अभिषेक बनर्जी के घर हमले पर भड़कीं ममता बनर्जी, BJP को दी खुली चुनौती
कोलकाता, सात नवंबर पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी के आवास पर हुए हमले की निंदा करते हुए शनिवार को भाजपा को उन्हें बुलडोजर से कुचलने की चुनौती दी। उन्होंने कहा कि वह ‘‘अत्याचार’’ के खिलाफ अपनी आवाज उठाती रहेंगी। ममता ने आरोप लगाया कि भाजपा समर्थित उपद्रवियों ने पुलिसकर्मियों के साथ मिलकर तड़के कालीघाट क्षेत्र में अभिषेक बनर्जी के आवास को निशाना बनाया।
भाजपा को चुनौती देते हुए ममता ने कहा, ‘‘आपके पास कितने बुलडोजर हैं? सब बुलडोजर ले आइए। मैं यहीं खड़ी हूं...अगर हिम्मत है तो आइए और मेरे शरीर पर बुलडोजर चढ़ा दीजिए।’’ ममता ने आरोप लगाया, ‘‘रात दो या तीन बजे भाजपा के गुंडे पुलिस के साथ मिलकर लोगों के घरों पर हमला कर रहे हैं।
आप गुंडों को साथ लाकर आधी रात को लोगों के घरों पर हमला क्यों कर रहे हैं?’’ उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिसकर्मी उनके कालीघाट स्थित आवास की ओर जाने वाली गली को अवरुद्ध कर रहे हैं, जिससे काली पूजा की तैयारियां प्रभावित हो रही हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर लोगों को अपने काम करने से रोका जा रहा है। ममता ने कहा, ‘‘हमारे घर में पूजा हो रही है।
काम करना है, लेकिन पुलिस गली को अवरुद्ध कर रही है। यह पाटुआपाड़ा है, जहां देवियों की मूर्तियां बनाई जाती हैं। आप लोगों को उनका काम करने से क्यों रोक रहे हैं?’’ उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य सड़क पर अलग से काली पूजा की अनुमति दी गई, जिससे उनके आवास तक पहुंचने का रास्ता बाधित हुआ और स्थानीय निवासियों को परेशानी हुई।
ममता ने कहा, ‘‘मेरे आवास के प्रवेश द्वार पर कभी कोई पूजा आयोजित नहीं की गई। मेरी पूजा हमेशा परिसर के भीतर ही होती रही है।’’ भाजपा पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए ममता ने कहा कि उसके नेता ‘लोकतंत्र बचाओ’ रैलियां कर रहे हैं, जबकि लोगों को अपने लोकतांत्रिक और धार्मिक अधिकारों का इस्तेमाल करने से रोक रहे हैं। ममता बनर्जी ने भाजपा पर राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने के लिए धनबल और पुलिस तंत्र का इस्तेमाल करने का भी आरोप लगाया।
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ पुलिसकर्मियों ने अभिषेक बनर्जी के साथ दुर्व्यवहार किया। साथ ही, उन्होंने पुलिस अधिकारियों को पक्षपातपूर्ण तरीके से काम करने के प्रति आगाह किया। ममता ने कहा, ‘‘कोई भी कानून से ऊपर नहीं है।
पुलिस को निष्पक्षता बनाए रखनी चाहिए। उसकी जिम्मेदारी कानून का पालन कराना, नागरिकों की रक्षा करना और यह सुनिश्चित करना है कि राजनीतिक संबद्धता से इतर सभी के साथ समान व्यवहार हो।’’ पूर्व मुख्यमंत्री ने कथित पुलिस ज्यादती के खिलाफ उच्चतम न्यायालय का रुख करने की चेतावनी भी दी। उन्होंने कहा, ‘‘जरूरत पड़ने पर मैं व्यक्तिगत रूप से उच्चतम न्यायालय जाऊंगी और इन मामलों को उठाऊंगी।’’ बाद में, दोपहर के समय अभिषेक बनर्जी के आवास के बाहर पुलिस और तृणमूल कांग्रेस समर्थकों के बीच टकराव के बाद ममता ने पार्टी कार्यकर्ताओं से शांति बनाए रखने और ‘‘भाजपा के जाल’’ में नहीं फंसने की अपील की।
इससे पहले दिन में, तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया कि ‘‘भाजपा के गुंडों’’ ने शुक्रवार देर रात यहां उनके आवास पर हमला किया जिसके बाद दोनों दलों के समर्थकों के बीच झड़प हो गई। डायमंड हार्बर से सांसद बनर्जी ने दावा किया कि यह हमला उनकी जान लेने की साजिश के तहत किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि घटना से पहले लगातार दो दिन तक उनके कार्यालय और आवास पर नजर रखी गई।
