राज्यसभा में बदला राजनीति का गणित: 141 के साथ एनडीए बहुमत के पार, INDIA 58 पर सिमटा
राज्यसभा की 37 सीटों के लिए हुए हालिया चुनावों ने संसद के ऊपरी सदन की तस्वीर बदल दी है। इन चुनावों के बाद एनडीए ने न सिर्फ निर्णायक बढ़त हासिल की है, बल्कि अब सदन में उसका बहुमत भी सुनिश्चित हो गया है. एक ऐसा मोड़, जो आने वाले संसदीय सत्रों में सत्ता पक्ष को स्पष्ट बढ़त देता दिख रहा है।
कैसे मिली बढ़त?
37 सीटों में से 11 पर मतदान हुआ, जिसमें एनडीए ने 9 सीटों पर जीत दर्ज की। वहीं, बाकी 26 सीटों पर निर्विरोध चुनाव हुआ, जहां एनडीए को 13 सीटें मिलीं। इस तरह कुल 37 में से 22 सीटें एनडीए के खाते में गईं, जबकि विपक्ष 15 सीटों पर सिमट गया।
चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी ने खास प्रदर्शन किया—बिहार और ओडिशा में एक-एक अतिरिक्त सीट हासिल की, जबकि हरियाणा में कांटे की टक्कर के बाद भी एक सीट जीतकर समीकरण अपने पक्ष में कर लिया।
अब क्या है राज्यसभा का पूरा गणित?
राज्यसभा की कुल प्रभावी संख्या 250 है और बहुमत का आंकड़ा 126 सीटों का है।
ताजा स्थिति में एनडीए 135 से बढ़कर 141 सीटों पर पहुंच गया है यानी बहुमत के आंकड़े से काफी आगे।
एनडीए के भीतर सबसे बड़ी ताकत भारतीय जनता पार्टी है, जिसके पास अकेले 106 सीटें हैं। लेकिन असली मजबूती सहयोगी दलों के व्यापक फैलाव से आती है
• तेलुगु देशम पार्टी (2)
• जनता दल (यूनाइटेड) (4)
• शिवसेना (2)
• राष्ट्रीय लोक दल (1)
• जनता दल (सेक्युलर) (1)
• असम गण परिषद (1)
दक्षिण भारत और क्षेत्रीय सहयोगियों का भी अहम योगदान है
• AIADMK (5)
• नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (4)
• PMK (1)
पूर्वोत्तर से भी समर्थन
• यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी, लिबरल (2)
• मिजो नेशनल फ्रंट (1)
• नेशनल पीपुल्स पार्टी (1)
इसके अलावा छोटे लेकिन निर्णायक सहयोगी
• रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (अठावले) (1)
• राष्ट्रीय लोक मोर्चा (1)
• निर्दलीय (कार्तिकेय शर्मा) (1)
और सबसे अहम, 7 नामित सदस्य, जो कुल संख्या को और मजबूती देते हैं।
विपक्ष की तस्वीर
दूसरी ओर, INDIA गठबंधन की ताकत 62 से घटकर 58 सीटों पर आ गई है। हालांकि, कांग्रेस 29 सीटों के साथ अब भी विपक्ष की धुरी बनी हुई है और उसके पास नेता प्रतिपक्ष का पद बरकरार रहेगा।
अन्य दलों की स्थिति भी थोड़ी कमजोर हुई है- 47 से घटकर 45 सीटें रह गई हैं।
राजनीतिक मायने क्या हैं?
अब तक राज्यसभा को सरकार के लिए “कठिन सदन” माना जाता था, जहां विपक्ष कई बार विधेयकों को अटका देता था। लेकिन नए आंकड़े एक अलग कहानी कह रहे हैं— अब सरकार के पास न सिर्फ बहुमत है, बल्कि सहयोगी दलों के साथ एक स्थिर और सुरक्षित संख्या बल भी है। इसका सीधा असर आने वाले मॉनसून सत्र में दिख सकता है, जहां सरकार के लिए महत्वपूर्ण बिलों को पास कराना पहले की तुलना में कहीं ज्यादा आसान होगा।
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