आधार ऑफलाइन वेरिफिकेशन को मिली रफ्तार, यूआईडीएआई से जुड़ीं 300 संस्थाएं, 7.5 करोड़ बार डाउनलोड हुआ आधार ऐप
नई दिल्ली, 5 नवंबर (आईएएनएस)। सरकार ने गुरुवार को बताया कि जनवरी में अपनी शुरुआत के बाद से, भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने 300 ऐसी संस्थाओं (ओवीएसई) को अपने साथ जोड़ा है जो ऑफलाइन सत्यापन (वेरिफिकेशन) की सुविधा देती हैं। इससे नागरिकों के बीच आधार के इस्तेमाल को और बढ़ावा मिला है।
इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, यह उपलब्धि होटल, हॉस्पिटैलिटी, हेल्थकेयर, शिक्षा, इवेंट्स, गिग इकॉनमी और उपभोक्ताओं से सीधे जुड़े क्षेत्रों में आधार-आधारित ऑफलाइन वेरिफिकेशन के इस्तेमाल को बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
इसने आधार ऑफलाइन वेरिफिकेशन मैकेनिज्म के जरिए सुरक्षित, सहमति-आधारित और पेपरलेस वेरिफिकेशन को संभव बनाया है, जिससे सर्विस प्रोवाइडर्स और नागरिकों, दोनों को सशक्त बनाया गया है।
बयान में कहा गया है कि इन ओवीएसई पार्टनर्स का जुड़ना, आधार-आधारित और प्राइवेसी को प्राथमिकता देने वाले डिजिटल वेरिफिकेशन फ्रेमवर्क में बढ़ते भरोसे को दर्शाता है। ये फ्रेमवर्क डीपीडीपी एक्ट के प्रावधानों के अनुरूप, यूजर के कंट्रोल को प्राथमिकता देते हैं, साथ ही आसान एक्सेस और डेटा के न्यूनतम इस्तेमाल (डेटा मिनिमाइजेशन) को सुनिश्चित करते हैं।
यूआईडीएआई नागरिकों के स्मार्टफोन तक जरूरी सेवाएं पहुंचाकर और ऑफलाइन वेरिफिकेशन के लिए संस्थागत इकोसिस्टम का विस्तार करके, नागरिकों और संगठनों के लिए डिजिटल पहचान के अनुभव को मजबूत कर रहा है।
आधार ऐप लगातार लोकप्रिय हो रहा है और अब तक इसके लगभग 7.5 करोड़ डाउनलोड हो चुके हैं। यह भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) और नागरिकों के बीच एक महत्वपूर्ण डिजिटल इंटरफेस के रूप में काम कर रहा है। इस ऐप की मदद से आधार नंबर धारक अपने स्मार्टफोन के जरिए आधार से जुड़ी कई सेवाओं का आसानी से लाभ उठा सकते हैं।
इस ऐप के जरिए कई प्रमुख सेवाओं का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हुआ है। इसमें बिना किसी सेंटर पर जाए, 86 लाख से ज्यादा मोबाइल नंबर अपडेट, 22.16 लाख पते (एड्रेस) अपडेट और 40.25 लाख ईमेल अपडेट शामिल हैं।
ऐप पर 4.6 करोड़ बायोमेट्रिक लॉक/अनलॉक ट्रांजेक्शन भी दर्ज किए गए हैं। यह सुरक्षा फीचर्स के प्रति बढ़ती जागरूकता और उन्हें अपनाने की प्रवृत्ति को दिखाता है, जिससे नागरिकों को अपने बायोमेट्रिक्स के इस्तेमाल पर बेहतर कंट्रोल मिलता है।
इसके अलावा, ऐप पर 3.61 लाख आधार लॉक या अनलॉक ट्रांजेक्शन भी दर्ज किए गए। बायोमेट्रिक लॉक/अनलॉक और आधार लॉक/अनलॉक जैसे फीचर्स, आधार नंबर धारकों को अपनी मर्जी से प्राइवेसी की एक अतिरिक्त परत (लेयर) जोड़ने का विकल्प देते हैं।
ये पहल सरकार के डिजिटल इंडिया विजन और विकसित भारत के लिए सुरक्षित, सुलभ और तकनीक-आधारित सार्वजनिक सेवाओं के जरिए लोगों का जीवन आसान बनाने के व्यापक उद्देश्य के अनुरूप हैं।
--आईएएनएस
एससीएच
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उत्तराखंड राज्य आंदोलन के संघर्ष और संकल्प का अहम दस्तावेज है पुस्तक, आंदोलनकारियों के त्याग एवं बलिदान की मिलेगी जानकारी: CM धामी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को आईआरडीटी सभागार, सर्वे चौक, देहरादून में उत्तराखण्ड राज्य आंदोलन के अग्रणी सेनानी एवं जननायक स्व. रणजीत सिंह वर्मा के जीवन पर आधारित पुस्तक ‘रणजीत सिंह वर्मा: उत्तराखण्ड राज्य आंदोलन की निर्णायक लड़ाई के एक जननायक’ का विमोचन किया. इस अवसर पर सीएम ने स्व. रणजीत सिंह वर्मा को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए राज्य निर्माण आंदोलन में उनके अहम योगदान का स्मरण किया.
