PM Modi in Kochi: 'ब्लू इकोनॉमी' से मछुआरा समुदाय का कायाकल्प, केरल का नाम 'केरलम' करने की मांग को मंजूरी
कोच्चि: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को केरल के कोच्चि में आयोजित अखिल केरल धीवर सभा के स्वर्ण जयंती सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की।
इस विशेष अवसर पर पीएम ने मछुआरा समुदाय को देश की अर्थव्यवस्था का एक मजबूत आधार स्तंभ बताया और 'ब्लू इकोनॉमी' के माध्यम से तटीय क्षेत्रों के सर्वांगीण विकास के लिए अपनी सरकार का संकल्प दोहराया। उन्होंने जोर देकर कहा कि समुद्र की शक्ति को पहचानकर ही हम विकसित भारत के सपने को साकार कर सकते हैं।
The work of Akhila Kerala Dheevara Sabha for the welfare of fishermen is commendable and aligns with NDA’s vision of empowering coastal communities. https://t.co/CqK0QMLAY7
— Narendra Modi (@narendramodi) March 11, 2026
केरल आधिकारिक तौर पर अब 'केरलम'
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक निर्णय की जानकारी साझा करते हुए बताया कि केंद्र की एनडीए सरकार ने राज्य का नाम बदलकर 'केरलम' रखने की दशकों पुरानी मांग को औपचारिक मंजूरी दे दी है।
पीएम ने कहा कि मलयाली संस्कृति और वहां की भाषाई विरासत के अनुसार अब राज्य को उसका वास्तविक और उचित नाम मिल गया है, जिससे न केवल केरल बल्कि पूरे देश में खुशी की लहर है। उन्होंने इसे पिछली सरकारों द्वारा की गई सांस्कृतिक उपेक्षा के अंत के रूप में पेश किया और कहा कि अब मछुआरा समुदाय को भी सम्मान के साथ विकास की मुख्यधारा में लाया जा रहा है।
ब्लू इकोनॉमी का निर्माण और स्वतंत्र मंत्रालय के माध्यम से सशक्तिकरण
तटीय अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए पीएम मोदी ने सरकार द्वारा उठाए गए कड़े कदमों का विवरण पेश किया। उन्होंने बताया कि यह बीजेपी-एनडीए सरकार ही थी जिसने मत्स्य पालन क्षेत्र की विशिष्ट आवश्यकताओं को समझते हुए इसके लिए एक पूर्णतः अलग मंत्रालय का गठन किया।
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत अकेले केरल राज्य के विकास के लिए लगभग 1400 करोड़ रुपये का विशेष प्रावधान किया गया है, जिसका परिणाम आज यहाँ मत्स्य पालन क्षेत्र में हो रही तीव्र प्रगति के रूप में सबके सामने है। उन्होंने मछुआरों के साहस की सराहना करते हुए केरल की बाढ़ के दौरान उनके द्वारा बचाई गई हजारों जिंदगियों को भी याद किया।
सैटेलाइट तकनीक और डिजिटल प्लेटफॉर्म से मछुआरों की सुरक्षा
मछुआरों के कार्यक्षेत्र को सुरक्षित और आधुनिक बनाने के लिए सरकार ने नवीनतम तकनीक का समावेश किया है। पीएम ने बताया कि पहले हमारे मछुआरे भाई-बहन खुले समुद्र में जाते समय मौसम की अनिश्चितता और सुरक्षा को लेकर निरंतर भयभीत रहते थे, लेकिन अब सैटेलाइट आधारित उन्नत तकनीक के माध्यम से उनकी सुरक्षा घेरे को अभेद्य बनाया गया है।
इसके साथ ही, 'राष्ट्रीय मत्स्य डिजिटल प्लेटफॉर्म' की शुरुआत की गई है जो मछुआरों, स्थानीय व्यापारियों और बड़े निर्यातकों को एक ही स्थान पर जोड़ता है, जिससे सरकारी योजनाओं का लाभ सीधा उनके खातों तक पहुँचना और व्यापार करना अत्यंत सुगम हो गया है।
विकसित भारत के निर्माण के लिए विकसित केरलम का महासंकल्प
अपने संबोधन के समापन पर पीएम मोदी ने प्रत्येक परिवार को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का संकल्प दोहराया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि विकसित भारत की मजबूत नींव तभी रखी जा सकती है जब केरल का प्रत्येक तटीय परिवार समृद्ध और आत्मनिर्भर होगा।
