How to grow bay leaf plant: घर में आसानी से उगाएं तेजपत्ता, सही प्लांटेशन और देखभाल से सालों तक मिलेगा ताजा मसाला
How to grow bay leaf plant: भारतीय रसोई में तेजपत्ता एक ऐसा मसाला है, जो दाल, सब्जी, पुलाव और कई खास व्यंजनों का स्वाद और खुशबू बढ़ा देता है। ज्यादातर लोग इसे बाजार से खरीदते हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि तेजपत्ता का पौधा घर की बालकनी, छत या किचन गार्डन में भी आसानी से उगाया जा सकता है। थोड़ी-सी देखभाल के साथ यह पौधा कई वर्षों तक ताजी पत्तियां देता रहता है।
अगर आप ऑर्गेनिक गार्डनिंग के शौकीन हैं और घर में ही जरूरी मसाले उगाना चाहते हैं, तो तेजपत्ता का पौधा आपके लिए बेहतरीन विकल्प हो सकता है। सही मिट्टी, पर्याप्त धूप और नियमित देखभाल के जरिए इसे आसानी से तैयार किया जा सकता है। आइए जानते हैं तेजपत्ता लगाने और उसकी देखभाल का सही तरीका।
कैसे करें तेजपत्ता की प्लांटेशन?
तेजपत्ता का पौधा बीज या नर्सरी से खरीदे गए छोटे पौधे दोनों से लगाया जा सकता है। हालांकि, जल्दी और बेहतर ग्रोथ के लिए नर्सरी का पौधा अधिक उपयुक्त माना जाता है। पौधा लगाने के लिए कम से कम 12 से 16 इंच का गमला चुनें, ताकि जड़ों को फैलने के लिए पर्याप्त जगह मिल सके।
मिट्टी कैसी होनी चाहिए?
तेजपत्ता के पौधे के लिए अच्छी जल निकासी वाली उपजाऊ मिट्टी सबसे बेहतर रहती है। इसके लिए 40% गार्डन सॉइल, 30% गोबर की सड़ी हुई खाद या कम्पोस्ट, 20% रेत और 10% कोकोपीट मिलाकर मिश्रण तैयार करें। इससे जड़ों को पर्याप्त पोषण और हवा मिलती है तथा पानी जमा नहीं होता।
धूप और पानी का रखें सही संतुलन
तेजपत्ता का पौधा रोजाना 5 से 6 घंटे की हल्की से मध्यम धूप में अच्छी तरह बढ़ता है। गर्मियों में दोपहर की तेज धूप से बचाना बेहतर होता है। पानी तभी दें जब मिट्टी की ऊपरी परत सूखी महसूस हो। जरूरत से ज्यादा पानी देने पर जड़ें सड़ सकती हैं।
खाद और देखभाल कैसे करें?
हर 30 से 40 दिन में पौधे में जैविक खाद या वर्मीकम्पोस्ट डालें। समय-समय पर सूखी और पीली पत्तियों की छंटाई करते रहें, ताकि नई शाखाएं तेजी से निकल सकें। यदि पौधे पर कीड़े दिखाई दें तो नीम के तेल का स्प्रे करें। यह प्राकृतिक तरीका पौधे को सुरक्षित रखने में मदद करता है।
कब तैयार होंगी पत्तियां?
