क्या बारिश में धुल जाएगा भारत और न्यूजीलैंड का दूसरा वनडे मैच, जानिए क्या कहती है वेलिंगटन की वेदर रिपोर्ट
IND vs NZ 2nd ODI Weather Report: शुभमन गिल की कप्तानी में टीम इंडिया न्यूजीलैंड के साथ पांच मैचों वनडे सीरीज खेल रही है. इस सीरीज का पहला मैच टीम इंडिया ने ऑकलैंड में 5 विकेट से जीत था. अब बारत और न्यूजीलैंड के बीच खेले जाने वाले दूसरे वनडे मैच को लेकर फैंस काफी ज्यादा उत्साहित हैं. भारत और न्यूजीलैंड के बीच दूसरा वनडे मैच 7 नवंबर यानी शनिवार को वेलिंगटन के स्काई स्टेडियम में खेला जाने वाला है. इन दोनों टीमों के बीच मुकाबला सुबह 7:30 बजे से खेला जाएगा.
भारत और न्यूजीलैंड के बीच बुधवार को ऑकलैंड में खेला गया पहला वनडे मैच बारिश की वजह से प्रभावित रहा था. इस मुकाबले को भारतीय क्रिकेट टीम ने अंत में पांच विकेट से अपने नाम करके सीरीज में 1-0 की बढ़ बना ली थी. अब भारत और न्यूजीलैंड के बीच होने वाले दूसरे वनडे मैच पर भी बारिश का साया है. तो आइए आज हम आपको बताते हैं कि, भारत और न्यूजीलैंड के बीच होने वाला दूसरा वनडे मैच भी क्या बारिश के चलते धुल जाएगा. आइए जानते हैं.
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मैच से ठीक एक दिन पहले हुई बारिश
वेलिंगटन में शुक्रवार को पहले हाफ बारिश हुई. इससे मैच के दौरान बारिश के भी आसार बढ़ गए हैं. शुक्रवार को हुई बारिश के चलते दोनों टीमों को अपनी ट्रेनिंग सत्र की योजना में बदलाव करना पड़ा है. अब भारत और न्यूजीलैंड मैच वेन्यू हेनरी स्टेडियम की जगह बेसिन रिजर्व में ट्रेनिंग करनी थी. न्यूजीलैंड ने अपना अभ्यास सत्र वेलिंगटन कॉलेज की इनडोर जगह पर शिफ्ट कर दिया, जबकि भारत ने अभ्यास सत्र रद्द कर दिया. अब मैच के दिन भी बारिश का भारी अनुमान है.
Shubman Gill with Gurnoor Brar and Ishan Kishan in New Zealand today. ❤️ pic.twitter.com/qFu3fsrCRW
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वेलिंगटन की वेदर रिपोर्ट
भारत और न्यूजीलैंड के बीच होने वाले दूसरे वनडे मैच से पहले, मौसम विभाग के अनुसार शनिवार को दिन के पहले हाफ में बारिश की 60 प्रतिशत और दूसरे हाफ में 55 प्रतिशत संभावना है. अगर बारिश होती है, तो मैच के बुरी तरह प्रभावित होगा. ऐसे में इस मैच पर भारी बारिश का खतरा है. इस मैच में बारिश फैंस के रोमांच में मजा किरकिरा कर सकती है.
बता दें कि, बारिश की वजह से पहले वनडे का परिणाम भी डीएलएस नियम के तहत निकल सका था न्यूजीलैंड पहले बल्लेबाजी करते हुए 40.2 ओवर में 185 रन पर सिमट गई. भारतीय टीम की बल्लेबाजी के दौरान बारिश की वजह से दो बार खेल रोकना पड़ा. दूसरी बार खेल रोके जाने के बाद भारतीय टीम को 32 ओवर में जीत के लिए संशोधित लक्ष्य 143 का मिला.
A moment for the quicks ???? pic.twitter.com/PpJBiM0WBB
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भारत और न्यूजीलैंड का वनडे स्क्वाड
भारत : रोहित शर्मा, शुभमन गिल (कप्तान), विराट कोहली, श्रेयस अय्यर, अक्षर पटेल, केएल राहुल (विकेट कीपर), नमन धीर, अंशुल कंबोज, औकिब नबी, गुरनूर बराड़, अर्शदीप सिंह, रुतुराज गायकवाड़, मोहम्मद सिराज, ईशान किशन, कुलदीप यादव.
