भगवान वाल्मीकि: जिन्होंने श्रीराम के आदर्शों को शब्दों में ढाला
रामलीला का मंच सजने से पहले हर साल एक परंपरा निभाई जाती है। कई रामलीला समितियां पंजाब के अमृतसर में बने भगवान वाल्मीकि तीर्थ स्थल (राम तीर्थ) जाती हैं और वहां से पवित्र जल व अखंड ज्योति लेकर लौटती हैं। यह भगवान वाल्मीकि का आश्रम था, जहां माता सीता ने निवास किया और लव-कुश का जन्म हुआ। राम के चरित्र का मंचन उस भूमि के आशीर्वाद से शुरू होता है, जहां से राम कथा निकली। आश्विन पूर्णिमा को आने वाली वाल्मीकि जयंती इसी स्मरण का दिन है।
ऋषिपुत्र, जिन्होंने साधना से पहचान बनाई
भगवान वाल्मीकि ऋषि प्रचेता के पुत्र हैं। ऋषि के घर जन्म लेने भर से उनका मार्ग आसान नहीं हुआ। उन्होंने इतनी कठोर तपस्या की कि उनके शरीर पर दीमक की बांबी, यानी वल्मीक, बन गई। इसी से वे "वाल्मीकि" कहलाए। उनका जीवन बताता है कि साधना और संकल्प से मनुष्य अपनी पहली पहचान से आगे बढ़ सकता है।
राम जी को संसार तक पहुंचाने वाली लेखनी
आज घर-घर में भगवान श्रीराम का नाम है, तो इसकी नींव वाल्मीकि की रामायण ने रखी। उन्होंने केवल घटनाएं नहीं दर्ज कीं। उन्होंने श्रीराम के जीवन को आदर्शों के रूप में सामने रखा:
• पिता के वचन के लिए राजपाट छोड़ देने का त्याग
• वनवास के कष्टों में धैर्य
• शबरी के जूठे बेर स्वीकार करने की विनम्रता
• शत्रु के प्रति भी मर्यादा
• प्रजा के विश्वास को अपने सुख से ऊपर रखने की भावना
बाद में कई भाषाओं के कवियों ने राम को अपने ढंग से गाया, पर सबकी जड़ में वही आदिकाव्य है। इसीलिए भगवान वाल्मीकि को आदिकवि कहा जाता है। उन्होंने राम के जीवन आदर्शों को काव्य का रूप दिया।
सीता के संबल और लव-कुश के गुरु
वाल्मीकि केवल कथाकार नहीं थे। जब लोकापवाद के कारण माता सीता को वन जाना पड़ा, तब उन्हें आश्रय उनके आश्रम में मिला। जिस घड़ी में अपने भी दूर हो गए, उस घड़ी में एक ऋषि बिना किसी शर्त के सहारा बने। वहीं लव और कुश का जन्म हुआ। भगवान वाल्मीकि ने दोनों को शिक्षा, संस्कार और शस्त्र-विद्या दी। यही बालक आगे चलकर रामकथा का गान करते हुए अयोध्या पहुंचे। रचयिता का सिखाया गायन उन्हीं के शिष्यों के स्वर में लौटकर राम के दरबार तक पहुंचा।
समरस जीवन और सबकी सहभागिता
उनके आश्रम में ऊंच-नीच का कोई भेद नहीं था। राजपुत्र और वनवासी बालक एक ही गुरु से सीखते थे। आज वाल्मीकि जयंती पर निकलने वाली शोभायात्राओं, पूजन, भजन-कीर्तन और रामकथा के आयोजनों में सभी वर्गों के लोग साथ दिखते हैं। यह उसी समरसता की झलक है, जो उनके आश्रम की पहचान थी।
आज हमारे लिए संदेश
जयंती केवल जयकारे लगाने और झांकियां निकालने का दिन नहीं है। भगवान वाल्मीकि ने श्रीराम के आदर्श इसलिए लिखे कि समाज उन्हें अपनाए। इसलिए हमें अपने आसपास देखना चाहिए कि कोई उपेक्षित तो नहीं, किसी के साथ भेदभाव तो नहीं हो रहा, किसी को सहारे की आवश्यकता तो नहीं। जिस परंपरा ने सीता को आश्रय दिया, उसे मानने वाले को दूसरों के लिए आश्रय बनना आना चाहिए। भगवान वाल्मीकि को इससे बड़ी श्रद्धांजलि कोई नहीं हो सकती।
New Zealand दौरे से पहले Rishabh Pant का फिटनेस टेस्ट 9 नवंबर को, तीसरे Test से बाहर
