पश्चिम एशिया संकट: कीमतों की स्थिरता के लिए जापान अपने भंडार से निकालेगा तेल: प्रधानमंत्री ताकाइची
टोक्यो, 11 मार्च (आईएएनएस)। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बीच पेट्रोल और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में संभावित वृद्धि को रोकने के लिए जापान आने वाले सोमवार से अपने तेल भंडार को खाली करना शुरू करेगा। जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने बुधवार को यह घोषणा की।
जापान के प्रमुख मीडिया आउटलेट क्योदो न्यूज के अनुसार, ताकाइची ने बुधवार को पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि जापान निजी क्षेत्र के पास रखे गए 15 दिनों के तेल भंडार और फिर सरकार के पास रखे एक महीने के तेल को जारी करेगा, बिना अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) द्वारा कोऑर्डिनेटेड फैसले का इंतजार किए खाली कर देगा।
यह पहली बार है जब जापान अपने सरकारी तेल भंडार को अकेले और अंतरराष्ट्रीय समन्वय के बिना जारी करेगा, जबकि 1978 से तेल भंडारण शुरू हुआ था।
ताकाइची ने कहा कि जापान की मध्य पूर्व पर कच्चे तेल के लिए निर्भरता अन्य देशों की तुलना में अधिक है और आयात इस महीने के अंत या उसके बाद कम होने की संभावना है, इसलिए पेट्रोल और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति में व्यवधान को रोकने के लिए उपायों की आवश्यकता है।
ताकाइची ने यह भी कहा कि घरेलू खुदरा पेट्रोल की औसत कीमत 200 येन प्रति लीटर से अधिक हो सकती है, इसलिए वह सरकार के फंड का उपयोग करके कीमत को लगभग 170 येन पर बनाए रखना चाहती हैं।
उन्होंने कहा, हम समर्थन उपायों की लचीलापन से समीक्षा करेंगे, ताकि जनता को लगातार राहत मिलती रहे, भले ही (मध्य पूर्व की) स्थिति लंबी चले।
जापान अपने तेल का 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सा पश्चिम एशिया से आयात करता है, जिससे होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से उस पर खतरा बढ़ गया है। फरवरी में अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद ईरान की तरफ से तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई।
हॉर्मुज जलसंधि एक संकीर्ण मार्ग है, जो खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है और दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। खाड़ी उत्पादक देशों के कच्चे तेल का एक बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से जाता है, इसलिए इस मार्ग को किसी भी तरह का खतरा वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए बड़ी चिंता है।
दिसंबर के अंत तक जापान के पास 470 मिलियन बैरल तेल भंडार था, जो घरेलू खपत के 254 दिनों के बराबर है। इसमें से 146 दिन का भंडार सरकार के पास, 101 दिन निजी क्षेत्र के पास और बाकी अन्य तेल उत्पादक देशों के साथ साझा भंडार में था।
यह संघर्ष तब शुरू हुआ जब 28 फरवरी को अमेरिका और इजरा/ल के संयुक्त हमलों के बाद ईरान ने ड्रोन और मिसाइल हमले किए, जिनका निशाना अमेरिका के संसाधन, क्षेत्रीय राजधानी और पश्चिम एशिया के सहयोगी बल थे।
--आईएएनएस
एवाई/डीकेपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
UNCOVERED With Manoj Gairola: तेल की कीमतें क्यों बढ़ीं? Hormuz Strait का खेल
UNCOVERED With Manoj Gairola: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब पूरी दुनिया पर दिखने लगा है. तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं और इसका सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जेब पर पड़ सकता है. दरअसल हर अखबार की हेडलाइन यही कह रही है कि तेल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी. वहीं तेल की कीमतें जो जंग शुरू होने से पहले 60 से 70 डॉलर प्रति बैरल हुआ करती थी वो जंग शुरू होने के बाद 90 से 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है. ऐसा नहीं है कि तेल की कीमतों में उछाल जंग का साइड इफेक्ट है. सच तो यह है कि ये ईरान की रणनीति का एक अहम हिस्सा भी है.
जैसा कि हमने पिछले वीडियो में बताया था कि ईरान जानता है कि उसकी लड़ाई दुनिया के सुपरपावर देश यानी अमेरिका से है. जिसके बाद दुनिया की सबसे ज्यादा शक्तिशाली सेना है. इसके अलावा इजरायल भी एक शक्तिशाली देश है. ऐसे में ईरान के पास न तो कोई बड़ी सेना है और न ही नेवी. अब ईरान तेल के खेल से ही इस युद्ध में खड़ा रह सकता है. UNCOVERED के आज के एपिसोड में जानिए Strait of Hormuz की रणनीतिक अहमियत, ईरान की वॉर स्ट्रेटेजी और भारत पर इसके संभावित आर्थिक प्रभाव.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others
News Nation





















