Honey Singh Birthday: जब 13 साल की उम्र में 'हनी सिंह' बने नास्तिक, फिर 'बाइपोलर' स्ट्रगल के बाद कैसे हुए भगवान के करीब?
Honey Singh Birthday: मशहूर रैपर और सिंगर हनी सिंह (Honey Singh) आज, 15 मार्च को अपना जन्मदिन मना रहे हैं. अपने हिट गानों और अलग स्टाइल के लिए पहचाने जाने वाले हनी सिंह की जिंदगी में कई उतार-चढ़ाव आए. एक समय ऐसा भी था जब उन्होंने सिर्फ 13 साल की उम्र में भगवान पर विश्वास करना छोड़ दिया था. इसके बाद वो बाइपोलर डिस्ऑर्डर जैसी खतरनाक बीमारी से पीड़ित हो गए. इससे लड़ते-लड़ते उनकी सोच बदली और वे फिर से भगवान की ओर लौट आए. आइए जानते हैं कैसे उन्होंने इस बीमारी का सामना किया और भगवान की तरफ कैसे लौटे-
13 साल की उम्र में बने नास्तिक
हनी सिंह ने एक इंटरव्यू में बताया कि 'टीन ऐज' में उनका भगवान पर विश्वास खत्म हो गया था और खुद को नास्तिक मानना शुरू कर दिया था. उस समय उन्हें लगता था कि इंसान को अपनी मेहनत और दिमाग पर भरोसा करना चाहिए, न कि भगवान पर. यही सोच आगे चलकर उनके करियर के शुरुआती दौर तक बनी रही. जब वे म्यूजिक इंडस्ट्री में अपना नाम बनाने की कोशिश कर रहे थे, तब उनका पूरा ध्यान सिर्फ काम पर था.
करियर के बीच आया जिंदगी का सबसे मुश्किल दौर
साल 2014 के आसपास हनी सिंह की जिंदगी में एक बड़ा संकट आया. उन्होंने कई इंटरव्यू में बताया कि उस समय उन्हें बाइपोलर डिस्ऑर्डर और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ा. बता दें कि यह बीमारी मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी होती है, जिसमें इंसान के मूड में बहुत तेज बदलाव आते हैं. बाइपोलर डिस्ऑर्डर (Bipolar Disorder) में व्यक्ति को लंबे समय तक इलाज और दवाओं की जरूरत पड़ती है. हनी सिंह ने बताया कि यह समय उनकी जिंदगी का सबसे 'डार्क फेज' था. उन्होंने लगभग 18 महीने तक खुद को घर में बंद कर लिया था और लोगों से मिलना-जुलना भी बंद कर दिया था.
बीमारी के कारण पूरी तरह टूट गए
हनी सिंह ने बताया कि इस बीमारी के दौरान उनकी हालत इतनी खराब हो गई थी कि उन्हें लोगों से मिलने में भी डर लगने लगा था. वह अपने कमरे से बाहर नहीं निकलते थे और कई महीनों तक बाल-दाढ़ी भी नहीं कटवाई. जो कलाकार हजारों लोगों के सामने स्टेज पर परफॉर्म करता था, वही व्यक्ति कुछ लोगों के सामने आने से भी डरने लगा था. इस दौरान उन्हें कई डॉक्टरों का इलाज लेना पड़ा और लंबे समय तक दवाएं भी लेनी पड़ीं.
मुश्किल समय ने फिर भगवान से जोड़ दिया
हनी सिंह ने बताया कि जिंदगी के इसी कठिन दौर ने उनके सोचने का तरीका बदल दिया. जब वे बीमारी और मानसिक तनाव से गुजर रहे थे, तब उन्हें आध्यात्मिकता का सहारा मिला. धीरे-धीरे उन्होंने भगवान में विश्वास करना शुरू किया और खास तौर पर भगवान शिव की भक्ति से उन्हें मानसिक शांति मिलने लगी. उनकी जिंदगी में यह बदलाव इतना बड़ा था कि उन्होंने कई बार कहा कि स्पिरिचुअलिटी ने उन्हें दोबारा खड़ा होने की ताकत दी.
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विदेश मंत्री एस. जयशंकर आज बेल्जियम के दौरे पर जाएंगे, ईयू के साथ संबंध मजबूत करने पर होगी चर्चा
नई दिल्ली, 15 मार्च (आईएएनएस)। भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर रविवार को बेल्जियम की अपनी यात्रा पर जाएंगे। विदेश मंत्रालय की ओर से साझा जानकारी के अनुसार बेल्जियम की यात्रा पर वे यूरोपीय संघ (ईयू) विदेश मामलों की परिषद में भाग लेंगे और यूरोपीय संघ के नेतृत्व और बेल्जियम के समकक्षों के साथ द्विपक्षीय बैठकों में भाग लेंगे।
विदेश मंत्री एस जयशंकर दो दिवसीय दौरे पर बेल्जियम पहुंच रहे हैं। 16 मार्च तक वह ब्रसेल्स में ही रहेंगे। उन्हें ईयू की उच्च प्रतिनिधि और उपाध्यक्ष काजा कैलास ने निमंत्रण दिया था।
विदेश मंत्रालय की ओर से साझा जानकारी के अनुसार, डॉ. जयशंकर का ये दौरा 16वें इंडिया-ईयू समिट के तुरंत बाद हो रहा है। इस दौरे का मकसद हाल की बातचीत को आगे बढ़ाते हुए रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करना है।
इस दौरे के दौरान, विदेश मंत्री यूरोपीय यूनियन के नेतृत्व और बेल्जियम और दूसरे ईयू सदस्य देशों के अपने समकक्षों के साथ भी मुलाकात करेंगे।
भारत-ईयू के संबंध 2026 में ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंच गए हैं। इस साल की शुरुआत में दोनों देशों के बीच लंबे समय से चली आ रही रणनीतिक साझेदारी आर्थिक और भू-राजनीतिक तालमेल में बदल गई है। दोनों पक्षों ने व्यापार, सुरक्षा, तकनीक, सतत विकास और वैश्विक मुद्दों पर संबंधों को मजबूत किया है।
बता दें, जनवरी 2026 में भारत और यूरोपीय संघ के बीच ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता हुआ। ईयू और भारत के बीच ये समझौता तब हुआ, जब अमेरिका टैरिफ का दबाव बनाकर सभी देशों के साथ अपनी शर्तों पर व्यापार करना चाहता था।
भारत और यूरोपीय संघ ने व्यापार समझौते पर बातचीत शुरू करने का पहला प्रयास 2007 में किया था। शुल्क, बाजार पहुंच और नियमों को लेकर बातचीत कई वर्षों तक ठप रही। बातचीत 2021 में फिर से शुरू हुई। समझौते का पूरा प्रभाव सामने आने में समय लगेगा। हालांकि, वाशिंगटन से आ रही प्रतिक्रियाओं से अंदाजा लगाया जा सकता है कि जैसे-जैसे मुक्त व्यापार के साझेदार आगे बढ़ेंगे, अमेरिका को अपनी व्यापार रणनीति पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता पड़ सकती है।
--आईएएनएस
केके/एएस
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