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मिडिल ईस्ट तनाव के बीच एयर इंडिया ने डीजीसीए से उड़ान ड्यूटी नियमों में राहत की मांग की

नई दिल्ली, 12 मार्च (आईएएनएस)। मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच एयर इंडिया ने विमानन नियामक डीजीसीए से फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (एफडीटीएल) नियमों में अस्थायी ढील देने की मांग की है। गुरुवार को एक रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई।

एनडीटीवी प्रॉफिट की रिपोर्ट के मुताबिक, टाटा ग्रुप के स्वामित्व वाली एयर इंडिया ने डीजीसीए से अनुरोध किया है कि कुछ लंबी दूरी की उड़ानों को तीन पायलट की बजाय दो पायलट के साथ संचालित करने की अनुमति दी जाए। इसके साथ ही अधिकतम उड़ान समय की सीमा बढ़ाने की भी मांग की गई है।

एनडीटीवी प्रॉफिट के सूत्रों के अनुसार, एयर इंडिया ने उड़ान के अनुमत समय में 1 घंटा 3 मिनट की बढ़ोतरी की मांग की है। इससे अधिकतम उड़ान समय 10 घंटे से बढ़कर करीब 11 से 11.5 घंटे हो जाएगा।

इसके अलावा एयरलाइन ने अधिकतम फ्लाइट ड्यूटी पीरियड (एफडीपी) को भी बढ़ाने का अनुरोध किया है। इसके तहत ड्यूटी समय 13 घंटे से बढ़ाकर 14 घंटे 45 मिनट करने की मांग की गई है, यानी करीब 1 घंटा 45 मिनट की अतिरिक्त अवधि।

रिपोर्ट के अनुसार, क्षेत्र के कई हिस्सों में हवाई क्षेत्र प्रतिबंधित होने और पाकिस्तान का एयरस्पेस भारतीय एयरलाइंस के लिए बंद रहने के कारण उड़ानों को लंबा रास्ता लेना पड़ रहा है।

इन परिस्थितियों में एयरलाइंस को अरब सागर, मध्य एशिया और अफ्रीका के कुछ हिस्सों के ऊपर से होकर लंबा रास्ता अपनाना पड़ रहा है, जिससे उड़ान का समय काफी बढ़ गया है।

इस कारण ईंधन की खपत भी बढ़ रही है और क्रू की ड्यूटी समय सीमा पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि डीजीसीए ने हाल ही में भारतीय एयरलाइंस को मध्य पूर्व के 11 देशों के हवाई क्षेत्र से बचने की सलाह दी है, क्योंकि इन्हें उच्च जोखिम वाले क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया गया है।

एयर इंडिया के लिए ईरान और इराक के हवाई क्षेत्र से बचने के कारण कई लंबी दूरी की उड़ानों का समय काफी बढ़ गया है। इसी वजह से एयरलाइन को इस सप्ताह कई उड़ानें रद्द भी करनी पड़ी हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, एयर इंडिया का यह प्रस्ताव फिलहाल डीजीसीए के पास विचाराधीन है और नियामक इसकी जांच कर रहा है।

अधिकारियों ने बताया कि विमानन उद्योग की अन्य कंपनियां भी इसी तरह की रूट संबंधी चुनौतियों का सामना कर रही हैं, लेकिन फिलहाल इंडिगो की ओर से डीजीसीए को ऐसा कोई अनुरोध नहीं मिला है।

हालांकि रिपोर्ट में कहा गया है कि एयर इंडिया ने इस मामले में क्रू की थकान से जुड़े संभावित मुद्दों पर पूछे गए सवालों का तुरंत जवाब नहीं दिया।

--आईएएनएस

डीबीपी/

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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डाइट से भी सुधर सकती है नींद की गुणवत्ता, सही भोजन से तन और मन दोनों को मिलता है आराम

नई दिल्ली, 12 मार्च (आईएएनएस)। आज की तेज रफ्तार जिंदगी में नींद की गुणवत्ता में कमी देखी जा रही है। देर रात तक मोबाइल या लैपटॉप चलाना, अनियमित दिनचर्या, तनाव और गलत खानपान के कारण बहुत से लोग रात में ठीक से सो नहीं पाते। कई लोग थकान के बावजूद बिस्तर पर करवटें बदलते रहते हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, नींद सिर्फ शरीर को आराम देने के लिए नहीं होती, बल्कि यह दिमाग को ताजगी देने और पूरे शरीर के संतुलन को बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी होती है। अगर नींद ठीक से न आए तो इसका असर धीरे-धीरे शरीर, दिमाग और रोजमर्रा के कामकाज पर दिखाई देने लगता है।

विज्ञान और आयुर्वेद दोनों ही इस बात पर जोर देते हैं कि हमारी डाइट, यानी हम क्या खाते हैं, इसका सीधा असर हमारी नींद पर पड़ता है। कुछ ऐसे खाद्य पदार्थ होते हैं जो शरीर को शांत करने, हार्मोन को संतुलित रखने और दिमाग को आराम देने में मदद करते हैं। सही समय पर सही भोजन लेने से नींद की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है।

रात में सोने से पहले दूध पीने की परंपरा भारत में बहुत पुरानी है। आयुर्वेद भी इसे लाभकारी मानता है। दूध में मौजूद ट्रिप्टोफैन नामक अमीनो एसिड शरीर में नींद से जुड़े हार्मोन मेलाटोनिन को बनाने में मदद करता है। जब यह हार्मोन संतुलित रहता है तो व्यक्ति को आसानी से नींद आने लगती है। कई लोग सोने से पहले हल्दी वाला गुनगुना दूध पीते हैं, जो शरीर में सूजन कम करने और मांसपेशियों को आराम देने में सहायक माना जाता है।

नींद की गुणवत्ता सुधारने में फाइबर युक्त भोजन भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। फाइबर हमारे पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है और ब्लड शुगर को स्थिर रखने में मदद करता है। साबुत अनाज, ओट्स, दालें, फल और सब्जियां फाइबर के अच्छे स्रोत माने जाते हैं। जब पाचन ठीक रहता है तो शरीर हल्का महसूस करता है और व्यक्ति आराम से सो पाता है।

प्रोटीन भी शरीर के लिए बेहद जरूरी पोषक तत्व है। यह शरीर की कोशिकाओं और दिमाग में जरूरी रसायनों के निर्माण में मदद करता है। दालें, दही, पनीर, अंडा, चना और सोयाबीन जैसे खाद्य पदार्थ प्रोटीन के अच्छे स्रोत हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि रात का भोजन हल्का और संतुलित होना चाहिए। ज्यादा तला-भुना या बहुत मसालेदार भोजन पाचन को प्रभावित कर सकता है, जिससे गैस, अपच और बेचैनी के कारण नींद प्रभावित हो सकती है।

--आईएएनएस

पीके/एएस

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