Explainer: क्या है महेश बाबू और प्रियंका चोपड़ा की 'वाराणसी' की कहानी? क्यों रिलीज से पहले ही चर्चा में है फिल्म जानें
Mahesh Babu and Priyanka Chopra Varanasi: साउथ सुपरस्टार महेश बाबू और ग्लोबल स्टार प्रियंका चोपड़ा की मच अवेटेड फिल्म 'वाराणसी' इन दिनों लगातार चर्चा में बनी हुई है. फिल्म की पहली झलक सामने आने के बाद से ही सोशल मीडिया पर इसे लेकर जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है. बड़े स्टार्स की मौजूदगी, बड़ा बजट, शानदार विजुअल्स और रहस्य से भरी कहानी ने दर्शकों की एक्साइटमेंट और बढ़ा दी है.
हालांकि, फिल्म के मेकर्स ने अभी तक इसकी पूरी कहानी का खुलासा नहीं किया है लेकिन टीजर, पोस्टर और सामने आई ऑफिसियल जानकारियों से इतना जरूर साफ हो गया है कि 'वाराणसी' सिर्फ एक एक्शन फिल्म नहीं, बल्कि आध्यात्म, इतिहास, रहस्य और रोमांच का अनोखा संगम होगी. तो चलिए जानते हैं आखिर इस फिल्म की कहानी क्या हो सकती है और इसे लेकर इतना क्रेज क्यों है.
क्या है 'वाराणसी' की कहानी?
फिल्म का नाम ही अपने आप में काफी कुछ कह देता है. वाराणसी जिसे काशी या बनारस के नाम से भी जाना जाता है दुनिया के सबसे प्राचीन और स्पिरिचुअल शहरों में से एक है. ये शहर सिर्फ धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता, संस्कृति और इतिहास का भी महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है.
फिल्म की कहानी इसी शहर की रहस्यमयी गलियों, प्राचीन मंदिरों, घाटों और सदियों पुराने रहस्यों के इर्द-गिर्द घूमती नजर आती है. शुरुआती जानकारी के मुताबिक, कहानी में एक ऐसे मिशन की झलक मिलती है जिसमें अतीत और वर्तमान आपस में टकराते हैं. कई ऐसे रहस्य सामने आते हैं, जो न सिर्फ कैरेक्टर की जिंदगी बदलते हैं, बल्कि पूरे देश के इतिहास से भी जुड़े दिखाई देते हैं. हालांकि मेकर्स ने अभी तक आधिकारिक रूप से कहानी का पूरा खुलासा नहीं किया है, इसलिए फिल्म की प्लाट को लेकर कई तरह की अटकलें भी लगाई जा रही हैं.
महेश बाबू किस किरदार में आएंगे नजर?
फिल्म में महेश बाबू एक बेहद दमदार और गंभीर किरदार निभाते नजर आएंगे. टीजर में उनका लुक पहले की फिल्मों से बिल्कुल अलग दिखाई देता है. लंबे बाल, दाढ़ी, सीरियस पर्सनालिटी और शांत लेकिन दमदार स्क्रीन प्रेजेंस ने फैंस का ध्यान खींचा है. कयास लगाए जा रहे हैं कि उनका किरदार किसी ऐसे व्यक्ति का हो सकता है, जो एक बड़े रहस्य की तलाश में वाराणसी पहुंचता है. कहानी आगे बढ़ने के साथ उसे कई ऐसे सच पता चलते हैं, जो उसके जीवन का उद्देश्य ही बदल देते हैं. महेश बाबू का ये किरदार एक्शन के साथ-साथ भावनात्मक और आध्यात्मिक पहलुओं को भी दर्शाता हुआ नजर आ सकता है.
