नेपाल को भारत से 350 मेगावाट बिजली आयात की मंजूरी, बैठक में हुआ समझौता
काठमांडू, 13 मार्च (आईएएनएस)। नेपाल के पश्चिमी शहर पोखरा में भारत और नेपाल के अधिकारियों के बीच एक द्विपक्षीय तंत्र की दो-दिवसीय बैठक हुई। इस बैठक में नेपाल के लिए पड़ोसी भारतीय राज्यों बिहार, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड से 350 मेगावाट तक बिजली आयात करने का रास्ता साफ हुआ।
नेपाल बारिश के मौसम में भारत को बिजली निर्यात करता है, लेकिन सर्दियों में उसे भारत से बिजली खरीदनी पड़ती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि सर्दियों में उसके ज्यादातर रन-ऑफ-द-रिवर पनबिजली प्रोजेक्ट अपनी स्थापित क्षमता से कहीं कम बिजली पैदा करते हैं।
पावर एक्सचेंज कमेटी (पीईसी) की बैठक में बिजली खरीद दर को 1.5 प्रतिशत बढ़ाने पर सहमति बनी। पावर एक्सचेंज कमेटी (पीईसी) में नेपाल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी (एनईए) और सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी (सीईए), भारत शामिल हैं। इससे नेपाल को सर्दियों में इन तीन भारतीय राज्यों से बिजली आयात जारी रखने में मदद मिलेगी।
समझौते के अनुसार, 132 केवी ट्रांसमिशन लाइन के जरिए दी जाने वाली बिजली की खरीद दर एनपीआर 8.22 प्रति यूनिट तय की गई है। इसी तरह, 33 केवी स्तर के जरिए दी जाने वाली बिजली की दर एनपीआर 8.91 प्रति यूनिट तय की गई है, जबकि 11 केवी लाइन के जरिए खरीदी गई बिजली की दर एनपीआर 9.55 प्रति यूनिट तय की गई है। एनईए ने शुक्रवार को एक बयान में यह जानकारी दी। यह दर एक साल के लिए लागू रहेगी।
नए समझौते के बाद एनईए को उम्मीद है कि मार्च और अप्रैल के सूखे महीनों में जब नेपाल में बिजली की मांग बढ़ती है, तब भारत से बिजली की आपूर्ति सुरक्षित रहेगी।
बैठक में नेपाली प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व एनईए के प्रबंध निदेशक हितेन्द्र देव शाक्य ने किया, जबकि भारतीय पक्ष का नेतृत्व विजय कुमार सिंह ने किया।
शाक्य ने बताया कि यह बढ़ी हुई दर केवल तब लागू होगी जब नेपाल इस विशेष व्यवस्था के तहत बिजली खरीदेगा। अगर भारत के खुले बिजली बाजार (पावर एक्सचेंज) में कीमत कम रहती है, तो नेपाल वहीं से बिजली खरीदता रहेगा। लेकिन अगर वहां बिजली पर्याप्त उपलब्ध नहीं हुई, तो नेपाल पीईसी व्यवस्था के तहत 350 मेगावाट तक बिजली खरीद सकता है।
फिलहाल एनईए भारत से लगभग 12 हजार-14 हजार मेगावाट-घंटे बिजली रोज आयात कर रहा है, और सूखे मौसम में मांग बढ़ने के कारण यह मात्रा आगे बढ़ सकती है।
एनईए के अनुसार, इजरायल-ईरान संघर्ष और पश्चिम एशिया के अन्य हिस्सों में चल रहे युद्ध का क्षेत्रीय ऊर्जा बाजार पर दबाव पड़ रहा है, जिससे बिजली आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
इसलिए भारतीय पक्ष के साथ समय पर हुआ यह समझौता नेपाल में बिजली आपूर्ति को संभालने में काफी मददगार होगा।
--आईएएनएस
एवाई/एमएस
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पाकिस्तान-अफगानिस्तान में छिड़ा युद्ध, तालिबान ने सीमा पार कर पाक सैन्य ठिकानों को किया तबाह
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच पिछले कुछ महीनों से जंग की स्थिति बनी हुई है. शुक्रवार को हालात उस वक्त बेकाबू हो गए जब पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के भीतर घुसकर बमबारी की, जिसके जवाब में अब तालिबान ने भी पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों पर बड़े हमले शुरू कर दिए हैं. दोनों देशों के बीच सीमा विवाद और आतंकी ठिकानों को लेकर चल रही पुरानी खींचतान अब एक खतरनाक मोड़ पर पहुंच गई है, जिससे पूरे क्षेत्र में युद्ध का खतरा मंडराने लगा है.
