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एडेड स्कूलों के शिक्षकों को योगी सरकार का बड़ा तोहफा, ग्रेच्युटी सीमा बढ़कर 25 लाख रुपये की
अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों (एडेड स्कूलों) में कार्यरत शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए सरकार ने एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है. अब सेवानिवृत्ति के समय मिलने वाली ग्रेच्युटी (उपादान) की अधिकतम सीमा 20 लाख रुपये से बढ़ाकर 25 लाख रुपये कर दी गई है. इस संबंध में माध्यमिक शिक्षा विभाग ने शासनादेश जारी कर नई व्यवस्था लागू कर दी है.
क्या है नया बदलाव?
नई व्यवस्था के तहत ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा में 5 लाख रुपये की वृद्धि की गई है. हालांकि, यह बढ़ी हुई सीमा तभी लागू होगी जब महंगाई भत्ता (डीए) मूल वेतन का 50 प्रतिशत या उससे अधिक हो जाएगा. यानी यह फैसला भविष्य की आर्थिक परिस्थितियों से भी जुड़ा हुआ है.
इस बदलाव से उन शिक्षकों और कर्मचारियों को सीधा लाभ मिलेगा जो लंबे समय तक सेवा देने के बाद सेवानिवृत्त होते हैं. ग्रेच्युटी उनके लिए एक महत्वपूर्ण आर्थिक सुरक्षा का साधन होती है.
2017 के नियमों में किया गया संशोधन
इससे पहले वर्ष 2017 में जारी शासनादेश के तहत वेतन समिति उत्तर प्रदेश-2016 की सिफारिशों को लागू किया गया था. उस समय पेंशन, ग्रेच्युटी और पारिवारिक पेंशन से जुड़े नियमों में बदलाव किया गया था. तब यह तय किया गया था कि 60 वर्ष की आयु तक सेवा का विकल्प चुनने वाले शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा 20 लाख रुपये होगी. अब सरकार ने उसी सीमा को बढ़ाकर 25 लाख रुपये कर दिया है, जो महंगाई और बढ़ती जरूरतों को देखते हुए एक अहम कदम माना जा रहा है.
शिक्षकों को कैसे मिलेगा फायदा?
ग्रेच्युटी में बढ़ोतरी से शिक्षकों और कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के समय अधिक आर्थिक सुरक्षा मिलेगी. यह राशि आमतौर पर जीवन के उस दौर में मिलती है जब नियमित आय का स्रोत समाप्त हो जाता है.
बढ़ी हुई ग्रेच्युटी से वे अपनी आवश्यकताओं जैसे स्वास्थ्य खर्च, परिवार की जिम्मेदारियों और अन्य जरूरतों को बेहतर तरीके से पूरा कर सकेंगे. खासकर उन कर्मचारियों के लिए यह राहत ज्यादा महत्वपूर्ण है, जो पूरी सेवा अवधि एडेड संस्थानों में बिताते हैं.
कितने लोगों को होगा लाभ?
राज्य में एडेड माध्यमिक विद्यालयों में करीब 61 हजार शिक्षक और कर्मचारी कार्यरत हैं. इस निर्णय का सीधा लाभ इन्हीं लोगों को मिलेगा.
सरकार का यह कदम शिक्षा क्षेत्र में कार्यरत कर्मचारियों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण को भी दर्शाता है. इससे न केवल वर्तमान कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि भविष्य में भी इस क्षेत्र में काम करने के प्रति आकर्षण बढ़ सकता है. कुल मिलाकर, ग्रेच्युटी की सीमा बढ़ाने का यह निर्णय शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने वाला है.
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