यदि पौधे की सही देखभाल की जाए तो लगभग 12 से 18 महीने में इसकी पत्तियों का उपयोग शुरू किया जा सकता है। पूरी तरह विकसित पत्तियों को तोड़कर छाया में सुखा लें और एयरटाइट डिब्बे में स्टोर करें। इससे लंबे समय तक उनकी खुशबू और स्वाद बना रहता है।
घर में तेजपत्ता उगाने के फायदे
- हमेशा ताजा और ऑर्गेनिक तेजपत्ता उपलब्ध रहता है।
- बाजार से बार-बार खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती।
- किचन गार्डन की सुंदरता बढ़ती है।
- रसोई में इस्तेमाल होने वाला महत्वपूर्ण मसाला घर पर ही मिलता है।
- सही देखभाल करने पर पौधा कई वर्षों तक पत्तियां देता रहता है।
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लेखक: (कीर्ति)
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रात में बार-बार यूरिन के लिए उठना पड़ता है?: शरीर दे रहा है खतरे का अलार्म, इन 5 गंभीर बीमारियों का हो सकता है संकेत
Frequent Urination at Night: रात में एक-दो बार पेशाब के लिए उठना कई बार सामान्य माना जाता है, लेकिन अगर यह समस्या रोजाना होने लगे और आपकी नींद बार-बार टूटने लगे तो इसे नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। मेडिकल भाषा में इसे नोक्ट्यूरिया कहा जाता है। यह सिर्फ बढ़ती उम्र की समस्या नहीं, बल्कि शरीर में छिपी कई गंभीर बीमारियों का शुरुआती संकेत भी हो सकती है।
अगर रात में बार-बार यूरिन आने के साथ ज्यादा प्यास लगना, पैरों में सूजन, पेशाब में जलन, कमजोरी या अचानक वजन कम होना जैसे लक्षण भी दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। समय रहते कारण का पता चल जाए तो कई गंभीर बीमारियों का इलाज शुरुआती चरण में ही संभव हो सकता है।
इन गंभीर बीमारियों की हो सकती है शुरुआत
डायबिटीज
बार-बार पेशाब आना डायबिटीज का सबसे आम शुरुआती लक्षण माना जाता है। जब ब्लड शुगर का स्तर बढ़ जाता है तो शरीर अतिरिक्त ग्लूकोज को पेशाब के जरिए बाहर निकालने की कोशिश करता है। इसके कारण रात में कई बार बाथरूम जाना पड़ सकता है। यदि इसके साथ अधिक प्यास लगना, भूख बढ़ना और वजन कम होना जैसे लक्षण भी हों तो तुरंत ब्लड शुगर की जांच करवानी चाहिए।
किडनी से जुड़ी बीमारी
किडनी शरीर से अतिरिक्त पानी और विषैले पदार्थों को बाहर निकालने का काम करती है। यदि किडनी ठीक से काम नहीं कर रही हो तो पेशाब का पैटर्न बदल सकता है। रात में बार-बार पेशाब आना, पैरों में सूजन, थकान और हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्याएं किडनी रोग का संकेत हो सकती हैं। समय पर जांच से किडनी डैमेज को बढ़ने से रोका जा सकता है।
प्रोस्टेट ग्रंथि का बढ़ना (पुरुषों में)
50 वर्ष से अधिक उम्र के पुरुषों में प्रोस्टेट ग्रंथि का बढ़ना एक सामान्य लेकिन गंभीर कारण हो सकता है। बढ़ी हुई प्रोस्टेट यूरिन ब्लैडर पर दबाव डालती है, जिससे बार-बार पेशाब की इच्छा होती है। यदि पेशाब शुरू करने में कठिनाई, कमजोर धार या पेशाब के बाद भी ब्लैडर पूरी तरह खाली न होने का एहसास हो तो यूरोलॉजिस्ट से सलाह लेना जरूरी है।
मूत्र मार्ग संक्रमण
यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन यानी UTI के कारण भी रात में बार-बार पेशाब आ सकता है। इसके साथ पेशाब करते समय जलन, बदबू, दर्द या हल्का बुखार भी हो सकता है। महिलाओं में यह समस्या पुरुषों की तुलना में अधिक देखने को मिलती है। संक्रमण का समय पर इलाज न होने पर यह किडनी तक भी पहुंच सकता है।
हार्ट फेलियर या हृदय संबंधी समस्या
दिल की कार्यक्षमता कम होने पर दिनभर पैरों में जमा अतिरिक्त तरल पदार्थ रात में लेटने के बाद रक्त प्रवाह में वापस आता है। किडनी इस अतिरिक्त तरल को पेशाब के रूप में बाहर निकालती है, जिससे रात में बार-बार यूरिन आने लगता है। यदि इसके साथ सांस फूलना, पैरों में सूजन या जल्दी थकान महसूस हो तो तुरंत हृदय रोग विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए।
कब डॉक्टर से जरूर मिलें?
- रात में दो से अधिक बार नियमित रूप से पेशाब के लिए उठना।
- पेशाब में जलन, खून या तेज दर्द होना।
- अत्यधिक प्यास और अचानक वजन कम होना।
- पैरों में सूजन या सांस लेने में तकलीफ।
- कई सप्ताह तक समस्या लगातार बनी रहना।
बचाव के आसान उपाय
- सोने से 2-3 घंटे पहले अधिक तरल पदार्थ पीने से बचें।
- कैफीन और शराब का सेवन सीमित करें।
- ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखें।
- नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं।
- किसी भी दवा का सेवन डॉक्टर की सलाह के अनुसार करें।
(Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई सामग्री सिर्फ जानकारी के लिए है। हरिभूमि इनकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी सलाह या सुझाव को अमल में लेने से पहले किसी विशेषज्ञ/डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।)
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