BSE Sensex 374 अंक चढ़ा, Reliance Industries और बैंक शेयरों में लिवाली
मुंबई, छह अगस्त स्थानीय शेयर बाजारों में बृहस्पतिवार को मिला-जुला रुख रहा। कच्चे तेल के दाम में नरमी और रिलायंस इंडस्ट्रीज तथा आईसीआईसीआई बैंक जैसी बड़ी कंपनियों के शेयरों में लिवाली से मानक सूचकांक बीएसई सेंसेक्स 374 अंक के लाभ में रहा, जबकि एनएसई निफ्टी में मामूली 11 अंक की तेजी रही। तीस शेयरों पर आधारित बीएसई सेंसेक्स कारोबार के दौरान पूरे समय सकारात्मक दायरे में रहा।
अंत में यह 373.76 अंक यानी 0.48 प्रतिशत चढ़कर 78,954.76 अंक पर बंद हुआ। पचास शेयरों पर आधारित एनएसई निफ्टी पूरे दिन सीमित दायरे में कारोबार करता रहा और अंत में 11.35 अंक यानी 0.05 प्रतिशत की मामूली बढ़त के साथ 24,636 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान निफ्टी ऊंचे में 24,677.05 अंक तक गया और नीचे में 24,604.15 अंक तक आया।
सोमवार से दोनों प्रमुख सूचकांकों के प्रदर्शन में अंतर देखने को मिल रहा है। यह बदलाव उन शेयरों के लिए नई नीलामी व्यवस्था लागू किए जाने के बाद आया है, जिनमें वायदा एवं विकल्प (एफएंडओ) अनुबंध उपलब्ध हैं। इक्विटी नकद खंड में समापन नीलामी सत्र (सीएएस) सोमवार से शुरू हुआ।
इसके तहत पात्र शेयरों के समापन मूल्य तय करने के लिए नीलामी आधारित नई व्यवस्था लागू की गई है। इसका उद्देश्य कीमत निर्धारण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और मजबूत बनाना है। एचएसटी वेल्थ के संस्थापक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) हरिसेल्वन राधाकृष्णन ने कहा, ‘‘घरेलू शेयर बाजार में मिश्रित रुख रहा...।
निवेशकों की धारणा पश्चिम एशिया संघर्ष के कूटनीतिक समाधान की उम्मीद के बीच सतर्क लेकिन सकारात्मक बनी रही।’’ उन्होंने कहा कि निफ्टी सीमित दायरे में कारोबार करते हुए लगभग स्थिर रहा। सेंसेक्स में बढ़त दर्ज की गई, जिसे मुख्य रूप से प्रमुख शेयरों में लिवाली से समर्थन मिला। राधाकृष्णन ने कहा कि एनएसई की समापन नीलामी सत्र व्यवस्था शुरू होने के चार सत्रों के बाद सेंसेक्स और निफ्टी के बीच अंतर अब केवल बदलाव के दौर की वजह से नहीं, बल्कि बाजार की नकदी में अंतर को दर्शा रहा है।
बीस मिनट की समापन नीलामी प्रक्रिया दोनों सूचकांकों के लिए अलग-अलग परिणाम दे रही है क्योंकि संस्थागत निवेशकों के ऑर्डर सेंसेक्स के मुकाबले निफ्टी के शेयरों में अधिक केंद्रित हैं। परिणामस्वरूप निफ्टी का बंद स्तर अब समापन नीलामी सत्र से तय होने वाली कीमतों के प्रति अधिक संवेदनशील हो गया है, जबकि सेंसेक्स पर इसका प्रभाव अपेक्षाकृत कम रहा है।’’ सेंसेक्स में शामिल शेयरों में रिलायंस इंडस्ट्रीज में सबसे अधिक 3.43 प्रतिशत की तेजी रही। इसके अलावा, भारतीय स्टेट बैंक, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, आईसीआईसीआई बैंक, इटर्नल और टाइटन भी बढ़त दर्ज करने वाले प्रमुख शेयरों में शामिल रहे।
दूसरी तरफ, नुकसान में रहने वाले शेयरों में पावर ग्रिड, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, इंटरग्लोब एविएशन और महिंद्रा एंड महिंद्रा शामिल हैं। सार्वजनिक क्षेत्र की पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के शेयर में 3.99 प्रतिशत की गिरावट आई। कंपनी का एकीकृत शुद्ध लाभ जून तिमाही में सालाना आधार पर मामूली गिरावट के साथ 3,598.42 करोड़ रुपये रहा।
वैश्विक कच्चा तेल मानक ब्रेंट क्रूड 0.09 प्रतिशत की मामूली बढ़त के साथ 79.52 डॉलर प्रति बैरल पर रहा। एशिया के अन्य बाजारों में दक्षिण कोरिया का कॉस्पी , हांगकांग का हैंगसेंग और जापान का निक्कीनुकसान में रहे। वहीं शंघाई का एसएसई कम्पोजिट सूचकांक मामूली बढ़त के साथ बंद हुआ।
यूरोप के प्रमुख बाजारों में दोपहर के कारोबार में तेजी रही। जबकि बुधवार को अमेरिकी बाजारों में ज्यादातर गिरावट दर्ज की गई। शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने बुधवार को 943.42 करोड़ रुपये मूल्य के शेयरों की बिकवाली की।
सेंसेक्स बुधवार को 152.05 अंक यानी बढ़कर 78,581 अंक पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 9.75 अंक की हल्की तेजी के साथ 24,624.65 अंक पर रहा था।
Lok Sabha में Tax Bill पारित, इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण को 2040 तक कर छूट