आंदोलनकारियों के त्याग एवं बलिदान की जानकारी
सीएम ने पुस्तक के माध्यम से स्व.रणजीत सिंह वर्मा के जीवन, संघर्ष और राज्य निर्माण में उनके योगदान को संजोने के लिए वरिष्ठ साहित्यकार गंभीर सिंह पालनी एवं अजय वर्मा के प्रयासों की सराहना की. उन्होंने कहा कि यह पुस्तक केवल एक जननायक की जीवनगाथा नहीं, बल्कि उत्तराखंड राज्य आंदोलन के संघर्ष और संकल्प का अहम दस्तावेज है. इससे आने वाली पीढ़ियों को राज्य निर्माण के इतिहास और आंदोलनकारियों के त्याग एवं बलिदान की जानकारी मिलेगी.
जनसमर्थन दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य का निर्माण दशकों के संघर्ष और असंख्य आंदोलनकारियों के त्याग एवं बलिदान का परिणाम है. पृथक राज्य की स्थापना लाखों लोगों की आकांक्षाओं और जनभावनाओं की जीत थी. स्व. रणजीत सिंह वर्मा ने पृथक उत्तराखण्ड की मांग को बुलंद करने, लोगों को एकजुट करने और आंदोलन को व्यापक जनसमर्थन दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
आंदोलनकारियों के ठहरने की व्यवस्था में सहयोग किया
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्व. रणजीत सिंह वर्मा ने उत्तराखण्ड संयुक्त संघर्ष समिति के देहरादून जनपद अध्यक्ष के रूप में विभिन्न संगठनों और आंदोलनकारियों को एक मंच पर लाकर आंदोलन को नेतृत्व प्रदान किया. वर्ष 1995-96 और उसके बाद भी उन्होंने देहरादून में आंदोलन को सक्रिय बनाए रखा. बंद, चक्का जाम, जेल भरो और रेल रोको जैसे आंदोलनों का नेतृत्व कर उन्होंने पृथक राज्य की मांग को मजबूती दी. उन्होंने डोईवाला के प्रेमनगर बाजार स्थित अपनी ससुराल को भी आंदोलन का महत्वपूर्ण केंद्र बनाया और पर्वतीय क्षेत्रों से आने वाले आंदोलनकारियों के ठहरने की व्यवस्था में सहयोग किया.
मुख्यमंत्री ने खटीमा, मसूरी और मुजफ्फरनगर की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ये राज्य आंदोलन के इतिहास के अत्यंत पीड़ादायक अध्याय हैं. अनेक कठिनाइयों और यातनाओं के बावजूद आंदोलनकारियों ने अपना संघर्ष जारी रखा. उनके संघर्ष और बलिदान के फलस्वरूप 9 नवम्बर 2000 को उत्तराखण्ड देश के 27वें राज्य के रूप में अस्तित्व में आया.
निःस्वार्थ जनसेवा की प्रेरणा देता है
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्व. रणजीत सिंह वर्मा अविभाजित उत्तर प्रदेश की मसूरी विधानसभा सीट से दो बार विधायक रहे, लेकिन उन्होंने राज्य निर्माण के संकल्प को सर्वोपरि रखा. राज्य गठन के बाद उन्होंने चुनाव नहीं लड़ा और सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहे. उनका जीवन सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्धता और निःस्वार्थ जनसेवा की प्रेरणा देता है.
विकास का लाभ प्रत्येक नागरिक तक पहुंचे
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों के योगदान को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के साथ ही उनके सपनों को साकार करना हम सभी की जिम्मेदारी है. राज्य सरकार प्रदेश के समग्र विकास, सुशासन, आत्मनिर्भरता और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए निरंतर कार्य कर रही है. हमारा संकल्प ऐसा उत्तराखण्ड बनाना है, जहां युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर मिलें, मातृशक्ति आत्मनिर्भर बने और विकास का लाभ प्रत्येक नागरिक तक पहुंचे.
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों के सपनों के अनुरूप विकसित और समृद्ध उत्तराखण्ड का निर्माण ही स्व. रणजीत सिंह वर्मा और राज्य निर्माण के लिए संघर्ष करने वाले सभी आंदोलनकारियों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी. उन्होंने राज्य आंदोलन के सभी शहीदों को नमन करते हुए समस्त आंदोलनकारियों के योगदान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की. इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री श्री सुबोध उनियाल, हंस फाउंडेशन की संस्थापक माता मंगला, वरिष्ठ साहित्यकार श्री गंभीर सिंह पालनी, श्री अजय वर्मा सहित राज्य आंदोलनकारी, जनप्रतिनिधिगण एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे.
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