NCW प्रमुख विजया रहाटकर बोलीं: कामकाजी महिलाओं के लिए कैब में पुख्ता सुरक्षा जरूरी
(कोमल शर्मा) नयी दिल्ली, छह नवंबर राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने शुक्रवार को कहा कि भारत में जैसे-जैसे महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी मौजूदगी दर्ज करा रही हैं, उन्हें ऐप-आधारित कैब सेवाओं का उपयोग करते समय सुरक्षित महसूस होना चाहिए और संचालकों को तनावमुक्त सफर करने के लिए सभी सुरक्षा दिशानिर्देशों का पालन करना चाहिए। रहाटकर ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि महिला यात्रियों की सुरक्षा पर आयोग की सिफारिशों का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि महिलाएं अपनी सुरक्षा की चिंता किए बिना अपने पेशेवर करियर को आगे बढ़ा सकें। राष्ट्रीय महिला आयोग ने पिछले माह ऐप-आधारित और डिजिटल परिवहन सेवाओं का उपयोग करने वाली महिला यात्रियों की सुरक्षा के लिए दिशानिर्देश जारी किए थे।
इनमें चालकों का अनिवार्य पुलिस सत्यापन, सभी कैब में आपातकालीन सहायता के लिए पैनिक बटन, रात में अतिरिक्त सुरक्षा उपाय तथा मार्ग बदलने या संदिग्ध रूप से वाहन रोके जाने की तत्काल सूचना देने की सिफारिश की गई है। इसके अलावा, चौबीसों घंटे संचालित नियंत्रण केंद्र, आपातकालीन संकेत मिलने पर 60 सेकंड के भीतर कार्रवाई और उत्पीड़न व दुर्व्यवहार की शिकायतों के समयबद्ध निपटारे का भी सुझाव दिया गया है। राहटकर ने कहा कि देश में कामकाजी महिलाओं की संख्या बढ़ रही है और उनके काम पर आने-जाने के दौरान सुरक्षा व गरिमा सुनिश्चित करना उतना ही महत्वपूर्ण हो गया है जितना कि कार्यबल में उनके लिए अवसरों का विस्तार करना।
उन्होंने कहा, ‘‘मुझे विश्वास है कि कैब के संबंध में हमने जो कदम उठाया है, वह बेहद उपयोगी साबित होगा। हमारे देश में कामकाजी महिलाओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है। आज बड़ी संख्या में महिलाएं अपने घर को संभालते हुए अपने करियर को आगे बढ़ा रही हैं और आर्थिक रूप से स्वतंत्र हो रही हैं।’’ राहटकर ने कहा कि रक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी सहित विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी ने सुरक्षा उपायों को मजबूत करना आवश्यक बना दिया है ताकि वे बिना किसी डर के काम कर सकें।
उन्होंने चार श्रम संहिताओं का भी उल्लेख करते हुए कहा कि वे महिलाओं को कई अधिकार प्रदान करती हैं तथा कार्यबल की बदलती आवश्यकताओं को दर्शाती हैं। राहटकर ने स्पष्ट किया कि रात की पाली में काम करने वाली महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी उनके संबंधित संस्थानों या संगठनों की है। उन्होंने कहा, ‘‘श्रम संहिताएं अब महिलाओं को रात्रि पाली में काम करने की अनुमति देती हैं, और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी उनके संबंधित संगठनों की है।
इस तरह के कई बदलाव हो रहे हैं।’’ उन्होंने कहा कि आयोग ने यह महसूस किया कि जैसे-जैसे अधिक महिलाएं काम के सिलसिले में घरों से बाहर निकल रही हैं और आने-जाने के लिए ऐप-आधारित कैब तथा परिवहन के अन्य साधनों पर निर्भर हो रही हैं, वैसे-वैसे उनकी सुरक्षा के लिए अतिरिक्त कदम उठाने की आवश्यकता है। राहटकर ने कहा, ‘‘मुझे पूरा विश्वास है कि हमारे द्वारा किए गए प्रयास बहुत प्रभावी साबित होंगे। इन सिफारिशों पर उचित विचार किया जाएगा और मुझे उम्मीद है कि इन्हें प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा।’’
Karnataka में गन्ने के लिए ₹5,500 प्रति टन की मांग, केंद्र से दखल की अपील
