Iran-Israel War: देश में और बढ़ सकती है महंगाई, जानें ईरान-इस्राइल युद्ध कैसे आपकी रोजर्मरा की जिंदगी में पैदा करेगा समस्या
Iran-Israel War: पश्चिम एशिया में युद्ध जारी है. युद्ध की वजह से ऊर्जा बाजार हिला हुआ है. युद्ध की वजह से प्राकृतिक गैस और तेल की आपूर्ति बाधित हो गई है. कई देशों को अपना उत्पादन इस वजह से या तो रोकना पड़ रहा है या फिर घटाना पड़ रहा है. दुनिया की सबसे अहम तेल सप्लाई लाइन माने जाने वाली होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही करीब-करीब ठप ही हो गई है.
दुनिया की सबसे बड़ी तेल निर्यातक कंपनी सऊदी अरामको ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द से जल्द होर्मुद स्ट्रेट नहीं खुला तो दुनिया के तेल बाजार को खतरनाक परिणाम देखने पड़ सकते हैं.
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उत्पादन पर बड़ा असर
युद्ध की वजह से कई प्रमुख ऊर्जा परियोजनाएं प्रभावित हुईं हैं. सऊदी अरब ने अपनी रास तनुरा रिफाइनरी का संचालन भी रोक दिया है, जिससे तेल उत्पादन में कटौती हो गई है. इसके अलावा, आबू धाबी स्थित नेशनल ऑयल कंपनी को ड्रोन हमले के बाद अपनी विशाल रुवैस रिफाइनरी बंद करनी पड़ गई. कुवैत ने भी तेल का उत्पादन घटाते हुए फोर्स मेज्योर घोषित कर दिया है. वहीं, इराक के दक्षिणी तेल क्षेत्रों में उत्पादन 43 लाख बैरल प्रतिदिन से घटाकर करीब 13 लाख बैरल ही रह गया है. तेल की कई कंपनियों ने फोर्स मेज्योर घोषित किया है.
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समुद्री परिवहन पर खतरा
स्ट्रेट होर्मुज के पास से गुजरने वाले कई जहाजों पर हमले हो चुके हैं, जिस वजह से अधिकांश टैंकरों ने इस मार्ग से गुजरना बंद कर दिया है. विभिन्न समुद्री बीमा कंपनियों ने भी क्षेत्र के लिए युद्ध जोखिम बीमा रद्द कर दिया है. युद्ध के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका की नौसेना टैंकरों को सुरक्षा प्रदान कर सकती हैं लेकिन हमलों की वजह से अमेरिकी नौसेना ने इसके लिए हामी नहीं भरी है.
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होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने पर महंगाई बढ़ने की चेतावनी
संयुक्त राष्ट्र ने युद्ध और तेल-गैस सप्लाई बाधित होने की वजह से चेतावनी दी है कि अगर होर्मुज स्ट्रेट बंद होता है तो दुनिया भर में खाद्य कीमतों में इजाफा होगा, जिस वजह से जीवन यापन करना महंगा हो सकता है. संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार, होर्मुज स्ट्रेट से समुद्र के रास्ते होने वाले तेल व्यापार का करीब 25 प्रतिशत गुजरता है. तेल के साथ-साथ एलएनजी और उर्वरक भी यहीं से भेजे जाते हैं. जहाज ईंधन, बीमा बढ़ने और माल ढुलाई में इजाफा होने की वजह से ऊर्जा और परिवहन लागत में बढ़ोतरी हो सकती है.
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होर्मुज स्ट्रेट पर कितना निर्भर है भारत
होर्मुज स्ट्रेट भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बहुत अहम है. क्योंकि भारत अपनी जरूरत का 40 से 60 फीसद कच्चा तेल और अधिकांश एलएनजी-एलपीजी इसी स्ट्रेट के माध्यम से आयात करता है. ईरान और ओमान के बीच से गुजरने वाला ये संकरा रास्ता ही खाड़ी देशों से तेल आपूर्ति का भारत के लिए मुख्य मार्ग है. अगर होर्मुज स्ट्रेट में किसी भी प्रकार की रुकावट होती है तो घरेलू ईंधन की कीमतों में इजाफा हो सकता है.
सिर्फ दो महीने का ही भारत के पास तेल भंडार
बता दें, अगर होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह से बंद हो जाता है तो भारत में परेशानी हो सकती है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत के पास महज 74 दिनों का ही तेल रिजर्व है. इमरजेंसी के लिए विशेष रूप से बनाए गए स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व में लगभग 9-10 दिनों का ही तेल है. यानी दो महीने से अधिक का तेल भारत के पास स्टॉक में है. 74 दिनों के भंडार में 25 दिनों का क्रूड ऑयल और 25 दिनों का पेट्रोल डीजल शामिल है. होर्मुज स्ट्रेट से भारत अपनी निर्भरता को कम करने के लिए रूस और अन्य देशों के संपर्क में है.
