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ग्रैविटी के नियमों को चुनौती देता है देश के इस हिस्से में स्थित 'मैग्नेटिक हिल', अपने आप चलती है गाड़ियां

नई दिल्ली, 18 मार्च (आईएएनएस)। भारत एक बेहद खूबसूरत और रहस्यों से भरा देश है। यहां की प्राकृतिक संपदा इतनी विविध है कि हर कोना कुछ न कुछ अनोखा पेश करता है। लद्दाख की ऊंची-ऊंची बर्फीली चोटियां, नीला आसमान और रहस्यमयी जगहें इसे और भी खास बनाती हैं। ऐसी ही एक जगह है मैग्नेटिक हिल, जो गुरुत्वाकर्षण के नियमों को चुनौती देती है।

लेह शहर से लगभग 30 किलोमीटर दूर लेह-कारगिल राष्ट्रीय राजमार्ग पर यह पहाड़ी स्थित है। यहां पर्यटक एक अनोखा अनुभव लेते हैं, यहां बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं और वे आनंद उठाने के लिए अपनी गाड़ी को न्यूट्रल गियर में डालकर ब्रेक छोड़ते ही गाड़ी बिना किसी इंजन की मदद के ऊपर की ओर चलने लगती है। ऐसा लगता है जैसे कोई अदृश्य शक्ति गाड़ी को खींच रही हो।

मैग्नेटिक हिल के पूर्व में बहती सिंधु नदी इस स्थान की खूबसूरती को और बढ़ा देती है। चारों ओर बर्फीले पहाड़, नीला आसमान और नदी का मनोरम दृश्य मिलकर यहां का नजारा बेहद आकर्षक बनाते हैं। पर्यटक यहां न केवल रहस्य का मजा लेते हैं, बल्कि लद्दाख की प्राकृतिक सुंदरता का भी आनंद उठाते हैं।

स्थानीय मान्यता के अनुसार इस पहाड़ी से एक विशेष चुंबकीय बल निकलता है, जो वाहनों को अपनी ओर आकर्षित करता है और उन्हें ढलान के विपरीत दिशा में ले जाता है। इसी वजह से इसे मैग्नेटिक हिल या ग्रैविटी हिल कहा जाता है। दुनियाभर से आने वाले सैलानी यहां इस विचित्र घटना को देखने और खुद आजमाने के लिए पहुंचते हैं। कई यात्रियों ने इसकी पुष्टि की है कि गाड़ियां वाकई बिना एक्सीलरेटर दबाए ऊपर की ओर बढ़ती हैं, जिससे यह जगह पर्यटकों के बीच बेहद लोकप्रिय हो गई है। हालांकि, वैज्ञानिक इस घटना को चुंबकीय शक्ति नहीं, बल्कि एक ऑप्टिकल इल्यूजन या दृष्टिभ्रम मानते हैं।

उनके अनुसार, आसपास के पहाड़ों और सड़क की बनावट ऐसी है कि ढलान का आभास उल्टा हो जाता है। जो जगह ऊपर की ओर दिखती है, वह वास्तव में नीचे की ओर झुकी होती है। इस वजह से गाड़ी गुरुत्वाकर्षण के नियमों के अनुसार ही नीचे की ओर सरकती है लेकिन आंखों को लगता है कि वह ऊपर जा रही है। यह एक प्रकार का ग्रैविटी हिल इल्यूजन है।

--आईएएनएस

एमटी/पीएम

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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सरकार ने एएलएमएम फ्रेमवर्क का सोलर इनगोट्स और वेफर्स तक विस्तार किया, एक जून 2028 से होगा प्रभावी

नई दिल्ली, 18 मार्च (आईएएनएस)। सरकार ने बुधवार को एप्रूव्ड लिस्ट ऑफ मॉडल्स और मैन्युफैक्चरर्स (एएलएमएम) फ्रेमवर्क का सोलर इनगोट्स और वेफर्स तक विस्तार किया। नए नियम एक जून, 2028 से प्रभावी होंगे।

नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) ने इनगोट्स और वेफर्स के लिए एएलएमएम सूची-III लागू की है, जिससे अनिवार्य घरेलू सोर्सिंग की आवश्यकता मॉड्यूल और सेल से आगे बढ़कर सौर मूल्य श्रृंखला के अपस्ट्रीम घटकों तक विस्तारित हो गई है।

मंत्रालय ने कहा कि पहले से ही कार्यान्वयन में चल रही परियोजनाओं की सुरक्षा के लिए ग्रैंडफादरिंग प्रोविजन शामिल किए गए हैं।

केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा कि इस कदम से घरेलू सौर ऊर्जा उत्पादन को मजबूती मिलेगी, आयात पर निर्भरता कम होगी और आपूर्ति श्रृंखला की स्थिरता में सुधार होगा।

उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि एएलएमएम फ्रेमवर्क का विस्तार करके इसमें इनगोट्स और वेफर्स को शामिल करना आत्मनिर्भर सोलर एनर्जी इकोसिस्टम के निर्माण की दिशा में एक निर्णायक कदम है और इससे भारत नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में एक मजबूत वैश्विक खिलाड़ी के रूप में स्थापित होगा।

नए फ्रेमवर्क के तहत, नेट मीटरिंग और ओपन एक्सेस सहित सभी परियोजनाओं को प्रभावी तिथि से एएलएमएम-सूचीबद्ध वेफर्स का उपयोग करना अनिवार्य होगा।

वेफर्स के लिए कट-ऑफ डेट प्रारंभिक एएलएमएम सूची-III के प्रकाशन के सात दिन बाद की समय सीमा निर्धारित की गई है। विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 63 के तहत इस तिथि के बाद प्रस्तुत की जाने वाली बोलियों में एएलएमएम-अनुरूप वेफर्स के उपयोग का उल्लेख करना अनिवार्य है।

पर्याप्त घरेलू आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए, प्रारंभिक सूची तभी जारी की जाएगी जब कम से कम तीन स्वतंत्र निर्माता, जिनकी संयुक्त क्षमता 15 गीगावॉट हो, परिचालन में हों।

वेफर्स के लिए एएलएमएम सूची-III में शामिल होने के इच्छुक निर्माताओं के पास समतुल्य इनगॉट निर्माण क्षमता भी होनी आवश्यक है।

मंत्रालय ने कहा कि जून 2028 से, एएलएमएम सूची-I (सौर मॉड्यूल) में केवल एएलएमएम-सूचीबद्ध सेल और वेफर्स का उपयोग करके निर्मित मॉड्यूल ही शामिल होंगे, जबकि मौजूदा परियोजनाओं के लिए अलग प्रावधान बनाए रखे जाएंगे।

मंत्रालय ने यह भी कहा कि यह आदेश मौजूदा घरेलू सामग्री आवश्यकता (डीसीआर) प्रावधानों को प्रभावित नहीं करता है।

सौर विनिर्माण में वेफर्स एक महत्वपूर्ण मध्यवर्ती घटक हैं, और भारत वर्तमान में इस क्षेत्र में आयात पर काफी हद तक निर्भर है।

सरकार ने कहा कि इस कदम से घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा मिलने, आपूर्ति श्रृंखला की सुरक्षा में सुधार होने और इस क्षेत्र में रोजगार सृजन को समर्थन मिलने की उम्मीद है।

--आईएएनएस

एबीएस/

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