ऋषभ पंत की न्यूजीलैंड दौरे पर भारतीय टेस्ट टीम में वापसी को लेकर अभी तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं हुई है। हालांकि, उनके जल्द फिट होने की उम्मीद जताई जा रही है, लेकिन वह भारत ए और न्यूजीलैंड ए के बीच होने वाले तीसरे अनौपचारिक टेस्ट मैच में शायद ही खेल पाएंगे। यह मुकाबला 7 से 10 नवंबर तक लिंकन में होना है। पंत की फिटनेस का दोबारा आकलन 9 या 10 नवंबर के आसपास किया जाएगा। अगर उन्हें खेलने और यात्रा करने के लिए फिट घोषित किया जाता है, तो वह न्यूजीलैंड जाकर सीधे भारतीय टेस्ट टीम से जुड़ सकते हैं।
मौजूद जानकारी के अनुसार, पंत को भरोसा है कि वह न्यूजीलैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज के लिए उपलब्ध हो सकते हैं। यह सीरीज विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के मौजूदा चक्र का हिस्सा है। भारत और न्यूजीलैंड के बीच पहला टेस्ट 19 नवंबर से वेलिंगटन के बेसिन रिजर्व मैदान पर खेला जाएगा। वहीं, दूसरा मुकाबला 27 नवंबर से 1 दिसंबर तक क्राइस्टचर्च में होना है।
29 वर्षीय पंत अगस्त के आखिर में कोलंबो में श्रीलंका के खिलाफ दूसरे टेस्ट के बाद से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से दूर हैं। इसके बाद उन्हें ईरानी कप में शेष भारत की टीम की कप्तानी सौंपी गई थी, लेकिन फिटनेस संबंधी परेशानी के कारण वह अपना पूरा कार्यक्रम नहीं खेल सके। फिलहाल वह बेंगलुरु स्थित भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में चोट से उबर रहे हैं। उन्हें शरीर के एक तरफ की मांसपेशियों में खिंचाव की समस्या हुई थी।
पंत भारतीय टेस्ट टीम के अहम बल्लेबाजों में गिने जाते हैं। उनके पिछले 3 टेस्ट मैचों में 3 अर्धशतक आए हैं। विकेट के पीछे भी उनकी भूमिका काफी महत्वपूर्ण रहती है। पिछले साल इंग्लैंड दौरे पर भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया था। उस सीरीज के 4 टेस्ट मैचों में पंत ने 479 रन बनाए थे और भारतीय बल्लेबाजी को मजबूती दी थी। ऐसे में न्यूजीलैंड के खिलाफ सीरीज से पहले उनका पूरी तरह फिट होना टीम के लिए अहम माना जा रहा है।
पंत अगले 1-2 दिनों में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में बल्लेबाजी और विकेटकीपिंग का अभ्यास फिर शुरू करना चाहते हैं। हालांकि, अगर उन्हें टेस्ट टीम में शामिल होने की अनुमति मिलती है, तो उनके पास सीरीज से पहले कोई अभ्यास मैच खेलने का मौका नहीं होगा। दूसरी ओर, टीम के कई खिलाड़ी न्यूजीलैंड ए के खिलाफ मुकाबलों के जरिए लाल गेंद से क्रिकेट का अभ्यास कर चुके होंगे। इससे पंत को सीधे टेस्ट मैच में उतरना पड़ सकता है।
बता दें कि पंत को शुरुआत में भारत ए की टीम में 3 चार दिवसीय मुकाबलों के लिए चुना गया था, लेकिन उनकी भागीदारी फिटनेस पर निर्भर रखी गई थी। अब तक उन्हें सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की मेडिकल टीम से औपचारिक मंजूरी नहीं मिली है। सूत्रों के मुताबिक, वह 10 या 11 नवंबर के आसपास न्यूजीलैंड रवाना होने की उम्मीद कर रहे हैं। हालांकि, यात्रा से पहले मेडिकल टीम की अनुमति जरूरी होगी।
इस बीच तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह के भारत ए के तीसरे मुकाबले में खेलने की उम्मीद है। वह 7 नवंबर से लिंकन में शुरू होने वाले मैच के लिए टीम से जुड़ सकते हैं। उनकी उपलब्धता से भारतीय गेंदबाजी को भी अभ्यास का अच्छा मौका मिलेगा। कुल मिलाकर, न्यूजीलैंड सीरीज से पहले पंत की फिटनेस और बुमराह की उपलब्धता पर टीम प्रबंधन की नजर बनी हुई है और अंतिम फैसला मेडिकल मंजूरी के बाद ही लिया जाएगा।
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