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Aaj Ka Singh Rashifal 13 March 2026: नौकरी और पढ़ाई में मिलेंगे नए मौके, करीबी से मिल सकता है धोखा, पढ़ें आज का सिंह राशिफल 

Leo Horoscope Today 13 March 2026, Aaj Ka Singh Rashifal: आज ग्रहों की स्थिति सिंह राशि के जातकों के लिए कई मामलों में सकारात्मक संकेत दे रही है. हालांकि दिन अच्छा रहने के बावजूद कुछ मामलों में सावधानी बरतना जरूरी होगा. खास तौर पर अपने आसपास के लोगों पर ध्यान देने की जरूरत है. किसी करीबी व्यक्ति से धोखा मिलने के योग बन सकते हैं. 

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वाचमैन की नौकरी की, कभी धनिया बेची:फिल्मों में 1-2 मिनट के छोटे रोल किए; आज बॉलीवुड के सबसे दमदार अभिनेता बन गए नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी

छोटे से कस्बे बुधाना से निकलकर बॉलीवुड तक का सफर तय करने वाले नवाजुद्दीन सिद्दीकी की कहानी संघर्ष, धैर्य और जुनून की मिसाल है। किसान परिवार में जन्मे नवाज ने बचपन सादगी और सीमित संसाधनों के बीच बिताया। केमिस्ट की नौकरी से लेकर दिल्ली में थिएटर और फिर मुंबई में छोटे-छोटे रोल करने तक, उनका सफर आसान नहीं रहा। कई फिल्मों में 1-2 मिनट की झलक से शुरुआत करने वाले नवाज ने कभी हार नहीं मानी। धीरे-धीरे उनके अभिनय की सच्चाई ने दर्शकों और फिल्ममेकरों का ध्यान खींचा। ब्लैक फ्राइडे, पीपली लाइव और न्यूयॉर्क जैसी फिल्मों ने उनके टैलेंट की झलक दी, लेकिन असली पहचान गैंग्स ऑफ वासेपुर से मिली। इसके बाद कहानी, द लंचबॉक्स और मांझी: द माउंटेन मैन जैसी फिल्मों में दमदार अभिनय ने उन्हें इंडस्ट्री के सबसे भरोसेमंद अभिनेताओं में शामिल कर दिया। आज की सक्सेस स्टोरी में आइए जानते हैं नवाजुद्दीन सिद्दीकी के करियर और निजी जीवन से जुड़ी कुछ और बातें.. बुधाना के किसान परिवार में जन्म और बचपन की सादगी भरी जिंदगी नवाजुद्दीन सिद्दीकी का जन्म 19 मई 1974 को उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के छोटे से कस्बे बुधाना में एक किसान परिवार में हुआ था। गांव का माहौल बेहद साधारण था और वहां मनोरंजन के साधन भी बहुत कम थे। बचपन में वे स्थानीय रामलीला और छोटे-मोटे मंचीय कार्यक्रमों को देखकर अभिनय से प्रभावित होते थे। गांव की सादगी और जमीन से जुड़ा जीवन उनके व्यक्तित्व का अहम हिस्सा बना। यही वजह है कि आगे चलकर उनके अभिनय में आम आदमी की सच्चाई झलकती है। छोटे कस्बे में पले-बढ़े नवाज ने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन वह बॉलीवुड के सबसे प्रभावशाली अभिनेताओं में गिने जाएंगे। नौ भाई-बहनों के बीच पले-बढ़े, छोटे कस्बे से बड़े सपनों की शुरुआत नवाजुद्दीन सिद्दीकी नौ भाई-बहनों वाले बड़े परिवार में पले-बढ़े। इतने बड़े परिवार में जिम्मेदारियां भी जल्दी आ जाती हैं। घर में अनुशासन और मेहनत का माहौल था, जिसने उनके स्वभाव को मजबूत बनाया। छोटे कस्बे से होने के बावजूद नवाज के अंदर कुछ अलग करने की चाह थी। परिवार की साधारण जिंदगी और सीमित संसाधनों के बीच उन्होंने बड़े सपने देखे। यही सपना बाद में उन्हें गांव से बाहर निकलकर अभिनय की दुनिया की ओर ले गया। उनके लिए यह सफर आसान नहीं था, लेकिन बचपन की परिस्थितियों ने उन्हें संघर्ष के लिए तैयार कर दिया। केमिस्ट की नौकरी करते हुए एक्टिंग का सपना जागा कॉलेज से केमिस्ट्री