न्यूजीलैंड : विल यंग, टिम सीफर्ट, हेनरी निकोल्स, डेरिल मिशेल, टॉम लैथम (विकेट कीपर), ग्लेन फिलिप्स, मिशेल सेंटनर (कप्तान), नाथन स्मिथ, काइल जैमीसन, जैकब डफी, ब्लेयर टिकनर, निक केली, मैथ्यू फिशर, माइकल ब्रेसवेल, मैट हेनरी.
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पंजाब में बनेगा एग्री-लॉजिस्टिक्स का नया नेटवर्क, रेलवे कॉरिडोर के करीब स्मार्ट कोल्ड चेन से किसानों की फसल को मिलेगा ग्लोबल बाजार
पंजाब को देश का प्रमुख कृषि उत्पादक राज्य माना जाता है. यहां गेहूं और धान के साथ आलू, मक्का, फल, सब्जियां और दूसरी व्यावसायिक फसलों का भी उत्पादन होता है. लेकिन खेती में अच्छी पैदावार हासिल करना ही पर्याप्त नहीं है. खेत से बाजार तक पहुंचने के दौरान फसल की गुणवत्ता बनाए रखना, भंडारण की सही व्यवस्था करना और समय पर माल की आपूर्ति करना भी उतना ही जरूरी है.
इसी चुनौती को अवसर में बदलने के लिए पंजाब में एडवांस्ड एग्रो-लॉजिस्टिक्स और ग्लोबल कोल्ड चेन नेटवर्क विकसित करने का प्रस्ताव अहम हो सकता है.
प्रस्तावः इस प्रस्ताव के तहत एक्सप्रेसवे और रेलवे कॉरिडोर के नजदीक स्मार्ट लॉजिस्टिक्स और रेफ्रिजरेटेड हब बनाने की परिकल्पना है. इसका उद्देश्य कृषि उत्पादों के भंडारण, छंटाई, पैकेजिंग, प्रसंस्करण और परिवहन को एक व्यवस्थित नेटवर्क से जोड़ना है. यदि इस दिशा में ठोस योजना बनती है, तो पंजाब को खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के लिए अधिक आकर्षक बनाया जा सकता है. हालांकि, फिलहाल इस विचार को एक प्रस्ताव के रूप में समझना चाहिए; इसके लिए निवेश, स्थान, समयसीमा और सरकारी प्रोत्साहनों का विस्तृत खाका सामने आना जरूरी होगा.
क्या है स्मार्ट एग्रो-लॉजिस्टिक्स हब का विचार
स्मार्ट एग्रो-लॉजिस्टिक्स हब ऐसा केंद्र होगा, जहां कृषि उत्पादों को खेतों से एकत्र करने के बाद उनकी गुणवत्ता के अनुसार छंटाई, ग्रेडिंग, पैकिंग, ठंडे तापमान में भंडारण और आगे की आपूर्ति की व्यवस्था की जा सके. सामान्य गोदामों के मुकाबले रेफ्रिजरेटेड हब में तापमान और नमी को नियंत्रित करने की सुविधा होती है, जिससे जल्दी खराब होने वाले उत्पादों की गुणवत्ता लंबे समय तक बनाए रखने में मदद मिलती है.
इस नेटवर्क को एक्सप्रेसवे और रेलवे कॉरिडोर के करीब विकसित करने का प्रस्ताव इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि कृषि उत्पादों की आपूर्ति में समय और परिवहन लागत की बड़ी भूमिका होती है. सड़क संपर्क से खेतों और प्रसंस्करण इकाइयों तक माल पहुंचाना आसान हो सकता है, जबकि रेलवे के जरिए बड़ी मात्रा में उत्पादों को लंबी दूरी तक भेजने के विकल्प मिल सकते हैं.
हालांकि, केवल हाईवे या रेलवे के पास हब बना देना पर्याप्त नहीं होगा. इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वहां बिजली की भरोसेमंद आपूर्ति, आधुनिक रेफ्रिजरेशन, डिजिटल ट्रैकिंग, पैकिंग सुविधाएं, स्वच्छता मानक और परिवहन की पर्याप्त उपलब्धता है या नहीं.
