अमेरिका ने होर्मुज के पास ईरान के मिसाइल ठिकानों पर हमला किया
वॉशिंगटन, 18 मार्च (आईएएनएस)। अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट के पास ईरान के मिसाइल ठिकानों पर नए हमले किए हैं। सेना के अधिकारियों का कहना है कि ये ठिकाने अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए खतरा बन रहे थे। यह कार्रवाई “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” के तहत की जा रही है, जो अब और तेज हो गया है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) के अनुसार, इन हमलों में भारी वजन वाले बमों का इस्तेमाल किया गया, जो मजबूत और सुरक्षित ठिकानों को भी नष्ट कर सकते हैं। ये मिसाइल ठिकाने ईरान के तटीय इलाके में, होर्मुज स्ट्रेट के पास स्थित थे। यहां तैनात एंटी-शिप मिसाइलें गुजरने वाले जहाजों के लिए खतरा पैदा कर रही थीं।
यह कार्रवाई इस पूरे अभियान में एक बड़ा कदम मानी जा रही है, क्योंकि अब समुद्री क्षेत्र भी इसका अहम हिस्सा बन गया है। होर्मुज स्ट्रेट इस समय अमेरिकी सैन्य गतिविधियों का मुख्य केंद्र बन गया है।
सेंटकॉम ने बताया कि इस ऑपरेशन के दौरान अमेरिकी नौसेना के विमानों ने सैकड़ों लड़ाकू उड़ानें भरी हैं। इससे यह दिखता है कि अमेरिका समुद्र से भी हवाई ताकत बनाए रखने में सक्षम है।
एक दिन पहले जारी जानकारी के मुताबिक, 28 फरवरी से शुरू हुए इस अभियान में अब तक 7,000 से ज्यादा लक्ष्यों पर हमला किया जा चुका है। यह अभियान राष्ट्रपति के निर्देश पर शुरू किया गया था, जिसका उद्देश्य ईरान की सुरक्षा व्यवस्था को कमजोर करना और उन ठिकानों को निशाना बनाना है जो तुरंत खतरा पैदा कर सकते हैं।
अब तक 100 से ज्यादा ईरानी जहाजों को नुकसान पहुंचाया गया है या उन्हें नष्ट कर दिया गया है। साथ ही अमेरिकी सेना 6,500 से ज्यादा लड़ाकू उड़ानें भर चुकी है।
हमलों के निशाने पर कई तरह के सैन्य ठिकाने हैं। इनमें बैलिस्टिक मिसाइल साइट, एंटी-शिप मिसाइल ठिकाने, आईआरजीसी (ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड) के मुख्यालय, एयर डिफेंस सिस्टम और सैन्य संचार से जुड़े सिस्टम शामिल हैं।
इस पूरे ऑपरेशन में अमेरिका ने हवा, जमीन और समुद्र तीनों मोर्चों पर अपनी ताकत का इस्तेमाल किया है। इसमें बी-1, बी-2 और बी-52 जैसे बमवर्षक विमान, एफ-22 और एफ-35 जैसे आधुनिक फाइटर जेट, निगरानी विमान और ड्रोन शामिल हैं। समुद्र में परमाणु ऊर्जा से चलने वाले विमानवाहक पोत, पनडुब्बियां और मिसाइल से लैस युद्धपोत तैनात किए गए हैं।
जमीन पर पैट्रियट और थाड जैसे मिसाइल रक्षा सिस्टम, रॉकेट आर्टिलरी और ड्रोन से निपटने वाली तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे साफ है कि यह अभियान कई स्तरों पर एक साथ चलाया जा रहा है।
एंटी-शिप मिसाइल ठिकानों पर खास ध्यान इसलिए दिया जा रहा है, क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट दुनिया में तेल आपूर्ति का एक बेहद महत्वपूर्ण रास्ता है। अगर यहां कोई बाधा आती है, तो इसका असर पूरी दुनिया के व्यापार और तेल बाजार पर पड़ सकता है।
--आईएएनएस
एएस/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
ईरान युद्ध को लेकर आतंकवाद-रोधी प्रमुख के इस्तीफे के बाद तुलसी गबार्ड ने किया राष्ट्रपति ट्रंप का बचाव