में ग्रेजुएशन करने के बाद नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने वडोदरा में केमिस्ट की नौकरी की। यही वह समय था जब पहली बार उन्होंने थिएटर का नाटक देखा और अभिनय का सपना उनके भीतर जन्मा। एक नाटक देखने के बाद उन्हें लगा कि यही वह दुनिया है जिसमें वह खुद को देखना चाहते हैं। उस रात उन्होंने तय किया कि जीवन में कुछ भी हो जाए, लेकिन अभिनय जरूर करेंगे। यह फैसला उनके जीवन का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ और उन्होंने स्थिर नौकरी छोड़कर अभिनय के अनिश्चित रास्ते पर चलने का जोखिम उठाया। दिल्ली आकर थिएटर जॉइन करने का फैसला नौकरी छोड़ने के बाद नवाजुद्दीन दिल्ली पहुंचे और थिएटर से जुड़ने का फैसला किया। यह कदम बेहद जोखिम भरा था क्योंकि उनके पास स्थायी आय का कोई साधन नहीं था। लेकिन अभिनय के प्रति जुनून इतना मजबूत था कि उन्होंने हर मुश्किल को स्वीकार किया। दिल्ली के थिएटर ग्रुप्स में काम करते हुए उन्होंने मंच की बारीकियां सीखीं और अभिनय की समझ विकसित की। थिएटर ने उन्हें आत्मविश्वास दिया और यही अनुभव आगे चलकर फिल्मों में उनके अभिनय की मजबूत नींव बना। नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में दाखिला और अभिनय की असली ट्रेनिंग थिएटर में रुचि बढ़ने के बाद नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने दिल्ली के प्रतिष्ठित नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) में दाखिला लिया। यहां उन्हें अभिनय की पेशेवर ट्रेनिंग मिली और अभिनय के तकनीकी पहलुओं को समझने का मौका मिला। NSD के दिनों में उन्होंने कई नाटकों में काम किया और अपने हुनर को निखारा। यह संस्थान उनके लिए जीवन का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुआ क्योंकि यहीं से उन्हें अभिनय में आत्मविश्वास मिला और उन्होंने बड़े सपने देखने शुरू किए।नवाज कहते हैं- NSD ने मुझे वह आत्मविश्वास दिया जो बॉलीवुड के कई लोगों के पास नहीं होता। थिएटर के दिनों में पैसों की तंगी और दोस्तों के सहारे गुजारा दिल्ली में थिएटर करते समय नवाजुद्दीन को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। कई बार उनके पास किराया देने या रोजमर्रा के खर्च के लिए भी पैसे नहीं होते थे। ऐसे समय में दोस्तों और साथी कलाकारों ने उनका साथ दिया। वे कई-कई लोगों के साथ कमरों में रहते थे और बेहद साधारण जीवन बिताते थे। संघर्ष के ये साल उनके लिए सीखने और खुद को मजबूत बनाने का समय थे। इन्हीं अनुभवों ने उन्हें जमीन से जुड़े किरदार निभाने की क्षमता दी। मुंबई पहुंचकर वाचमैन की नौकरी और ऑडिशन का लंबा संघर्ष NSD से पढ़ाई पूरी करने के बाद नवाजुद्दीन मुंबई पहुंचे। यहां शुरुआत बेहद कठिन रही। फिल्मों में काम मिलने से पहले उन्होंने गुजारा चलाने के लिए वाचमैन की नौकरी भी की। दिन में ऑडिशन और रात में नौकरी, यही उनकी दिनचर्या बन गई थी। