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अग्नि-4 का चांदी की रोशनी में सफल परीक्षण, बढ़ी भारत की सामरिक ताकत; 4,000 किमी दूर तक साध सकती है सटीक निशाना

भारत ने अपनी रणनीतिक रक्षा क्षमता को एक बार फिर मजबूती देते हुए ओडिशा के चांदीपुर तट से अग्नि-4 बैलिस्टिक मिसाइल का सफल रात्रिकालीन परीक्षण किया. यह परीक्षण भारतीय सेना की स्ट्रैटेजिक फोर्सेस कमांड (Strategic Forces Command) की देखरेख में संपन्न हुआ. रक्षा मंत्रालय के अनुसार, मिसाइल ने परीक्षण के दौरान अपने सभी तकनीकी और परिचालन मानकों को पूरी सटीकता के साथ पूरा किया.

रात के समय किए गए इस परीक्षण ने यह भी दिखाया कि भारत किसी भी परिस्थिति और किसी भी समय अपनी सामरिक क्षमता का प्रभावी उपयोग करने में सक्षम है.

क्या है अग्नि-4 मिसाइल की खासियत?

अग्नि-4 सतह से सतह पर मार करने वाली मध्यवर्ती दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल (MRBM) है. इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसकी लगभग 4,000 किलोमीटर तक की मारक क्षमता है, जो इसे लंबी दूरी तक सटीक हमला करने में सक्षम बनाती है.

यह दो चरणों वाली (Two-Stage) मिसाइल है, जो ठोस ईंधन (Solid Fuel) से संचालित होती है. ठोस ईंधन होने के कारण इसे लॉन्च करने की तैयारी में बहुत कम समय लगता है, जिससे आपात परिस्थितियों में तुरंत प्रतिक्रिया देना संभव हो जाता है.

मोबाइल लॉन्चर से दागी जा सकती है मिसाइल

अग्नि-4 की एक और महत्वपूर्ण विशेषता इसकी मोबाइल लॉन्च क्षमता है. इसे स्थायी लॉन्च पैड पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं होती. मोबाइल लॉन्चर के माध्यम से इसे अलग-अलग स्थानों से दागा जा सकता है, जिससे इसकी तैनाती अधिक लचीली और सुरक्षित हो जाती है.

युद्ध जैसी परिस्थितियों में यह क्षमता बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है क्योंकि इससे मिसाइल की लोकेशन का पता लगाना विरोधी के लिए कठिन हो जाता है.

रात में परीक्षण का क्या है रणनीतिक महत्व?

रात्रिकालीन परीक्षण केवल तकनीकी सफलता नहीं बल्कि सामरिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. इससे यह साबित होता है कि भारतीय रक्षा प्रणाली दिन और रात दोनों समय समान दक्षता के साथ कार्य करने में सक्षम है.

विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी मौसम और किसी भी समय मिसाइल संचालन की क्षमता किसी भी देश की रणनीतिक तैयारी का महत्वपूर्ण संकेत होती है. यह परीक्षण भारतीय सेना की परिचालन क्षमता और तैयारियों को भी दर्शाता है.

न्यूनतम विश्वसनीय प्रतिरोधक क्षमता को मिली मजबूती

भारत लंबे समय से "न्यूनतम विश्वसनीय प्रतिरोधक क्षमता" (Minimum Credible Deterrence) की नीति पर काम करता रहा है. अग्नि-4 का सफल परीक्षण इस नीति को और अधिक मजबूत करता है.

इस प्रकार की मिसाइलें किसी भी संभावित खतरे के खिलाफ रणनीतिक संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती हैं. रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के सफल परीक्षण भारत की प्रतिरोधक क्षमता को और प्रभावी बनाते हैं.

पहले भी सफल रहे हैं कई परीक्षण

इस वर्ष भारत ने अपनी विभिन्न रणनीतिक मिसाइल प्रणालियों के कई सफल परीक्षण किए हैं. अग्नि-प्राइम और अग्नि-3 के सफल परीक्षणों के बाद अब अग्नि-4 का सफल यूजर ट्रायल इस बात का संकेत देता है कि भारतीय रणनीतिक मिसाइल प्रणाली लगातार आधुनिक और भरोसेमंद बन रही है.