पाकिस्तान की एयर स्ट्राइक और तबाही
तालिबान के मुताबिक, पाकिस्तानी सेना ने कंधार एयरपोर्ट के पास स्थित प्राइवेट एयरलाइन 'काम एयर' के फ्यूल डिपो पर जोरदार हमला किया. इसके अलावा, रात के अंधेरे में किए गए हमलों ने काबुल के रिहायशी इलाकों को भी अपना निशाना बनाया. इस गोलाबारी में चार बेगुनाह लोगों की जान चली गई और दर्जनों लोग घायल हो गए. वहीं पूर्वी नंगरहार के मोमंदरा जिले में पाकिस्तान की तरफ से दागे गए एक मोर्टार ने एक घर को तबाह कर दिया, जिसमें एक महिला और बच्चे की दर्दनाक मौत हो गई. इन हमलों ने चीन की उन कोशिशों को भी नाकाम कर दिया है, जो दोनों देशों के बीच शांति बहाल करने के लिए मध्यस्थता कर रहा था.य
तालिबान का भीषण पलटवार
पाकिस्तान की इस कार्रवाई के कुछ ही घंटों बाद अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने कड़ा जवाब दिया है. तालिबान के प्रवक्ता हमदुल्लाह फितरत ने दावा किया कि उनकी सेना ने डूरंड लाइन के पास मौजूद पाकिस्तान के कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है. तालिबान का कहना है कि यह कार्रवाई पाकिस्तान द्वारा की गई एयर स्ट्राइक का सीधा जवाब है. अफगान सेना ने पाकिस्तान के एक 'वार कमांड सेंटर' और किले के भीतर स्थित कमांड ऑफिस को निशाना बनाया है, जिससे वहां भारी नुकसान होने की खबर है.
सैन्य ठिकानों को बनाया निशाना
अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने इस जवाबी हमले की पुष्टि करते हुए इसे "काउंटरिंग इनजस्टिस" यानी अन्याय के खिलाफ प्रतिशोधी अभियान का हिस्सा बताया है. तालिबान का दावा है कि उन्होंने पाकिस्तान के हथियार गोदामों और सैनिकों के रिहायशी इलाकों को भी टारगेट किया है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में रक्षा मंत्रालय ने कहा कि अफगान वायुसेना ने पाकिस्तान के एक बेहद अहम सैन्य केंद्र पर हमला कर अपनी ताकत का अहसास कराया है. तालिबान ने साफ कर दिया है कि वह अपनी संप्रभुता के साथ कोई समझौता नहीं करेगा.
चीन की कोशिशें और वैश्विक चिंता
हैरानी की बात यह है कि जब चीन दोनों देशों को बातचीत की टेबल पर लाने की कोशिश कर रहा था, तब यह हिंसक टकराव शुरू हुआ. जानकारों का मानना है कि यह संघर्ष पिछले कई दशकों में सबसे गंभीर है. पाकिस्तान के कड़े रुख और तालिबान के पलटवार ने दक्षिण एशिया की सुरक्षा व्यवस्था को हिलाकर रख दिया है. अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस स्थिति पर बारीकी से नजर रखे हुए है, क्योंकि दो परमाणु शक्ति संपन्न देशों के पड़ोस में इस तरह का खुला युद्ध पूरी दुनिया के लिए बड़ी मुसीबत बन सकता है.
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