प्रधानमंत्री ने मछुआरा समुदाय को आश्वस्त किया कि उनकी क्षमता को असीमित स्तर तक बढ़ाने और उन्हें वैश्विक बाजारों से जोड़ने के लिए सरकार अपनी नीतियों में निरंतर सुधार करती रहेगी, ताकि आने वाला समय मछुआरा समुदाय के लिए स्वर्णिम युग साबित हो सके।
कौन है हरीश राणा? : भारत में पहली बार इच्छा मृत्यु को मिली इजाजत, फैसला सुनाते समय सुप्रीम कोर्ट भावुक
सुप्रीम कोर्ट ने करीब 13 साल से जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे गाजियाबाद के हरीश राणा मामले में अहम फैसला सुनाया है। सर्वोच्च न्यायालय ने उनकी स्थिति को देखते हुए इच्छा मृत्यु की अनुमति दे दी है ताकि उनकी पीड़ा को गरिमा के साथ समाप्त किया जा सके। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह फैसला सिर्फ इसी मामले पर लागू है।
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि हरीश राणा (32) को एम्स के पैलिएटिव केयर विभाग में भर्ती कराया जाएगा। यहां चिकित्सकीय प्रक्रिया के तहत उनका इलाज धीरे-धीरे कम किया जाएगा। निर्देश दिया कि यह प्रक्रिया पूरी गरिमा और सम्मान के साथ पूरी होनी चाहिए।
इच्छा मृत्यु की मांग किसने की?
हरीश राणा को इच्छा मृत्यु देने की मांग उनके माता पिता ने की थी। सुप्रीम कोर्ट ने पिछली सुनवाई के दौरान हरीश के परिवार से बात की। माता पिता ने बताया था कि उनके बेटे की 100 प्रतिशत दिव्यांगता और लंबे समय से चली आ रही चिकित्सकीय स्थिति के चलते बुरी तरह से टूट चुके हैं। उन्होंने कहा कि बेटा पल-पल मर रहा है। इसलिए, उन्होंने उसे इच्छा मृत्यु देने का आग्रह किया।
एम्स से मांगी रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने एम्स से भी इस मामले पर रिपोर्ट मांगी थी। एम्स की रिपोर्ट में बताया गया था कि हरीश के ठीक होने की संभावना नहीं है। सुनवाई के दौरान जस्टिस जे. बी. पारडीवाला ने कहा कि अदालत के लिए यह फैसला आसान नहीं है। लेकिन किसी व्यक्ति को लंबे समय तक असहनीय पीड़ा में रखना भी दुखद स्थिति है। सुप्रीम कोर्ट ने इच्छा मृत्यु देने की मांग पर अपना फैसला सुना दिया।
कौन है हरीश राणा
गाजियाबाद के रहने वाले हरीश राणा 2013 में चंडीगढ़ में पढ़ाई कर रहे थे। इस दौरान वे हॉस्टल की चौथी मंजिल से गर गए। इस हादसे में उनके सिर पर गंभीर चोटें लगीं। तब से वे अचेत अवस्था में बिस्तर पर हैं। लंबे समय तक बिस्तर पर पड़े होने की वजह से शरीर पर भी गंभीर घाव बन गए और स्थिति भी बिगड़ती जा रही है।
कितने प्रकार की होती है इच्छा मृत्यु
सुप्रीम कोर्ट ने हरीश को पैसिव इच्छा मृत्यु देने का फैसला सुनाया है। बताते हैं कि आमतौर पर कितनी प्रकार की इच्छा मृत्यु होती है। पैसिव इच्छा मृत्यु में मरीज का इलाज धीरे-धीरे बंद कर दिया जाता है। जैसे कि मरीज वेंटिलेटर जैसी लाइफ सपोर्ट मशीनों पर निर्भर है तो मशीनों को धीरे-धीरे हटाया जाता है। इसके साथ ही दवाएं भी कम की जाती हैं। ऐसे में कुछ समय बाद ही मरीज की मृत्यु हो जाती है।
वहीं, दूसरी तरह एक्टिव इच्छा मृत्यु भी दी जाती है। इसमें मरीज को ऐसी दवा या इंजेक्शन दिया जाता है, जिससे मरीज की तुरंत मौत हो जाती है। इसे कई देशों में अवैध माना गया है। भारत की बात करें तो यह पहला मौका है, जब किसी मरीज को इच्छा मृत्यु दी गई है, लेकिन माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने यह फैसला सुनाते समय इस पूरी प्रक्रिया को पूरी गरिमा और सम्मान के साथ पूरा करने का आदेश दिया है।
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