Diwali पर मां लक्ष्मी को करना है प्रसन्न तो इस मुहूर्त में करें पूजा, नोट करें सही समय
दीपावली पर मां लक्ष्मी की पूजा को शुभ मुहूर्त में करने का विशेष महत्व माना जाता है। इस बार दिवाली पर लक्ष्मी पूजन के लिए चार शुभ स्थिर लग्न हैं। जिनमें वृश्चिक, कुंभ, वृषभ और सिंह लग्न शामिल हैं। वहीं मां लक्ष्मी की पूजा के लिए वृषभ लग्न को विशेष शुभ बताया गया है, क्योंकि यह प्रदोष काल में पड़ता है। दीपावली की शाम प्रदोष काल में मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करना विशेष फलदायी माना जाता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको लक्ष्मी पूजा के शुभ मुहूर्त, प्रदोष काल और अमावस्या तिथि के समय के बारे में बताने जा रहे हैं।
जानिएं लक्ष्मी-गणेश पूजा का मुहूर्त
दीपावली के दिन प्रदोष काल में मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करना शुभ माना जाता है। इस बार आज यानी की 08 नवंबर को लक्ष्मी-गणेश पूजन का शुभ मुहूर्त शाम 05:54 मिनट से रात 07:50 मिनट तक है। इस दौरान भक्त विधिपूर्वक मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा कर सकते हैं। वहीं पूजा की अवधि कुल 1 घंटा 56 मिनट रहेगा। वृषभ लग्न में लक्ष्मी पूजन विशेष महत्व रखता है। इस दौरान पूजा करने से घर में धन-धान्य और सुख-समृद्धि बनी रहती है।
प्रदोष काल और वृषभ लग्न का समय
द्रिक पंचांह के मुताबिक 08 नवंबर को सूर्यास्त शाम 05:31 मिनट पर होगा। वहीं प्रदोष काल शाम 05:31 मिनट से लेकर रात 08:09 मिनट तक रहेगा। वहीं प्रदोष काल में वृषभ लग्न का भी संयोग है। इस अवधि में गृहस्थों के लिए भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की पूजा करना विशेष शुभ होगा।
अमावस्या तिथि कब से कब तक
हिंदू पंचांग के मुताबिक कार्तिक माह की अमावस्या तिथि 08 नवंबर 2026 की सुबह 11:27 मिनट से लेकर अगले दिन 09 नवंबर दोपहर 12:31 मिनट तक रहेगी। ऐसे में दीपावली का पर्व 08 नवंबर 2026 को मनाया जा रहा है।
घर में सुख समृद्धि के लिए Diwali 2026 पर Lakshmi Puja का यह है सही समय और संपूर्ण विधान
हर साल कार्तिक माह की अमावस्या तिथि को दीपावली का पर्व मनाया जाता है। इस बार 08 नवंबर 2026 को दिवाली का पर्व मनाया जा रहा है। इस खास मौके पर प्रदोष काल में मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा का विधान है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक दिवाली की रात विधिविधान से मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली आती है। मान्यता है कि विघ्नहर्ता गणेश विघ्नों को दूर करते हैं और मां लक्ष्मी अपने भक्तों को धन-वैभव का आशीर्वाद देते हैं। तो आइए जानते हैं दिवाली की तिथि, मुहूर्त, पूजन विधि और महत्व आदि के बारे में...
तिथि और मुहूर्त
द्रिक पंचांग के अनुसार, कार्तिक माह की अमावस्या तिथि की शुरूआत 08 नवंबर की सुबह 11:27 मिनट से लेकर 09 नवंबर की दोपहर 12:31 मिनट तक रहेगी। इस दिन प्रदोष काल और अमावस्या तिथि व्याप्त रहेगी। वहीं लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त 08 नवंबर को शाम 05:54 मिनट से शुरू होकर रात 07:50 मिनट तक रहेगा।
पूजन विधि
इस दिन स्वच्छ होकर और साफ कपड़े पहनकर एक चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं। अब इस पर मां लक्ष्मी और गणेश जी की मूर्ति स्थापित करें। फिर पूजा स्थल पर कलश स्थापित करें और उसमें जल भरें। फिर कलश में सुपारी, सिक्का, फूल, अक्षत और हल्दी डालें और आम के 5 पत्ते लगाएं। फिर इस पर नारियल पर तिलक करें औऱ इस पर कलावा बांधें और कलश के ऊपर रखें।
आप पूजा स्थल पर धनतेरस को खरीदा गया सामान भी रख सकते हैं। फिर लक्ष्मी-गणेश को प्रतीकात्मक स्नान कराएं। इसके बाद सरसों के तेल का एक बड़ा दीपक प्रज्वलित करें। अब भगवान गणेश को जनेऊ और मौली अर्पित करें और मां लक्ष्मी को लाल चुनरी चढ़ाएं। फिर रोली से तिलक करके अक्षत चढ़ाएं। इसके बाद फूल अर्पित करें और संभव को तो मां लक्ष्मी को कमल का पुष्प अर्पित करें और श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें।
मां लक्ष्मी को गोमती चक्र, सुपारी, कमल गट्टा, कौड़ी और हल्दी की गांठ अर्पित करें। अब देवी को सप्तधन यानी की सात तरह का अनाज चढ़ाएं। फिर पान के पत्ते पर खील-बताशे रखकर भगवान को अर्पित करें। आप मौसमी फल और पंचमेवा का भोग लगा सकती हैं। फिर श्रद्धा और सामर्थ्य अनुसार दक्षिणा अर्पित करें। अब दिवाली से जुड़ी धार्मिक कथा का पाठ करें और दो घी के दीपक और अन्य सरसों के तेल का दीपक जलाएं और मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की आरती करें। फिर सभी को प्रसाद बांटें और पूरे घर में दीपक रखें। इस तरह से आपकी पूजा संपन्न हो जाएगी।
मंत्र
ॐ गं गणपतये नमः ॥
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ॥
ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः ॥
नमस्तेस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते। शङ्खचक्रगदाहस्ते महालक्ष्मि नमोऽस्तुते ॥
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