अंतरराष्ट्रीय आतंकी नेटवर्क का खुलासा, अमेरिकी समेत सात विदेशी नागरिकों को 11 दिन की NIA हिरासत
नई दिल्ली में एक बड़े सुरक्षा मामले में एनआईए ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैले एक संदिग्ध आतंकी नेटवर्क का पर्दाफाश किया है. पटियाला हाउस कोर्ट ने छह यूक्रेनी और एक अमेरिकी नागरिक को 11 दिनों की एनआईए हिरासत में भेज दिया है.
अदालत का फैसला और कानूनी कार्रवाई
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रशांत शर्मा की अदालत में बंद कमरे में सुनवाई हुई. एनआईए ने 15 दिन की हिरासत की मांग की थी, लेकिन अदालत ने 27 मार्च तक 11 दिन की कस्टडी मंजूर की.
इस मामले में गैर कानूनी गतिविधियां की धारा 18 के तहत केस दर्ज किया गया है. एफआईआर 13 मार्च को गृह मंत्रालय के निर्देश पर दर्ज की गई थी, जो इस मामले की गंभीरता को दर्शाता है.
मिजोरम से म्यांमार तक का संदिग्ध सफर
जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपी वैध वीजा पर भारत आए थे, लेकिन उन्होंने नियमों का उल्लंघन करते हुए मिजोरम के संरक्षित क्षेत्र में बिना अनुमति प्रवेश किया.
इसके बाद वे अवैध रूप से सीमा पार कर म्यांमार पहुंच गए. मिजोरम की लगभग 500 किलोमीटर लंबी सीमा म्यांमार के चिन और रखाइन राज्यों से लगती है, जिसे इस नेटवर्क की अहम कड़ी माना जा रहा है.
उग्रवादी समूहों को ड्रोन और हथियारों की ट्रेनिंग
एनआईए के मुताबिक, ये विदेशी नागरिक म्यांमार में सक्रिय एथनिक आर्म्ड ग्रुप्स (EAGs) के संपर्क में थे. उन्होंने इन समूहों को ड्रोन संचालन, असेंबली और जैमिंग जैसी उन्नत तकनीकों की ट्रेनिंग दी.
जांच में यह भी सामने आया है कि यूरोप से ड्रोन और उससे जुड़े उपकरण भारत के रास्ते म्यांमार भेजे जा रहे थे. सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि इन तकनीकों का इस्तेमाल भारत विरोधी गतिविधियों में किया जा सकता था.
एयरपोर्ट्स से हुई गिरफ्तारी
सुरक्षा एजेंसियों ने देश के अलग-अलग हवाई अड्डों पर समन्वित कार्रवाई करते हुए आरोपियों को पकड़ा. अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वेनडाइक को नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट से हिरासत में लिया गया. तीन यूक्रेनी नागरिक चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट से और बाकी तीन को इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर पकड़ा गया.
मैथ्यू वैन डाइक: विवादों से जुड़ा नाम
इस पूरे मामले में सबसे चर्चित नाम अमेरिकी नागरिक मैथ्यू का है. बताया जाता है कि वह पहले भी अंतरराष्ट्रीय संघर्ष क्षेत्रों में सक्रिय रहा है. वह खुद को सुरक्षा विश्लेषक, युद्ध संवाददाता और डॉक्यूमेंट्री फिल्ममेकर बताता है. 2011 में लीबिया के गृहयुद्ध के दौरान भी उसकी भूमिका चर्चा में रही थी. उसने सन ऑफ लिबर्टी इंटरनेशनल नामक संगठन भी बनाया, जो सशस्त्र समूहों को ट्रेनिंग देने का दावा करता है.
जांच के दायरे में बड़ा नेटवर्क
सूत्रों के मुताबिक, करीब 14 यूक्रेनी नागरिक अलग-अलग समय पर भारत आए थे, जिससे इस नेटवर्क के और बड़ा होने की आशंका है.
अब जांच एजेंसियां इस पूरे मामले के कई अहम पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं क्या इसका भारत में कोई लोकल कनेक्शन है, फंडिंग कहां से हो रही थी, और सोशल मीडिया के जरिए किन लोगों को जोड़ा गया.
सुरक्षा के लिहाज से गंभीर मामला
यह मामला केवल एक आतंकी साजिश तक सीमित नहीं है, बल्कि एक संगठित अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की ओर इशारा करता है. फिलहाल सभी आरोपी एनआईए की हिरासत में हैं और उनसे पूछताछ जारी है. सुरक्षा एजेंसियां हर पहलू की गहराई से जांच कर रही हैं ताकि किसी भी संभावित खतरे को समय रहते रोका जा सके.
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