Nepal Hindu Rashtra Demand: नेपाल को हिंदू राष्ट्र घोषित करने की उठी मांग! यूपी, बिहार और बंगाल के सीमाई इलाकों में हाई अलर्ट
पड़ोसी देश नेपाल में राजनीतिक और धार्मिक माहौल एक बार फिर गरमा गया है। नेपाल को दोबारा 'हिंदू राष्ट्र' घोषित करने की मांग अब तेजी से जोर पकड़ रही है। शुरुआत में यह चिंगारी देश के पहाड़ी क्षेत्रों तक सीमित थी, लेकिन अब यह सुलगते हुए मधेस और भारत की सीमा से सटे तमाम तराई इलाकों तक व्यापक रूप से फैल चुकी है।
इस बीच नेपाल के भीतर हुई हिंसक घटनाओं के चलते भारत की सुरक्षा एजेंसियों ने भी उत्तर प्रदेश से लेकर पश्चिम बंगाल और सिक्किम तक की सीमाओं पर चौकसी बेहद कड़ी कर दी है।
????Golbazar, Siraha #Nepal ????????
— CAUGHTIN4KHQ (@CaughtIn4KHQ) August 6, 2026
Members of the Hindu Samrat Sena
attacked the under-construction mosque and, while celebrating victory, hoisted a saffron flag printed with "Jai Shri Ram"and an image of Hanuman ????
Mulla's will never dare to enter Nepal from now on ???????? pic.twitter.com/22OPDvZZUp
सुनसरी हिंसा और हिंदूवादी संगठनों का एक मंच पर आना
यह पूरा विवाद तब और गहरा गया जब हाल ही में नेपाल के सुनसरी जिले के देवागंज क्षेत्र में 26 जुलाई को एक धार्मिक जुलूस के दौरान दो समुदायों के बीच हिंसक झड़प हो गई। इस संघर्ष में तीन प्रदर्शनकारियों की मौत के बाद स्थिति अत्यधिक संवेदनशील हो गई।
हालांकि नेपाल सरकार के गृहमंत्री ने प्रभावित क्षेत्र का दौरा कर पीड़ित परिवारों को दस-दस लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है, फिर भी आंदोलन की धार कम होती नहीं दिख रही है।
???????? - Communal tensions escalate in Nepal as hindu extremists use violence in Madhes region.
— Flashpoint (@Flashpo1nts) August 1, 2026
Nepal is witnessing its most serious communal unrest in years after violence erupted during a Hindu religious procession in Sunsari district, reportedly leaving at least three people… pic.twitter.com/Oel4EU44YZ
वर्तमान में नेपाल के 15 से अधिक प्रमुख हिंदूवादी संगठन- जिनमें संयुक्त हिंदू मोर्चा, हिंदू सम्राट सेना, राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी, महाकाल युवा शक्ति और हिंदू युवा संघ शामिल हैं- अपनी 13 सूत्रीय मांगों को लेकर एक ही मंच पर एकजुट हो चुके हैं। जनकपुर और कपिलवस्तु जैसे इलाकों में बैठकों और प्रदर्शनों का दौर जारी है और नेताओं का कहना है कि यह अब किसी एक जिले का नहीं बल्कि पूरे नेपाल का राष्ट्रीय विषय बन चुका है।
यूपी से बंगाल और सिक्किम तक सीमा पर हाई अलर्ट
नेपाल में सुलगते इस आंतरिक तनाव को देखते हुए भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद कर दी गई है। उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती जिलों में प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। सशस्त्र सीमा बल (SSB) और राज्य पुलिस को हर गतिविधि पर पैनी नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।
???? #Nepal ????????
