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नेपाल के मशहूर पर्वतारोही निर्मल पुर्जा की गिलगित-बाल्टिस्तान में मौत:8 हजार मीटर ऊंची ब्रॉड पीक पर चढ़ रहे थे, हिमस्खलन में गई जान

मशहूर पर्वतारोही निर्मल पुर्जा की पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान में हिमस्खलन की चपेट में आने से मौत हो गई। उनकी ही पर्वतारोहण कंपनी एलीट एक्सपेडिशन ने इसकी पुष्टि की है। निर्मल 30 जुलाई को काराकोरम इलाके में 8,051 मीटर ऊंची ब्रॉड पीक पर चढ़ाई कर रहे थे। इस दौरान करीब 7,000 मीटर की ऊंचाई पर यह हादसा हुआ। इसमें निर्मल समेत 10 पर्वतारोही लापता हो गए थे। इनमें छह नेपाली थे। पुर्जा ने 2012 में ब्रिटिश नागरिकता ले ली थी, जिसके बाद उनकी नेपाली नागरिकता खत्म हो गई थी। मैप से समझिए हादसे की लोकेशन… 6 महीने में 14 सबसे ऊंची चोटियां फतह कीं तीसरी बार ब्रॉड पीक की चढ़ाई में जान गई ब्रिटिश स्पेशल फोर्स जॉइन करने वाले पहले नेपाली निर्मल पुर्जा का जन्म 25 जुलाई 1983 को नेपाल के म्याग्दी जिले के दाना गांव में हुआ था। उनके परिवार का सेना से गहरा नाता रहा है। कई पीढ़ियों से परिवार के लोग गोरखा रेजिमेंट में सेवा करते रहे। उनके पिता और तीन बड़े भाई भी गोरखा सैनिक थे। ऐसे माहौल में पले-बढ़े निर्मल ने भी बचपन से ही सैनिक बनने का सपना देखा। बाद में उन्होंने इसी परंपरा को आगे बढ़ाया और ब्रिटिश सेना की गोरखा रेजिमेंट में भर्ती हो गए। करीब छह साल तक गोरखा सैनिक के रूप में सेवा देने के बाद उन्होंने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की। वे ब्रिटिश रॉयल नेवी की स्पेशल बोट सर्विस (SBS) में शामिल होने वाले पहले नेपाली बने। SBS ब्रिटेन की नौसेना की सबसे खतरनाक और प्रतिष्ठित स्पेशल फोर्स है। इसके सैनिक समुद्र, पहाड़, जंगल और दुश्मन के इलाके में सीक्रेट ऑपरेशन चलाने के लिए ट्रेंड होते हैं। इसमें चयन इतना मुश्किल है कि बहुत कम सैनिक इसे पूरा कर पाते हैं। सपने को पूरा करने के लिए नौकरी छोड़ दी सेना में रहते हुए निर्मल पुर्जा ने अत्यधिक ठंडे और मुश्किल इलाकों में कई स्पेशल ऑपरेशन में हिस्सा लिया। इसी दौरान उनके मन में दुनिया की सबसे ऊंची चोटियों को फतह करने का ख्याल आया साल 2012 में निर्मल पुर्जा पहली बार एवरेस्ट बेस कैंप ट्रेक पर गए थे। उस समय वे सेना में थे तभी उनके मन में एवरेस्ट की चोटी पर चढ़ने का ख्याल आया। इसके लिए उन्होंने ट्रेनिंग शुरू की। करीब दो साल की मेहनत के बाद 2014 में उन्होंने पहली बार माउंट एवरेस्ट फतह किया। इसके बाद उन्होंने दुनिया की 8,000 मीटर से ऊंची सभी चोटियों पर चढ़ने का लक्ष्य बना लिया। अपने इस सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने 2018 में नौकरी छोड़ दी और पूरी तरह पर्वतारोहण पर फोकस किया। इसमें सबसे बड़ी चुनौती पैसों की थी। खर्च जुटाने के लिए उन्होंने अपना घर तक बेच दिया, ताकि दुनिया की सबसे ऊंची चोटियों पर चढ़ने का सपना पूरा कर सकें। नेटफ्लिक्स की डॉक्यूमेंट्री से दुनियाभर में मिली पहचान 2019 में छह महीने और छह दिन में दुनिया की 14 सबसे ऊंची चोटियां फतह करने के बाद निर्मल पुर्जा की कहानी पूरी दुनिया तक पहुंची। उनके इस रिकॉर्ड अभियान पर नेटफ्लिक्स ने '14 पीक्स: नथिंग इज इम्पॉसिबल' नाम से डॉक्यूमेंट्री बनाई। इस डॉक्यूमेंट्री में दिखाया गया कि कैसे निर्मल पुर्जा और उनकी नेपाली टीम ने बेहद कम समय में दुनिया की सबसे कठिन चोटियों को फतह किया। इसमें उनके सामने आई खराब मौसम की चुनौतियां, मौत का खतरा, ऑक्सीजन की कमी और कई जानलेवा हालात भी दिखाए गए हैं। डॉक्यूमेंट्री रिलीज होने के बाद इसे 191 देशों में देखा गया। इसके जरिए नेपाली पर्वतारोहियों के योगदान पर पूरी दुनिया का ध्यान गया। इससे पहले पर्वतारोहण की बड़ी उपलब्धियों में अक्सर विदेशी पर्वतारोहियों की चर्चा होती थी, जबकि नेपाली शेरपाओं और पर्वतारोहियों की भूमिका उतनी सामने नहीं आ पाती थी। इसके बाद 2020 में निर्मल पुर्जा ने 'बियॉन्ड पॉसिबल' नाम से अपनी आत्मकथा भी प्रकाशित की। इस किताब में उन्होंने अपने बचपन, सैन्य जीवन, पर्वतारोहण की शुरुआत, 'प्रोजेक्ट पॉसिबल' और विश्व रिकॉर्ड बनाने तक के पूरे सफर को विस्तार से बताया है। रिकॉर्ड की परवाह किए बिना पर्वतारोही का रेस्क्यू किया निर्मल पुर्जा ने प्रोजेक्ट पॉसिबल के तहत अन्नपूर्णा-1 पर सफल चढ़ाई की। लौटे तो पता चला कि मलेशिया के डॉ. वुई किन चिन अन्नपूर्णा पर करीब 7500 फीट की ऊंचाई पर फंसे हुए हैं। पुर्जा रिकॉर्ड की परवाह किए बगैर हेलिकॉप्टर से ऊंचाई वाले कैंप तक पहुंचे। रेस्क्यू शुरू किया। उनकी टीम करीब 4 घंटे में डॉ. चिन तक पहुंच गई। सामान्य रूप से यह दूरी करीब 16 घंटे में पूरी होती है। डॉ. चिन को नीचे लाया गया, हालांकि बाद में सिंगापुर के अस्पताल में उनकी मौत हो गई।