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार प्रयास करते रहे। यह संघर्ष उनके करियर का अहम हिस्सा रहा जिसने उन्हें मजबूत बनाया। फिल्मों में 1-2 मिनट के छोटे रोल, लेकिन हार नहीं मानी मुंबई में शुरुआती दौर में नवाजुद्दीन को फिल्मों में बहुत छोटे-छोटे रोल मिले। कई बार उनका स्क्रीन टाइम सिर्फ एक-दो मिनट का होता था। बावजूद इसके उन्होंने हर किरदार को पूरी ईमानदारी से निभाया। उन्हें विश्वास था कि एक दिन उनका अभिनय जरूर पहचाना जाएगा। छोटे रोल करते हुए भी उन्होंने अभिनय का अभ्यास जारी रखा और खुद को बेहतर बनाते रहे। यही जिद आगे चलकर उनके करियर की सबसे बड़ी ताकत बनी। नवाज कहते हैं- मैंने हर छोटा-बड़ा रोल किया, जो भी मिला उसे स्वीकार किया। ‘सरफरोश’ और अन्य फिल्मों में छोटी झलक से शुरुआत नवाजुद्दीन सिद्दीकी को शुरुआती पहचान फिल्म ‘सरफरोश में छोटे से रोल से मिली। इस फिल्म में उन्होंने छोटे क्रिमिनल/इन्फॉर्मर टाइप किरदार निभाया था। इसके बाद ‘शूल’ में रेस्टोरेंट का वेटर, जंगल में डकैत गैंग के एक सदस्य की छोटी भूमिका, मुन्ना भाई एमबीबीएस में पॉकेटमार और आजा नचले में लोकल व्यक्ति का छोटा सा किरदार निभाया था। भले ही ये भूमिकाएं बड़ी नहीं थीं, लेकिन हर किरदार में उन्होंने अपनी अलग छाप छोड़ी। धीरे-धीरे फिल्म इंडस्ट्री के लोग उनके अभिनय को नोटिस करने लगे। यह दौर उनके करियर की नींव रखने वाला समय था। ‘ब्लैक फ्राइडे’ से पहली बार एक्टिंग की चर्चा शुरू अनुराग कश्यप की फिल्म ‘ब्लैक फ्राइडे’ नवाजुद्दीन सिद्दीकी के करियर का अहम मोड़ बनी। इस फिल्म में उनका किरदार छोटा था, लेकिन उनके अभिनय ने दर्शकों और फिल्म समीक्षकों का ध्यान खींचा। इस फिल्म के बाद इंडस्ट्री में उनके काम की चर्चा शुरू हुई और उन्हें बेहतर भूमिकाएं मिलने लगीं। यहीं से उनकी पहचान एक गंभीर अभिनेता के रूप में बनने लगी। फिल्म ‘न्यूयॉर्क’ और छोटे किरदार से भी असर छोड़ने की कला न्यूयॉर्क फिल्म में नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने जिलगई नाम के किरदार को निभाया। यह भूमिका 9/11 हमलों के बाद गलत तरीके से FBI हिरासत में लिए गए एक भारतीय की थी। जिलगई पूछताछ, टॉर्चर और मानसिक प्रताड़ना झेलता है। 5-8 मिनट के इस छोटे रोल में नवाजुद्दीन ने आंखों से पीड़ा व्यक्त कर दर्शकों को झकझोर दिया। कबीर खान के निर्देशन में उनके टॉर्चर सीन ने खूब वाहवाही लूटी। इस किरदार ने नवाजुद्दीन की यथार्थवादी अभिनय क्षमता को साबित किया। ‘पीपली लाइव’ से इंडस्ट्री का ध्यान अपनी ओर खींचा आमिर खान के प्रोडक्शन में बनी फिल्म ‘पीपली लाइव’ नवाजुद्दीन सिद्दीकी के करियर के लिए बड़ा मौका साबित हुई। इस फिल्म में नवाज ने छोटे शहर के फ्रस्ट्रेटेड रिपोर्टर का किरदार निभाया था। इस फिल्म में उनके अभिनय को काफी सराहना मिली और इंडस्ट्री का ध्यान उनकी ओर गया। इसके बाद उन्हें कई महत्वपूर्ण फिल्मों के ऑफर मिलने लगे और उनका करियर नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ गया। ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ में फैजल बनकर रातोंरात पहचान नवाज को असली पहचान 2012 में आई अनुराग कश्यप की फिल्म ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ से मिली। फिल्म में उन्होंने फैजल खान का किरदार निभाया, जो धीरे-धीरे एक कमजोर लड़के से गैंगस्टर बनता है। उनके शांत लेकिन खतरनाक अंदाज ने दर्शकों को चौंका दिया। फिल्म रिलीज होते ही नवाजुद्दीन रातोंरात चर्चा में आ गए और इंडस्ट्री को एक नया टैलेंट मिला। इस किरदार ने उन्हें मुख्यधारा सिनेमा में मजबूत पहचान दिलाई और कई बड़े निर्देशकों का ध्यान भी खींचा। नवाज कहते हैं- फैजल का किरदार मेरे लिए टर्निंग पॉइंट था। लोगों ने पहली बार मुझे नोटिस किया। “बाप का, दादा का…” डायलॉग से पॉप-कल्चर आइकन बन गए ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ का मशहूर डायलॉग “बाप का, दादा का…” आज भी पॉप-कल्चर का हिस्सा है। इस डायलॉग को नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने जिस सहज अंदाज में कहा, वह दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय हो गया। सोशल मीडिया से लेकर युवाओं की बातचीत तक, यह लाइन लंबे समय तक ट्रेंड करती रही। इससे नवाजुद्दीन की पहचान सिर्फ एक अच्छे एक्टर की नहीं, बल्कि यादगार स्क्रीन प्रेजेंस वाले कलाकार की बन गई। नवाज कहते हैं- कई बार डायलॉग की ताकत अभिनेता से भी ज्यादा बड़ी हो जाती है। ‘कहानी’ में इंटेलिजेंस ऑफिसर का दमदार किरदार 2012 की फिल्म ‘कहानी’ में नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने इंटेलिजेंस ऑफिसर खान का रोल निभाया। फिल्म में उनकी मौजूदगी कम समय की थी, लेकिन अभिनय इतना असरदार था कि दर्शकों को वह लंबे समय तक याद रहा। उनकी आंखों और बॉडी लैंग्वेज से झलकता रहस्य फिल्म की कहानी को और रोचक बना देता है। इस भूमिका ने साबित किया कि नवाजुद्दीन छोटे रोल में भी मजबूत छाप छोड़ सकते हैं। नवाज कहते हैं- मैं किरदार का आकार नहीं देखता, बस उसकी सच्चाई ढूंढता हूं। ‘द लंचबॉक्स’ के जरिए इंटरनेशनल फेस्टिवल्स में सराहना फिल्म ‘द लंचबॉक्स’ ने नवाजुद्दीन सिद्दीकी को अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक पहुंचा दिया। फिल्म में उन्होंने इरफान खान के सहयोगी शेख का किरदार निभाया, जो हल्के-फुल्के हास्य और मासूमियत से कहानी को संतुलित करता है। फिल्म कई अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल्स में दिखाई गई और खूब सराही गई। इस प्रोजेक्ट ने नवाजुद्दीन को ग्लोबल स्तर पर पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई। नवाज बताते हैं कि इंटरनेशनल फेस्टिवल्स में जब लोग मेरे काम की तारीफ करते थे, तो विश्वास बढ़ जाता था। ‘मांझी: द माउंटेन मैन’ के लिए जबरदस्त ट्रांसफॉर्मेशन फिल्म ‘मांझी: द माउंटेन मैन’ में नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने दशरथ मांझी की भूमिका निभाई। इस किरदार के लिए उन्होंने अपनी बॉडी लैंग्वेज, लुक और बोलने के अंदाज पर खास मेहनत की। फिल्म में एक गरीब मजदूर की जिद और संघर्ष को उन्होंने बेहद भावुक तरीके से निभाया। यह रोल उनके करियर की सबसे चुनौतीपूर्ण भूमिकाओं में से एक माना जाता है। नवाज कहते हैं कि मांझी की कहानी ने मुझे अंदर से हिला दिया था। हर फिल्म में अलग अंदाज, विलेन, कॉमिक और इमोशनल रोल का संतुलन नवाजुद्दीन सिद्दीकी की सबसे बड़ी खासियत उनकी बहुमुखी प्रतिभा है। उन्होंने गैंगस्टर, पुलिस ऑफिसर, कॉमिक किरदार और भावनात्मक रोल, हर तरह की भूमिकाएं निभाई हैं। यही वजह है कि वह किसी एक इमेज में बंधकर नहीं रह गए। अलग-अलग फिल्मों में उनका नया अंदाज देखने को मिलता है, जो उन्हें बाकी कलाकारों से अलग बनाता है। नवाज खुद कहते हैं कि अगर एक ही तरह के रोल करूं तो मैं खुद बोर हो जाऊंगा। सेक्रेड गेम्स से ओटीटी का ग्लोबल फेस बने 2018 में आई वेब सीरीज ‘सेक्रेड गेम्स’ ने नवाजुद्दीन सिद्दीकी को ओटीटी की दुनिया में नया मुकाम दिया। इसमें उन्होंने गणेश गायतोंडे का किरदार निभाया, जो क्राइम और सत्ता के खेल में उलझा एक जटिल गैंगस्टर है। सीरीज दुनियाभर में लोकप्रिय हुई और नवाजुद्दीन की एक्टिंग को जबरदस्त सराहना मिली। नवाज कहते हैं- गायतोंडे का किरदार