दिल्ली, झारखंड के बाद अब हिमाचल... धर्मशाला में 19 दिनों से क्यों चल रही भूख हड़ताल? निर्वासित तिब्बती सांसद भी हुए शामिल
Tibetan Youth Congress Hunger Strike: दिल्ली में जंतर मंतर के बाद झारखंड में बड़े स्तर छात्रों का आंदोलन शुरू हो गया है. इसमें भी कई लोग भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं. वहीं देश के बॉर्डर राज्य हिमाचल में भी भूख हड़ताल चल रही है. तिब्बती युवा कांग्रेस (टीवाईसी) द्वारा शुरू की गई सिलसिलेवार भूख हड़ताल गुरुवार को 19वें दिन में प्रवेश कर गई.
हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में तिब्बती युवा कांग्रेस ने 19 जुलाई से यह अभियान शुरू किया है. संगठन का कहना है कि उसका उद्देश्य तिब्बतियों की आवाज दुनिया तक पहुंचाना और लोगों को तिब्बत की असली स्थिति से अवगत कराना है. यह प्रदर्शन चीन के जातीय एकता कानून के विरोध में चलाए जा रहे वैश्विक अभियान का हिस्सा है. गुरुवार को निर्वासित तिब्बती संसद के तीन सदस्य भी धर्मशाला में चल रही सिलसिलेवार भूख हड़ताल में शामिल हुए.
क्या है पूरा मामला?
एएनआई से बातचीत में तिब्बती युवा कांग्रेस के महासचिव तेनजिन लोबसांग ने कहा कि हमारी सिलसिलेवार भूख हड़ताल को आज 19 दिन हो गए हैं. वहीं, तिब्बती शहीद लोबगा रंगजेन के न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के सामने आत्मदाह किए 34 दिन पूरे हो चुके हैं.
उन्होंने बताया कि अब तक तिब्बती युवा कांग्रेस की 40 शाखाओं ने अलग-अलग जगहों पर कई अभियान और विरोध प्रदर्शन किए हैं. ये प्रदर्शन सात से ज्यादा देशों में आयोजित किए गए हैं. लोबसांग ने कहा कि संगठन इस आंदोलन को और मजबूत बनाने की कोशिश कर रहा है, ताकि संयुक्त राष्ट्र (UN) उनकी मांगों पर ध्यान दे और तिब्बत के मुद्दे पर कार्रवाई करे.
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निर्वासित सांसदों ने बताई ये मांग
निर्वासित तिब्बती संसद के सदस्य वांगडू दोरजी ने कहा कि तिब्बती युवा कांग्रेस की सिलसिलेवार भूख हड़ताल आज 19वें दिन में पहुंच गई है. हम निर्वासित तिब्बती संसद के तीन सदस्य स्वेच्छा से धर्मशाला में इस आंदोलन में शामिल हुए हैं.
उन्होंने कहा कि वे चीन के जातीय एकता कानून का विरोध कर रहे हैं और लोबगा रंगजेन, जिन्होंने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के सामने आत्मदाह किया था, उनके प्रति अपनी एकजुटता दिखाने आए हैं. वांगडू दोरजी ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र को तिब्बत में हो रहे कथित दमन के लिए चीन से जवाब मांगना चाहिए और इस मुद्दे पर कार्रवाई करनी चाहिए.
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