चीन और बहरीन व कुवैत के विदेश मंत्रियों के बीच फोन वार्ताएं
बीजिंग, 10 मार्च (आईएएनएस)। चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने 9 मार्च को बहरीन के विदेश मंत्री अब्दुल लतीफ बिन राशिद अल जयानी के साथ फोन पर वार्ता की।
इस अवसर पर अब्दुल लतीफ बिन राशिद अल जयानी ने क्षेत्रीय परिस्थिति का परिचय देते हुए बहरीन के रुख पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बहरीन हमेशा शांति का समर्थक रहा है और इसलिए उसे अवैध हमलों का निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बहरीन चीन के निष्पक्ष और संतुलित रुख की सराहना करता है तथा इसके लिए चीन का आभार व्यक्त करता है।
जयानी ने यह भी कहा कि बहरीन खाड़ी देशों और चीन के साथ संयुक्त राष्ट्र संघ सहित द्विपक्षीय और बहुपक्षीय मंचों पर संपर्क और समन्वय को और मज़बूत करना चाहता है, ताकि क्षेत्र में जल्द से जल्द शांति और स्थिरता स्थापित की जा सके। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि बहरीन चीनी नागरिकों और संस्थानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कड़े कदम उठाता रहेगा।
वहीं, चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने कहा कि वर्तमान में खाड़ी क्षेत्र की स्थिति लगातार तनावपूर्ण होती जा रही है, जिससे बहरीन की सुरक्षा भी प्रभावित हो सकती है। उन्होंने कहा कि चीन इस स्थिति पर गहरी नजर बनाए हुए है। वांग यी ने दोहराया कि चीन का रुख हमेशा स्पष्ट रहा है कि सभी देशों की प्रभुसत्ता और प्रादेशिक अखंडता का सम्मान किया जाना चाहिए। साथ ही आम नागरिकों और गैर-सैन्य ठिकानों पर होने वाले हमलों की निंदा की जानी चाहिए।
वांग यी ने आगे कहा कि इस समय सबसे महत्वपूर्ण कार्य सैन्य कार्रवाइयों को तुरंत रोकना है, ताकि संघर्ष के और अधिक फैलने से बचा जा सके। उन्होंने कहा कि खाड़ी देशों का रणनीतिक साझेदार और एक जिम्मेदार प्रमुख देश होने के नाते चीन हमेशा शांति की वकालत करने और संघर्ष को रोकने के प्रयासों में सक्रिय भूमिका निभाता रहा है।
उन्होंने बताया कि मध्य-पूर्व मामलों के लिए चीन के विशेष दूत जल्द ही बहरीन का दौरा करेंगे। वांग यी ने विश्वास व्यक्त किया कि चीन खाड़ी क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए आगे भी लगातार रचनात्मक भूमिका निभाता रहेगा।
उधर, चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने 9 मार्च को कुवैत के विदेश मंत्री जराह जाबेर अल-अहमद अल-सबाह के साथ फोन पर वार्ता की।
इस मौके पर जराह ने ताज़ा क्षेत्रीय स्थिति का परिचय दिया और कहा कि कुवैत युद्ध में शामिल नहीं है, लेकिन फिर भी युद्ध से प्रभावित है। कुवैत समेत खाड़ी देश अभी भी बातचीत के ज़रिए विवादों को सुलझाने में जुटे हुए हैं। इसके बावजूद हम अपनी कानूनी आत्मरक्षा का अधिकार नहीं छोड़ेंगे। कुवैत चीन के रुख और प्रयास की प्रशंसा करता है और चीन के साथ संपर्क व समन्वय मजबूत करना चाहता है, ताकि क्षेत्रीय स्थिति शीघ्र ही सुरक्षित और स्थिर बहाल हो सके। कुवैत चीनी लोगों और संस्थानों की सुरक्षा लगातार सुनिश्चित करेगा।
वहीं, वांग यी ने कहा कि चीन का हमेशा से यही विचार रहा है कि राजनीतिक और कूटनीतिक माध्यम से विवादों का निपटारा किया जाएगा। वर्तमान युद्ध कभी नहीं होना चाहिए था। यह किसी भी पक्षों के लिए फायदेमंद नहीं है। अमेरिका और इज़राइल ने संयुक्त राष्ट्र संघ की अनुमति के बिना ईरान-अमेरिका वार्ता के चलने के दौरान ईरान पर सैन्य हमला किया। यह बिलकुल अंतर्राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है। इसके साथ, खाड़ी देशों की प्रभुसत्ता, सुरक्षा और प्रादेशिक अखंडता का पूरा सम्मान करना होगा। आम लोगों और गैर-सैन्य ठिकानों पर किसी भी हमले की निंदा की जानी चाहिए। वर्तमान प्राथमिकता जल्द ही युद्धविराम करना है। चीन लगातार शांति के लिए प्रयास करेगा। मध्य-पूर्व मुद्दे के लिए चीनी विशेष दूत मध्यस्थता के लिए रवाना हुए और कुवैत व अन्य देशों के साथ संपर्क मजबूत करेंगे।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)
--आईएएनएस
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मिडिल ईस्ट संकट पर सरकार अलर्ट, मंत्रियों को पीएम मोदी के स्पष्ट निर्देश, आम लोगों पर न पड़े कोई असर
मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच भारत सरकार ने स्थिति पर कड़ी नजर रखनी शुरू कर दी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कैबिनेट बैठक में मंत्रियों को साफ निर्देश दिया है कि इस संकट का असर भारत के आम लोगों पर नहीं पड़ना चाहिए. उन्होंने सभी मंत्रालयों को मिलकर काम करने और संभावित चुनौतियों से निपटने के लिए पहले से तैयारी रखने को कहा है.