इन परीक्षणों का उद्देश्य मिसाइलों की तकनीकी विश्वसनीयता और सैन्य उपयोग के लिए उनकी तैयारियों का आकलन करना होता है.

भारत की रक्षा तैयारियों का मजबूत संकेत

अग्नि-4 के सफल रात्रिकालीन परीक्षण ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत अपनी रक्षा क्षमताओं को लगातार आधुनिक बना रहा है. लंबी दूरी तक सटीक प्रहार करने की क्षमता, तेज प्रतिक्रिया, मोबाइल लॉन्च सिस्टम और सफल नाइट ट्रायल जैसी विशेषताएं इसे भारतीय सामरिक सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाती हैं.

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के परीक्षण न केवल तकनीकी आत्मनिर्भरता को दर्शाते हैं, बल्कि भारत की रणनीतिक तैयारियों और राष्ट्रीय सुरक्षा को भी नई मजबूती प्रदान करते हैं.

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ट्रम्प की सख्ती से भारतीय छात्रों का अमेरिका जाना कम:65 साल में पहली बार अप्रवासियों की संख्या घटी; पाकिस्तान-बांग्लादेश के छात्रों को ज्यादा वीजा

अमेरिका में पढ़ाई का सपना देखने वाले भारतीय छात्रों के लिए अब राह पहले जैसी आसान नहीं रही। ट्रम्प सरकार की सख्त इमिग्रेशन पॉलिसी के बीच 2025 में भारतीय छात्रों को मिलने वाले F-1 स्टूडेंट वीजा में बड़ी गिरावट आई है। इसके उलट पाकिस्तान, बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों के छात्रों को पहले के मुकाबले ज्यादा वीजा मिले हैं। सख्ती का असर सिर्फ स्टूडेंट वीजा तक सीमित नहीं है। वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक, जनवरी 2025 में अमेरिका में अप्रवासियों की संख्या रिकॉर्ड 5.33 करोड़ थी, जो जून तक घटकर 5.19 करोड़ रह गई। 1960 के दशक के बाद पहली बार वहां अप्रवासियों की आबादी में गिरावट दर्ज की गई है। भारतीय छात्रों के लिए अमेरिका पहुंचना मुश्किल हुआ सेंटर फॉर इमिग्रेशन स्टडीज (CIS) के मुताबिक, मई से अगस्त के बीच एडमिशन का पीक सीजन होता है। इसी दौरान 2025 में भारतीय छात्रों को मिलने वाले F-1 स्टूडेंट वीजा पिछले साल के मुकाबले 62% घट गए। चीनी छात्रों पर भी असर पड़ा और उन्हें 34% कम वीजा मिले। हालांकि, तस्वीर सभी देशों के लिए एक जैसी नहीं रही। 2025 की पहली छमाही में वियतनाम के छात्रों को 5,324 F-1 वीजा मिले, जो पिछले साल के मुकाबले 19.6% ज्यादा हैं। बांग्लादेश के छात्रों को 2,098 वीजा मिले, यानी 20.1% की बढ़ोतरी हुई। वहीं पाकिस्तान के छात्रों को 1,928 F-1 वीजा मिले, जो पिछले साल की तुलना में 44.3% अधिक हैं। ट्रम्प सरकार ने वीजा आवेदकों की सोशल मीडिया स्क्रीनिंग की वीजा में आई इस गिरावट की एक बड़ी वजह ट्रम्प सरकार के नए नियम रहे। जैसे- अमेरिका की जगह यूरोप का रुख कर रहे हैं भारतीय छात्र कई भारतीय छात्र अब यूरोप का रुख कर रहे हैं। जर्मनी, फ्रांस, आयरलैंड, इटली और नीदरलैंड जैसे देश भारतीय छात्रों की नई पसंद बन रहे हैं। इसकी वजह कम फीस, आसान वीजा प्रक्रिया और पढ़ाई के बाद नौकरी के बेहतर मौके हैं। रॉयटर्स के मुताबिक, यूरोप की कई यूनिवर्सिटीज की फीस अमेरिकी यूनिवर्सिटीज से 50% से 80% तक कम होती है। 