बिहार में ये क्या हो रहा है? स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार के सामने फूटा मरीजों के परिजनों का गुस्सा, बोले-इलाज में चरम पर लापरवाही
बिहार की राजधानी पटना स्थित इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) में उस समय अलग ही नजारा देखने को मिला, जब राज्य के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार नई स्वास्थ्य सुविधाओं का उद्घाटन करने पहुंचे. कार्यक्रम के दौरान अस्पताल में भर्ती मरीजों के परिजनों ने मंत्री को घेर लिया और इलाज में कथित लापरवाही, दवाओं की कमी तथा अव्यवस्थित स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की.
मरीजों के परिजनों ने एक-एक कर अपनी समस्याएं मंत्री के सामने रखीं. अचानक बड़ी संख्या में लोगों के इकट्ठा होने से कुछ देर के लिए अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी जैसी स्थिति बन गई. हालांकि मंत्री ने लोगों की शिकायतों को गंभीरता से सुना और अधिकारियों को जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया.
"मेरी मां की मौत हो गई, समय पर इलाज नहीं मिला"
सबसे भावुक शिकायत एक ऐसे व्यक्ति ने की, जिसने दावा किया कि उसकी मां की अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई. परिजन का आरोप था कि मरीज का रक्तचाप कम था, लेकिन चिकित्साकर्मियों ने सही तरीके से जांच किए बिना उपचार शुरू कर दिया.
उन्होंने कहा कि यदि समय रहते उचित जांच और इलाज होता तो शायद उनकी मां की जान बच सकती थी. इस शिकायत ने वहां मौजूद लोगों का भी ध्यान अपनी ओर खींच लिया और कई अन्य परिजनों ने भी अपनी समस्याएं बतानी शुरू कर दीं.
भर्ती में देरी और इलाज को लेकर उठे सवाल
एक महिला ने मंत्री से शिकायत करते हुए कहा कि अस्पताल में मरीजों को समय पर भर्ती नहीं किया जा रहा है. उनका कहना था कि गंभीर स्थिति होने के बावजूद मरीजों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है.
वहीं कुछ अन्य लोगों ने बताया कि अस्पताल में इतनी लंबी कतारें लगती हैं कि मरीज इलाज मिलने से पहले ही थक जाते हैं. परिजनों का आरोप था कि इलाज की प्रक्रिया काफी धीमी है, जिससे गंभीर मरीजों को अतिरिक्त परेशानी उठानी पड़ रही है.
बाहर से दवा खरीदने की मजबूरी का आरोप
मौके पर मौजूद कई लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि अस्पताल में उपलब्ध होने के बावजूद उन्हें दवाएं बाहर से खरीदने के लिए कहा जाता है.
कुछ परिजनों ने कहा कि आयुष्मान भारत योजना के तहत मुफ्त इलाज का लाभ मिलने की उम्मीद थी, लेकिन कई आवश्यक दवाएं और मेडिकल सामग्री बाहर से खरीदनी पड़ी. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अस्पताल में दवा वितरण व्यवस्था को लेकर पारदर्शिता की कमी है.
मंत्री ने दिए जांच और सुधार के निर्देश
स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने सभी शिकायतों को ध्यानपूर्वक सुना और संबंधित अधिकारियों को पूरे मामले की जांच करने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि यदि कहीं भी लापरवाही या अनियमितता पाई जाती है तो उसके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी.
मंत्री ने अधिकारियों से यह भी कहा कि मरीजों और उनके परिजनों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना प्राथमिकता होनी चाहिए और शिकायतों का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाए.
पांच नई स्वास्थ्य सुविधाओं का किया उद्घाटन
दरअसल, स्वास्थ्य मंत्री IGIMS में कई नई चिकित्सा सुविधाओं का शुभारंभ करने पहुंचे थे. उन्होंने संस्थान के आरआईओ मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर कॉम्प्लेक्स में सीसीटीवी कंट्रोल रूम और सर्वर रूम का उद्घाटन किया.
इसके अलावा क्रिटिकल केयर मेडिसिन (CCM) आईसीयू और आधुनिक डायलिसिस यूनिट समेत कुल पांच नई स्वास्थ्य सुविधाओं का भी लोकार्पण किया गया. इन सुविधाओं से गंभीर मरीजों के उपचार को और बेहतर बनाने की उम्मीद जताई जा रही है.
बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की उम्मीद के बीच उठे गंभीर सवाल
एक ओर अस्पताल में आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर मरीजों और उनके परिजनों द्वारा उठाई गई शिकायतों ने स्वास्थ्य व्यवस्था की जमीनी स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं. अब निगाहें इस बात पर हैं कि शिकायतों की जांच के बाद प्रशासन क्या कदम उठाता है और अस्पताल में मरीजों को बेहतर एवं पारदर्शी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए कौन से सुधार किए जाते हैं.
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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सख्त किए औषधि नियम, फर्जी आंकड़े देने वाले आवेदक होंगे अयोग्य
नई दिल्ली, 6 अगस्त (आईएएनएस)। भारत की औषधि विनियामक प्रणाली की सत्यनिष्ठा और पारदर्शिता को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने औषधि नियम, 1945 में संशोधन अधिसूचित किया है। यह संशोधन 16 अक्टूबर, 2025 की जीएसआर संख्या 756 (ई) के माध्यम से अधिसूचित किया गया है।
औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 के अंतर्गत मौजूदा प्रवर्तन प्रावधानों के अतिरिक्त इन नव-अधिसूचित प्रावधानों के तहत लाइसेंसिंग प्राधिकरण को यह अधिकार प्रदान किया गया है कि यदि कोई संस्था अपने आवेदन के समर्थन में फर्जी अथवा मनगढ़ंत आंकड़े/दस्तावेज प्रस्तुत करती है, तो उसके भविष्य के आवेदन निर्धारित अवधि के लिए स्वीकार न किए जाएं। यह औषधि नियम, 1945 के विभिन्न प्रावधानों के अंतर्गत दायर सभी प्रकार के आवेदनों पर लागू होगा।
वर्तमान में यदि कोई आवेदक मनगढ़ंत आंकड़े प्रस्तुत करता है, तो उसके विरूद्ध आवेदन अस्वीकार करने और/अथवा विद्यमान लाइसेंस रद्द करने जैसी प्रवर्तन कार्रवाई की जाती है। इस संशोधन के बाद ऐसे आवेदक को निर्धारित अवधि तक संबंधित विनियामक प्राधिकरण (राज्य अथवा केंद्र, जैसा लागू) के समक्ष कोई नया आवेदन प्रस्तुत करने से भी वंचित किया जा सकेगा। इस प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई से पूर्व कारण बताओ नोटिस जारी कर समुचित प्रक्रिया का पालन किया जाएगा। इसके अतिरिक्त अपील का भी प्रावधान किया गया है।
आवेदकों द्वारा प्रस्तुत वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित एवं विश्वसनीय आंकड़े औषधियों की गुणवत्ता, सुरक्षा तथा प्रभावकारिता के विनियामक मूल्यांकन का आधार होते हैं। फर्जी या मनगढ़ंत आंकड़ों का प्रस्तुत किया जाना न केवल विनियामक प्रक्रिया की विश्वसनीयता को प्रभावित करता है, बल्कि औषधियों की गुणवत्ता पर भी प्रश्नचिन्ह लगाता है और जन-स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम उत्पन्न कर सकता है। यह संशोधन ऐसे दुराचार को हतोत्साहित करने, आवेदकों की जवाबदेही को मजबूत करने तथा यह सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किया गया है कि औषधियों की स्वीकृति विश्वसनीय और वैज्ञानिक रूप से मान्य साक्ष्यों पर आधारित हो।
यह अधिसूचना सरकार के उन प्रयासों के अनुरूप है, जिनका उद्देश्य वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप भारत के औषधि विनियामक ढांचे को और अधिक सुदृढ़ बनाना है। इसका उद्देश्य देश के विनियामक ढांचे का अनुपालन करने वाले औषधि निर्माताओं और वितरकों को प्रोत्साहित करना तथा किसी भी प्रकार के कदाचार की रिपोर्ट होने पर प्रभावी कार्रवाई करना है। यह औषधि क्षेत्र में चल रहे विनियामक सुधारों का पूरक है, जिसमें निगरानी को सुदृढ़ बनाने, नैति प्रथाओं को बढ़ावा देने तथा अनैतिक गतिविधियों में संलिप्त संस्थाओं पर प्रभावी दंड सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया गया है।
--आईएएनएस
एमएस/
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