ईरान पर सख्त हुआ यूएनएससी, खाड़ी देशों पर हमलों की निंदा वाला प्रस्ताव पास
संयुक्त राष्ट्र, 12 मार्च (आईएएनएस)। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) ने बुधवार को खाड़ी देशों पर ईरान के हमलों के खिलाफ प्रस्ताव को पारित कर दिया। इसके बाद तेहरान ने सुरक्षा परिषद के खुलेआम दुरुपयोग की निंदा की। ईरान के खिलाफ ये प्रस्ताव बहरीन की ओर से रखा गया, जिसमें खाड़ी देशों पर ईरान के हालिया मिसाइल और ड्रोन हमलों की निंदा की गई।
इससे पहले बहरीन के संयुक्त राष्ट्र में स्थायी प्रतिनिधि जमाल फारिस अलरोवैई ने कहा था था कि खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के सदस्य देशों ने सामूहिक रूप से ईरान की ओर से दागी गई 954 से अधिक मिसाइलों, 2,500 ड्रोन और 17 विमानों को इंटरसेप्ट किया है। जमाल फारिस अलरोवैई ने कहा था कि तेहरान की निंदा के लिए सुरक्षा परिषद में प्रस्ताव लाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि छह सदस्यीय जीसीसी देशों पर हुए ये हमले व्यापार और समुद्री मार्गों को बाधित कर रहे हैं, जिससे क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है और इसका असर सभी पर पड़ रहा है। ईरानी ने ये हमले आवासीय इमारतों, खाद्य वितरण केंद्रों, हवाई अड्डों, बंदरगाहों, ऊर्जा प्रतिष्ठानों और अन्य महत्वपूर्ण नागरिक ढांचे को निशाना बनाकर किए।
संयुक्त अरब अमीरात के संयुक्त राष्ट्र में स्थायी प्रतिनिधि मोहम्मद अबूशहाब ने कहा कि यूएई ने स्पष्ट कर दिया था कि उसकी जमीन, हवाई क्षेत्र और क्षेत्रीय जल का उपयोग ईरान पर हमले के लिए नहीं किया जाएगा। इसके बावजूद तेहरान ने उनके देश को निशाना बनाया। यूएई ने अपने रक्षा संसाधनों का उपयोग कर इन हमलों का सामना किया और यदि ये क्षमताएं न होतीं तो भारी नुकसान और जान-माल की क्षति हो सकती थी। उन्होंने बताया कि 25 देशों के नागरिक ईरानी हमलों से प्रभावित हुए हैं।
प्रस्ताव में बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और जॉर्डन पर ईरान के हमलों की निंदा की गई इसमें इस बात पर जोर दिया गया है कि ऐसे कृत्य अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन और अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं। बहरीन ने ईरान द्वारा इन देशों के खिलाफ किए जा रहे सभी हमलों को तुरंत बंद करने की मांग की। साथ ही संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 के तहत मान्यता प्राप्त व्यक्तिगत और सामूहिक आत्मरक्षा के अधिकार पर जोर दिया।
इस प्रस्ताव में होर्मुज जलडमरूमध्य और उसके आसपास के क्षेत्रों सहित नागरिकों, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे और वाणिज्यिक जहाजों को जानबूझकर निशाना बनाने की कड़ी आलोचना की गई है।
पाकिस्तान के संयुक्त राष्ट्र राजदूत आसिम इफ्तिखार अहमद ने कहा कि 28 फरवरी को ईरान पर हमलों के बाद अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को गंभीर रूप से खतरे में डाल दिया है।
उन्होंने कहा कि संयुक्त अरब अमीरात पर हुए हमलों में कम से कम दो पाकिस्तानी नागरिकों की जान चली गई और खाड़ी देशों में रहने वाले लाखों अन्य पाकिस्तानी खतरे में हैं। ईंधन की आपूर्ति और आवश्यक विमानन संपर्क भी बाधित हो गए हैं।
उन्होंने कहा, हम शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में आगे बढ़ने के लिए बातचीत और कूटनीति की ओर शीघ्र लौटने का आह्वान करते हैं। फ्रांस के प्रतिनिधि जेरोम बोनाफोंट ने आरोप लगाया कि वर्तमान तनाव बढ़ने के लिए ईरान काफी हद तक जिम्मेदार है। फ्रांस काफी समय से ईरान के परमाणु खतरों से चिंतित रहा है।
बहरीन के इस प्रस्ताव को सुरक्षा परिषद ने 13 वोटों से पारित कर लिया गया, जबकि चीन और रूस ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया। पाकिस्तान ने इस प्रस्ताव के पक्ष में मतदान करते हुए कहा कि वह इन हमलों से अछूता नहीं है। सुरक्षा परिषद ने ईरान के साथ संवाद को सुगम बनाने और विवादों को शांतिपूर्ण ढंग से हल करने के उद्देश्य से जीसीसी देशों और अन्य क्षेत्रीय पक्षों के मध्यस्थता प्रयासों को भी स्वीकार किया।
साथ ही आगे तनाव बढ़ने से रोकने की आवश्यकता पर जोर दिया। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने मध्य पूर्व में स्थिरता और शांति को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की। साथ ही खाड़ी राज्यों और जॉर्डन की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और राजनीतिक स्वतंत्रता के लिए अपने समर्थन को दोहराया।
इससे पहले रूस ने मध्य पूर्व में सैन्य तनाव बढ़ने पर एक मसौदा प्रस्ताव प्रस्तुत किया, जिसमें सभी पक्षों से अपनी सैन्य गतिविधियों को तुरंत रोकने और आगे तनाव बढ़ाने से बचने का आग्रह किया गया था, लेकिन अमेरिका ने इसे वीटो कर दिया।
रूस के इस प्रस्ताव के पक्ष में रूस, चीन, सोमालिया और पाकिस्तान के चार मत प्राप्त हुए, जबकि संयुक्त राज्य अमेरिका और लातविया ने इसके विरुद्ध मतदान किया। यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, बहरीन, कोलंबिया, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो, डेनमार्क, ग्रीस, लाइबेरिया और पनामा सहित नौ सदस्यों ने मतदान से परहेज किया।
--आईएएनएस
वीसी
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