फसल की बर्बादी रोकना सबसे बड़ी प्राथमिकता
कटाई के बाद फसल का खराब होना कृषि क्षेत्र की बड़ी चुनौतियों में से एक है. फल और सब्जियों जैसे उत्पादों में तापमान का नियंत्रण न होने, उचित पैकिंग की कमी, परिवहन में देरी और भंडारण की खराब व्यवस्था के कारण नुकसान हो सकता है. इसे पोस्ट-हार्वेस्ट लॉस कहा जाता है.
पंजाब में स्मार्ट कोल्ड चेन नेटवर्क विकसित करने का एक प्रमुख उद्देश्य इसी नुकसान को कम करना हो सकता है. उदाहरण के लिए, आलू की फसल को वैज्ञानिक तरीके से भंडारित किया जाए, तो उसे तुरंत बेचने की मजबूरी कम हो सकती है. इसी तरह फल और सब्जियों को नियंत्रित तापमान में रखा जाए, तो उन्हें दूर के बाजारों तक भेजने के लिए अधिक समय मिल सकता है.
इससे किसानों को बाजार में बेहतर समय चुनने का अवसर मिल सकता है. लेकिन इसका लाभ तभी व्यापक होगा, जब छोटे किसानों और किसान उत्पादक संगठनों यानी एफपीओ को भी इन सुविधाओं तक किफायती पहुंच मिले. यदि हब का उपयोग केवल बड़े खरीदार और बड़ी कंपनियां कर सकें, तो छोटे किसानों के लिए इसका फायदा सीमित रह सकता है.
नेस्ले, पेप्सीको और मेकैन जैसी कंपनियों को आकर्षित करने की रणनीति
इस प्रस्ताव का दूसरा महत्वपूर्ण पक्ष वैश्विक खाद्य प्रसंस्करण कंपनियों को पंजाब में निवेश के लिए आमंत्रित करना है. नेस्ले, पेप्सीको और मेकैन जैसी कंपनियां खाद्य उत्पादों के निर्माण और प्रसंस्करण से जुड़ी हैं. ऐसी कंपनियों को कच्चे माल की नियमित आपूर्ति, गुणवत्ता के स्पष्ट मानक, सुरक्षित भंडारण और कुशल परिवहन की जरूरत होती है.
यदि पंजाब में आधुनिक कोल्ड चेन और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क उपलब्ध होता है, तो खाद्य प्रसंस्करण कंपनियों के लिए उत्पादन इकाइयां स्थापित करने या मौजूदा गतिविधियों का विस्तार करने की संभावनाएं बेहतर हो सकती हैं. आलू आधारित उत्पाद, फ्रोजन फूड, डेयरी, अनाज और दूसरे कृषि उत्पादों की प्रोसेसिंग से जुड़ी इकाइयों को इस तरह के इंफ्रास्ट्रक्चर से लाभ मिल सकता है.
हालांकि, इन कंपनियों को आकर्षित करने के लिए केवल जमीन और गोदाम उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं होगा. निवेशक स्थिर नीतियों, उचित लागत, कुशल श्रमिकों, पानी और बिजली की उपलब्धता, गुणवत्ता नियंत्रण और बाजार तक पहुंच को भी महत्व देते हैं. इसलिए सरकार को इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ निवेश प्रक्रिया को सरल बनाने और उद्योगों के लिए भरोसेमंद कारोबारी माहौल तैयार करने पर भी ध्यान देना होगा.
यह भी स्पष्ट करना जरूरी है कि इन कंपनियों के नाम प्रस्तावित रणनीति के उदाहरण हैं. जब तक संबंधित कंपनियों की ओर से निवेश की औपचारिक घोषणा या सरकार की ओर से समझौते की जानकारी सामने न आए, तब तक यह नहीं माना जा सकता कि उन्होंने पंजाब में नए हब बनाने का फैसला कर लिया है.
किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए फायदेमंद
अगर लॉजिस्टिक्स नेटवर्क सही ढंग से विकसित होता है, तो इसका असर खेत से लेकर प्रसंस्करण उद्योग और खुदरा बाजार तक दिखाई दे सकता है. पहला संभावित लाभ फसल की बर्बादी में कमी है.
दूसरा, किसानों को अपनी उपज की छंटाई और ग्रेडिंग के बाद अलग-अलग बाजारों में बेचने के विकल्प मिल सकते हैं.
