सेल ने वित्त वर्ष 26 की अप्रैल-फरवरी अवधि में अब तक की सबसे अधिक बिक्री दर्ज की
नई दिल्ली, 11 मार्च (आईएएनएस)। सरकारी स्टील कंपनी स्टील ऑथोरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) ने वित्त वर्ष 26 की अप्रैल-फरवरी अवधि में अब तक की सबसे अधिक बिक्री दर्ज की है। यह जानकारी बुधवार को स्टील मंत्रालय द्वारा दी गई।
कंपनी ने कहा कि महारत्न पीएसयू ने चालू वित्त वर्ष के पहले 11 महीनों में 18.24 मिलियन टन (एमटी) स्टील की बिक्री की है, जो कि सालाना आधार पर 14 प्रतिशत अधिक है।
समान अवधि में सरकारी स्टील कंपनी का कैश कलेक्शन 1.11 लाख करोड़ रुपए रहा है, जो कि पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 10 प्रतिशत अधिक है।
रिटेल बिक्री को लेकर मंत्रालय ने बताया कि इस अवधि के दौरान स्टॉकयार्ड बिक्री और घर-घर डिलीवरी दोनों में मजबूत सुधार हुआ है, जो कंपनी के ग्राहक-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाता है।
स्टील मंत्रालय के अनुसार, अकेले फरवरी 2026 में, सेल ने 1.58 मिलियन टन की कुल बिक्री दर्ज की।
मंत्रालय के अनुसार, कंपनी ने जनवरी 2026 की तुलना में अपने स्टॉक में 1.05 लाख टन की कमी की और अपने ऋण को 1,000 करोड़ रुपए घटाया है।
बाजार की बदलती मांग को देखते हुए, सेल ने प्रमुख क्षेत्रों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए चेकर प्लेट का उत्पादन फिर से शुरू कर दिया है। इस उत्पाद का निर्माण झारखंड स्थित बोकारो स्टील प्लांट में पहली बार किया जा रहा है।
प्रदर्शन पर कंपनी के निदेशक (वाणिज्यिक) का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे ए.के. पांडा ने कहा कि कंपनी बाजार की जरूरतों को पूरा करते हुए अपनी वित्तीय अनुशासन को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
“हम बाजार के साथ तालमेल बिठाने और आगे बढ़ने के लिए तैयार हैं। इन्वेंट्री और कार्यशील पूंजी का कुशलतापूर्वक प्रबंधन करके, हम वित्तीय अनुशासन प्रदर्शित कर रहे हैं जो कंपनी की नींव को मजबूत करता है।”
पांडा ने कहा, “साथ ही, हमारी रिकॉर्ड बिक्री और नकद संग्रह हमारे ग्राहकों के हम पर भरोसे का प्रमाण है।”
--आईएएनएस
एबीएस/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के चलते शेयर बाजार में बड़ी गिरावट; सेंसेक्स 1,342 अंक फिसला, निवेशकों के डूबे 3 लाख करोड़ रुपए
मुंबई, 11 मार्च (आईएएनएस)। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया, जिसके चलते भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख बेंचमार्क एक दिन की तेजी के बाद बुधवार को फिर से गिरावट के साथ लाल निशान में बंद हुए।
कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 1.72 प्रतिशत या 1,342.27 अंक की गिरावट के साथ 76,863.71 पर बंद हुआ। वहीं एनएसई निफ्टी50 1.63 प्रतिशत या 394.75 अंक गिरकर 23,866.85 पर बंद हुआ।
व्यापक बाजार की बात करें तो निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 1.25 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.36 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
सेक्टरवार देखें तो, निफ्टी ऑटो सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला क्षेत्रीय सूचकांक बनकर उभरा, जिसमें 3 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज और निफ्टी प्राइवेट बैंक का प्रदर्शन भी निराशाजनक रहा।
इसके विपरीत, निफ्टी फार्मा क्षेत्रीय सूचकांकों में सबसे अधिक मुनाफे वाला सूचकांक रहा। वहीं, निफ्टी ऑयल एंड गैस और निफ्टी हेल्थकेयर सूचकांक भी बढ़त के साथ बंद हुए।
बुधवार के कारोबारी सत्र में निवेशकों में सतर्कता बनी रही, जिसके चलते सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में 1.5 प्रतिशत से अधिक की गिरावट देखने को मिली। बाजार की इस गिरावट में खासतौर पर बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और ऑटो सेक्टर के शेयरों का बड़ा योगदान रहा।
इंट्राडे कारोबार में सेंसेक्स 1,396 अंक तक गिरकर 76,810.14 के निचले स्तर तक पहुंच गया, जबकि निफ्टी50 करीब 407 अंक गिरकर 23,854.35 तक लुढ़क गया। मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में भी 1.5 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई।
बाजार में इस गिरावट के कारण निवेशकों की संपत्ति को बड़ा झटका लगा। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन पिछले सत्र के लगभग 447 लाख करोड़ रुपए से घटकर करीब 442 लाख करोड़ रुपए रह गया। यानी एक ही दिन में निवेशकों को लगभग 3 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हुआ।
अमेरिका-ईरान युद्ध से जुड़ी घटनाओं के बीच खबरें सामने आईं कि ईरान के तट के पास तीन जहाजों पर मिसाइल जैसे प्रोजेक्टाइल से हमला हुआ। इनमें से एक जहाज में आग लग गई, जिसके बाद जहाज पर मौजूद चालक दल को सुरक्षित बाहर निकालना पड़ा। इस घटना ने वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता और बढ़ा दी।
इंटरकॉन्टिनेंटल एक्सचेंज में एक समय ब्रेंट क्रूड की कीमतों में 5.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और यह 92.96 रुपए प्रति बैरल पर पहुंच गया।
वैश्विक बाजारों की बात करें तो, मध्य-पूर्व में जारी सैन्य कार्रवाई के बीच जहाजों पर हमले की खबरों के बाद तेल की कीमतों में फिर तेजी देखने को मिली। ब्रेंट क्रूड करीब 1.8 प्रतिशत बढ़कर 90 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया, जबकि इससे पहले पिछले सत्र में इसमें लगभग 11 प्रतिशत की गिरावट आई थी। ब्रिटेन की नौसेना ने बताया कि बुधवार को होर्मुज जलडमरूमध्य और फारस की खाड़ी में तीन जहाजों पर हमला हुआ, जिससे समुद्री व्यापार मार्गों पर बाधा की आशंका बढ़ गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और युद्ध से जुड़ी अनिश्चितता फिलहाल वैश्विक वित्तीय बाजारों को प्रभावित करती रहेगी, क्योंकि लंबे समय तक संघर्ष जारी रहने पर तेल और प्राकृतिक गैस की वैश्विक आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
--आईएएनएस
डीबीपी/
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