इंडिगो के CEO पीटर एलबर्स का इस्तीफा:दिसंबर में फ्लाइट ऑपरेशन में गड़बड़ी हुई थी, ₹22 करोड़ जुर्माना लगा था; फाउंडर राहुल भाटिया संभालेंगे कमान
भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) पीटर एलबर्स ने पद से इस्तीफा दे दिया है। कंपनी ने आज 10 मार्च को रेगुलेटरी फाइलिंग में इसकी जानकारी दी। एलबर्स के जाने के बाद अब कंपनी के फाउंडर और मैनेजिंग डायरेक्टर राहुल भाटिया अंतरिम तौर पर एयरलाइन के कामकाज की जिम्मेदारी संभालेंगे। 3 महीने पहले इंडिगो को भारी फ्लाइट ऑपरेशंस संकट का सामना करना पड़ा था। उस दौरान करीब 3 लाख यात्री फंसे रह गए थे, जिसके बाद एविएशन रेगुलेटर DGCA ने एयरलाइन पर ₹22.20 करोड़ का भारी जुर्माना भी लगाया था। आज ही जिम्मेदारी से मुक्त हुए एलबर्स इंडिगो ने स्टॉक एक्सचेंज को दी जानकारी में बताया, कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की आज हुई मीटिंग में CEO पीटर एलबर्स के इस्तीफे को स्वीकार कर लिया गया है। उन्हें आज बिजनेस ऑवर्स खत्म होने के बाद जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया गया है। उनकी जगह राहुल भाटिया कंपनी के मामलों का मैनेजमेंट देखेंगे। इस्तीफे की वजह निजी कारण बताई राहुल भाटिया को लिखे अपने इस्तीफे में पीटर एलबर्स ने पद छोड़ने के पीछे निजी कारणों का हवाला दिया है। उन्होंने कंपनी से अपना नोटिस पीरियड खत्म करने की भी अपील की ताकि वे तत्काल प्रभाव से पद मुक्त हो सकें। दिसंबर से ही दबाव में थे पीटर एलबर्स पीटर एलबर्स ने सितंबर 2022 में इंडिगो की कमान संभाली थी। पिछले साल दिसंबर में एयरलाइन को अपने इतिहास के सबसे खराब ऑपरेशनल संकट का सामना करना पड़ा था। सैकड़ों उड़ानें रद्द होने और देरी की वजह से एयरलाइन की साख पर बुरा असर पड़ा था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस संकट की वजह से कंपनी को करीब ₹2,000 करोड़ का नुकसान भी हुआ था। तभी से एलबर्स पर इस्तीफे का दबाव था। DGCA की सख्त कार्रवाई और भारी जुर्माना दिसंबर में हुए फ्लाइट व्यवधान के बाद नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने इंडिगो के खिलाफ सख्त रुख अपनाया था। जांच में पाया गया कि एयरलाइन ने यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा मानकों में लापरवाही बरती। इसके बाद इंडिगो पर ₹22.20 करोड़ की पेनल्टी लगाई गई थी। जानकारों का मानना है कि इस घटना के बाद से ही बोर्ड और CEO के बीच तालमेल में कमी आने लगी थी। 3 ग्राफिक्स में जानें इंडिगो संकट की वजह, एयरलाइन का जबाव और सरकार का एक्शन राहुल भाटिया के पास कमान, नए CEO की तलाश शुरू इंडिगो के को-फाउंडर और वर्तमान MD राहुल भाटिया अब अस्थायी रूप से ऑपरेशंस की कमान संभालेंगे। एयरलाइन अब नए पूर्णकालिक CEO की तलाश शुरू करेगी। मार्केट लीडर होने के नाते इंडिगो के लिए यह बदलाव काफी अहम है, क्योंकि कंपनी अपनी अंतरराष्ट्रीय विस्तार योजनाओं पर तेजी से काम कर रही है। ------------------------ ये खबर भी पढ़ें… 15 लाख से शुरू किया बिजनेस: आज 73 हजार करोड़ रुपए की नेट वर्थ, राहुल भाटिया ने इंडिगो को बनाया देश की नंबर 1 एयरलाइंस 4 दिन में देश की सबसे बड़ी एयरलाइंस इंडिगो की 1200 से ज्यादा फ्लाइट्स कैंसिल हो चुकी हैं। इससे एयरपोर्ट्स पर अफरा-तफरी जैसा माहौल नजर आ रहा है और देशभर में लोगों को ट्रैवल करने में परेशानी हो रही है। एयरलाइंस के घरेलू मार्केट पर इंडिगो का ही कब्जा है। इस बीच राहुल भाटिया चर्चा में है। राहुल भाटिया इंडिगो यानी इंटरग्लोब एविएशन लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर, प्रमोटर और को-फाउंडर हैं। पूरी खबर पढ़ें…
भारतीय एयरलाइंस ने इंटरनेशनल फ्लाइट्स का 15% किराया बढ़ाया:कच्चे तेल के रेट बढ़ने से जेट फ्यूल के दाम दोगुने, ईरान जंग का असर