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Bathroom Drain से आने वाली दुर्गंध होगी खत्म, आजमाएं यह Vinegar Cleaning Trick और पाएं केमिकल फ्री पाइप मेंटेनेंस

घर की साफ-सफाई के दौरान सफेद सिरका ऑल इन वन क्लीनर के रूप में काम करता है। सफेद सिरका में मौजूद नेचुरल एसिड और एंटी बैक्टीरियल गुण इसको कीटाणुनाशक और बदबू को दूर करने का बेहतरीन तरीका होता है। आजकल बाथरूम की नाली में सिरका छिड़कने की ट्रिक काफी चर्चा में है। जिसके बारे में काफी कम लोगों को पता है। बता दें कि अक्सर शॉवर ड्रेन में बालों का जमाव, ग्रीस, साबुन के झाग और नमी के कारण गंदगी जमा हो जाती है।

इस वजह से बाथरूम की नालियों से गंदी बदबू आने लगती है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि बाथरूम की नाली को साफ करने के लिए आपको इस ट्रिक का कैसे इस्तेमाल करना चाहिए।

शॉवर ड्रेन में विनेगर डालने का तरीका

ड्रेन की जाली पर जमा बड़ा कचरा या बालों को हाथों से हटाएं।

फिर एक कप या स्प्रे बोतल में सिरका लेकर सीधे नाली में डालें।

इसके बाद 20 से 30 मिनट के लिए ऐसे ही छोड़ दें। जिससे कि यह गंदगी पर अपना असर छोड़ सके।