प्रियंका चोपड़ा की होगी दमदार वापसी
कई सालों बाद प्रियंका चोपड़ा भारतीय सिनेमा की किसी बड़े प्रोजेक्ट में नजर आने वाली हैं. इसलिए उनकी वापसी को लेकर भी दर्शकों में खासा एक्साइटेड है. फिल्म में उनका किरदार अभी पूरी तरह से सामने नहीं आया है, लेकिन माना जा रहा है कि वो कहानी की सबसे अहम कड़ी होंगी. पॉसिबल है कि उनका किरदार किसी इतिहासकार, रिसर्चर, एजेंट या ऐसे व्यक्ति का हो, जो महेश बाबू के मिशन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनता है. प्रियंका के इंटरनेशनल एक्सपीरियंस और दमदार एक्टिंग को देखते हुए उम्मीद की जा रही है कि फिल्म में उनका रोल काफी प्रभावशाली होगा.
क्यों खास है फिल्म की लोकेशन?
फिल्म की सबसे बड़ी खासियत इसकी लोकेशन मानी जा रही है. वाराणसी के असली घाट, मंदिर, संकरी गलियां और गंगा के किनारे के सीन फिल्म को एक अलग पहचान देते हैं. मेकर्स ने शहर की आध्यात्मिक पहचान को बड़े पर्दे पर भव्य तरीके से दिखाने की कोशिश की है. सुबह की गंगा आरती, शाम की आरती, प्राचीन मंदिर और सदियों पुरानी संस्कृति फिल्म के विजुअल्स को और भी आकर्षक बनाते हैं. यही वजह है कि फिल्म को सिर्फ एक एक्शन ड्रामा नहीं बल्कि विजुअल एक्सपीरियंस भी माना जा रहा है.
क्या होगा एक्शन और आध्यात्म का मेल?
टीजर में जिस तरह एक्शन और धार्मिक सिम्बल्स को साथ दिखाया गया है, उससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि फिल्म में सिर्फ लड़ाई या पीछा करने वाले सीन्स ही नहीं होंगे, बल्कि कहानी के केंद्र में आध्यात्मिक मैसेज भी होगा. संभव है कि फिल्म ये दिखाने की कोशिश करे कि शक्ति सिर्फ हथियारों में नहीं, बल्कि ज्ञान, विश्वास और आत्मबल में भी होती है. यही पहलू फिल्म को दूसरी एक्शन फिल्मों से अलग बना सकता है.
बड़े बजट में तैयार हुई फिल्म
रिपोर्ट्स के मुताबिक, 'वाराणसी' को बड़े बजट में तैयार किया गया है. फिल्म में हाई-एंड विजुअल इफेक्ट्स, बड़े एक्शन सीक्वेंस और इंटरनेशनल स्तर की तकनीक का इस्तेमाल किया गया है. मेकर्स चाहते हैं कि ये फिल्म सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि दुनिया भर के दर्शकों को आकर्षित करे. यही वजह है कि इसे बनान में किसी तरह की कमी नहीं छोड़ी गई है.
क्यों बढ़ रही है फिल्म को लेकर उत्सुकता?
फिल्म को लेकर चर्चा की कई वजहें हैं जैसे - महेश बाबू और प्रियंका चोपड़ा की नई जोड़ी, वाराणसी जैसी ऐतिहासिक और आध्यात्मिक लोकेशन, बड़े बजट और भव्य विजुअल्स, रहस्य और एक्शन से भरपूर कहानी, अंतरराष्ट्रीय स्तर की तकनीक, रिलीज से पहले ही सोशल मीडिया पर जबरदस्त चर्चा. इन सभी कारणों ने फिल्म को साल की सबसे चर्चित फिल्मों में शामिल कर दिया है.
क्या बॉक्स ऑफिस पर बनेगी बड़ी फिल्म?
फिल्म की रिलीज से पहले ही इसे लेकर काफी सकारात्मक माहौल बन चुका है. अगर कहानी दर्शकों की उम्मीदों पर खरी उतरती है और इमोशनल जुड़ाव कायम करती है, तो ये बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता हासिल कर सकती है.
