जंतर-मंतर पर विरोध-प्रदर्शन संबंधी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, केंद्र और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी
राजधानी दिल्ली स्थित जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शनों की व्यवस्था को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर रुख अपनाया है। सोमवार को दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया। अदालत ने माना कि यह ऐसा मुद्दा है, जिस पर विस्तार से विचार किए जाने की आवश्यकता है।
याचिका में कहा गया है कि जंतर-मंतर लंबे समय से विरोध-प्रदर्शनों का प्रमुख स्थल रहा है, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में वहां लगातार होने वाले धरना-प्रदर्शनों से आम नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। प्रदर्शन के दौरान सड़क यातायात प्रभावित होता है जिससे अस्पतालों तक पहुंचने वाले मरीजों, एंबुलेंस और अन्य आवश्यक सेवाओं की आवाजाही पर भी असर पड़ता है। ऐसे में प्रदर्शन के लिए वैकल्पिक व्यवस्था या नई नीति बनाने की आवश्यकता है।
जंतर मंतर पर विरोध प्रदर्शनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया। याचिका में कहा गया है कि राजधानी का जंतर-मंतर अब विरोध प्रदर्शनों के लिए उपयुक्त स्थान नहीं रह गया है। सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मुद्दे को महत्वपूर्ण माना है।
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि याचिका में उठाए गए मुद्दे सिर्फ प्रदर्शन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इससे सार्वजनिक व्यवस्था और आवश्यक सेवाओं की उपलब्धता भी जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि प्रथम दृष्टया यह महत्वपूर्ण विषय है। अदालत ने केंद्र सरकार से इस संबंध में निर्देश लेकर जवाब दाखिल करने को कहा और मामले को अलग से सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।
याचिकाकर्ता सतीश चंद कौशिक की ओर से दायर इस PIL में कहा गया है कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शनों के दौरान आम लोगों की आवाजाही प्रभावित होती है। साथ ही मेडिकल जरूरी सामान, दवाओं और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति में बाधा आती है। याचिका में वैकल्पिक प्रदर्शन स्थल की व्यवस्था करने की मांग की गई है।
कानून व्यवस्था पर भी बात हुई
सुनवाई के दौरान एक वकील ने अदालत को बताया कि एक राजनीतिक दल की ओर से टाउनहॉल बैठक और प्रधानमंत्री आवास तक मार्च निकालने की घोषणा की गई है। उन्होंने आशंका जताई कि हाल की तरह दोबारा तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो सकती है। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना संबंधित एजेंसियों की जिम्मेदारी है और उन्हें विश्वास है कि प्रशासन स्थिति को संभाल लेगा। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि बाद में कोई गंभीर समस्या उत्पन्न होती है, तो संबंधित पक्ष अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं।
जंतर-मंतर हाल के दिनों में विभिन्न छात्र और सामाजिक संगठनों के प्रदर्शनों का केंद्र रहा है। हालिया प्रदर्शनों के दौरान पुलिस कार्रवाई, बल प्रयोग और प्रदर्शनकारियों के अधिकारों से जुड़े कई मामले सुप्रीम कोर्ट के समक्ष लंबित हैं। ऐसे माहौल में जंतर-मंतर पर विरोध-प्रदर्शनों की व्यवस्था और उसके प्रभाव को लेकर दायर यह नई याचिका अहम मानी जा रही है।
जरूरत की खबर- बारिश में कपड़ों से आती स्मेल:हो सकती है स्किन एलर्जी, एक्सपर्ट से जानें- बैड स्मेल कैसे भगाएं, कपड़े कैसे रखें फ्रेश
