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रुपये पर दबाव: डॉलर के मुकाबले 16 पैसे गिरकर 92.01 पर बंद, कच्चे तेल और विदेशी बिकवाली का असर

Rupee vs US Dollar: भारतीय मुद्रा पर बुधवार को दबाव देखने को मिला। भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 16 पैसे कमजोर होकर 92.01 (अस्थायी) के स्तर पर बंद हुआ। विदेशी मुद्रा बाजार के जानकारों के मुताबिक वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल, मजबूत डॉलर और घरेलू शेयर बाजार की कमजोरी ने रुपये को नीचे खींचा।

इंटरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 91.92 के स्तर पर खुला। कारोबार के दौरान यह 91.85 से 92.06 के दायरे में रहा और आखिर में 92.01 पर बंद हुआ। यह पिछले कारोबारी सत्र के मुकाबले 16 पैसे की गिरावट है। दिलचस्प बात यह है कि मंगलवार को रुपया अपने रिकॉर्ड निचले स्तर से उबरते हुए मजबूत हुआ था और 36 पैसे की तेजी के साथ 91.85 पर बंद हुआ था। लेकिन अगले ही दिन वैश्विक संकेत कमजोर होने से फिर दबाव बढ़ गया।

कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता
वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में तेज उछाल भी रुपये के लिए चिंता का कारण बना। अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड वायदा कारोबार में 5.44% बढ़कर 92.58 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया। भारत जैसे तेल आयात करने वाले देश के लिए कच्चे तेल की कीमत बढ़ना आमतौर पर रुपये पर दबाव डालता है।

मजबूत हुआ डॉलर
इस दौरान वैश्विक बाजार में डॉलर भी मजबूत रहा। यूएस डॉलर इंडेक्स, जो छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की ताकत को मापता है, 0.14% बढ़कर 98.96 पर कारोबार कर रहा था। डॉलर की मजबूती आमतौर पर उभरते बाजारों की मुद्राओं को कमजोर करती है।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली
घरेलू शेयर बाजार में कमजोरी और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने भी रुपये पर दबाव बढ़ाया। एक्सचेंज के आंकड़ों के मुताबिक एफआईआई ने मंगलवार को करीब 4672 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। घरेलू बाजार में भी गिरावट देखने को मिली। बीएसई सेंसेक्स करीब 1300 अंक टूटकर 76863.71 पर बंद हुआ जबकि निफ्टी-50 394.75 अंक गिरकर 23866.85 के स्तर पर बंद हुआ।

आगे क्या रहेगा रुख
एक्सपर्ट्स के मुताबिक कमजोर घरेलू बाजार, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और विदेशी निवेशकों की निकासी से रुपये पर दबाव बना हुआ है। साथ ही पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने वैश्विक बाजारों में जोखिम से बचने की भावना बढ़ा दी है। आने वाले समय में बाजार की नजर अमेरिका के महंगाई आंकड़ों यानी सीपीआई डेटा पर भी रहेगी। USD-INR स्पॉट रेट निकट अवधि में 91.70 से 92.40 के दायरे में रह सकता है। कुल मिलाकर वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, महंगा तेल और विदेशी निवेशकों की बिकवाली जैसे कारकों के चलते फिलहाल रुपये पर दबाव बना रहने की आशंका है।

(प्रियंका कुमारी)

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मिडिल ईस्ट में तनाव का असर: गैस कंपनियों के शेयरों में दिखी जोरदार उछाल, कुछ स्टॉक्स 15% तक चढ़े

मुबई। भारत के ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े शेयरों में हाल ही में तेज उछाल देखने को मिला है। खास तौर पर सिटी गैस और एलएनजी से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी है। बाजार में यह तेजी ऐसे समय आई है जब पश्चिम एशिया में चल रहा ईरान और इजराइल के बीच संघर्ष वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित कर रहा है। इसी वजह से भारत में गैस की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ गई है, लेकिन निवेशकों को उम्मीद है कि यदि तनाव जल्द कम होता है तो सप्लाई की स्थिति बेहतर हो सकती है। इसी उम्मीद के चलते कई गैस कंपनियों के शेयरों में जोरदार तेजी दर्ज की गई।

अडाणी टोटल के शेयर सबसे ज्यादा उछले
ऊर्जा क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों में से अडाणी टोटल गैस के शेयरों में सबसे ज्यादा उछाल देखा गया, जहां कीमत में लगभग 15 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई। इसके अलावा गुजरात गैस के शेयर भी करीब 11 प्रतिशत तक चढ़ गए। वहीं पेट्रोनेट एलएनजी, गेल (इंडिया), इंद्रप्रस्थ गैस और महानर गैस जैसी कंपनियों के शेयरों में भी दो प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज की गई है। बाजार में यह तेजी इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि पिछले सप्ताह इन्हीं शेयरों में भारी गिरावट देखने को मिली थी। उस समय मध्य-पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव और आपूर्ति में संभावित बाधा के कारण निवेशकों ने बड़ी मात्रा में बिकवाली की थी।

खाड़ी संकट से वैश्विक ऊर्जा बाजार प्रभावित  
दरअसल पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित किया है। इस क्षेत्र से दुनिया के बड़े हिस्से को तेल और गैस की आपूर्ति होती है। जब भी यहां तनाव बढ़ता है तो ऊर्जा की सप्लाई और कीमतों को लेकर अनिश्चितता पैदा हो जाती है। इसी कारण भारत जैसे देशों में गैस की कीमतों और उपलब्धता पर भी असर पड़ता है। हाल के दिनों में भारत के कुछ शहरों में गैस की कमी की खबरें सामने आई हैं, जिनमें मुंबई और बेंगलुरू भी शामिल हैं। कई रेस्टोरेंट और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों ने चेतावनी दी है कि यदि गैस की कमी जारी रही तो उन्हें अपने संचालन को सीमित करना पड़ सकता है।

वैश्विक स्तर पर बाजार में अस्थिरता बढ़ी 
वैश्विक स्तर पर भी गैस बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार यूरोप में प्राकृतिक गैस की कीमतों में पिछले सप्ताह लगभग 40 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई। यह बढ़ोतरी तब हुई जब कतर एनर्जी ने मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण अपने एक प्रमुख एलएनजी संयंत्र में उत्पादन अस्थायी रूप से रोक दिया। इसके साथ ही फारस की खाड़ी में स्थित महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग स्ट्रेट आफ होर्मुज के बंद होने की आशंका ने भी ऊर्जा बाजार में चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि इस मार्ग से बड़ी मात्रा में तेल और गैस का परिवहन होता है।

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