राज्यसभा चुनाव 2026ः टीएमसी सांसद के इस्तीफे बाद अटकलें तेज, इस सीट को लेकर कुलदीप माइती का नाम सबसे आगे
पश्चिम बंगाल में 24 जुलाई 2026 को राज्यसभा की 3 सीटों के लिए उपचुनाव संपन्न हो चुका है. TMC के 3 वरिष्ठ सांसदों - सुखेंदु शेखर रॉय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बराइक के इस्तीफे के बाद यह सीटे खाली हुई थीं. अब बताया जा रहा है कि चौथी सीट को लेकर चुनाव होने के आसार हैं. टीएमसी सांसद कोयल मल्लिक ने राज्यसभा और टीएमसी से इस्तीफा दे दिया है. इस सीट पर सितंबर में चुनाव हो सकता है. निर्वाचन आयोग इसकी घोषणा किसी भी वक्त हो सकती है. इस सीट पर सबसे मजबूत दावेदारी कुलदीप माइती की हो रही है.
उपचुनाव को लेकर पूरे बंगाल में राजनीतिक सरगर्मी तेज है. सूत्रों के अनुसार, माइती के नाम को लेकर भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है. विधानसभा चुनाव 2026 में जनता ने BJP को 207 सीटों के साथ ऐतिहासिक जनादेश दिया है. इस मजबूत गणित के तहत पार्टी राज्यसभा में भी बंगाल की आवाज को और बुलंद करना चाहती है.
अब बंगाल बदलाव चाहता है
कुलदीप माइती ने कहा, 'मैं बंगाल की मिट्टी से जुड़ा एक सामान्य कार्यकर्ता हूं. बीते कई वर्षों से मैं बंगाल के गांव-गांव में जाकर जनता की समस्याएं समझने का काम कर रहा हूं.' माताओं-बहनों की सुरक्षा, युवाओं के लिए रोजगार, किसानों को फसल का उचित दाम और बंगाल के उद्योगों को नई पहचान देना यही मेरी प्राथमिकता है. बीते 15 वर्षों में TMC के कुशासन, भ्रष्टाचार और हिंसा की राजनीति ने बंगाल को बहुत पीछे धकेल दिया. अब बंगाल बदलाव चाहता है.
फायदा बंगाल के आखिरी व्यक्ति तक पहुंचे
विधानसभा में मिले प्रचंड बहुमत के बाद अब समय है कि बंगाल को डबल इंजन सरकार का लाभ मिले और केंद्र की हर योजना का फायदा बंगाल के आखिरी व्यक्ति तक पहुंचे. अगर पार्टी मुझे राज्यसभा में बंगाल का प्रतिनिधित्व करने का अवसर देती है, तो मैं वादा करता हूं कि मैं संसद में बंगाल के मछुआरे, किसान, शिक्षक, व्यापारी और मजदूर - हर वर्ग की आवाज़ बनूंगा. बंगाल को फिर से शिक्षा, संस्कृति और उद्योग का केंद्र बनाना मेरा संकल्प है. मैं पार्टी नेतृत्व और सभी कार्यकर्ताओं का धन्यवाद करता हूं जिन्होंने मुझ पर विश्वास जताया. बंगाल के गौरव और सम्मान को वापस लाने के लिए हम सब मिलकर काम करेंगे.
आरक्षण में आय-आधारित कोटे का केंद्र ने किया विरोध, SC में दिया जवाब
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि आरक्षित श्रेणियों में आय के आधार पर लाभ देने का प्रावधान नहीं किया जा सकता। सरकार के मुताबिक, SC/ST/OBC के साथ भेदभाव आर्थिक नहीं, बल्कि ऐतिहासिक और सामाजिक आधार पर हुआ है।
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