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श्रीलंका के व्यवसायी का चीनी 'चाय व्यापारी' के रूप में सफर

बीजिंग, 11 मार्च (आईएएनएस)। चीन में आयोजित एनपीसी और सीपीपीसीसी के वार्षिक सत्रों के दौरान “उच्च-स्तरीय खुलापन” एक ऐसा विषय बन जाता है, जिसकी चर्चा न केवल सम्मेलन कक्षों के भीतर होती है बल्कि बाहर भी व्यापक रूप से होती है। यह मुद्दा दुनिया भर के व्यापारिक समुदाय के लिए भी विशेष रुचि का विषय है। इसी संदर्भ में श्रीलंका से आए व्यवसायी जिनलांगा की कहानी चीन और श्रीलंका के बीच बढ़ते आर्थिक सहयोग की एक दिलचस्प झलक पेश करती है।

जिनलांगा पिछले दो दशकों से अधिक समय से चीन में आयात-निर्यात व्यापार से जुड़े हुए हैं। उनका कहना है कि वर्ष 2026 चीन की 15वीं पंचवर्षीय योजना का पहला वर्ष है और इस दौरान “उच्च-स्तरीय खुलेपन” को लेकर दोनों सत्रों में हो रही चर्चाएं उनके लिए विशेष महत्व रखती हैं। उनके अनुसार यह नीति श्रीलंका के कृषि उत्पादों के लिए चीन के विशाल बाज़ार में नई संभावनाएँ खोल सकती है और इससे श्रीलंकाई उत्पादों की बाज़ार हिस्सेदारी बढ़ने की उम्मीद है।

जिनलांगा का सफर भी अपने आप में उल्लेखनीय है। एक अंतरराष्ट्रीय छात्र के रूप में चीन आने से लेकर सफल व्यापारी बनने तक की उनकी यात्रा ने उन्हें व्यापार की नई राहें दिखाईं। पारंपरिक ऑफ़लाइन व्यापार से आगे बढ़ते हुए उन्होंने लाइव-स्ट्रीमिंग ई-कॉमर्स जैसे आधुनिक माध्यमों को भी अपनाया।

उनके अनुसार हाल के वर्षों में सीमा शुल्क निकासी की प्रक्रिया तेज और अधिक सुविधाजनक हो गई है। इसके साथ ही व्यापार के नए चैनल भी उपलब्ध हुए हैं। उदाहरण के तौर पर, श्रीलंका की प्रसिद्ध सीलोन चाय, काजू और नारियल से बने उत्पाद अब सीमा-पार ई-कॉमर्स और लाइव-स्ट्रीमिंग के माध्यम से सीधे श्रीलंका के कारखानों से चीनी उपभोक्ताओं तक पहुंच रहे हैं। इससे न केवल व्यापार का दायरा बढ़ा है बल्कि डिलीवरी का समय भी लगभग आधा रह गया है।

(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

--आईएएनएस

डीकेपी/

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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देश में कोयले का भंडार रिकॉर्ड 210 मिलियन टन तक पहुंचा, 88 दिनों के लिए पर्याप्त: सरकार

नई दिल्ली, 11 मार्च (आईएएनएस)। इस साल देश में कोयले का उत्पादन और सप्लाई खपत से ज्यादा रही है, जिसके कारण खदानों और थर्मल पावर प्लांट्स में कोयले का भंडार रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। सरकार ने बुधवार को यह जानकारी दी।

कोयला मंत्रालय के अनुसार, देश में कुल कोयला भंडार लगभग 210 मिलियन टन (एमटी) हो गया है, जो मौजूदा खपत दर के हिसाब से करीब 88 दिनों की जरूरत पूरी करने के लिए पर्याप्त है।

सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) की खदानों में 1 अप्रैल 2025 को 106.78 मिलियन टन कोयला स्टॉक था, जो 9 मार्च 2026 तक बढ़कर 121.39 मिलियन टन हो गया।

इसके अलावा सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड (एससीसीएल) की खदानों में करीब 6 मिलियन टन कोयला उपलब्ध है, जबकि कैप्टिव और कमर्शियल खदानों में 15.12 मिलियन टन कोयला मौजूद है।

मंत्रालय के अनुसार, वर्तमान में करीब 14 मिलियन टन कोयला ट्रांजिट में है, यानी परिवहन के दौरान है। इस तरह खदानों और सप्लाई चेन में कुल कोयला भंडार रिकॉर्ड 156.58 मिलियन टन तक पहुंच गया है।

इसके अलावा 9 मार्च तक थर्मल पावर प्लांट्स में 54.05 मिलियन टन कोयला मौजूद था, जो लगभग 24 दिनों की खपत के लिए पर्याप्त है।

मंत्रालय ने यह भी बताया कि गैर-नियंत्रित (नॉन-रेगुलेटेड) सेक्टर को कोयले की सप्लाई पिछले साल की तुलना में लगभग 14 प्रतिशत बढ़ी है।

सरकार के अनुसार, देश में कोयला उत्पादन लगातार स्थिर गति से जारी है, जिससे खदानों पर स्टॉक बढ़ रहा है और साथ ही रेलवे की लॉजिस्टिक मदद से उपभोक्ताओं तक पर्याप्त सप्लाई भी सुनिश्चित की जा रही है।

कोयला मंत्रालय ने आगे कहा कि वह नीतिगत समर्थन, लगातार गहन निगरानी और हितधारकों के साथ समन्वय के जरिए एक स्थिर और बेहतर प्रदर्शन वाला वातावरण बनाए रखने पर ध्यान दे रहा है।

सरकार के मुताबिक, इन प्रयासों का उद्देश्य देश में कोयले की भरोसेमंद उपलब्धता सुनिश्चित करना, प्रमुख क्षेत्रों में बिना रुकावट संचालन बनाए रखना और बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना है। साथ ही यह विकसित भारत 2047 के दीर्घकालिक राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल करने में भी मदद करेगा।

--आईएएनएस

डीबीपी/

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