सरकार का मुख्य फोकस यह सुनिश्चित करना है कि तेल, गैस और अन्य जरूरी सेवाओं की आपूर्ति देश में बाधित न हो और लोगों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े.
मंत्रालयों को समन्वय के साथ काम करने का निर्देश
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि मौजूदा हालात को देखते हुए सभी मंत्रालयों को आपसी समन्वय के साथ काम करना होगा. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि ऊर्जा, परिवहन, विदेश और वाणिज्य से जुड़े विभाग लगातार स्थिति की समीक्षा करें और जरूरत पड़ने पर तुरंत कदम उठाएं.
सरकार ने यह भी कहा है कि वैश्विक हालात को देखते हुए भारत को ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति के विकल्पों पर भी ध्यान देना होगा.
तेल और गैस आपूर्ति पर सरकार की कड़ी नजर
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के कारण वैश्विक तेल बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ गया है. रिपोर्टों के अनुसार कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं और इससे कई देशों में महंगाई बढ़ने की आशंका जताई जा रही है.
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए सरकार तेल और गैस की उपलब्धता पर विशेष निगरानी रख रही है. सरकार ने तेल कंपनियों और रिफाइनरियों को भी आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं ताकि घरेलू सप्लाई प्रभावित न हो.
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जरूरी सेवाओं को बनाए रखने के लिए सख्त कदम
स्थिति को देखते हुए सरकार ने आवश्यक सेवाओं की आपूर्ति बनाए रखने के लिए सख्त कदम उठाने की तैयारी भी की है. खबरों के अनुसार, एलपीजी और पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर कई विकल्पों पर काम किया जा रहा है.
जरूरत पड़ने पर आवश्यक सेवाओं से जुड़े क्षेत्रों में विशेष प्रावधान लागू किए जा सकते हैं ताकि आपूर्ति बाधित न हो और बाजार में अफरातफरी की स्थिति न बने.
विदेशों में फंसे भारतीयों की सुरक्षा भी प्राथमिकता
मिडिल ईस्ट के कई देशों में बड़ी संख्या में भारतीय काम करते हैं. ऐसे में सरकार उनकी सुरक्षा को लेकर भी सतर्क है। विभिन्न दूतावासों को अलर्ट पर रखा गया है और जरूरत पड़ने पर भारतीय नागरिकों को सहायता देने की तैयारी की गई है.
सरकार ने हेल्पलाइन और संपर्क व्यवस्था भी सक्रिय कर दी है ताकि संकट की स्थिति में भारतीयों को तुरंत मदद मिल सके.
सरकार का संदेश: घबराने की जरूरत नहीं
सरकार का कहना है कि भारत के पास ऊर्जा आपूर्ति और रणनीतिक भंडार को लेकर पर्याप्त तैयारी है. इसलिए आम लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है.
प्रधानमंत्री का स्पष्ट संदेश है कि वैश्विक संकट चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, सरकार की प्राथमिकता देश के नागरिकों की सुरक्षा और उनकी जरूरतों को पूरा करना है. आने वाले दिनों में सरकार लगातार हालात की समीक्षा करती रहेगी और जरूरत के अनुसार कदम उठाए जाएंगे.
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