सोने और चांदी के लिए लंबी अवधि का आउटलुक सकारात्मक, गिरावट खरीदारी का मौका: रिपोर्ट
Gold Price: कैलेंडर वर्ष 2026 में काफी उतार-चढ़ाव रहने के बावजूद, मध्यम से लंबी अवधि में सोने और चांदी का आउटलुक सकारात्मक है. साथ ही, कोई भी गिरावट निवेशकों के लिए खरीदारी के मौका है. यह जानकारी गुरुवार को जारी रिपोर्ट में दी गई.
2026 में सोने की कीमतों में दिखा भारी बदलाव
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज की रिपोर्ट में कहा गया है, "2025 में देखी गई काफी हद तक एकतरफा तेजी के विपरीत, 2026 में कीमती धातुओं में कहीं अधिक उतार-चढ़ाव देखने को मिले हैं. इसकी वजह अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर बदलती उम्मीदें, लगातार बनी हुई महंगाई, बॉन्ड यील्ड का ऊंचे स्तर पर रहना और भू-राजनीतिक घटनाक्रम हैं."
सोने में निवेश को लेकर क्या कहते हैं एक्सपर्ट
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज में कमोडिटीज रिसर्च के प्रमुख नवनीत दमानी ने कहा कि सोने की निकट अवधि की चाल अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति, महंगाई के रुझान, अमेरिकी डॉलर में उतार-चढ़ाव और वास्तविक बॉन्ड यील्ड पर निर्भर करेगी. दमानी ने आगे कहा कि केंद्रीय बैंकों द्वारा अपने निवेश में विविधता लाने, लगातार बनी हुई निवेश मांग और वित्तीय अनिश्चितताओं के कारण सोने को एक मजबूत आधार मिल रहा है.
गिरावट के दौरान सोना खरीदने का शानदार मौका
रिपोर्ट में सोने के लिए 'गिरावट पर खरीदारी' की रणनीति अपनाने का सुझाव दिया गया है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, 3,800-3,900 डॉलर प्रति औंस के दायरे को खरीदारी के लिए एक अच्छा स्तर माना गया है, जिसमें अल्पकालिक लक्ष्य 4,200 डॉलर और मध्यम अवधि का लक्ष्य 4,500-4,700 डॉलर तय किया गया है. भारत में 1,35,000 रुपए प्रति 10 ग्राम के स्तर को खरीदारी के लिए उपयुक्त माना गया है. इसके लिए अल्पकालिक लक्ष्य 1,48,000 रुपए और मध्यम अवधि का लक्ष्य 1,60,000-1,68,000 रुपए निर्धारित किया गया है.
रिपोर्ट के अनुसार, ऊंची कीमतों के बावजूद सोने में निवेश की मांग मजबूत बनी हुई है. अगस्त और सितंबर 2026 के दौरान वैश्विक गोल्ड ईटीएफ होल्डिंग्स में लगभग 187 टन की वृद्धि हुई, जिससे यह 4,256 टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई. वहीं, तीसरी तिमाही में इसमें 31 अरब डॉलर का रिकॉर्ड निवेश (इनफ्लो) आया. भारत में, सितंबर महीने में गोल्ड ईटीएफ में निवेश 71 प्रतिशत बढ़कर 44.5 अरब रुपए हो गया, जबकि सिल्वर ईटीएफ में 19.7 अरब रुपए का निवेश आया.
जनवरी में ऑलटाइम हाई पर पहुंचे थे सोने के दाम
जनवरी 2026 में सोने की कीमत लगभग 5,600 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी, जिसके बाद इसमें गिरावट आई और कीमत 4,000 डॉलर से नीचे चली गई, हालांकि बाद में इसमें फिर से सुधार देखने को मिला. चांदी की कीमत भी 100 डॉलर प्रति औंस के पार पहुंच गई थी, जिसके बाद इसमें और भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई.