2015 से 2023 के बीच यूरोप जाने वाले भारतीय छात्रों की संख्या 45% बढ़ी, जबकि जर्मनी, फ्रांस, इटली और आयरलैंड में भारतीय छात्रों का दाखिला 68% बढ़ा। वहीं, कुछ भारतीय प्रोफेशनल भी वीजा नियमों और नौकरी को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के बीच भारत लौटने या दूसरे देशों का रुख करने लगे हैं। H-1B वीजा में अब भी भारत सबसे आगे स्टूडेंट वीजा में गिरावट के बावजूद नौकरी के लिए मिलने वाले H-1B वर्क वीजा में भारत की पकड़ अब भी सबसे मजबूत है। 2024 में जारी H-1B वीजा में 71% भारतीयों को मिले। चीन दूसरे स्थान पर रहा, जबकि फिलीपींस, कनाडा और साउथ कोरिया की हिस्सेदारी करीब 1-1% रही। यानी, स्टूडेंट वीजा घटे हैं, लेकिन नौकरी के लिए भारतीय प्रोफेशनल्स की मांग अब भी सबसे ज्यादा है। अमेरिका अब भी सबसे बड़ा प्रवासी देश सख्त नियमों और वीजा में गिरावट के बावजूद अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा प्रवासी देश बना हुआ है। बेहतर शिक्षा, नौकरी और कमाई के मौके आज भी लाखों लोगों को अमेरिका की ओर आकर्षित करते हैं। 2023 के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका में सबसे ज्यादा 1.1 करोड़ प्रवासी मेक्सिको से हैं। इसके बाद भारत (32 लाख), चीन (30 लाख), फिलीपींस (21 लाख) और क्यूबा (17 लाख) का स्थान है। प्यू रिसर्च सेंटर के मुताबिक, अमेरिका में रहने वाले कुल प्रवासियों में 52% लैटिन अमेरिका और 27% एशिया से हैं। यानी, अमेरिका की प्रवासी आबादी में एशियाई देशों की बड़ी हिस्सेदारी है। ऐसे में वीजा नियमों में होने वाले बदलाव का असर भारत, चीन और दूसरे एशियाई देशों पर सबसे ज्यादा पड़ता है। अमेरिका में विदेशी टूरिस्टों की भी संख्या घटी अमेरिका आने वाले विदेशी टूरिस्टों की संख्या भी घटी है। 2025 में करीब 6.83 करोड़ विदेशी टूरिस्ट अमेरिका पहुंचे, जबकि 2024 में यह आंकड़ा 7.23 करोड़ था। टूरिस्टों के खर्च में भी 8 अरब डॉलर से ज्यादा की कमी आई। सबसे ज्यादा गिरावट कनाडा से आने वाले टूरिस्टों में रही। भारत, जर्मनी, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया और चीन से आने वाले टूरिस्टों की संख्या भी कम हुई, जबकि मेक्सिको से आने वाले टूरिस्ट बढ़े। यानी, ट्रम्प सरकार की सख्ती का असर सिर्फ स्टूडेंट वीजा ही नहीं, बल्कि इमिग्रेशन और विदेशी टूरिज्म पर भी साफ दिख रहा है।

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भारत-श्रीलंका टेस्ट सीरीज में सबसे ज्यादा रन का रिकॉर्ड, इकलौता बल्लेबाज जिसने पार किया 600 का स्कोर

Virat Kohli 610 Runs Record in IND vs SL Test Series: भारतीय दिग्गज बल्लेबाज विराट कोहली के नाम यह रिकॉर्ड है. उन्होंने 2017 में खेली गई तीन मैचों की सीरीज में रनों का अंबार लगा दिया था. वह किसी भी भारत-श्रीलंका टेस्ट सीरीज में इकलौते ऐसे बल्लेबाज बने, जिन्होंने 600 रनों का आंकड़ा पार किया। दूसरा कोई बल्लेबाज 600 रन के नजदीक भी पहुंचने में कामयाब नहीं हो सका है. Sat, 8 Aug 2026 00:01:03 +0530

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