UGC नियमों पर CJI ने उठाया नीति का सवाल, केंद्र सरकार ने कोर्ट में रखा अपना पक्ष
UGC Rule: देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव रोकने के उद्देश्य से लाए गए यूजीसी के नए नियमों को लेकर एक बड़ा मोड़ सामने आया है. केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि वह इन विवादित नियमों पर नए सिरे से विचार कर रही है. सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को आश्वस्त किया कि सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए एक विशेष समिति के गठन पर भी काम चल रहा है. इस पर मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने स्पष्ट टिप्पणी की कि देश की नीतियां ऐसी होनी चाहिए जिससे हर युवा संतुष्ट और सुरक्षित महसूस करे. अदालत ने सरकार की इस दलील को रिकॉर्ड पर लेते हुए मामले की अगली सुनवाई को चार हफ्तों के लिए आगे बढ़ा दिया है.
कैंपस में समानता और छात्रों की चिंता
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने सरकार का पक्ष रखा. उन्होंने कहा कि सरकार छात्रों की सभी चिंताओं का समग्र समाधान निकालना चाहती है. उनका कहना था कि प्रशासन का मुख्य मकसद यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी वर्ग के छात्र के मन में असंतोष, डर या असुरक्षा की भावना पैदा न हो. कोर्ट ने भी इस बात पर जोर दिया कि शिक्षण संस्थानों का माहौल ऐसा होना चाहिए जहां हर पृष्ठभूमि से आने वाला छात्र खुद को समान समझे. नीति निर्धारण में संतुलन बहुत जरूरी है ताकि सुधार की कोशिशें किसी नए विवाद की वजह न बन जाएं.
रोहित वेमुला और पायल तडवी से जुड़ा मामला
यह पूरा कानूनी विवाद अबेदा सलीम तडवी बनाम भारत संघ और उससे जुड़ी याचिकाओं से संबंधित है. वर्ष 2019 में रोहित वेमुला और पायल तडवी की माताओं ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. इन दोनों होनहार छात्रों ने कैंपस में कथित रूप से गंभीर जातिगत उत्पीड़न और भेदभाव का सामना करने के बाद अपनी जान दे दी थी. इस याचिका में मांग की गई थी कि विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में हाशिए पर खड़े वर्गों के छात्रों की सुरक्षा के लिए कड़े और प्रभावी नियम बनाए जाएं. इसी लंबी कानूनी प्रक्रिया और विचार विमर्श के बाद यूजीसी ने जनवरी 2026 में नए नियमों की अधिसूचना जारी की थी.
नए नियमों पर रोक और पुराना ढांचा
यूजीसी द्वारा 2026 के नियम लागू करने के तुरंत बाद उनके खिलाफ आपत्तियां उठने लगीं. सामान्य वर्ग के छात्रों ने इन नियमों को लेकर अपनी गहरी आपत्ति दर्ज कराई और इसे कोर्ट में चुनौती दी. सुप्रीम कोर्ट ने 29 जनवरी को इन नए नियमों पर अंतरिम रोक लगा दी थी. कोर्ट ने उस समय यह व्यवस्था दी थी कि जब तक इस मामले में कोई ठोस हल नहीं निकलता, तब तक 2012 के पुराने दिशा निर्देश ही प्रभावी रहेंगे. याचिकाकर्ताओं का मुख्य आक्षेप रेगुलेशन 3(1)(c) के तहत तय की गई जातिगत भेदभाव की परिभाषा पर था.
परिभाषा को लेकर उपजा मुख्य विवाद
याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि नए नियमों में भेदभाव की जो रूपरेखा बनाई गई है, उसमें केवल अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग पर ही ध्यान केंद्रित किया गया है. सामान्य वर्ग के छात्रों का कहना था कि इस एकतरफा व्यवस्था से गैर आरक्षित वर्ग के छात्रों के साथ भेदभाव का खतरा बढ़ सकता है और झूठी शिकायतों की आशंका भी बनी रहेगी. दूसरी तरफ, अन्य पक्षों का कहना था कि सदियों से चली आ रही सामाजिक असमानता को खत्म करने के लिए विशेष संरक्षण बेहद जरूरी है. अब सरकार द्वारा समिति बनाकर समीक्षा करने के संकेत के बाद उम्मीद जगी है कि सभी पक्षों को स्वीकार्य समाधान निकाला जा सकेगा.