उन्होंने कहा कि झड़प में उनके कई समर्थक गंभीर रूप से घायल हो गए।
Delhi High Court का आदेश, रेखा गुप्ता का आपत्तिजनक AI वीडियो सोशल मीडिया से हटाएं
नयी दिल्ली, सात नवंबर दिल्ली उच्च न्यायालय ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को शराब विक्रेता के रूप में दिखाने वाले एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता से तैयार वीडियो को सोशल मीडिया मंचों से हटाने का निर्देश दिया है। उच्च न्यायालय ने इस सामग्री को मानहानिकारक और आपत्तिजनक मानते हुए टिप्पणी की कि यह संवैधानिक पद पर आसीन एक महिला की गरिमा पर हमला है। उच्च न्यायालय ने यह आदेश गुप्ता की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए सुनाया।
गुप्ता ने उक्त वीडियो पर स्थायी रूप से रोक लगाने और आम आदमी पार्टी (आप) के आधिकारिक और सत्यापित सोशल मीडिया हैंडल से जारी एआई जनित तस्वीरों, वीडियो और पोस्टर की शृंखला को हटाने का निर्देश देने का आग्रह किया था। न्यायमूर्ति मनोज जैन ने शुक्रवार को दिए आदेश में कहा कि किसी भी राजनीतिक दल को सरकार की किसी नीति, फैसले या प्रशासनिक कार्रवाई की आलोचना करने का अधिकार है। लेकिन, किसी नीति के प्रति अपनी असहमति जताने की आड़ में, एआई जनित वीडियो की मदद से मुख्यमंत्री को अपमानजनक तरीके से पेश करना-जिससे उनकी गरिमा को ठेस पहुंचती हो-इसे किसी भी सूरत में स्वीकार्य राजनीतिक व्यंग्य नहीं माना जा सकता।
अदालत ने कहा कि राजनीतिक व्यंग्य और आपत्तिजनक चित्रण के बीच हमेशा एक बहुत बारीक रेखा होती है। न्यायाधीश ने कहा, ‘‘जब बात केवल हास्य या व्यंग्य की हो, तो अदालत शायद दखल न दे, लेकिन जब किसी व्यक्ति की गरिमा पर हमला किया जाए, उसे धूमिल किया जाए या उसका मखौल उड़ाया जाए, तो अदालत का यह कर्तव्य बन जाता है कि वह उचित कदम उठाए।’’ अदालत ने कहा कि सार्वजनिक पद पर रहने से स्वाभाविक रूप से अधिक जांच-परख की स्थिति बनती है, लेकिन किसी भी व्यक्ति की गरिमा से समझौता नहीं किया जा सकता। फैसले में कहा गया, ‘‘व्यंग्य भले ही किसी व्यक्ति की अंतरात्मा को ठेस पहुंचा सकता है, लेकिन इसे किसी की गरिमा पर ऐसा गहरा घाव करने की अनुमति नहीं दी जा सकती जिसे भरा न जा सके।
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आड़ में, और हास्य व व्यंग्य के बहाने, किसी को भी इस तरह अपमानित करने या मज़ाक का पात्र बनाने की छूट नहीं दी जा सकती।’’ अदालत ने कहा कि आज के दौर में चित्रण की संभावनाएं असीमित हैं, लेकिन ऐसी कोई भी सामग्री तैयार करने और प्रकाशित करने की जिम्मेदारी इंसान के नियंत्रण में होती है, इसलिए उचित सीमाओं का उल्लंघन नहीं किया जाना चाहिए। न्यायाधीश ने कहा कि गुप्ता द्वारा दाखिल की गई याचिका प्रथम दृष्टया विचारणीय है और स्थिति उनके पक्ष में है। अदालत ने गुप्ता को अंतरिम राहत देते हुए टिप्पणी की कि सोशल मीडिया मंचों के जरिए सामग्री बिजली की गति से फैल सकती है, जिससे अपूरणीय क्षति हो सकती है।
अदालत ने सोशल मीडिया मंचों को निर्देश दिया कि वे याचिका में उल्लेखित छह यूआरएल तत्काल हटाएं। उच्च न्यायालय ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए चार दिसंबर की तारीख तय की है।
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