पश्चिम एशिया में तनाव पर एस जयशंकर ने जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल से की बातचीत
नई दिल्ली, 10 मार्च (आईएएनएस)। पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव को लेकर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मंगलवार को अपने जर्मन समकक्ष जोहान वाडेफुल के साथ टेलीफोन पर बातचीत की।
एस जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर लिखा, जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल के साथ पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष पर विचार साझा किए।
पिछले कुछ दिनों में विदेश मंत्री जयशंकर ने कई देशों के समकक्षों के साथ बातचीत की है, जिनमें इटली, ओमान और ईरान शामिल हैं, क्योंकि भारत क्षेत्र की सरकारों और अन्य प्रमुख साझेदारों के साथ तनावपूर्ण सुरक्षा स्थिति के बीच संपर्क में है।
संघर्ष की शुरुआत 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों के बाद हुई, जिसके जवाब में ईरान ने पश्चिम एशिया में अमेरिकी संपत्तियों, क्षेत्रीय राजधानी और सहयोगी बलों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए।
विदेश मंत्री जयशंकर ने सोमवार को अपनी इटली की समकक्ष एंटोनियो ताजानी के साथ पश्चिम एशिया की स्थिति पर बात की। ताजानी ने कहा कि वे जयशंकर के साथ मिलकर तुरंत स्थिति को शांत करने, समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने और अंतरराष्ट्रीय बाजारों की स्थिरता बनाए रखने के लिए कदम उठाने का प्रयास करेंगे।
ताजानी ने कहा कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज की आंशिक नाकेबंदी ऊर्जा सुरक्षा और इटली तथा भारत की आर्थिक स्थिरता के लिए गंभीर खतरा पैदा करती है।
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला एक संकरा जल मार्ग है और दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। खाड़ी के उत्पादकों के अधिकांश कच्चे तेल का निर्यात इसी मार्ग से होता है, इसलिए इस मार्ग को कोई खतरा वैश्विक ऊर्जा बाजारों के लिए एक बड़ा चिंता का विषय बन जाता है।
ताजानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, मैंने भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर से खाड़ी और पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र की स्थिति पर चर्चा की। यूरोप और भारत रणनीतिक साझेदार हैं। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज की आंशिक नाकेबंदी ऊर्जा सुरक्षा और हमारे देशों की आर्थिक स्थिरता के लिए गंभीर खतरा पैदा करती है। हमने रणनीतिक निहितार्थ और क्षेत्र में उपस्थित अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता साझा की। इस संदर्भ में हम तुरंत स्थिति को शांत करने, समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने और अंतरराष्ट्रीय बाजारों की स्थिरता बनाए रखने के लिए अपने कदम समन्वयित करने का लक्ष्य रखते हैं ये तत्व ईयू-भारत मुक्त व्यापार समझौते के पूर्ण संचालन के लिए भी आवश्यक हैं।
उन्होंने आगे कहा, यह संकट यह दर्शाता है कि नई अवसंरचना और सुरक्षित मार्गों में निवेश को मजबूत करना कितना महत्वपूर्ण है। आईएमईसी कॉरिडोर इसका स्पष्ट उदाहरण है। इस उद्देश्य से हम 17 मार्च को ट्राइस्टे में इसके लिए एक राजनीतिक और आर्थिक पहल करेंगे, जिसका लक्ष्य हमारे व्यापार, डिजिटल और ऊर्जा संबंधों को मजबूत करना और एक ऐसा आर्थिक क्षेत्र बनाना है जिससे हमारे व्यवसाय लाभान्वित हो सकें।
--आईएएनएस
एवाई/डीकेपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
पाकिस्तान में तेल की कीमतों में बढ़ोतरी वैश्विक तनाव और घरेलू ऊर्जा कमजोरियों का मिश्रण: रिपोर्ट
नई दिल्ली, 10 मार्च (आईएएनएस)। पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमतों में अचानक लगभग 55 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी ने गहरा संकट खड़ा कर दिया है। पेट्रोल पंपों पर लंबी लाइनें लग रही हैं। पूरे देश में लोगों का गुस्सा बढ़ा हुआ है। हालांकि, पाकिस्तान की सरकार इस बढ़ोतरी के लिए मिडिल ईस्ट में तनाव को जिम्मेदार ठहरा रही है।
एक रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान में सरकार ने इस वृद्धि को वैश्विक तेल की अस्थिरता और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण बताया है, लेकिन हालिया संकट पाकिस्तान की ऊर्जा प्रणाली में गहरी संरचनात्मक कमजोरियों को भी उजागर करता है।
मॉडर्न डिप्लोमेसी रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक कीमतों में दबाव के पीछे मुख्य कारण अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच बढ़ता तनाव है, जिससे होर्मुज की खाड़ी में अस्थिरता का डर बढ़ गया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया की तेल सप्लाई का लगभग पांचवां हिस्सा इसी पतले समुद्री रास्ते से गुजरता है, जिससे यह जियोपॉलिटिकल रुकावटों के लिए बहुत ज्यादा कमजोर हो जाता है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि वैश्विक कीमतों में छोटे बदलाव भी घरेलू ईंधन की कीमतों में तेजी से वृद्धि कर देते हैं।
पाकिस्तान के वित्त मंत्रालय के आर्थिक सर्वेक्षणों के अनुसार, पेट्रोलियम आयात देश के वार्षिक आयात बिल का एक बड़ा हिस्सा है।
रिपोर्ट में कहा गया, “केवल बाहरी कारण पाकिस्तान में ईंधन संकट की गंभीरता को बार-बार नहीं पैदा कर सकते। मूल मुद्दा यह है कि देश अपनी ऊर्जा उद्योग को आधुनिक बनाने और ईंधन स्रोतों में विविधता लाने में सक्षम नहीं रहा है।”
इंस्टीट्यूट फॉर एनर्जी इकोनॉमिक्स एंड फाइनेंशियल एनालिसिस के अध्ययन बताते हैं कि पाकिस्तान अपने विशाल नवीकरणीय ऊर्जा संभावनाओं के बावजूद विदेशी ऊर्जा स्रोतों पर बहुत अधिक निर्भर है।
हाल की पेट्रोल वृद्धि से महंगाई और बढ़ने की उम्मीद है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि ईंधन की बढ़ती कीमतें परिवहन खर्च बढ़ाती हैं, जिससे भोजन और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतें बढ़ जाती हैं, जो कम आय वाले परिवारों को सबसे ज्यादा प्रभावित करती हैं।
बार-बार होने वाले संकटों के बावजूद, नीतिगत प्रतिक्रियाएं अक्सर अल्पकालिक राहत उपायों जैसे सब्सिडी या अस्थायी मूल्य फ्रीज तक ही सीमित रही हैं, बजाय कि संरचनात्मक सुधारों के।
क्षेत्रीय ऊर्जा परियोजनाएं, जैसे प्रस्तावित ईरान-पाकिस्तान गैस पाइपलाइन, भू-राजनीतिक और नीतिगत चुनौतियों के कारण अभी तक रुकी हुई है।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि ऊर्जा विश्लेषकों का कहना है कि पाकिस्तान को अपनी ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने के लिए व्यापक रणनीति अपनानी चाहिए।
रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार का विस्तार, घरेलू रिफाइनरियों का आधुनिकीकरण और सौर और पवन जैसी नवीकरणीय स्रोतों में निवेश आयातित तेल पर निर्भरता कम करने में मदद कर सकते हैं।
--आईएएनएस
एवाई/डीकेपी
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