बहुत परतों वाला था, इसलिए उसे निभाना चुनौतीपूर्ण भी था। कभी लीड हीरो जैसा लुक नहीं माना गया, फिर भी बने दमदार स्टार बॉलीवुड में लंबे समय तक यह माना जाता रहा कि हीरो बनने के लिए खास तरह का लुक जरूरी है। लेकिन नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने इस सोच को चुनौती दी। साधारण चेहरे और मजबूत अभिनय के दम पर उन्होंने साबित किया कि असली स्टारडम प्रतिभा से आता है। धीरे-धीरे दर्शकों ने भी उन्हें अलग तरह के हीरो के रूप में स्वीकार किया। आत्मकथा एन ऑर्डिनरी लाइफ और उससे जुड़े विवाद 2017 में नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने अपनी आत्मकथा ‘एन ऑर्डिनरी लाइफ’ लिखी। किताब में उन्होंने अपने संघर्ष, रिश्तों और निजी अनुभवों के बारे में खुलकर लिखा। हालांकि कुछ व्यक्तिगत खुलासों को लेकर विवाद भी हुआ, जिसके बाद उन्होंने किताब को वापस लेने का फैसला किया। इस घटना ने खूब सुर्खियां बटोरीं और उनकी निजी जिंदगी चर्चा में आ गई। नवाज ने कहा था कि अगर मेरी किताब से किसी को ठेस पहुंची है तो मुझे अफसोस है। निजी जिंदगी में रिश्तों और विवादों से भी सुर्खियों में रहे नवाजुद्दीन सिद्दीकी का निजी जीवन भी कई बार चर्चा में रहा है। परिवार और रिश्तों से जुड़े विवाद मीडिया की सुर्खियां बने। हालांकि उन्होंने कई बार कहा कि वह अपने काम पर ध्यान देना चाहते हैं और निजी मुद्दों को सुलझाने की कोशिश करते रहते हैं। वह कहते हैं- मेरे लिए सबसे जरूरी मेरा काम और मेरे बच्चे हैं। एक्टर नहीं, ‘परफॉर्मर’ बनने का उनका अलग नजरिया नवाजुद्दीन सिद्दीकी खुद को सिर्फ ‘एक्टर’ नहीं बल्कि ‘परफॉर्मर’ मानते हैं। उनका कहना है कि अभिनय सिर्फ डायलॉग बोलना नहीं, बल्कि किरदार की आत्मा को समझना है। थिएटर के अनुभव ने उन्हें यह समझ दी कि अभिनय पूरी तरह सच्चाई और ईमानदारी से जुड़ा काम है। यही सोच उन्हें हर किरदार में नई ऊर्जा के साथ काम करने के लिए प्रेरित करती है। ________________________________________________ पिछले हफ्ते की सक्सेस स्टोरी पढ़िए... भाषा और पहनावे पर उड़ा मजाक, ऑडिशन में हुई बेइज्जती:सिद्धांत बोले- टाइम इंतजार से नहीं आता, मेहनत और धैर्य से खुद बनाना पड़ता है हिंदी सिनेमा की दुनिया हर साल नए चेहरों से रोशन होती है, लेकिन चमकते सितारों की भीड़ में अपनी अलग पहचान बना पाना हर किसी के बस की बात नहीं होती। इस चमक-दमक के पीछे अनगिनत संघर्ष, असफलताएं और आत्मविश्वास की लंबी परीक्षा छिपी होती है। पूरी खबर पढ़ें..

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BCCI ने बदली पूरी गाइडलाइन... अब एक-दूसरे के नेट्स इस्तेमाल नहीं कर पाएंगी टीमें, 5 पन्नों के फरमान से हड़कंप

BCCI New Guideline: बीसीसीआई ने आईपीएल से पहले मैदान पर 'जासूसी' और 'मनमानी' रोकने के लिए सख्त पिच प्रोटोकॉल लागू कर दिया है. नए नियमों के तहत अब टीमें एक-दूसरे के प्रैक्टिस नेट्स का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगी. यहां तक कि थ्रो-डाउन के लिए भी मनाही है. बोर्ड ने साफ कर दिया है कि हर टीम को फ्रेश विकेट ही दिए जाएंगे. मुख्य मैदान को सुरक्षित रखने के लिए मैच से चार दिन पहले वहां प्रैक्टिस पर पूरी तरह ताला लगा दिया गया है, जिसने टीमों की टेंशन बढ़ा दी है. Fri, 13 Mar 2026 05:01:02 +0530

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