Explainer: मिडटर्म में हार के बाद ट्रंप को क्या झुकाने में लगा ईरान? न्यूक्लियर समझौते के लिए भेजा पैगाम
मिडटर्म चुनाव में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को करारी हार सामना करना पड़ा है. इसके पीछे ट्रंप की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है. हालांकि इसे मानने से इनककार रहे हैं. उनका कहना है कि इसके बीच पेट्रोल बढ़ती कीमतें हैं. इससे जनता को असुविधा का सामना करना पड़ा है. मगर विशेषज्ञों का कहना है कि इसके पीछे ट्रंप के फैसले जिसने सिर्फ अमेरिका को नहीं पूरे विश्व को खतरे में डाल दिया है. अमेरिका और ईरान का युद्ध आज भी सुलग रहा है. हालांकि आठ माह से चल रहे इस युद्ध को खत्म करने के लिए कूटनीतिक उपाय खोजे जा रहे हैं. ईरान ने अपनी ओर परमाणु कार्यक्रम को लेकर नया प्रस्ताव पेश किया है. खास बात यह है कि यह प्रस्ताव कतर के मध्यस्थों के जरिए वाशिंगटन तक पहुंचाने की कोशिश की गई है. ईरान ने साफ किया है कि बातचीत आगे बढ़ाने से पहले अमेरिका को उसकी कुछ शर्तें को कबूल करना होगा.
इस घटनाक्रम को काफी अहम माना जा रहा है. अमेरिका में मिडटर्म चुनाव के परिणाम सामने आने के बाद ट्रंप प्रशासन पर ईरान युद्ध को लेकर राजनीतिक दबाव देखने को मिल रहा है. वहीं दूसरी ओर ट्रंप ने सैन्य कार्रवाई की संभावना से पूरी तरह से मना नहीं किया है. ऐसे में दोनों के बीच बातचीत का नया प्रयास पश्चिम एशिया में जारी तनाव को कम करने के दिशा में काफी अहम माना गया है.
ट्रंप और अमीर अल-थानी की बातचीत
अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का दोबारा आरंभ कराने में खाड़ी देश कतर अहम भूमिका निभा रहा है. कतर लंबे वक्त से दोनों देशों के बीच मध्यस्थता का प्रयास कर रहा है. इसी कड़ी में 6 नवंबर को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल-थानी से फोन चर्चा की.
कतर के अमीरी दीवान की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार, दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया में तनाव कम करने और मौजूदा संकट का व्यापक समाधान निकालने के लिए चल रहे कूटनीतिक प्रयासों पर चर्चा की. बातचीत में कतर की मध्यस्थता से जारी कोशिशों को भी अहमियत दी गई.
दरअसल, कतर के सामने सबसे बड़ी चुनौती अमेरिका और ईरान के बीच भरोसे को कायम करना है. दोनों देशों के बीच युद्धविराम और शांति समझौते को लेकर कई प्रस्तावों पर चर्चा जारी है. कतर का प्रयास है कि किसी ऐसे समझौते तक पहुंच जाए. इससे सैन्य टकराव दोबारा शुरू होने की आशंका कम हो सके.
ईरान ने भेजा न्यूक्लियर प्रस्ताव, लेकिन रख दीं सात शर्तें
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण बात ईरान की ओर से अमेरिका को भेजा गया नया प्रस्ताव है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि तेहरान ने कतर के माध्यम से अपना परमाणु और शांति प्रस्ताव अमेरिका तक पहुंचाया है. फिलहाल अमेरिका इस प्रस्ताव की समीक्षा कर रहा है.
हालांकि, ईरान ने बातचीत के लिए सात शर्तें रखी हैं. इनमें अमेरिकी प्रतिबंध हटाना, ईरान की विदेशों में फ्रीज संपत्तियों को जारी करना और ईरानी बंदरगाहों के आसपास अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी खत्म करना शामिल है. ईरान चाहता है कि इन मुद्दों पर सहमति बनने के बाद ही बातचीत आगे बढ़े. परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच अभी भी मतभेद बने हुए हैं. वाशिंगटन चाहता है कि किसी भी व्यापक समझौते में ईरान की परमाणु गतिविधियों से जुड़े मुद्दों को शामिल किया जाए. वहीं, तेहरान का रुख है कि पहले उसकी शर्तों पर सहमति बने, उसके बाद परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत का रास्ता खुले. इसका मतलब है कि ईरान की ओर से प्रस्ताव भेजना बातचीत की दिशा में एक अहम कदम जरूर है, लेकिन इसे समझौते पर अंतिम सहमति नहीं माना जा सकता.
अराघची ने संभाला कूटनीतिक मोर्चा, कई देशों से की बातचीत
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची भी इस समय कूटनीतिक स्तर पर सक्रिय हैं. उन्होंने क्षेत्रीय देशों के विदेश मंत्रियों से संपर्क कर युद्ध को समाप्त करने और पश्चिम एशिया में स्थिरता बहाल करने के प्रयासों पर चर्चा की है.
अराघची ने कतर और सऊदी अरब के विदेश मंत्रियों से बातचीत की. इसके अलावा संयुक्त अरब अमीरात और ओमान के साथ भी क्षेत्रीय हालात और समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर संपर्क किया गया. इन चर्चाओं का प्रमुख मुद्दा होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही और क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव को रोकना है. होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है. यहां जारी तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर भी पड़ रहा है. ऐसे में इस समुद्री रास्ते को फिर से सामान्य बनाने की कोशिशें शांति वार्ता का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई हैं.
