भगवान शिव के गले में नाग क्यों रहता है? जानिए वासुकी नाग और भोलेनाथ की पौराणिक कथा
Lord Shiva and Vasuki snake story: हिन्दू पौराणिक कथाओं और शिव पुराण के अनुसार, भगवान शिव के शरीर पर कई ऐसी चीजें हैं जो उन्हें अन्य देवताओं से अलग बनाती हैं, और उनमें से सबसे प्रमुख है उनके गले में लिपटा हुआ नाग। भोलेनाथ के गले में हमेशा नागराज वासुकी निवास करते हैं। क्या आप जानते हैं कि वासुकी नाग भगवान शिव के गले का हार कैसे बने? इसके पीछे समुद्र मंथन से जुड़ी एक बेहद दिलचस्प और प्रेरणादायक कथा है।
समुद्र मंथन में वासुकी नाग का योगदान
जब देवताओं और असुरों के बीच क्षीरसागर का समुद्र मंथन हो रहा था, तब मंथन के लिए रस्सी की आवश्यकता पड़ी थी। उस समय नागों के राजा वासुकी ने ही आगे आकर खुद को मंदराचल पर्वत के चारों ओर लपेटने के लिए तैयार किया था, ताकि मंथन सुचारू रूप से हो सके। वासुकी नाग ने मंथन के दौरान अपनी रगड़ और खिंचाव से होने वाली भयंकर पीड़ा को सहन किया।
उनकी इस निष्ठा, सेवा और समर्पण को देखकर भगवान शिव अत्यंत प्रसन्न हुए। मंथन के अंत में जब सभी को उनका भाग मिला, तो भोलेनाथ ने वासुकी नाग को अपने गले का हार बनाकर हमेशा के लिए अपने पास स्थान दे दिया। तभी से वासुकी नाग भगवान शिव के सबसे प्रिय गणों और आभूषणों में गिने जाते हैं।
गले में नाग होने का आध्यात्मिक और वैज्ञानिक रहस्य
धार्मिक और दार्शनिक दृष्टिकोण से देखें तो भगवान शिव के गले में सांप का होना बहुत बड़ा संदेश देता है। सांप को एक बहुत ही खतरनाक और क्रोधी जीव माना जाता है, लेकिन जब वह मृत्यु के देवता और महायोगी शिव के संपर्क में आता है, तो वह पूरी तरह शांत हो जाता है।
यह इस बात का प्रतीक है कि जो व्यक्ति भगवान की शरण में आ जाता है और जिसके मन में संयम व शांति होती है, उसके सारे भय और क्रोध समाप्त हो जाते हैं। इसके अलावा, वैज्ञानिक नजरिए से भी सर्प ऊर्जा और संतुलन का प्रतीक है, जो योग साधना में विशेष महत्व रखता है।
डिस्क्लेमर (Disclaimer): इस लेख में दी गई कथा पौराणिक ग्रंथों और सनातन संस्कृति की मान्यताओं पर आधारित है। इसका उद्देश्य पाठकों तक धार्मिक कथाओं और उनके आध्यात्मिक अर्थों की जानकारी पहुंचाना है।
Sawan First Somwar 2026: सावन का पहला सोमवार कल, इस विधि से करें शिवलिंग का अभिषेक; महादेव की बरसेगी विशेष कृपा
Sawan First Somwar 2026: सावन का पहला सोमवार 3 अगस्त 2026 को पड़ रहा है। भगवान शिव की आराधना के लिए यह दिन बेहद शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से शिवलिंग का अभिषेक करने पर महादेव प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं। यही वजह है कि सावन सोमवार के दिन देशभर के शिव मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है।
ऐसे करें शिवलिंग का अभिषेक
सावन सोमवार की सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थल की साफ-सफाई करें। यदि घर में शिवलिंग स्थापित है, तो सबसे पहले भगवान शिव का ध्यान करते हुए पूजा का संकल्प लें।
इसके बाद इस क्रम से पूजा करें
- सबसे पहले शिवलिंग को शुद्ध जल से स्नान कराएं।
- चाहें तो जल में गंगाजल मिलाकर जलाभिषेक करें।
- इसके बाद दूध से अभिषेक करें।
- फिर दोबारा साफ जल से शिवलिंग का स्नान कराएं।
- अब बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल और सफेद पुष्प अर्पित करें।
- इसके बाद चंदन, अक्षत और पुष्प चढ़ाएं।
- अंत में धूप-दीप जलाकर भगवान शिव की आरती करें।
अभिषेक के समय करें इन मंत्रों का जाप
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अभिषेक के दौरान मंत्र जाप करना शुभ माना जाता है। आप श्रद्धा के अनुसार, ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करें। महामृत्युंजय मंत्र का भी श्रद्धापूर्वक जप किया जा सकता है।
शिवलिंग पर क्या चढ़ाना शुभ माना जाता है?
सावन सोमवार के दिन भगवान शिव को ये पूजन सामग्री अर्पित की जा सकती है—
शुद्ध जल
गंगाजल
दूध
बेलपत्र (साफ और साबुत)
धतूरा
आक के फूल
सफेद फूल
चंदन
अक्षत
धूप और दीप
सावन के सभी सोमवार की तारीखें
- पहला सोमवार: 3 अगस्त 2026
- दूसरा सोमवार: 10 अगस्त 2026
- तीसरा सोमवार: 17 अगस्त 2026
- चौथा सोमवार: 24 अगस्त 2026
नोट: यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित है। अलग-अलग परंपराओं और क्षेत्रों में पूजा-विधि में कुछ भिन्नता हो सकती है।
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