‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ का उद्देश्य स्पष्ट, लंबी नहीं चलेगी लड़ाई: पीट हेगसेथ
वाशिंगटन, 10 मार्च (आईएएनएस)। अमेरिका के रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने मंगलवार को अमेरिकी नागरिकों और सहयोगियों को आश्वस्त किया कि ईरान के खिलाफ चल रही सैन्य कार्रवाई सख्ती से सीमित रहेगी। उन्होंने कहा कि इस ऑपरेशन के स्पष्ट उद्देश्य हैं और यह लंबे युद्ध में नहीं बदलेगा।
पेंटागन में संयुक्त स्टाफ के अध्यक्ष डैन केन के साथ बोलते हुए हेगसेथ ने जोर देकर कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के लिए एक संकुचित मिशन निर्धारित किया है और प्रशासन अतीत में हुई खुली और लंबी लड़ाइयों से बचने के लिए प्रतिबद्ध है।
हेगसेथ ने कहा, “यह अंतहीन नहीं है। यह लंबा नहीं है। हम मिशन क्रिप (अनियंत्रित विस्तार) की अनुमति नहीं दे रहे हैं।”
उन्होंने बताया कि ऑपरेशन का उद्देश्य विशेष सैन्य लक्ष्यों को पूरा करना है, न कि इसे व्यापक संघर्ष में बदलना।
उन्होंने कहा, “राष्ट्रपति ने बहुत स्पष्ट मिशन निर्धारित किया है। हमारा काम इसे पूरी निष्ठा से पूरा करना है।”
रक्षा सचिव ने कहा कि ऑपरेशन कब तक चलेगा? इसका अंतिम निर्णय राष्ट्रपति पर निर्भर करता है।
हेगसेथ ने कहा, वह थ्रॉटल को कंट्रोल करते हैं। जब हम उन खास मकसदों को हासिल कर रहे होते हैं, तो वही फैसला करते हैं, वही अमेरिकी लोगों की तरफ से चुने जाते हैं।
पेंटागन ब्रीफिंग के समय यह अमेरिकी अभियान अपने दसवें दिन में था, और अधिकारियों ने कहा कि अमेरिकी बलों ने पहले ही ईरान में हजारों लक्ष्यों पर हमला कर दिया है।
केन ने कहा कि सैन्य बल तीन मुख्य लक्ष्यों पर केंद्रित है: ईरानी मिसाइल और ड्रोन क्षमताओं को नष्ट करना, ईरान की नौसेना को कमजोर करना, और उसकी सैन्य-औद्योगिक संरचना पर गहरा हमला करना।
केन ने कहा, “संयुक्त बल तीन सैन्य लक्ष्यों पर केंद्रित है।”
उन्होंने बताया कि अमेरिकी ऑपरेशन का उद्देश्य क्षेत्र में अमेरिकी बलों और सहयोगियों पर हमलों को रोकना है।
उन्होंने कहा, “इसका मतलब है लॉन्च साइट्स, कमांड और कंट्रोल केंद्र और भंडार पर हमला करना ताकि वे हमारे कर्मियों, हमारी सुविधाओं और सहयोगियों को खतरा न पहुंचा सकें।”
केन ने बताया कि इन हमलों ने पहले ही ईरान की हमला करने की क्षमता को काफी कम कर दिया है। हेगसेथ ने कहा कि यह अभियान मध्य पूर्व में पहले के अमेरिकी युद्धों से बिल्कुल अलग है।
उन्होंने कहा, “देखिए, यह 2003 जैसा नहीं है। यह अंतहीन राष्ट्र निर्माण नहीं है, जैसी पिछली जटिलताएं थीं।”
उन्होंने बताया कि अमेरिकी बल मिशन को भारी ताकत और प्रभावी ढंग से अंजाम दे रहे हैं।
हेगसेथ ने कहा, “हम निर्णायक रूप से जीत रहे हैं, पूरी वायु प्रभुत्व और राष्ट्रपति के उद्देश्यों को पूरा करने की अटूट इच्छा के साथ।”
साथ ही, रक्षा सचिव ने यह भी माना कि अमेरिकी लोग लंबे युद्ध के जोखिम को लेकर चिंतित हैं।
उन्होंने कहा, “मैं इन चिंताओं को समझता हूं, क्योंकि मैंने उन परिस्थितियों को खुद अनुभव किया है। मैंने इन युद्धों में 20 साल बिताए हैं।”
उन्होंने कहा कि प्रशासन का ध्यान ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने और अमेरिका तथा उसके सहयोगियों को धमकी देने की उसकी क्षमता को खत्म करने पर है।
हेगसेथ ने कहा, “हम ऐसे परमाणु ब्लैकमेल की स्थिति में नहीं जी सकते, जिसमें पारंपरिक मिसाइलें हमारे लोगों को निशाना बना सकें।”
यह संघर्ष ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के लॉन्च के बाद तेज हुआ, जो ईरानी मिसाइल, ड्रोन और नौसैनिक क्षमताओं को निशाना बनाने वाला अमेरिका-नेतृत्व वाला सैन्य अभियान है।
--आईएएनएस
एवाई/डीकेपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
ईरान संघर्ष से वैश्विक आपूर्ति पर असर, तेल की कीमतें 90 डॉलर के करीब
