी रखें जिसे आप नियमित रूप से बिना दबाव के निवेश कर सकें।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, निवेश की अवधि भी बहुत मायने रखती है। लंबी अवधि का निवेश बाजार के उतार-चढ़ाव को संतुलित करता है और कंपाउंडिंग का पूरा फायदा देता है।
एसआईपी शुरू करना बेहद आसान है। सबसे पहले अपने लक्ष्य और जोखिम के आधार पर सही म्यूचुअल फंड चुनें। इसके बाद केवाईसी प्रक्रिया पूरी करें, निवेश की तारीख और अवधि तय करें और अपनी क्षमता के अनुसार राशि निर्धारित करें। इसके बाद आप ऑनलाइन या ऑफलाइन माध्यम से एसआईपी शुरू कर सकते हैं।
हर व्यक्ति के जीवन में अलग-अलग वित्तीय लक्ष्य होते हैं, लेकिन सही योजना के अभाव में वे अधूरे रह जाते हैं। एसआईपी आपको हर लक्ष्य के लिए अलग-अलग निवेश करने की सुविधा देता है, जिससे आप अपने सभी लक्ष्यों को व्यवस्थित तरीके से पूरा कर सकते हैं।
--आईएएनएस
डीबीपी
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