Rajasthan Culture: थाली में घी की धार ही क्यों कहलाती है असली मनवार? जानें सदियों पुरानी परंपरा की दिलचस्प कहानी
Rajasthani Tradition Desi Ghee ki Manwar: राजस्थान में अतिथि सत्कार की सबसे खास पहचान 'घी की मनवार' है. यहां किसी भी मेहमान को दाल-बाटी, चूरमा, खिचड़ा या बाजरे की रोटी पर भरपूर देसी घी डालकर परोसना सम्मान की परंपरा मानी जाती है. ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी मेजबान तब तक घी परोसते रहते हैं, जब तक मेहमान स्वयं मना न कर दे. लोक कहावत 'घी री धार, मेहमान रो सत्कार' इसी परंपरा को दर्शाती है. बुजुर्गों का मानना है कि शुष्क जलवायु और कठिन जीवनशैली के कारण घी ताकत का महत्वपूर्ण स्रोत था, जो बाद में संस्कृति का हिस्सा बन गया. आज स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ी है, लेकिन राजस्थान की पारंपरिक मनवार आज भी देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है.
दादी-नानी की पारंपरिक रेसिपी का स्वाद एक बार चखेंगे तो बाजार की मिठाइयां भूल जाएंगे, सिर्फ 2 चीजों से बनती थी ये देसी मिठाई
Grandma Sweet Recipe: गुड़ और गेहूं के आटे से बनने वाली पारंपरिक गुलगुली स्वाद, सादगी और देसी खुशबू का शानदार मेल है. कम सामग्री और आसान विधि वाली यह पुरानी रेसिपी आज भी उतनी ही खास है और एक बार खाने के बाद बाजार की मिठाइयां भी फीकी लग सकती हैं.
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