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब सीधे आम आदमी की जेब पर भी पड़ते दिखाई दे रहा है। भारतीय एयरलांइस ने इंटरनेशनल फ्लाइट्स के किराए में करीब 15% की बढ़ोतरी की है। ब्लूमबर्ग ने अपनी एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ती जंग और होर्मुज रूट प्रभावित होने के कारण कच्चे तेल की कीमतों और जेट फ्यूल के दाम में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। जिसका असर ग्लोबल एविएशन इंडस्ट्री पर भी दिखने लगा है। भारत समेत एशिया की प्रमुख एयरलाइंस ने भी टिकटों के दाम बढ़ा दिए हैं और कई कंपनियां अपने विमानों को ग्राउंडेड करने का प्लान भी बना रही हैं। जानकारों का कहना है कि यह 1970 के दशक के बाद का सबसे बड़ा तेल संकट हो सकता है। भारतीय एयरलाइंस आगे किराया और बढ़ा सकती हैं रिपोर्ट के अनुसार, जेट फ्यूल यानी ATF की कीमतों में हो रहे इजाफे को देखते हुए भारत की एविएशन कंपनियां आने वाले दिनों में किराया और भी बढ़ा सकती हैं। एयरलाइंस का कहना है कि ऑपरेशनल कॉस्ट बढ़ने के कारण उनके पास किराया बढ़ाने के अलावा कोई ऑप्शन नहीं बचा है। जेट फ्यूल की कीमतें लगभग दोगुनी हो चुकी हैं 28 फरवरी को शुरू हुई ईरान-इजराइल जंग के बाद से तेल की सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है। इस वजह से क्रूड ऑयल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत आज 93 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई है। वहीं एक दिन पहले ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत करीब 120 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई थी। वहीं कई मार्केट में जेट फ्यूल की कीमतें संघर्ष शुरू होने के बाद से दोगुनी हो चुकी हैं। जंग से पहले जेट फ्यूल की कीमतें लगभग 85 से 90 डॉलर प्रति बैरल थीं, जो अब बढ़कर 150 से 200 डॉलर प्रति बैरल के बीच पहुंच गई है। वहीं मिडिल ईस्ट के तनाव के कारण दुनियाभर में अब तक 40,000 से ज्यादा उड़ानें कैंसिल भी हुई हैं। वियतनाम में 70% तक महंगे हो सकते हैं टिकट ब्लूमबर्ग ने रिपोर्ट में बताया कि वियतनाम की सरकारी मीडिया ने चेतावनी दी है कि वहां हवाई किराए में 70% तक का उछाल आ सकता है। इसकी मुख्य वजह वियतनाम की इम्पोर्टेड जेट फ्यूल पर भारी निर्भरता है। इंडस्ट्री एनालिस्ट्स के अनुसार, एशियाई एयरलाइंस यूरोपीय या अमेरिकी एयरलाइंस की तुलना में ज्यादा खतरे में हैं, क्योंकि इनके पास फ्यूल हेजिंग (ईंधन की कीमतों को लॉक करने का प्रोग्राम) की पुख्ता व्यवस्था नहीं है। एविएशन सेक्टर में हर तरफ पैनिक की स्थिति है स्पार्टा कमोडिटीज की सीनियर ऑयल मार्केट एनालिस्ट जून गोह ने बताया, एविएशन सेक्टर में हर तरफ पैनिक की स्थिति है। जिन एशियाई एयरलाइंस का हेजिंग प्रोग्राम कमजोर है, वे सबसे ज्यादा मुश्किल में हैं। उन्होंने कम कीमत पर टिकट बेच दिए थे, लेकिन अब उन्हें बहुत महंगे रेट पर फ्यूल खरीदना पड़ रहा है। कुछ लो-कॉस्ट एयरलाइंस तो अब विमानों को खड़ा करने की तैयारी में हैं। क्योंकि मौजूदा फ्यूल कीमतों पर उड़ान भरना घाटे का सौदा साबित हो रहा है। हालात नहीं सुधरे, तो छोटी एयरलाइंस बंद हो सकती हैं जर्मन बैंक डॉयचे बैंक के एनालिस्ट्स का कहना है कि अगर हालात जल्द नहीं सुधरे, तो दुनिया भर में हजारों विमान खड़े हो सकते हैं और कुछ छोटी एयरलाइंस बंद भी हो सकती हैं। लुफ्थांसा जैसी कंपनियों को मिल सकता है फायदा जहां ज्यादातर एयरलाइंस संकट में हैं, वहीं लुफ्थांसा जैसी कंपनियां इसे मौके के तौर पर देख रही हैं। लुफ्थांसा के CEO कार्सन स्पोह्र ने कहा कि उनकी कंपनी ने फ्यूल प्राइज को हेज किया हुआ है, जिससे उन्हें 'रिलेटिव एडवांटेज' मिलेगा। वे मिडिल ईस्ट की एयरलाइंस के प्रभावित होने का फायदा उठाते हुए एशिया और अफ्रीका के रूट्स पर अपनी क्षमता बढ़ाने का प्लान बना रहे हैं। --------------------- ये खबर भी पढ़ें… कई राज्यों में कॉमर्शियल गैस सिलेंडर सप्लाई बंद: गैस नहीं मिलने से होटल-रेस्टोरेंट बंद होने की नौबत; जमाखोरी रोकने के लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू अमेरिका-इजराइल की ईरान से जंग की वजह से हॉर्मुज जलमार्ग के रास्ते गैस सप्लाई ठप हो गई है। इससे देश में LPG की किल्लत हो रही है। दिल्ली, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और राजस्थान समेत कई राज्यों ने कॉमर्शियल गैस की सप्लाई पर रोक लगा दी है। गैस सप्लाई बंद होने की वजह से कई शहरों में रेस्टोरेंट्स और होटल बंद होने की नौबत आ गई है। ऐसे में सरकारी सूत्रों का कहना है कि तेल कंपनियां तीन सदस्यी कमेटी के जरिए रेस्टोरेंट एसोसिएशनों से बात करेंगी, ताकि LPG सप्लाई की दिक्कतों को समझा जा सके। पूरी खबर पढ़ें…
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