— CAUGHTIN4KHQ (@CaughtIn4KHQ) August 3, 2026
Nepali Hindus ???? are attacking mosques in Nepal after Muslims in Nepal chanted slogans calling for Hindus to be driven out of the Hindu majority nation (Nepal) pic.twitter.com/2BLru7yF1a
- बिहार बॉर्डर: मधुबनी जिले के बेतौहां और पिपरौन बॉर्डर पर एसएसबी ने नेपाल से आने वाले लोगों के लिए बायोमैट्रिक जांच, फेस स्कैनिंग और मूल प्रमाण पत्र दिखाना अनिवार्य कर दिया है। अररिया में भी संयुक्त फ्लैग मार्च निकाले जा रहे हैं।
- उत्तर प्रदेश सीमा: पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, बहराइच, श्रावस्ती, महाराजगंज (सोनौली) और सिद्धार्थनगर (बढ़नी, ककहरवा) जैसे जिलों में पुलिस ने गश्त तेज कर दी है। हाल ही में यूपी सरकार द्वारा सीमावर्ती क्षेत्रों में अवैध धार्मिक स्थलों के सत्यापन और कार्रवाई के बाद सुरक्षा एजेंसियां और अधिक मुस्तैद हैं।
- बंगाल और सिक्किम: सिलीगुड़ी सब डिवीजन के तहत पानीटंकी और मिरिक में पशुपति सीमा पर एसएसबी के अतिरिक्त जवानों की तैनाती की गई है। सिक्किम सीमा पर भी बिना वैध पहचान पत्र के किसी को प्रवेश नहीं दिया जा रहा है और वाहनों की सख्त चेकिंग की जा रही है।
एसएसबी के आईजी वंदन सक्सेना ने स्पष्ट किया है कि सीमा पर चौबीसों घंटे कड़ी निगरानी रखी जा रही है ताकि भारत की आंतरिक सुरक्षा पर किसी भी तरह का जोखिम न आए।
Make in India: फ्रांस ने भारत को सौंपा राफेल विमानों के निर्माण का प्रस्ताव; 3.25 लाख करोड़ का है मेगा सौदा!
भारतीय रक्षा क्षेत्र में एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक कदम सामने आया है। 114 राफेल जेट विमान सौदे के सिलसिले में एक अहम विकास के तहत फ्रांस ने भारत को इस मेगा प्रोजेक्ट के लिए विस्तृत तकनीकी और व्यावसायिक प्रस्ताव सौंप दिया है।
लगभग 3.25 लाख करोड़ रुपये के इस भारी-भरकम सौदे में बहु-भूमिका वाले इन लड़ाकू विमानों का बड़े पैमाने पर स्थानीय निर्माण और उत्पादन शामिल है, जो भारत के स्वदेशीकरण और 'मेक इन इंडिया' अभियान को अभूतपूर्व मजबूती देगा।
स्थानीय विनिर्माण और टाटा-L&T जैसे दिग्गजों को मिलेंगे अवसर
इस प्रस्ताव के तहत फ्रांसीसी कंपनी दसॉल्ट एविएशन और उसके प्रमुख साझीदार- जिनमें मिसाइल निर्माता एमबीडीए, इंजन निर्माता सफ्राेन और थेल्स शामिल हैं- भारत में स्थानीय उद्योग साझीदारों के साथ मिलकर कुल 114 में से 94 विमानों का निर्माण भारत की धरती पर ही करेंगे।
यह डील भारतीय निजी रक्षा उद्योग के खिलाड़ियों जैसे टाटा, लार्सन एंड टर्बो (L&T) और अन्य कंपनियों के लिए लगभग 1.6 लाख करोड़ रुपये तक के भारी-भरकम व्यावसायिक और उत्पादन अवसर प्रदान कर सकती है।
वायु सेना का आग्रह पत्र और स्वदेशी हथियारों का एकीकरण
गौरतलब है कि भारत ने इसी साल मई के महीने में भारतीय वायु सेना (IAF) के लिए 114 राफेल लड़ाकू विमानों के इस मेगा सरकारी सौदे के लिए अनुरोध पत्र (RFP) जारी किया था। वर्तमान में रक्षा मंत्रालय का अधिग्रहण विंग और वायु सेना इस फ्रांसीसी प्रस्ताव का बारीकी से अध्ययन और तकनीकी विश्लेषण कर रहे हैं।
इस सौदे की एक खास बात यह भी है कि इसमें भारत में बनने वाले विमानों के भीतर भारतीय हथियारों, जैसे स्वदेशी 'अस्त्र' हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों और अन्य स्वदेशी प्रणालियों की सामग्री को एकीकृत करने पर भी जोर दिया जा रहा है।
भविष्य की रणनीति और लंबी प्रक्रिया
राफेल विमान भविष्य में भारतीय वायु सेना के मुख्य रक्षा आधारा स्तंभों में से एक बनने की राह पर है। इसे साल 2012 में रक्षा मंत्रालय द्वारा एक लंबी वैश्विक प्रतिस्पर्धा के बाद चुना गया था। अब इस नए और विस्तृत उत्पादन प्रस्ताव के सामने आने के बाद, भारत और फ्रांस के बीच रक्षा कूटनीति और मजबूत स्वदेशी रक्षा उत्पादन का एक नया अध्याय शुरू होने की उम्मीद है।
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