रूस भी कूटानीति में सक्रिय, पुतिन तक पहुंचा खामेनेई का संदेश
अमेरिका के साथ बातचीत की कोशिशों के बीच ईरान ने रूस के साथ भी अपने संपर्क तेज किए हैं. ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के वरिष्ठ अधिकारी मोहसिन रजाई ने मॉस्को पहुंचकर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की. इस यात्रा को भी मौजूदा संकट के बीच ईरान की व्यापक कूटनीतिक रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है. ईरान रूस के साथ अपने संबंधों को मजबूत रखते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहा है.
क्या टल जाएगा अमेरिका और ईरान के बीच दूसरा युद्ध?
फिलहाल दोनों देशों के बीच बातचीत की संभावनाएं जरूर बढ़ी हैं, लेकिन युद्ध पूरी तरह टल गया है, ऐसा कहना जल्दबाजी होगी. ट्रंप ने ईरान के खिलाफ आगे सैन्य कार्रवाई की संभावना खुली रखी है. वहीं, ईरान भी किसी नए हमले की स्थिति में जवाब देने की चेतावनी दे रहा है.
सबसे बड़ी चुनौती परमाणु कार्यक्रम, अमेरिकी प्रतिबंधों और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर दोनों देशों के अलग-अलग रुख हैं. अमेरिका चाहता है कि परमाणु मुद्दे पर ठोस आश्वासन मिले, जबकि ईरान पहले अपनी शर्तों पर कार्रवाई की मांग कर रहा है. ऐसे में कतर की मध्यस्थता से शुरू हुई यह पहल आने वाले दिनों में किस दिशा में आगे बढ़ती है, इस पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी. फिलहाल इतना जरूर है कि सैन्य टकराव की आशंकाओं के बीच बातचीत का रास्ता खुला है, लेकिन स्थायी शांति के लिए दोनों देशों को अपने रुख में समझौता करना होगा.
त्योहारी Car Offers के बीच जल्दबाजी से बचें, Online Research और Test Drive है जरूरी
फेस्टिव सीजन में कई सारे लोग गाड़ियां खरीदते हैं। लेकिन ऑफर्स के चक्कर में कई सारी गलतियां कर देते है। अक्सर कंपनियां नई गाड़ी लॉन्च के एडवांस बुकिंग ऑफर के साथ पुरानी गाड़ियों पर भी कई तरह के ऑफर्स निकालती हैं। इन ऑफर्स में लालच में कई लोग गाड़ी बगैर देखे ही बुकिंग कर लेते हैं, जिससे उनके हाथ से सुहाने ऑफर निकल न जाए, लेकिन कई बार ऐसा होता है कि उनके लिए नुकसानदेह साबित होता है। जब गाड़ी खरीदें तो पहले सिर्फ ऑफर देखकर प्रभावित न हो, साथ ही में इंश्योरेंस, ऑन रोड कीमत, एक्सेसरीज, लोन आदि कहां सही कीमत पर मिल रहे हैं इसकी पूरी जांच करने के बाद फैसला लेना चाहिए। फेस्टिव सीजन के दौरान गाड़ी खरीदने से पहले उसके एडवांस बुकिंग ऑफर के अलावा किन जानकारियों को समझना जरुरी है, आइए आपको बताते हैं-
ऑनलाइन रिसर्च करें
त्योहार के समय गाड़ियों के ऑफर वाले विज्ञापन देखकर लोग अपने पास के शोरुम जाकर ही गाड़ी खरीदने का फैसला कर लेते हैं, उन्हें यह समझ नहीं आता कि सिर्फ शोरुम के डिस्काउंट और ऑफर्स देखकर गाड़ी बुक करना घाटे का सौदा हो सकता है। इसलिए ध्यान दें कि एक्सपर्ट गाड़ियों के ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर और दूसरे डिलर्स की कीमतों को चेक करने की सलाह जरुर देते हैं। यदि आप थोड़ी-सा रिसर्च करें, तो एक्स-शोरुम की कीमत के साथ ही कार इंश्योरेंस, एक्सेसरीज और एक्सचेंज बोनस में हजारों रुपये की भारी बचत कर सकते हैं।
कीमत और ऑफर की तुलना जरुर करें
जब आप कार खरीदें तो पहले कम से कम दो से तीन डीलरों से उसकी गाड़ी पर चल रहे ऑफर की तुलना जरुर करें। फेस्टिव सीजन में ऑफर आकर्षक जरुर होते हैं, लेकिन सही डील वही है, जिसमें डिस्काउंट के बाद भी कार की कुल लागत आपके बजट में रहे। इसलिए सिर्फ ऑफर देखकर नहीं, बल्कि पूरी ऑन रोड कीमत, इंश्योरेंस और भविष्य की ईएमआई को ध्यान रखकर फैसला लेना चाहिए।
यह है एक्सपर्ट की सलाह
एक्सपर्ट के अनुसार, फेस्टिव सीजन में गाड़ी लेने से पहले खासकर ग्राहकों के फीडबैक, इंटरनेट मीडिया पर उस गाड़ी से संबंधित क्या प्रतिक्रियाएं हैं, उनकी जांच करना समझदारी का फैसला होता है। कार वाले, मोटर बीम तमाम विश्वसनीय वेबसाइट्स पर जाकर गाड़ी से संबंधित फाइनेंशियल जानकारी जरुर लें। यह आपके लिए काफी मददगार साबित होगी।
इसके साथ ही गाड़ी की टेस्ट ड्राईव लेने से भी आपको सही फैसला लेने में मदद मिल सकती है। सिर्फ कैश डिस्काउंट देखकर गाड़ी खरीदना ठीक नहीं, बल्कि गाड़ी की सर्विस, वारंटी, रोड साइड इंश्योरेंस आदि पहलु बेहद ही महत्वपूर्ण है।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
News Nation
prabhasakshi