वाशिंगटन, 18 मार्च (आईएएनएस)। अमेरिका की नेशनल इंटेलिजेंस निदेशक तुलसी गबार्ड ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान पर हमला करने के फैसले का बचाव किया। यह तब हुआ जब आतंकवाद-रोधी संस्था के प्रमुख जो केंट ने विरोध में इस्तीफा दे दिया। इस युद्ध को लेकर प्रशासन से यह पहला उच्च-स्तरीय इस्तीफा था।
तुलसी गबार्ड ने अपने बयान में कहा कि डोनाल्ड ट्रंप को अमेरिकी जनता ने भारी बहुमत से राष्ट्रपति और कमांडर-इन-चीफ चुना है। उन्होंने कहा, कमांडर-इन-चीफ के रूप में यह उनकी जिम्मेदारी है कि वे तय करें कि क्या तत्काल खतरा है और क्या नहीं, और क्या हमारे सैनिकों, अमेरिकी लोगों और हमारे देश की सुरक्षा व हिफाजत के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं या नहीं।
राष्ट्रपति प्रशासन में सबसे ऊंचे पद पर मौजूद हिंदू अमेरिकी गबार्ड ने कहा कि यह फैसला खुफिया जानकारी के आकलन पर आधारित था। उन्होंने कहा, नेशनल इंटेलिजेंस निदेशक का कार्यालय सभी खुफिया जानकारियों को समन्वित और एकीकृत करने में मदद करने के लिए जिम्मेदार है, ताकि राष्ट्रपति और कमांडर-इन-चीफ को उनके फैसलों के लिए सबसे अच्छी उपलब्ध जानकारी दी जा सके।
गबार्ड ने कहा, अपने सामने मौजूद सभी जानकारियों की सावधानीपूर्वक समीक्षा करने के बाद राष्ट्रपति ट्रंप इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि ईरान में मौजूद इस्लामी शासन हमारे लिए एक खतरा है। उन्होंने इसी निष्कर्ष के आधार पर कार्रवाई की।
इससे पहले, जो केंट ने इस्तीफा देते हुए कहा, काफी सोच-विचार के बाद मैंने आतंकवाद-रोधी संस्था के निदेशक पद से इस्तीफा देने का फैसला किया है।
केंट ने सीधे तौर पर इस युद्ध के आधार को ही चुनौती दी। उन्होंने कहा, मैं अपनी अंतरात्मा की आवाज पर ईरान में चल रहे इस युद्ध का समर्थन नहीं कर सकता। ईरान से हमारे देश को कोई खतरा नहीं था और यह साफ है कि हमने इजरायल और उसकी शक्तिशाली अमेरिकी लॉबी के दबाव में आकर यह युद्ध शुरू किया है।
हालांकि, व्हाइट हाउस ने भी केंट के दावों को खारिज कर दिया। प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने कहा, इस पत्र में कई झूठे दावे किए गए हैं, लेकिन मैं विशेष रूप से एक दावे का जवाब देना चाहूंगी कि ईरान से हमारे देश को कोई तत्काल खतरा नहीं था। यह वही झूठा दावा है जिसे डेमोक्रेट और उदारवादी मीडिया के कुछ लोग बार-बार दोहराते आ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप के पास इस बात के मजबूत और ठोस सबूत थे कि ईरान सबसे पहले अमेरिका पर हमला करने वाला था। कैरोलिन लेविट ने कहा कि यह फैसला कई स्रोतों और कारकों से जुटाई गई खुफिया जानकारियों पर आधारित था।
इस्तीफे के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद केंट की आलोचना की। उन्होंने पत्रकारों से कहा, यह अच्छी बात है कि वह अब प्रशासन से बाहर हैं, क्योंकि उन्होंने कहा था कि ईरान कोई खतरा नहीं है, जबकि हर देश यह मानता था कि ईरान एक खतरा है।
ट्रंप ने आगे कहा, मुझे हमेशा लगता था कि वह एक अच्छा इंसान है। लेकिन मुझे हमेशा यह भी लगता था कि वह सुरक्षा के मामले में कमजोर है। जब मैंने उनका बयान पढ़ा, तो मुझे एहसास हुआ कि यह अच्छा ही हुआ कि वह अब इस पद पर नहीं है, क्योंकि उन्होंने कहा कि ईरान कोई खतरा नहीं है, जबकि ईरान एक खतरा था।
--आईएएनएस
डीसीएच/
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