बिहार की राजनीति में नया मोड़, चिराग पासवान को मुख्यमंत्री बनाने की मांग तेज; कब होगा नए सीएम का नाम तय?
Bihar New CM: बिहार की राजनीति में इन दिनों बड़ा सियासी हलचल देखने को मिल रही है मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल कर दिया है. इसके बाद से यह चर्चा तेज हो गई है कि अगर वे राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय होते हैं तो बिहार में मुख्यमंत्री की कुर्सी किसे मिलेगी. इस सवाल को लेकर पटना से लेकर दिल्ली तक राजनीतिक हलचल बढ़ गई है और एनडीए के भीतर नए समीकरण बनने की चर्चा शुरू हो गई है.
चिराग को सीएम बनाने की मांग तेज
इसी बीच एनडीए की सहयोगी पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) के कार्यकर्ताओं ने एक नई मांग उठा दी है. पार्टी समर्थकों ने केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान को बिहार का मुख्यमंत्री बनाने की मांग तेज कर दी है. राजधानी पटना की कई सड़कों पर पोस्टर लगाए गए हैं, जिनमें लिखा है- ‘ना दंगा हो, ना फसाद हो, बिहार का सीएम सिर्फ चिराग हो.’ इन पोस्टरों के सामने आने के बाद राज्य की राजनीति में चर्चा और तेज हो गई है. पार्टी के कई नेताओं का कहना है कि बिहार को अब युवा नेतृत्व की जरूरत है. उनका मानना है कि चिराग पासवान नई सोच और ऊर्जा के साथ राज्य को आगे बढ़ा सकते हैं. इससे पहले भी वे ‘बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट’ का नारा देकर चर्चा में रहे हैं.
जल्द हो सकता है नए सीएम का ऐलान
इसी बीच नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार के जेडीयू में शामिल होने से भी नई राजनीतिक चर्चाएं शुरू हो गई हैं. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. हालांकि मुख्यमंत्री का अंतिम फैसला एनडीए के शीर्ष नेतृत्व द्वारा ही किया जाएगा. कयास सगाए जा रहे है कि जल्द ही बिहार के नए सीएम का ऐलान हो सकता है.
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Harish Rana SC Verdict: हरीश राणा कौन हैं? जिसे मिली सुप्रीम कोर्ट से इच्छामृत्यु की अनुमति
Harish Rana SC Verdict: बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए गाजियाबाद के हरीश राणा को इच्छा मृत्यु की अनमुति दे दी है. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने पहली बार ऐसा कोई फैसला सुनाया है. जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. इसके लिए बेंच ने दिल्ली एम्स को निर्देष दिया है कि हरीश राणा तत्काल प्रभाव से अस्पताल में भर्ती करवाया जाए और उसे लाइफ सपोर्ट सिस्टम से हटाने की प्रक्रिया की सुविधा प्रदान की जाएं.
कौन है हरीश राणा? (Who is Harish Rana)
हरीश राणा गाजियाबाद के रहने वाले हैं. उन्होंने साल 2013 में पंजाब यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट थे. दरअसल, वह एक पेइंग गेस्ट हाउस की चौथी मंजिल से गिर गए थे. इस कारण उन्हें गंभीर चोटें आई थी और डॉक्टरों ने उन्हें लाइफ सपोर्ट पर रखा हुआ था. वह सांस लेने के लिए ट्रेकियोस्टॉमी और खाने के लिए गैस्ट्रोजेजुनोस्टॉमी ट्यूब का इस्तेमाल कर रहे हैं. उन्हें एक बेड पर लेटे हुए कई वर्ष हो गए हैं.
पढ़ाई में बड़े होशियार थे हरीश
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि हरीश राणा पंजाब यूनिवर्सिटी में पढ़ाई करने वाले छात्र थे, जो पढ़ाई में काफी होशियार भी थे. वह एक बिल्डिंग से चौथी मंजिल से गिर गए थे. उन्हें ब्रेन इंजरी हुई थी. हरीश को डिस्चार्ज किया गया था मगर ब्रेन इंजरी की वजह से वह लगातार वेजिटेटिव स्टेट में रहते हैं. वह हमेशा दूसरों पर निर्भर रहते हैं और सिर्फ सोने-जागने के साइकिल को महसूस कर पाते थे. मेडिकल रिपोर्ट्स बताती हैं कि उनकी सेहत में पिछले 13 सालों से कोई सुधार नहीं देखा गया है.
Delhi: The Supreme Court has allowed passive euthanasia for Harish Rana, who has been in a vegetative state since 2013.
— IANS (@ians_india) March 11, 2026
Advocate Manish Jain, representing Harish Rana's family, says, "...Harish Rana's petition has been allowed. Permission has been granted to let him remain in a… pic.twitter.com/ynN4HuZ4X3
पैसिव यूथेनेशिया क्या है?
कोर्ट ने हरीश को पैसिव यूथेनेशिया की इजाजत दी है. यह एक मेडिकल टर्म है. आसान भाषा में समझे तो जब किसी को कोई गंभीर बीमारी या असाध्य बीमारी होती है और उसे मशीनों के जरिए लंबे समय तक जिंदा रखा जाता है और डॉक्टरों का मानना होता है कि वे उसे ठीक नहीं कर पाएंगे तो मरीज को लाइफ सपोर्ट सिस्टम रोक दिया जाता है. इसे ही पैसिव यूथेनेशिया कहते हैं. इसमें वेंटिलेटर हटाना, फीडिंग ट्यूब हटाना या जीवन बढ़ाने वाली दवाएं देना बंद करना शामिल होता है.
क्या है इस फैसले का महत्व?
हरीश राणा के पिता अशोक राणा पिछले काफी समय से कोर्ट से अपने बेटे की इच्छा मृत्यु की मांग कर रहे हैं. उन्होंने कोर्ट में तर्क दिया था कि उनका बेटा लंबे समय से कोर्ट में हैं और उसकी सेहत में कोई सुधार नहीं हो रहा है. डॉक्टरों ने उसके ठीक होने की शुन्य संभावना जताई थी. इसलिए, क्यों इलाज के जरिए हरीश की तकलीफ को और बढ़ाया जाए. कोर्ट का यह निर्णय भारत में गरिमापूर्ण मृत्यु के अधिकार और इच्छामृत्यु पर लंबे समय से चल रही कानूनी और नैतिक बहस में एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है. यह उन लोगों के लिए आशा की किरण बन सकता है, जो दीर्घकालिक समय से कोमा में हैं.
इन देशों में है इच्छामृत्यु की अनुमति
दुनिया के कुछ देशों में इच्छामृत्यु को लेकर अलग-अलग कानून बनाए गए हैं. इन देशों में इच्छामृत्यु कानूनी है जैसे नीदरलैंड्स, बेल्जियम, लक्ज़मबर्ग, कोलंबिया. हालांकि, इन देशों में भी सख्त नियमों के तहत इच्छामृत्यु की अनुमति प्रदान की जाती है. साल 2016 में कनाडा ने भी इच्छामृत्यु को मान्यता दे दी थी. अमेरिका में भी कुछ राज्यों में सख्त नियमों के तहत इच्छामृत्यु की अनुमति है.
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