बारिश के मौसम में कपड़े ठीक से नहीं सूखते हैं। धूप की कमी और हवा में ज्यादा नमी की वजह से कपड़ों से अजीब स्मेल आने लगती है। कई बार अलमारी में रखे कपड़ों से भी सीलन की स्मेल आती है। दरअसल, बारिश के मौसम में बढ़ी हुई नमी बैक्टीरिया और फंगस के पनपने के लिए अनुकूल माहौल बनाती है। ऐसे में अगर कपड़ों को सही तरीके से सुखाया और स्टोर न किया जाए तो उनमें स्मेल और फफूंदी की समस्या बढ़ सकती है। लंबे समय तक ऐसे कपड़े पहनने से फंगल इन्फेक्शन का रिस्क बढ़ जाता है। इसलिए आज 'जरूरत की खबर' में बारिश में कपड़ों को फ्रेश रखने के आसान तरीके बताएंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट: डॉ. विजय सिंघल, सीनियर कंसल्टेंट, डर्मेटोलॉजी, श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट, दिल्ली सवाल- बारिश में कपड़ों से स्मेल क्यों आने लगती है? जवाब- बरसात में कपड़े देर से सूखते हैं और यही देरी स्मेल की बड़ी वजह बनती है। जब कपड़े लंबे समय तक नम रहते हैं तो उनमें बैक्टीरिया और फंगस पनपने लगते हैं। कपड़ों में स्मेल के सभी कारण ग्राफिक में देखिए- अब इसे थोड़ा विस्तार से समझिए- नमी और बैक्टीरिया पनपना फंगस पनपना डिटर्जेंट या गंदगी का अवशेष देर से सुखाना/वॉशिंग मशीन में छोड़ देना सवाल- कितनी देर तक कपड़े गीले रहने पर स्मेल आने लगती है? जवाब- इसका कोई फिक्स टाइम नहीं है। यह कपड़ों में कितनी देर तक नमी बनी हुई है, उस पर निर्भर करता है। आमतौर पर 6-8 घंटे के अंदर कपड़ों से स्मेल आने लगती है। सवाल- कौन से फैब्रिक से ज्यादा स्मेल आती है? जवाब- यह फैब्रिक के केमिकल स्ट्रक्चर और उसकी 'मॉइश्चर होल्ड करने की क्षमता' पर निर्भर करता है। ग्राफिक में देखिए किन फैब्रिक्स से ज्यादा स्मेल आती है- सवाल- क्या गीले कपड़े पहनने से फंगल इन्फेक्शन हो सकता है? जवाब- हां, गीले कपड़े पहनने से स्किन पर लंबे समय तक नमी बनी रहती है। यह फंगस के पनपने के लिए अनुकूल माहौल बनाती है। लगातार गीलापन स्किन की बाहरी प्रोटेक्टिव लेयर को कमजोर कर सकता है। इससे दाद, खुजली समेत कई फंगल इन्फेक्शन का रिस्क बढ़ जाता है। ग्राफिक में देखिए- सवाल- गीले कपड़े पहनना किनके लिए ज्यादा रिस्की है? जवाब- गीले या नम कपड़े पहनने से किसी को भी फंगल इन्फेक्शन हो सकता है, लेकिन कुछ लोगों में इसका रिस्क ज्यादा होता है। ग्राफिक में देखिए- सवाल- कपड़ों की स्मेल दूर करने के असरदार घरेलू उपाय क्या हैं? जवाब- कुछ आसान घरेलू उपायों से इसे काफी हद तक रोका या कम किया जा सकता है। पॉइंटर्स में देखिए- विनेगर का इस्तेमाल बेकिंग सोडा नींबू का रस एंटीसेप्टिक लिक्विड (जैसे डिटॉल) सवाल- क्या सिर्फ परफ्यूम डालने से स्मेल खत्म हो जाती है? जवाब- नहीं, परफ्यूम बैक्टीरिया या फंगस को नहीं खत्म करता। कई बार स्मेल और परफ्यूम मिलकर अजीब व हार्ड स्मेल बना देते हैं। सवाल- धूप न होने पर कपड़े कैसे सुखाएं ताकि स्मेल न आए? जवाब- पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- बारिश में कपड़ों को फ्रेश रखने के लिए रोज क्या करें? जवाब- इसके लिए रोजमर्रा की कुछ आदतें अपनाएं- सवाल- क्या वॉशिंग मशीन भी स्मेल की वजह बन सकती है? जवाब- हां, इसके कई कारण हो सकते हैं- इससे 'सीलन' जैसी स्मेल बनने लगती है। ऐसे माहौल में कपड़े धोने से स्मेल आने लगती है। सवाल- वॉशिंग मशीन की सफाई कितने दिन में करनी चाहिए? जवाब- आमतौर पर वॉशिंग मशीन की डीप क्लीनिंग हर 15-30 दिन में करनी चाहिए। अगर डेली मशीन यूज करते हैं तो हर 2 हफ्ते में साफ करना बेहतर है। इसके अलावा रेगुलर कुछ बेसिक केयर करनी चाहिए, जैसेकि- सवाल- बारिश में कौन-सी गलतियां कपड़ों की स्मेल बढ़ा देती हैं? जवाब- बारिश में कपड़ों की देखभाल में की गई छोटी-छोटी गलतियां उनमें सीलन और स्मेल पैदा कर सकती हैं। ग्राफिक में देखिए- बारिश में सिर्फ घर ही नहीं, कपड़ों की भी खास देखभाल जरूरी होती है। सही वॉशिंग, अच्छी तरह सुखाना और सूखी जगह पर स्टोर करना कपड़ों को लंबे समय तक फ्रेश रखता है। इससे स्मेल, फफूंदी और स्किन से जुड़ी परेशानियों से भी बचाव होता है। ………………… जरूरत की ये खबर भी पढ़िए जरूरत की खबर- मानसून में बढ़ते फूड पॉइजनिंग के केस: ये 7 लक्षण इग्नोर न करें, बचाव के लिए 12 सावधानियां, बता रहे हैं डॉक्टर ‘फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया’ (FSSAI) के मुताबिक, मानसून के दौरान ई.कोली और सल्मोनेला जैसे बैक्टीरिया तेजी से फैलते हैं। बढ़ी हुई नमी, जलभराव और दूषित भोजन-पानी इसके मुख्य कारण हैं। इस कारण फूड पॉइजनिंग, डायरिया और हैजा के मामले बढ़ जाते हैं। पूरी खबर पढ़िए…
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
Mp Breaking News