अब नाली में गरम खौलता हुआ पानी डालकर बहाएं। इससे ढीली हुई गंदगी आसानी से बह जाएगी।

कब और कितना करें इस्तेमाल

इस नुस्खे का लाभ उठाने के लिए आपका सप्ताह में एक बार इस क्लीनिंग रूटीन को शामिल करें। नाले को साफ और स्मेल मुक्त रखने के लिए सप्ताह में एक बार या फिर 15 दिन में एक बार इस तरीके को अपना सकती हैं। वहीं अगर नाली में गंदगी ज्यादा है, तो सिरका डालने से पहले नाली में 2 से 3 चम्मच बेकिंग सोडा डालें। बेकिंग सोडा और सिरके का रिएक्शन जिद्दी से जिद्दी कचरे को आसानी से साफ कर देता है।

साबुन और मिनरल डिपॉजिट्स

रोजाना नहाने के समय बॉडी वॉश, साबुन का झाग और पानी में मौजूद मिनरल्स अक्सर नाले के दीवारों पर चिपक जाते हैं और एक सख्त परत बना देते हैं। लेकिन सफेद सिरके में एसिडिक गुण मौजूद होते हैं। यह जिद्दी परत और ग्रीस को धीरे-धीरे घोलकर ढीला कर देते हैं। इससे नाली के अंदर का रास्ता साफ हो जाता है।

नाले से आने वाली बदबू

हर वक्त बाथरूम ड्रेन में नमी और ऑर्गेनिक कचरा जमा रहता है। यह बैक्टीरिया पनपने और दुर्गंध की मुख्य वजह होता है। विनेगर नेचुरल रूप से नाले से आने वाली गंध को बेअसर करता है। जब आप इसमें विनेगर को स्प्रे करते हैं। तो बदबू पैदा करने वाले बैक्टीरिया खत्म होते हैं और बाथरूम की हवा फ्रेश होती है।

ब्लॉक होने से बचाना

अचानक से शॉवर ड्रेन में बड़ा ब्लॉक बड़ी सिरदर्दी की वजह बन सकती है। ऐसे में नियमित रूप से आप विनेगर का इस्तेमाल कर सकते हैं। यह छोटी-मोटी गंदगी और कचरे को नहीं जमने देता है। विनेगर एक प्रिवेंटिव मेंटेनेंस है। जिससे नाली में बिना रुकावट पानी का बहाव होता रहता है और ड्रेन जाम की समस्या नहीं होती है।

हार्श केमिकल ड्रेन क्लीनर्स

बाथरूम की नाली को साफ करने के लिए मार्केट में मिलने वाले केमिकल हार्श एसिड और टॉक्सिक पदार्थों से बने होते हैं। यह आपकी सांस और सेहत दोनों के लिए नुकसानदाय है। वहीं यह प्लंबिंग पाइपों को भी अंदर से नुकसान पहुंचा सकते हैं। लेकिन सिरका एक नेचुरल, इको-फ्रेंडली और सेफ ऑप्शन है। यह पाइपों को नुकसान पहुंचाए बिना सफाई करता है।

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भारत-श्रीलंका टेस्ट मैच स्टेडियम में देखना है? टिकट में पैसे नहीं करने होंगे खर्च, फैंस को मिला खास तोहफा

IND vs SL Tests Free Entry in Stadium: भारत और श्रीलंका के बीच 15 अगस्त से शुरू होने वाली दो टेस्ट मैचों की सीरीज को लेकर श्रीलंका क्रिकेट ने क्रिकेट प्रेमियों के लिए बड़ा तोहफा दिया है. बोर्ड ने ऐलान किया है कि गॉल और कोलंबो में खेले जाने वाले दोनों टेस्ट मैचों में दर्शकों की एंट्री पूरी तरह मुफ्त होगी. वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप का हिस्सा इस सीरीज में बड़ी संख्या में फैंस स्टेडियम पहुंचें, इसी मकसद से श्रीलंका क्रिकेट ने यह फैसला लिया है. 15 अगस्त से गॉल में पहला टेस्ट और 23 अगस्त से कोलंबो में दूसरा टेस्ट खेला जाएगा. Fri, 7 Aug 2026 19:51:56 +0530

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