रिपोर्ट में बताया गया कि भारत में दीपावली और धनतेरस कीमती धातुओं की खरीदारी के लिए सबसे महत्वपूर्ण अवसरों में से हैं. इस दौरान पारंपरिक खरीदारी के तरीकों, शादी-विवाह के सीजन और सोने-चांदी के सांस्कृतिक महत्व के कारण इनकी मांग काफी बढ़ जाती है. ऐतिहासिक प्रदर्शन से भी पता चलता है कि दीपावली से पहले के 30 दिनों में, दीपावली के बाद के 30 दिनों की तुलना में, सोने ने आमतौर पर बेहतर रिटर्न दिया है.
स्रोत- आईएएनएस
वैश्विक स्तर पर एआई स्टॉक्स में गिरावट से भारतीय बाजार विदेशी पूंजी को कर सकता है आकर्षित: उदय कोटक
मुंबई, 5 नवंबर (आईएएनएस)। दिग्गज बैंकर उदय कोटक ने गुरुवार को कहा कि अगर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) में वैश्विक निवेश की तेजी कमजोर पड़ती है, तो भारत में विदेशी पूंजी का नया प्रवाह आ सकता है।
वर्चुअल संबोधन में कोटक महिंद्रा बैंक के संस्थापक ने कहा कि वैश्विक कंपनियों ने एआई से जुड़ी अपनी महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर कर्ज लिया है, जिससे कई मामलों में कंपनियों का मूल्यांकन काफी बढ़ गया है।
कोटक ने कहा, अगर यह रुझान पलटता है, तो भारत को नई विदेशी पूंजी के प्रवाह का फायदा मिल सकता है, क्योंकि देश अपनी एआई क्षमताओं का विकास कर रहा है।
वैश्विक स्तर पर एआई से जुड़ी कंपनियों के शेयरों पर दबाव के बाद भारतीय शेयर बाजार अक्टूबर की शुरुआत के अपने निचले स्तर से करीब 10 प्रतिशत की रिकवरी कर चुके हैं। इसी अवधि में टेक कंपनियों पर केंद्रित एशियाई बाजारों में 7 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई है।
उच्च मूल्यांकन, एआई से जुड़े निवेश के सीमित अवसरों और ऊर्जा की बढ़ती कीमतों के बीच विदेशी निवेशकों ने 2026 में अब तक भारतीय बाजारों से रिकॉर्ड 29 अरब डॉलर की निकासी की है।
कोटक ने कहा कि भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं, वैश्विक बाजारों में उतार-चढ़ाव और विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली के बावजूद घरेलू निवेशकों के लगातार भरोसे की बदौलत भारतीय शेयर बाजार मजबूती से टिके हुए हैं।
उन्होंने कहा कि हालिया गिरावट के बाद दूसरे बाजारों की तुलना में भारत के मूल्यांकन का अंतर कम हुआ है। इससे भारतीय शेयर छह से 12 महीने पहले की तुलना में कम महंगे हो गए हैं। उन्होंने कहा कि देश की मजबूत आर्थिक विकास संभावनाएं अब भी भारत का सबसे बड़ा लाभ हैं।
कोटक ने निवेशकों को सलाह दी कि वे अल्पकालिक उतार-चढ़ाव के पीछे भागने के बजाय मध्यम अवधि के नजरिये से बेहतर गुणवत्ता वाली कंपनियों और जोखिम प्रबंधन पर ध्यान दें।
वहीं, गुरुवार को भारतीय शेयर बाजारों में जोरदार तेजी देखने को मिली। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांक 2 प्रतिशत से अधिक की बढ़त के साथ क्रमशः 79,465.03 और 24,579.90 के इंट्राडे उच्च स्तर पर पहुंच गए।
कारोबार की शुरुआत में सेंसेक्स 1,609.54 अंक यानी 2.08 प्रतिशत की बढ़त के साथ 78,910.94 पर खुला, जबकि निफ्टी 417.45 अंक यानी 1.74 प्रतिशत की तेजी के साथ 24,378.05 पर खुला था।
--आईएएनएस
एबीएस
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