वॉशिंगटन, 10 मार्च (आईएएनएस)। तेल की कीमतें मंगलवार को लगभग 90 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहीं, क्योंकि ईरान से जुड़े युद्ध ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों में हलचल मचा दी, जिससे महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के माध्यम से आपूर्ति में लंबे समय तक रुकावट की आशंका बढ़ गई और अमेरिकी सांसदों ने बढ़ती ईंधन कीमतों को कम करने के लिए आपात उपाय प्रस्तावित किए।
सीएनबीसी और सएनएन के अनुसार, ब्रेंट क्रूड, जो वैश्विक मानक है, लगभग 91.94 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था, जबकि अमेरिकी क्रूड लगभग $88.87 पर था।
ऊर्जा बाजारों में तेजी से उतार-चढ़ाव आया क्योंकि संघर्ष स्ट्रेट ऑफ़ हॉर्मुज़ के माध्यम से टैंकर यातायात को खतरे में डाल रहा है। ईरान और ओमान के बीच यह संकीर्ण जलमार्ग खाड़ी के उत्पादकों जैसे सऊदी अरब, इराक और संयुक्त अरब अमीरात से दुनिया के बड़े हिस्से के कच्चे तेल के निर्यात को ले जाता है।
सऊदी अरामको के सीईओ आमिन नासेर ने चेतावनी दी कि अगर रुकावटें बनी रहती हैं, तो इसका वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर गंभीर प्रभाव हो सकता है।
नासेर ने सीएनबीसी के अनुसार कहा, “दुनिया के तेल बाजार के लिए इसका विनाशकारी परिणाम होगा, जबकि हमने पहले भी रुकावटें देखी हैं, यह क्षेत्र के तेल और गैस उद्योग के लिए अब तक का सबसे बड़ा संकट है।”
शुरुआत में, बाजार में तेजी आई क्योंकि डर था कि युद्ध स्ट्रेट के माध्यम से आपूर्ति को रोक सकता है। तेल की कीमतें सप्ताह की शुरुआत में 120 डॉलर के करीब पहुंच गईं, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के यह कहने के बाद कि संघर्ष जल्द समाप्त हो सकता है, कीमतें थोड़ी गिर गईं।
ट्रंप ने सीएनएन में दिए एक फोन इंटरव्यू में कहा, “मुझे लगता है कि युद्ध लगभग पूरा हो गया है।
हालांकि, व्यापक दृष्टिकोण अभी भी अनिश्चित है। विश्लेषकों का कहना है कि अस्थायी रुकावटें भी वैश्विक ऊर्जा संकट को जन्म दे सकती हैं।
वॉल स्ट्रीट जर्नल ने रिपोर्ट किया कि स्ट्रेट ऑफ़ हॉर्मुज़ के माध्यम से शिपिंग में हमले के डर के कारण तेज़ी से गिरावट आई, जो दशकों में वैश्विक तेल प्रवाह के लिए सबसे गंभीर खतरा बताई गई। संघर्ष ने कच्चे तेल के बाजारों में अस्थिरता पैदा की है और अगर रुकावटें बनी रहती हैं, तो तेल की कीमतें और भी अधिक बढ़ सकती हैं।
ट्रंप ने ईरान को चेतावनी भी दी कि यदि वे इस जलमार्ग को अवरुद्ध करने की कोशिश करेंगे तो उन्हें भारी जवाब मिलेगा।
ट्रम्प ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट में कहा, “अगर ईरान स्ट्रेट ऑफ़ हॉर्मुज़ में तेल के प्रवाह को रोकने की कोशिश करता है, तो उसे अमेरिका से बीस गुना अधिक कड़ा जवाब मिलेगा।”
संघर्ष का आर्थिक असर पहले से ही अमेरिका में दिखने लगा है, जहां पेट्रोल की कीमतें तेजी से बढ़ने लगी हैं।
इस बीच, अमेरिकी सांसदों के एक समूह ने उपभोक्ताओं के लिए ईंधन की कीमतों को कम करने के लिए कानून प्रस्तावित किया है।
सेनेटर मार्क केली और रिचर्ड ब्लूमेंथल, साथ ही प्रतिनिधि क्रिस पापास ने गैस प्राइस रिलीफ एक्ट पेश किया, जो संघीय पेट्रोल कर को अस्थायी रूप से निलंबित करेगा ताकि घरों पर दबाव कम हो सके।
प्रस्ताव के अनुसार, संघीय पेट्रोल कर (18.4 सेंट प्रति गैलन) को 1 अक्टूबर 2026 तक निलंबित किया जाएगा, ताकि वैश्विक ऊर्जा बाजारों की अस्थिरता के दौरान मोटर चालकों के लिए कीमतें कम हो सकें।
केली ने कहा, “संघीय पेट्रोल कर को निलंबित करने से कीमतें कम होंगी और परिवारों को जरूरी राहत मिलेगी।”
प्रस्ताव के तहत, अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ईंधन की कीमतों की निगरानी करेगा ताकि तेल कंपनियां कर में बचत सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचाएं, न कि इसे अपने मुनाफे में जोड़ें।
ऊर्जा विश्लेषकों का कहना है कि ऐसे नीति कदम अस्थायी राहत तो दे सकते हैं, लेकिन अगर मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ता है, तो ये वैश्विक बाजार के झटकों को पूरी तरह से नहीं रोक पाएंगे।
--आईएएनएस
एवाई/डीकेपी
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