Shravan Krishna Chaturdashi 2026: श्रावण कृष्ण चतुर्दशी कब है? जानें तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त
श्रावण मास भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र महीनों में माना जाता है। इस माह की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी का विशेष धार्मिक महत्व है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा, जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं तथा सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। आइए जानते हैं श्रावण कृष्ण चतुर्दशी की तिथि, पूजा का शुभ समय, महत्व और पूजा विधि।
श्रावण कृष्ण चतुर्दशी का धार्मिक महत्व
सनातन धर्म में श्रावण मास की प्रत्येक तिथि विशेष मानी जाती है, लेकिन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी भगवान शिव को समर्पित मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन शिवलिंग का जलाभिषेक, पंचामृत अभिषेक और महामृत्युंजय मंत्र का जाप अत्यंत शुभ माना जाता है। भक्त इस दिन व्रत रखकर शिव परिवार की पूजा करते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि तथा आरोग्य की कामना करते हैं।
पूजा कैसे करें?
सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद शिवलिंग पर गंगाजल, शुद्ध जल, दूध, दही, शहद, घी और शक्कर से अभिषेक करें। भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल, सफेद चंदन और भस्म अर्पित करें। पूजा के दौरान 'ॐ नमः शिवाय' और महामृत्युंजय मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करें। अंत में शिव आरती कर प्रसाद वितरित करें।
इस दिन क्या करें?
- भगवान शिव का रुद्राभिषेक करें।
- जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र या दक्षिणा का दान दें।
- शिव चालीसा और शिव पुराण का पाठ करें।
- पूरे दिन सात्विक भोजन और संयम का पालन करें।
- किन बातों का रखें ध्यान?
- तामसिक भोजन, शराब और मांसाहार से दूर रहें।
- किसी का अपमान या कटु वचन न बोलें।
- क्रोध और विवाद से बचें।
- पूजा में टूटा हुआ बेलपत्र या बासी फूल अर्पित न करें।
क्या मिलता है इस व्रत का फल?
धार्मिक मान्यता है कि श्रावण कृष्ण चतुर्दशी पर श्रद्धापूर्वक भगवान शिव की पूजा करने से मानसिक शांति, रोगों से राहत, परिवार में सुख-समृद्धि और कार्यों में सफलता का आशीर्वाद मिलता है। शिव कृपा से जीवन की कई बाधाएं दूर होने की भी मान्यता है।
नोट: तिथि और पूजा का शुभ मुहूर्त आपके शहर के पंचांग के अनुसार थोड़ा अलग हो सकता है। पूजा से पहले स्थानीय पंचांग या योग्य ज्योतिषाचार्य से समय की पुष्टि कर लें।
Kanwar Yatra Guidelines 2026: पहली बार कांवड़ यात्रा करने वाले इन नियमों का रखें विशेष ध्यान
Kanwar Yatra Guidelines 2026: कांवड़ यात्रा केवल पैदल चलकर गंगाजल लाने की परंपरा नहीं, बल्कि भगवान शिव के प्रति श्रद्धा, संयम और समर्पण का प्रतीक मानी जाती है। पहली बार कांवड़ यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं के लिए कुछ विशेष नियम बताए गए हैं, जिनका पालन करना धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।
कांवड़ को कभी सीधे जमीन पर न रखें
कांवड़ यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण नियम यह माना जाता है कि कांवड़ को सीधे जमीन पर नहीं रखा जाता। यदि विश्राम करना हो तो कांवड़ स्टैंड या किसी साफ और ऊंचे स्थान का उपयोग करें। इससे गंगाजल की पवित्रता बनी रहती है और यात्रा की मर्यादा भी कायम रहती है।
सात्विक भोजन और संयम रखें
यात्रा के दौरान सात्विक भोजन करना चाहिए। लहसुन, प्याज, मांसाहार और नशे जैसी चीजों से पूरी तरह दूरी बनाकर रखें। साथ ही वाणी में संयम रखें और किसी प्रकार के विवाद या अपशब्द से बचें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यात्रा के दौरान ब्रह्मचर्य का पालन भी शुभ माना जाता है।
पहनावे और स्वच्छता का रखें ध्यान
कांवड़ यात्रा में साफ-सुथरे और सरल वस्त्र पहनने की सलाह दी जाती है। चमड़े से बनी बेल्ट, पर्स या जूते-चप्पल का उपयोग नहीं करना चाहिए। कांवड़ को छूने से पहले हाथ-पैर साफ करना और व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखना भी जरूरी माना जाता है।
यात्रा का उद्देश्य केवल भक्ति रखें
कांवड़ यात्रा को मनोरंजन या प्रदर्शन का माध्यम नहीं, बल्कि शिव भक्ति का पर्व माना जाता है। यात्रा के दौरान भगवान शिव के मंत्रों का जाप करें, मन शांत रखें और जरूरतमंदों की सहायता करने का प्रयास करें। विनम्र व्यवहार और सेवा भावना यात्रा के आध्यात्मिक महत्व को और बढ़ाती है।
पहली बार यात्रा करने वाले रखें ये बातें याद
- कांवड़ को कभी जमीन पर न रखें।
- सात्विक भोजन और शुद्ध आचरण अपनाएं।
- चमड़े की वस्तुओं का उपयोग न करें।
- बिना हाथ-पैर धोए कांवड़ को स्पर्श न करें।
- विवाद और क्रोध से दूर रहें।
- शिव नाम का स्मरण करते हुए यात्रा पूरी करें।
- यात्रा के नियमों का पालन श्रद्धा और अनुशासन के साथ करें।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सच्ची श्रद्धा, संयम और नियमों का पालन करते हुए की गई कांवड़ यात्रा भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का माध्यम मानी जाती है।
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