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क्रेडिट सुइस विलय के बीच यूबीएस ने लंदन में करीब 200 कर्मचारियों की छंटनी की
वैश्विक बैंकिंग समूह यूबीएस ग्रुप एजी ने अपने पूर्व प्रतिद्वंद्वी क्रेडिट सुइस के विलय की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए लंदन में करीब 200 कर्मचारियों की छंटनी की है. कई रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले कुछ सप्ताहों में की गई यह कटौती वेल्थ मैनेजमेंट और इन्वेस्टमेंट बैंकिंग सहित कई व्यावसायिक इकाइयों को प्रभावित करती है.
क्यों की क्रेडिट लुईस के कर्मचारियों की छटनी
रिपोर्ट्स में कहा गया है कि यह नौकरी कटौती मार्च 2023 में सरकारी समर्थन से हुए क्रेडिट सुइस के अधिग्रहण के बाद शुरू किए गए व्यापक पुनर्गठन कार्यक्रम का हिस्सा है. इस अधिग्रहण के बाद यूबीएस के कर्मचारियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई थी, जिसके चलते बैंक ने परिचालन एकीकरण, सिस्टम माइग्रेशन और समान भूमिकाओं को समाप्त करने के लिए बहुवर्षीय योजना लागू की है.
अधिग्रहण के बाद कार्यबल में आई 18 फीसदी की कमी
रिपोर्ट्स के मुताबिक, क्रेडिट सुइस के अधिग्रहण के बाद से यूबीएस के कुल कार्यबल में लगभग 18 प्रतिशत की कमी आ चुकी है. हालांकि विभिन्न विभागों में प्रभावित कर्मचारियों की सटीक संख्या का खुलासा नहीं किया गया है. जानकारी के अनुसार, जिन कर्मचारियों के पद समाप्त किए गए हैं, उनमें से कुछ को बैंक के भीतर अन्य भूमिकाओं में स्थानांतरित किए जाने का अवसर भी दिया जा सकता है. बताया गया है कि यूबीएस ने हालिया छंटनी की जानकारी आंतरिक रूप से कर्मचारियों को दी है.
लागत में बचत हासिल करने की कोशिश
यह कदम यूबीएस की उस रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत वह क्रेडिट सुइस के अधिग्रहण के बाद परिचालन को अधिक कुशल बनाने और लागत में बचत हासिल करने का प्रयास कर रहा है. हाल के वर्षों में यह वैश्विक बैंकिंग उद्योग के सबसे बड़े पुनर्गठन कार्यक्रमों में से एक माना जा रहा है. इस बीच, वैश्विक कॉर्पोरेट जगत में लागत नियंत्रण और पुनर्गठन का दौर जारी है. हाल ही में ग्राफिक डिजाइन प्लेटफॉर्म कैनवा ने भी अपने वैश्विक कार्यबल के लगभग 22 प्रतिशत यानी 1,271 कर्मचारियों की छंटनी की योजना की घोषणा की थी.
कंपनी की मुख्य कार्यकारी अधिकारी और सह-संस्थापक मेलानी पर्किन्स ने कहा था कि यह कदम धीमी होती वृद्धि और तेजी से बदलती तकनीकी परिस्थितियों के बीच दीर्घकालिक विकास सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है. कैनवा के पुनर्गठन में टीमों का एकीकरण, प्रबंधन स्तरों में कमी, भूमिकाओं में बदलाव और कुछ कर्मचारियों का स्थानांतरण भी शामिल है. कंपनी ने प्रभावित कर्मचारियों के लिए सेवरेंस पैकेज, स्वास्थ्य सहायता और करियर ट्रांजिशन सेवाओं की भी घोषणा की है.
स्रोत- आईएएनएस
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