भारत से सटी सीमाओं वाले देशों के निवेश नियमों में बदलाव को कैबिनेट से मिली मंजूरी
नई दिल्ली, 10 मार्च (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंगलवार को भारत से स्थलीय सीमा साझा करने वाले देशों से आने वाले निवेश से जुड़े दिशा-निर्देशों में बदलाव को मंजूरी दे दी। सरकार का कहना है कि इस फैसले से निवेशकों को नियमों को लेकर अधिक स्पष्टता मिलेगी और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को बढ़ावा मिलेगा।
सरकार के अनुसार, मौजूदा नीति की समीक्षा कर उसमें संशोधन किया गया है, जिसके तहत निवेश में बेनेफिशियल ओनर (वास्तविक लाभकारी मालिक) की पहचान से जुड़े नियमों को अधिक स्पष्ट बनाया गया है और कुछ क्षेत्रों में निवेश प्रस्तावों की मंजूरी की प्रक्रिया को सरल किया गया है।
संशोधित दिशा-निर्देशों के मुताबिक अब बेनेफिशियल ओनर की परिभाषा और उसे तय करने के मानदंड को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग रूल्स, 2005 के तहत लागू ढांचे के अनुरूप किया जाएगा। इसके तहत निवेश करने वाली संस्था के स्तर पर ही यह जांच की जाएगी कि असली लाभकारी मालिक कौन है।
सरकार ने यह भी बताया कि जिन निवेशकों की बेनेफिशियल हिस्सेदारी 10 प्रतिशत तक है और जिनका कंपनी पर नियंत्रण नहीं है, उन्हें अब ऑटोमैटिक रूट के जरिए निवेश की अनुमति दी जाएगी। हालांकि, यह निवेश संबंधित सेक्टर की अधिकतम सीमा और अन्य शर्तों के अधीन होगा।
ऐसे मामलों में जिस कंपनी में निवेश किया जाएगा, उसे उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) को निवेश से जुड़ी पूरी जानकारी देनी होगी।
कैबिनेट ने कुछ खास मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में निवेश प्रस्तावों की मंजूरी की प्रक्रिया को तेज करने का भी फैसला किया है। इन क्षेत्रों में आने वाले निवेश प्रस्तावों पर 60 दिनों के भीतर निर्णय लिया जाएगा।
इन क्षेत्रों में कैपिटल गुड्स मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रॉनिक कैपिटल गुड्स, इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स, पॉलीसिलिकॉन और इनगॉट-वेफर उत्पादन जैसे सेक्टर शामिल हैं। सरकार ने यह भी कहा कि इन क्षेत्रों की सूची में बदलाव कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता वाली कमेटी ऑफ सेक्रेटरीज द्वारा किया जा सकता है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि ऐसे निवेश मामलों में भी कंपनी की बहुमत हिस्सेदारी और नियंत्रण हमेशा भारतीय नागरिकों या भारतीय स्वामित्व और नियंत्रण वाली संस्थाओं के पास ही रहेगा।
यह कदम कोविड-19 महामारी के दौरान जारी किए गए प्रेस नोट 3 (2020) के तहत लगाए गए प्रतिबंधों की समीक्षा के बाद उठाया गया है। उस नीति के तहत भारत से सीमा साझा करने वाले देशों की कंपनियों या जिनके लाभकारी मालिक ऐसे देशों से हों, उन्हें भारत में निवेश के लिए सरकार की मंजूरी लेना अनिवार्य था।
यह नियम महामारी के दौरान भारतीय कंपनियों को कम कीमत पर विदेशी अधिग्रहण से बचाने के लिए लागू किया गया था।
हालांकि बाद में सरकार ने पाया कि इन नियमों के कारण ग्लोबल प्राइवेट इक्विटी और वेंचर कैपिटल फंड्स से आने वाला निवेश भी प्रभावित हो रहा था, क्योंकि उनमें ऐसे देशों के निवेशकों की हिस्सेदारी बहुत कम और नियंत्रण रहित होती थी। इसलिए अब नियमों में बदलाव कर निवेश प्रक्रिया को अधिक संतुलित और स्पष्ट बनाया गया है।
--आईएएनएस
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नीतीश कुमार ने इस शर्त को पूरा करने के बाद भरा राज्यसभा का नामांकन, विजय चौधरी का दावा
बिहार की राजनीति में इन दिनों मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के संभावित राज्यसभा जाने की चर्चा तेज है. हालांकि बिहार की सियासत में रोजना कोई न कोई खबर सामने आ जाती है. नीतीश कुमार ने भले ही राज्यसभा के लिए नामांकन भर दिया है, लेकिन उनकी सियासी चालें हर कोई जानता है कि वह कभी भी अपने फैसले को पलट सकते हैं या अपने अपने फैसले से ही पलट सकते हैं. इसकी एक झलक उनके बिहार दौरे पर भी देखने को मिली है जब उन्होंने ताबड़तोड़ सीमांचल का दौरा किया तो अटकलें तेज हो गईं कि अब भी वह बिहार की सियासत में सक्रिय दिख रहे हैं तो आगे कुछ भी कर सकते हैं. लेकिन इन अटकलों के भी एक और बड़ी खबर सामने आई है. ये खबर है विजय कुमार चौधरी की. जी हां चौधरी का दावा है कि राज्यसभा का नामांकन भरने से पहले नीतीश कुमार ने एक शर्त मानी थी.