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वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में उम्मीद से बेहतर रहे भारतीय कंपनियों के नतीजे, बैंकिंग और मेटल सेक्टर ने दिखाई मजबूत बढ़त
नई दिल्ली, 6 अगस्त (आईएएनएस)। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में भारतीय कंपनियों के नतीजे उम्मीद से बेहतर रहे हैं। तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) में नुकसान के बावजूद बैंकिंग एवं वित्तीय सेवाएं (बीएफएसआई), धातु (मेटल), प्रौद्योगिकी (आईटी) और ऑटोमोबाइल क्षेत्रों के मजबूत प्रदर्शन ने कॉरपोरेट मुनाफे को सहारा दिया है। यह जानकारी ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज (एमओएफएसएल) की एक रिपोर्ट में सामने आई है।
रिपोर्ट के अनुसार, यदि तेल विपणन कंपनियों को आंकड़ों से अलग कर दिया जाए, तो कंपनियों की आय में सालाना आधार पर 17 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। यह दर्शाता है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के दबाव के बावजूद भारतीय कॉरपोरेट क्षेत्र की बुनियादी स्थिति मजबूत बनी हुई है।
रिपोर्ट में उन कंपनियों का विश्लेषण किया गया है, जो प्रमुख क्षेत्रों के कुल अनुमानित मुनाफे का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा रखती हैं। इसके आधार पर पहली तिमाही में कुल आय में 2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि बाजार को करीब 10 प्रतिशत गिरावट की आशंका थी। इस तरह नतीजे अनुमान से कहीं बेहतर रहे।
क्षेत्रवार प्रदर्शन की बात करें तो बैंकिंग एवं वित्तीय सेवाओं (बीएफएसआई) ने सबसे महत्वपूर्ण योगदान दिया। इस सेक्टर की आय में सालाना 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। वहीं मेटल सेक्टर में 53 प्रतिशत की शानदार वृद्धि दर्ज की गई। प्रौद्योगिकी क्षेत्र की आय 11 प्रतिशत और ऑटोमोबाइल क्षेत्र की आय 7 प्रतिशत बढ़ी।
अब तक अपने नतीजे घोषित करने वाली 39 निफ्टी कंपनियों के मुनाफे में औसतन 11 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि बाजार को केवल 7 प्रतिशत वृद्धि की उम्मीद थी। रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 49 प्रतिशत कंपनियां ब्रोकरेज फर्म के लाभ अनुमान से बेहतर प्रदर्शन करने में सफल रहीं। वहीं केवल 22 प्रतिशत कंपनियों के नतीजे अनुमान से कमजोर रहे, जो आय सीजन की व्यापक मजबूती को दर्शाता है।
हालांकि सभी क्षेत्रों का प्रदर्शन सकारात्मक नहीं रहा। तेल विपणन कंपनियां, सीमेंट, विमानन और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र (हेल्थकेयर) इस तिमाही में आय पर सबसे अधिक दबाव डालने वाले सेक्टर रहे, जिसके पीछे कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और कुछ क्षेत्रों में मांग संबंधी चुनौतियां प्रमुख कारण रहीं।
बड़ी कंपनियों (लार्ज-कैप) ने भी अच्छा प्रदर्शन किया और उनकी आय में 6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। दूसरी ओर मिड-कैप कंपनियों की आय में 31 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली। इसका मुख्य कारण तेल विपणन कंपनियों में हुआ नुकसान रहा।
हालांकि अगर ओएमसी को अलग कर दिया जाए, तो मिड-कैप कंपनियों की आय वास्तव में 25 प्रतिशत बढ़ी है। इससे स्पष्ट होता है कि अधिकांश मिड-कैप कंपनियों का प्रदर्शन मजबूत रहा और गिरावट का प्रभाव मुख्य रूप से तेल क्षेत्र तक सीमित रहा।
स्मॉल-कैप कंपनियां इस तिमाही की सबसे बड़ी विजेता बनकर उभरीं, जिनकी आय में 32 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। वित्तीय क्षेत्र के बेहतर प्रदर्शन और पिछले साल के तुलनात्मक आधार (बेस इफेक्ट) ने इस वृद्धि को समर्थन दिया।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पहली तिमाही में आय अनुमानों में कटौती की रफ्तार कुछ धीमी हुई है, जो बाजार के लिए सकारात्मक संकेत है। हालांकि आने वाले महीनों में भू-राजनीतिक तनाव, ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव और आईपीओ तथा पूंजी जुटाने की बढ़ती गतिविधियां शेयर बाजार में अस्थिरता बनाए रख सकती हैं।
--आईएएनएस
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