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने केंद्र सरकार से गन्ने का एक निश्चित मूल्य तय करने की मांग की है। राज्य के कई जिलों में किसान अपनी उपज के लिए 5,500 रुपये प्रति टन की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। ये प्रदर्शन 6 नवंबर को किसान संगठनों द्वारा आयोजित राज्यव्यापी बंद के दौरान हुए। शिवकुमार ने बताया कि उन्होंने इस मुद्दे को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने उठाया है और उन्हें इस प्रस्ताव के बारे में पत्र भी लिखा है। उन्होंने आगे कहा कि केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने भी इस मामले को सुलझाने का आश्वासन दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह केंद्र सरकार का मामला है - उन्हें ही गन्ने का दाम और कीमत तय करनी है। मैंने प्रधानमंत्री से अपने प्रस्ताव के बारे में बात की है और उन्हें पत्र भी लिखा है। जोशी जी ने भी कहा है कि वे कोशिश कर रहे हैं।
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इससे एक दिन पहले, शिवकुमार ने राज्य के बुनियादी ढांचे, सिंचाई और गन्ना किसानों से जुड़ी चिंताओं को दूर करने के लिए प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप की मांग की थी। यह घटनाक्रम कन्नड़ राज्योत्सव के मौके पर दोनों नेताओं के बीच हुए पत्रों के आदान-प्रदान के बाद सामने आया है। मुख्यमंत्री ने आग्रह किया कि किसानों के आंदोलन को प्रतिष्ठा का मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि कर्नाटक सरकार समाधान निकालने के लिए फैक्ट्री मालिकों और मंत्रियों के साथ बातचीत कर रही है। उन्होंने कहा कि हमने गन्ना किसानों के विरोध प्रदर्शन को लेकर एक अनुरोध किया है। हमें किसानों के मामले को प्रतिष्ठा का मुद्दा नहीं बनाना चाहिए।
उन्होंने बताया कि हाल ही में फैक्ट्री मालिकों और राज्य के मंत्रियों के बीच बातचीत हुई है। उन्होंने आगे कहा कि आज फैक्ट्री मालिकों और हमारे मंत्रियों ने बैठकर चर्चा की। मैंने उनसे अनुरोध किया है। वे पेराई (क्रशिंग) के लिए सुरक्षा मांगने अदालत भी गए हैं। हम आज अदालत में इस मामले को लेकर भी पक्ष रख रहे हैं। शिवकुमार ने प्रदर्शन कर रहे किसानों से अपील की कि वे अपनी मांगें रखते समय शालीनता बनाए रखें और सरकार के प्रति टकराव वाला रवैया न अपनाएं। उन्होंने कहा, "लेकिन अगर आप सरकार से भिड़ जाएं और कहें कि 'हम नहीं देंगे, हम विधानसभा से नहीं हटेंगे' - तो ऐसा नहीं होना चाहिए। थोड़ी शालीनता होनी चाहिए। किसी मीटिंग में जाकर 'अरे, इधर आओ' कहना - हमारे किसानों की तरफ से ऐसा असम्मानजनक व्यवहार नहीं होना चाहिए। मैं बस यही कह रहा हूं।"
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13 नवंबर को बेंगलुरु मेट्रो के उद्घाटन के लिए प्रधानमंत्री मोदी के कर्नाटक दौरे के बारे में शिवकुमार ने बताया कि राज्य सरकार ने ही उन्हें आमंत्रित किया है। उन्होंने इस परियोजना का श्रेय लेने की कोशिश करने के लिए भाजपा की आलोचना करते हुए कहा कि अभी कई त्योहार हैं, इसलिए प्रधानमंत्री 13 तारीख को हमारी मेट्रो के लिए आ रहे हैं। हमने खुद ही उनसे आने का अनुरोध किया था। इसमें भाजपा का क्या लेना-देना है? वे बस पब्लिसिटी बटोरने की कोशिश कर रहे हैं। हमने उन्हें बुलाया है। यह हमारा पैसा है, जनता का पैसा है। हमने कर्ज लेकर इसे बनाया है। 13 तारीख को हम उनके सामने कुछ मुद्दे रखेंगे।
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