तीसरा लाभ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों के रूप में सामने आ सकता है. कोल्ड स्टोरेज संचालन, पैकेजिंग, गुणवत्ता जांच, खाद्य प्रसंस्करण, ट्रक परिवहन और डिजिटल सप्लाई चेन प्रबंधन में काम बढ़ सकता है. इससे कृषि पर निर्भर परिवारों के लिए गैर-कृषि रोजगार के अवसर भी बन सकते हैं.
इसके अलावा, यदि स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित होती हैं, तो कच्चे कृषि उत्पादों के बजाय मूल्यवर्धित उत्पादों की आपूर्ति बढ़ सकती है. उदाहरण के लिए, केवल आलू बेचने के बजाय उससे फ्रोजन या प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं.
इससे राज्य के कृषि-आधारित उद्योगों को विस्तार का अवसर मिल सकता है. लेकिन किसानों को वास्तविक लाभ पहुंचाने के लिए पारदर्शी खरीद व्यवस्था, उचित भुगतान, गुणवत्ता के स्पष्ट मानक और छोटे उत्पादकों के साथ निष्पक्ष अनुबंध जरूरी होंगे. केवल उद्योगों का निवेश बढ़ना अपने आप किसानों की आय में वृद्धि की गारंटी नहीं देता.
पंजाब को भी मिलेगा फायदा
एडवांस्ड एग्रो-लॉजिस्टिक्स और ग्लोबल कोल्ड चेन नेटवर्क का प्रस्ताव पंजाब की कृषि को उत्पादन-केंद्रित मॉडल से आगे बढ़ाकर भंडारण, प्रसंस्करण और बाजार-केंद्रित मॉडल की ओर ले जाने का अवसर दे सकता है. एक्सप्रेसवे और रेलवे के पास स्मार्ट हब बनाने से कृषि उत्पादों की आवाजाही व्यवस्थित हो सकती है और खाद्य प्रसंस्करण कंपनियों के लिए राज्य की उपयोगिता बढ़ सकती है.
यही नहीं पंजाब सिर्फ कच्चा अनाज बेचने वाले राज्य से ऊपर उठकर एक ग्लोबल 'फूड प्रोसेसिंग और सप्लाई चेन' का केंद्र के तौर पर भी विकसित होगा. इसका सबसे बड़ा फायदा प्रदेश के किसानों को होगा. क्योंकि इस योजना के तहत किसानों की आय भी दोगुनी होगी.
सरकार के सामने ये है चुनौतियां
इस तरह के नेटवर्क को विकसित करने के लिए शुरुआती निवेश बड़ा हो सकता है. जमीन, रेफ्रिजरेशन उपकरण, बिजली, परिवहन और डिजिटल प्रबंधन की लागत को देखते हुए सार्वजनिक और निजी निवेश के बीच संतुलन बनाना होगा. साथ ही, छोटे और मध्यम उद्यमों के लिए भी इन सुविधाओं का इस्तेमाल किफायती बनाना जरूरी होगा.
कोल्ड चेन का संचालन ऊर्जा पर निर्भर करता है. इसलिए बिजली की लागत और आपूर्ति में बाधा परियोजना की आर्थिक व्यवहार्यता को प्रभावित कर सकती है. नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा-कुशल उपकरण और आधुनिक तापमान निगरानी प्रणाली इस चुनौती को कम करने में मदद कर सकती हैं.
एक और अहम सवाल यह है कि किन फसलों के लिए किस तरह की सुविधाओं की जरूरत है. आलू, डेयरी, फल, सब्जियों और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों की भंडारण जरूरतें एक जैसी नहीं होतीं. इसलिए हब का स्थान और क्षमता तय करने से पहले फसल उत्पादन, मौसमी मांग, बाजार और मौजूदा भंडारण क्षमता का अध्ययन करना होगा.
यदि इन पहलुओं पर ध्यान दिया जाता है, तो पंजाब का कृषि क्षेत्र सिर्फ अनाज उत्पादन तक सीमित रहने के बजाय मूल्यवर्धित खाद्य उत्पादों, आधुनिक आपूर्ति श्रृंखला और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जुड़ने की दिशा में निश्चित तौर पर आगे बढ़ सकता है.
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