नयी दिल्ली, छह अगस्त सरकार के घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बढ़ावा देने, विदेशी निवेश आकर्षित करने और डिजिटल भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) व्यवस्था में बदलाव का मार्ग प्रशस्त करने वाले कराधान एवं अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 को लोकसभा ने मंगलवार को पारित कर दिया। यह विधेयक पांच जून को जारी अध्यादेश का स्थान लेगा, जिसके तहत सरकारी प्रतिभूतियों (जी-सेक) में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) के निवेश से अर्जित ब्याज आय और पूंजीगत लाभ को आयकर से छूट दी गई थी। विधेयक के जरिये भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007, आयकर अधिनियम, 2025 और वित्त अधिनियम, 2026 में संशोधन किया गया है।
सरकार का कहना है कि इन बदलावों से भारत वैश्विक पूंजी, विनिर्माण और कारोबार के लिए अधिक आकर्षक तथा स्थिर गंतव्य बनेगा। विधेयक में भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम और आयकर अधिनियम के बीच मौजूदा कानूनी संबंध समाप्त करने का प्रस्ताव है। इससे सरकार को अधिसूचना के जरिये यह तय करने का अधिकार मिलेगा कि किन डिजिटल भुगतान माध्यमों या लेनदेन पर शून्य एमडीआर व्यवस्था लागू रहेगी।
एमडीआर डिजिटल भुगतान (जैसे कार्ड या यूपीआई) पर व्यापारी से लिया जाने वाला शुल्क होता है, जो भुगतान सेवा देने वाले बैंकों या कंपनियों को जाता है। हालांकि, विधेयक में स्वयं किसी शुल्क का प्रावधान नहीं है, लेकिन इससे भविष्य में चुनिंदा यूपीआई और रुपे डेबिट कार्ड से लेनदेन पर व्यापारी शुल्क लगाने का कानूनी आधार तैयार होगा। विधेयक में वैश्विक कोष प्रबंधकों के भारत आने को सुगम बनाने के लिए कर संबंधी शर्तों को सरल किया गया है, ताकि उनकी वैश्विक आय पर भारत में कर न लगे।
रियल एस्टेट निवेश ट्रस्ट (रीट) और अवसंरचना निवेश ट्रस्ट (इनविट) के निवेशकों को भी लाभांश पर कर छूट जारी रखने का प्रस्ताव है, भले ही परिचालन कंपनी नई कर व्यवस्था अपना ले। इस विधेयक में विदेशी क्लाउड कंपनियों के लिए भारतीय डेटा सेंटर के उपयोग से जुड़ी कई मंजूरियों से जुड़ी शर्तें हटाने का प्रस्ताव है। साथ ही डेटा सेंटर को प्रत्यक्ष स्वामित्व के बजाय पट्टे या लीज पर संचालित करने की अनुमति देने का प्रावधान किया गया है।
सरकार का मानना है कि इससे देश में बड़े एआई डेटा सेंटर विकसित होंगे और निवेश बढ़ेगा। विधेयक में भारतीय कंपनियों के लिए मोबाइल फोन, लैपटॉप, कंप्यूटर, टैबलेट, सर्वर और इनके पुर्जों का अनुबंध आधारित विनिर्माण करने वाली विदेशी कंपनियों को मिलने वाली कर छूट 10 वर्ष बढ़ाकर 2040-41 तक करने का प्रस्ताव है। इसके अलावा, मुंबई और सूरत के विशेष क्षेत्रों में कच्चे हीरों के कारोबार से होने वाली विदेशी कंपनियों की आय को 15 वर्ष तक कर छूट देने का प्रस्ताव है, ताकि वैश्विक हीरा व्यापार का बड़ा हिस्सा भारत की ओर आकर्षित किया जा सके।
इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के लिए सीमा शुल्क गोदामों में रखे पुर्जों की आपूर्ति से विदेशी कंपनियों की आय को भी 15 वर्ष तक कर मुक्त करने का प्रस्ताव किया गया है। सरकार का कहना है कि डेटा सेंटर, कोष प्रबंधन और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण से जुड़े कर नियमों को सरल बनाकर कारोबार करना आसान बनाया जाएगा। कर विशेषज्ञों का मानना है कि इन संशोधनों से विदेशी कोष प्रबंधन गतिविधियों को भारत लाने में मदद मिलेगी और देश का निवेश माहौल और मजबूत होगा।
डेलॉयट इंडिया में साझेदार राजेश गांधी ने कहा कि विदेशी कोष प्रबंधकों से जुड़ा संशोधन निजी इक्विटी (पीई) फर्मों, मास्टर-फीडर संरचना वाले कोषों तथा सीमित भारतीय निवेश वाले विदेशी कोषों को बिना प्रतिकूल कर प्रभाव के अपनी कोष प्रबंधन गतिविधियां भारत स्थानांतरित करने के लिए प्रोत्साहित कर सकता है। मास्टर-फीडर संरचना निवेश कोषों की एक व्यवस्था है, जिसमें कई अलग-अलग निवेश कोषअपनी पूंजी एक बड़े साझा कोष में निवेश करते हैं। नांगिया ग्लोबल में साझेदार (एमएंडए कर) अभीत सचदेवा ने कहा कि इन संशोधनों से विदेशी निवेश कोषों के लिए भारत में कोष प्रबंधन व्यवस्था अधिक आकर्षक बनेगी।
इससे विदेशी कोषों की प्रबंधन गतिविधियों को भारत में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया को भी बढ़ावा मिलेगा।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
prabhasakshi











/newsnation/media/agency_attachments/logo-webp.webp)