क्या है विजय कुमार का दावा
जेडीयू नेता विजय कुमार चौधरी का बड़ा बयान सामने आया है. उन्होंने कहा कि राज्यसभा जाना मुख्यमंत्री का निजी फैसला है. चौधरी का दावा है कि जब नीतीश कुमार ने राज्यसभा जाने की इच्छा जताई तो सभी नेता परेशान हो गए थे. कई लोगों ने तुरंत नीतीश से फैसला वापस लेने को कहा, लेकिन इसके बाद बिहार के विकास के लिए उनका मार्गदर्शन आगे भी मिलता रहेगा ये शर्त रखी गई. जिसे नीतीश कुमार ने मान लिया और कहा कि हम बिहार को नहीं छोड़ेंगे.
बीएनएमयू के नॉर्थ कैंपस मैदान में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार ने करीब दो दशकों तक मुख्यमंत्री के रूप में राज्य की सेवा की है और आगे भी वे बिहार के हित में काम करते रहेंगे.
नीतीश के राज्यसभा जाने की चर्चा से कार्यकर्ताओं में नाराजगी
सभा के दौरान जब विजय कुमार चौधरी ने मुख्यमंत्री के राज्यसभा जाने की संभावना का जिक्र किया, तो कार्यक्रम स्थल पर मौजूद लोगों की भावनाएं सामने आ गईं. पूरा मैदान “नीतीश कुमार जिंदाबाद” के नारों से गूंज उठा.
कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने खुलकर अपनी नाराजगी भी जाहिर की. उनका कहना था कि वे नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री के रूप में ही बिहार का नेतृत्व करते देखना चाहते हैं.
हालांकि सभा में मौजूद नेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों ने लोगों को शांत कराने की कोशिश की. इसके बावजूद कार्यक्रम के दौरान कई बार यह नाराजगी देखने को मिली.
नेताओं ने मनाया, शर्त पर हुए तैयार
विजय कुमार चौधरी ने कहा कि जब मुख्यमंत्री ने राज्यसभा जाने की बात कही, तो पार्टी के कई नेताओं और समर्थकों को यह फैसला स्वीकार करना मुश्किल लगा. उन्होंने बताया कि सभी ने मिलकर उनसे आग्रह किया कि वे बिहार के विकास के लिए हमेशा सक्रिय रहें.
आखिरकार एक शर्त पर उन्हें इसके लिए राजी किया गया कि चाहे वे किसी भी पद पर रहें, लेकिन बिहार के विकास और मार्गदर्शन के लिए हमेशा उपलब्ध रहेंगे.
सम्राट चौधरी ने विकास को बताया नीतीश की पहचान
इस जनसभा में उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी मुख्यमंत्री की कार्यशैली और विकास कार्यों की सराहना की. उन्होंने अपने संबोधन की शुरुआत “भारत माता की जय” और “जय श्रीराम” के नारों के साथ की.
उन्होंने कहा कि देश में सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को मजबूत करने की दिशा में कई बड़े कदम उठाए जा रहे हैं. उत्तर प्रदेश में भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर बन चुका है और अब मिथिला की बेटी माता जानकी के नाम पर भी भव्य मंदिर निर्माण की दिशा में काम शुरू किया गया है.
बिहार में विकास की गति जारी रहने का दावा
सम्राट चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज विकास का पर्याय बन चुके हैं. उनकी दूरदर्शी नीतियों के कारण राज्य में बुनियादी ढांचे में तेजी से सुधार हुआ है.
उन्होंने कहा कि आज बिहार के किसी भी कोने से राजधानी पटना तक चार से पांच घंटे में पहुंचा जा सकता है, जो राज्य के विकास की गति को दर्शाता है.
उन्होंने यह भी कहा कि न्याय यात्रा से लेकर समृद्धि यात्रा तक मुख्यमंत्री ने बिहार को विकास की राह पर आगे बढ़ाने का काम किया है और आगे भी उनके नेतृत्व में विकास का यह सिलसिला जारी रहेगा.
सामाजिक न्याय की परंपरा को आगे बढ़ाने की बात
उपमुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में सामाजिक न्याय के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया. उन्होंने कहा कि यह धरती पूर्व मुख्यमंत्री बीपी मंडल की है, जिन्होंने सामाजिक न्याय की मजबूत नींव रखी थी.
सम्राट चौधरी के अनुसार, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार उसी विचारधारा को आगे बढ़ाते हुए समाज के सभी वर्गों के विकास के लिए काम कर रहे हैं.
जनसभा में नेताओं के भाषणों और समर्थकों की प्रतिक्रियाओं ने यह साफ कर दिया कि बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार की भूमिका अभी भी बेहद महत्वपूर्ण बनी हुई है.
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